नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज मंगलवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया और उद्घोष किया कि भारतीय जनता पार्टी मूल समेत तृणमूल को उखाड़ फेंक कर 2026 में दो-तिहाई बहुमत से पश्चिम बंगाल में सरकार बनाएगी। इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में पश्चिम बंगाल के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री डॉ सुकांता मजूमदार एवं केंद्रीय मंत्री शान्तनु ठाकुर उपस्थित थे।
अमित शाह ने कहा कि 30 दिसंबर का दिन हम सभी भारतीयों के लिए गौरव का दिन है। आज ही के दिन 1943 में बंगाल की भूमि के सुपुत्र और महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पोर्टब्लेयर में पहली बार आज़ाद भारत का झंडा फहराया था। आठ दशकों बाद जब आज 30 दिसंबर को हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह समय पश्चिम बंगाल के लिए भी विशेष महत्व रखता है। आज से लेकर अप्रैल 2026 तक का समय पश्चिम बंगाल के लिए निर्णायक है, क्योंकि अप्रैल में वहाँ विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठ की राजनीति के स्थान पर विरासत, विकास और गरीब कल्याण पर आधारित एक मज़बूत सरकार बनाने का संकल्प बंगाल की जनता में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन में भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और विशेषकर घुसपैठ के कारण बंगाल की जनता चिंतित भी है, भयभीत भी है और आशंकित भी है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के सभी कार्यकर्ता बंगाल की जनता को यह आश्वासन और वादा करना चाहते हैं कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही यहाँ की विरासत को पुनर्जीवित किया जाएगा और विकास की गंगा एक बार फिर तेज गति से बहेगी। गरीब कल्याण आज बंगाल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है और देश भर में जहाँ-जहाँ एनडीए सरकारें और भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहाँ गरीब कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी प्रकार बंगाल में भी गरीब कल्याण को प्राथमिकता दी जाएगी। हमारी सरकार आने पर एक ऐसी मजबूत राष्ट्रीय ग्रिड का निर्माण किया जाएगा, जो बंगाल से घुसपैठ को पूरी तरह समाप्त कर देगी। ऐसी सशक्त व्यवस्था बनाई जाएगी कि इंसान तो छोड़िए, परिंदा भी पर नहीं मार नहीं सकेगा। न केवल घुसपैठ को रोका जाएगा, बल्कि सभी घुसपैठियों को चुन-चुनकर भारत से बाहर निकालने का काम भी बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार करेगी।
अमित शाह ने कहा कि आज ममता बनर्जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के कारण पूरे बंगाल का विकास एक प्रकार से थम गया है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सभी लाभकारी योजनाएँ, जो पूरे देश में गरीबी उन्मूलन का कार्य कर रही हैं, बंगाल में टोल सिंडिकेट की भेंट चढ़ चुकी हैं और प्रत्येक योजना डेड एंड पर पहुँच चुकी है। पिछले 15 वर्षों से भय और भ्रष्टाचार ही बंगाल की पहचान बन चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी सरकार का संकल्प है कि 15 अप्रैल 2026 के बाद जब बंगाल में भाजपा सरकार बनेगी, तब बंग गौरव और बंग संस्कृति के पुनर्जागरण की फिर से शुरुआत की जाएगी और स्वामी विवेकानंद, बंकिम बाबू, गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर तथा श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्वप्न का बंगाल बनाने का एक बार फिर प्रयास किया जाएगा।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज वह फिर से एक बार स्पष्ट करना चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के लिए बंगभूमि अत्यंत पवित्र और विशेष महत्व रखने वाली है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की स्थापना से पहले भारतीय जनसंघ की स्थापना इसी भूमि पर महान नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा की गई थी। भारतीय जनता पार्टी ने स्वामी विवेकानंद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी के विचारों और आदर्शों का अपने सभी सिद्धांतों में अनुकरण किया है। श्री शाह ने कहा कि जब वह यह कहते हैं कि वर्ष 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी, तो इसके पीछे एक मजबूत और ठोस आधार है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 17 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे और केवल दो सीटें मिली थीं। 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 10 प्रतिशत वोट मिले और विधानसभा की मात्र तीन सीटें प्राप्त हुई थीं। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 41 प्रतिशत वोट मिले और 18 सीटें हासिल हुई, जबकि 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 38 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए और 77 सीटें मिलीं। यह परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिस पार्टी को कभी केवल तीन सीटें मिली थीं, वही पार्टी मात्र पाँच वर्षों के अंतराल में 77 सीटें प्राप्त करने में सफल रही।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस, जिसकी एक प्रकार से स्थापना ही बंगाल से शुरू हुई थी, आज शून्य पर पहुँच गई है। 34 वर्षों तक शासन करने वाला कम्युनिस्ट गठबंधन भी एक भी सीट प्राप्त नहीं कर सका, जबकि भाजपा ने मुख्य विपक्ष का स्थान हासिल किया। भाजपा के नेता और पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी यह बैठे हैं। वर्ष 2024 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को लगभग 39 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए और 12 सीटें मिलीं। वर्ष 2026 में भारतीय जनता पार्टी निश्चित रूप से प्रचंड बहुमत के साथ बंगाल में सरकार बनाएगी। वर्ष 2024 से अब तक का समय भारतीय जनता पार्टी के लिए अत्यंत शुभंकर सिद्ध हुआ है। वर्ष 2024 में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और अब बिहार में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है। 2024 के चुनावों में ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भी पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा और एनडीए की सरकारें बनीं। हमें पूरा भरोसा है कि 2026 में बंगाल में दो-तिहाई बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी, क्योंकि यह निर्णय बंगाल की जनता पहले ही तय कर चुकी है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वे जहाँ-जहाँ भी बंगाल में जाते हैं, वहाँ पूरे प्रदेश की जनता घुसपैठ से त्रस्त दिखाई देती है। क्या कोई राज्य सरकार ऐसी हो सकती है, जो अपने ही राज्य को घुसपैठियों की पनाहगाह बना दे। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा है, इसका उत्तर बंगाल की मुख्यमंत्री को देना चाहिए। बंगाल में घुसपैठ रोकने के लिए ममता बनर्जी के पास क्या योजना है? जब अनुच्छेद 370 हटाया गया तो वे उसका विरोध करती हैं, जब सीएए लाकर, बंगाल के शरणार्थियों को नागरिकता देने का कार्यक्रम चलाया जाता है तो वे उसका भी विरोध करती हैं और फिर यह कहकर जिम्मेदारी से बचती हैं कि बीएसएफ घुसपैठ नहीं रोक पा रही है। ममता बनर्जी यह स्पष्ट करें कि बांग्लादेश से लगी पूरी सीमा पर फेंसिंग के लिए जमीन कौन सी सरकार नहीं देती। यह टीएमसी की ही सरकार है, जो जमीन नहीं देती, जिसके कारण फेंसिंग का कार्य पूरा नहीं हो पाता। इतनी कठिन सीमा से यदि कोई घुसपैठिया भीतर आता है, तो वह सबसे पहले बंगाल के किसी गाँव में पहुँचता है। वहाँ का पटवारी क्या कर रहा है?
वहाँ के थाने की पुलिस क्या कर रही है? उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया जाता? उसके खिलाफ मामला क्यों दर्ज नहीं होता और उसे वापस क्यों नहीं भेजा जाता?
शाह ने कहा कि क्या बंगाल की मुख्यमंत्री यह जवाब दे सकती हैं कि असम में घुसपैठ क्यों बंद हो गई, त्रिपुरा में घुसपैठ क्यों बंद हो गई, गुजरात और राजस्थान की सीमाओं पर घुसपैठ क्यों नहीं होती, पंजाब की सीमा पर घुसपैठ क्यों नहीं होती और कश्मीर की सीमा पर घुसपैठ क्यों नहीं होती, जबकि केवल बंगाल में ही यह समस्या क्यों बनी हुई है? इसका कारण यह है कि उनकी निगरानी में घुसपैठ कराई जाती है और बंगाल की जनसांख्यिकी को धीरे-धीरे बदलकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह अधिक समय तक नहीं चलेगा। अब बंगाल की जनता इस सच्चाई को समझ चुकी है और इसके खिलाफ लामबंद भी हो रही है। भाजपा को विश्वास है कि अगला चुनाव घुसपैठ रोकने और घुसपैठियों को बाहर निकालने के मुद्दे पर लड़ा जाएगा, क्योंकि यह अब केवल बंगाल का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बन चुका है। देश की संस्कृति को बचाने और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए बंगाल की सीमा को पूरी तरह सील करना होगा, और इसके लिए यहाँ एक ऐसी देशभक्त सरकार लानी पड़ेगी, जो यह काम कर सके। यह काम ममता बनर्जी नहीं कर सकतीं, यह केवल और केवल भारतीय जनता पार्टी ही कर सकती है।
तृणमूल सरकार पर करारा प्रहार करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि घुसपैठ के अलावा भ्रष्टाचार से भी पूरे बंगाल की जनता त्रस्त है। रोजवैली चिटफंड घोटाला, कैश फॉर क्वेरी घोटाला, एसएससी घोटाला, नगरपालिका और नगर निगमों में भर्ती घोटाला, गाय तस्करी घोटाला, राशन और पीडीएस घोटाला, मनरेगा घोटाला और पीएम आवास घोटाले जैसे इतने अधिक मामले हैं कि यदि उनकी पूरी सूची पढ़ी जाए तो पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस उसी में समाप्त हो जाएगी। क्या ममता बनर्जी इस बात का जवाब दे सकती हैं कि उनके मंत्रियों के ठिकानों से 27 करोड़ रुपये नकद बरामद होते हैं, जिन्हें गिनते-गिनते नोट गिनने की मशीन तक गर्म होकर बंद हो जाती है। राज्य में 27 करोड़, 20 करोड़ और 15 करोड़ रुपये जैसी रकम का मिलना क्या किसी भी प्रकार की जवाबदेही नहीं दर्शाता। पार्थ चटर्जी जेल जाते हैं, ज्योतिप्रिय मलिक जेल जाते हैं, अनुव्रत मंडल जेल जाते हैं, जीवन कृष्ण साहा जेल जाते हैं, माणिक भट्टाचार्य जेल जाते हैं, चंद्रनाथ सिन्हा जेल जाते हैं, परेश पाल जेल जाते हैं, कुंतल घोष जेल जाते हैं, फिरहाद हकीम आरोपी बनाए जाते हैं और शोभन चटर्जी भी आरोपी बनाए जाते हैं। कुणाल घोष तीन साल जेल में रहकर आते हैं और इसके बाद भी यह कहा जाता है कि भ्रष्टाचार नहीं हुआ। बंगाल सरकार भ्रष्टाचार पर आंख मूंदे बैठी है. लेकिन बंगाल की जनता आंख बंद करके नहीं बैठी है। बंगाल की जनता के अधिकार का पैसा तृणमूल कांग्रेस के कैडर की भेंट चढ़ रहा है और इसका जवाब सरकार को देना ही पड़ेगा।
श्री शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आधिकारिक रूप से कहा जाता है कि महिलाएं शाम सात बजे के बाद घर से बाहर न निकलें। पश्चिम बंगाल किस युग में जी रहा है, क्या यह मुगलकाल है? आज़ाद भारत में माताओं और बहनों को पूरे दिन, जब भी उन्हें आवश्यकता हो, घर से बाहर निकलने की सुरक्षा देना एक संवैधानिक दायित्व है, जिसे निभाने में टीएमसी सरकार पूरी तरह विफल रही है। चाहे आरजी कर मेडिकल कॉलेज का मामला हो, संदेशखाली का मामला हो, दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज का मामला हो या साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज का मामला हो, हर जगह बेटियां असुरक्षित हैं और माताएं-बहनें अत्याचार और असुरक्षा से तंग आ चुकी हैं। अब जनता उस दिन की प्रतीक्षा कर रही है, जब उसे वोट देने का अधिकार मिलेगा और वह इस निकम्मी तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाएगी। ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार ने सांप्रदायिक तुष्टिकरण को अपनी नीति के रूप में स्वीकार कर लिया है। अब मरहम लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इससे कुछ होने वाला नहीं है, क्योंकि बंगाल के हिंदुओं के हृदय पर जो घाव लगे हैं, वे इतने गहरे हैं कि अब तृणमूल का कोई मरहम काम नहीं आएगा। अब ममता बनर्जी के जाने का समय तय हो चुका है, क्योंकि उन्होंने हर सीमा पार कर दी है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि संसद में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् पर चर्चा होती है, जो पूरे स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत रहा है और उसी वंदे मातरम् पर चर्चा का तृणमूल कांग्रेस विरोध किया। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उनकी वोट बैंक इससे नाराज हो रही है। लेकिन पश्चिम बंगाल की जनता इस अपमान को कभी सहन नहीं करेगी।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब भारत की जीडीपी में बंगाल का योगदान 10.5 प्रतिशत था और योगदान की दृष्टि से बंगाल देश में तीसरे स्थान पर था। तीसरे स्थान पर रहने वाला बंगाल 49 वर्षों में फिसलकर 22वें स्थान पर पहुँच गया है और अब उससे नीचे जाने के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा। बंगाल का ऐसा आर्थिक पतन कभी नहीं हुआ। ममता बनर्जी को इसका जवाब देना पड़ेगा। कभी इस सुजलाम सुफलाम भूमि से हर प्रकार के उद्योग की शुरुआत होती थी और उसी आधार पर सोनार बांग्ला' की परिकल्पना की गई थी, लेकिन आज भ्रष्टाचार, घुसपैठ और टोलबाजी के कारण बंगाल से उद्योग पलायन कर रहे हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने में टीएमसी सरकार को अपनी वोट बैंक खोने का डर सता रहा है। पीएम-किसान योजना को देरी से लागू किया गया, जिससे बंगाल के किसानों को 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
अमित शाह ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना आज तक लागू नहीं की गई और उसके स्थान पर कमियों से भरी स्वास्थ्य साथी योजना लागू की गई। उन्होंने कहा कि यदि कोई बंगाली नागरिक बंगाल से बाहर देश के किसी अन्य हिस्से में जाता है और बीमार पड़ जाता है, तो क्या स्वास्थ्य साधी योजना उसे बाहर के अस्पताल में इलाज की सुविधा दे पाएगी? बंगाल के गरीबों ने ऐसा कौन-सा गुनाह किया है? देशभर के गरीबों को 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य उपचार की गारंटी मिल रही है और कई राज्यों ने केंद्र के 5 लाख रुपये के साथ अपनी ओर से अतिरिक्त 5 लाख रुपये भी जोड़े हैं। लेकिन बंगाल की तृणमूल सरकार केंद्र के 5 लाख रुपये स्वीकार नहीं करना चाहती, क्योंकि टीएमसी सरकार को आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का डर है। यह डर स्वाभाविक है, क्योंकि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता बंगाल में दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, लेकिन इस डर के कारण बंगाल के गरीबों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पूरे देश को उम्मीद थी कि कम्युनिस्ट शासन जाने के बाद हिंसा और प्रतिशोध की राजनीति खत्म हो जाएगी, लेकिन इसके विपरीत हुआ। हालात ऐसे बन गए हैं कि तृणमूल कांग्रेस के शासन ने लोगों को यह कहने पर मजबूर कर दिया है कि कम्युनिस्ट शासन इससे बेहतर था।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अब तक भारतीय जनता पार्टी के 300 से अधिक कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है। वर्ष 2021 के चुनाव के बाद लगभग 3,000 कार्यकर्ता आज भी विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं और अपने गाँवों में वापस नहीं लौट पाए हैं। उन पर दबाव बनाया जाता है कि यदि वे तृणमूल कांग्रेस का झंडा उठाएँगे तभी उन्हें अपने गाँव में रहने दिया जाएगा। क्या यह किसी स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है कि कोई व्यक्ति अपनी राजनीतिक विचारधारा या दल का चयन स्वतंत्र रूप से न कर सके? क्या यह तय करने का अधिकार मुख्यमंत्री के कक्ष से होगा कि कौन किस दल में काम करेगा? ममता बनर्जी जितनी भी प्रताड़ना करनी चाहें, कर लें, लेकिन बंगाल की जनता अब निर्णय कर चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को हर प्रकार से प्रताड़ित किया गया है, यहाँ तक कि महिलाओं के साथ बलात्कार जैसी घटनाएँ भी हुई हैं। यह उनका व्यक्तिगत आरोप नहीं है, बल्कि नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन की रिपोर्ट में इसका उल्लेख है और इसका जवाब ममता बनर्जी को देना पड़ेगा। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में सभी संवैधानिक मर्यादाओं को समाप्त कर दिया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जब किसी राज्य में जाते हैं तो वे पूरे देश के प्रधानमंत्री होते हैं, जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं है, वहाँ भी ऐसा व्यवहार नहीं होता जैसा उनके साथ पश्चिम बंगाल में हुआ। जब यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी बंगाल में वंदे भारत ट्रेन के उद्घाटन के लिए आते हैं, तो ममता बनर्जी मंच पर तक नहीं जातीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बनी भारत सरकार की डीओपीटी की नियमावली को भी तोड़ा-मरोड़ा जाता है। डीजीपी और मुख्य सचिवों की नियुक्तियों में मनमानी की जाती है और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सलाहकार बनाकर प्रॉक्सी डीजीपी और प्रॉक्सी मुख्य सचिव बैठाने का काम किया जाता है। 34 वर्षों के कम्युनिस्ट शासन और 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस के शासन ने मिलकर केंद्र विरोधी मानसिकता को बढ़ावा दिया है और संविधान की जिस भावना पर देश चलता है, उसका पूर्ण रूप से अनादर करने का काम किया गया है।
श्री शाह ने कहा कि ममता बनर्जी के शासन में सिंडिकेट, टोलबाजी और कट मनी को न केवल सिस्टम में बढ़ावा दिया गया है, बल्कि यहां कमाई करने का अधिकार भी केवल 'भाईपो' को है और किसी को कमाई करने का कोई अधिकार नहीं है। अगर कोई भी व्यक्ति पश्चिम बंगाल में कमाई करता है, तो उसे अपनी कमाई का हिस्सा तृणमूल के सिंडिकेट को देना पड़ता है। बंगाल एक समय हर क्षेत्र में देश में सबसे आगे था। देश का पहला मोटर कारखाना पश्चिम बंगाल में लगा, 1887 में पहला पावर प्लांट बंगाल में स्थापित हुआ, सबसे पहले कोयला उद्योग बंगाल में आया, पहला स्टील प्लांट यहीं लगा, देश की पहली हाइराइज इमारत बंगाल में बनी, पहली जूट मिल बंगाल में स्थापित हुई और देश की पहली मेट्रो ट्रेन भी बंगाल में ही चली। देश में एक ही शहर में दो पोर्ट होने का गौरव भी बंगाल को प्राप्त है। देश की पहली आधुनिक यूनिवर्सिटी, कोलकाता यूनिवर्सिटी, और विश्व प्रसिद्ध विश्वभारती यूनिवर्सिटी, जिसने भारतीय शिक्षा की अवधारणा को धरातल पर उत्तारा, दोनों की स्थापना भी बंगाल में ही हुई। ममता बनर्जी को इन उपलब्धियों पर गौरव नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनमें से कुछ भी उनके शासनकाल में नहीं हुआ। जिन्होंने बंगाल को विकास की ऊँचाइयों तक पहुँचाया, उनकी पूरी लय, गति और विकास की गति को तोड़ने का काम ममता बनर्जी के शासन ने किया है। पश्चिम बंगाल आज औद्योगिक रूप से पूरी तरह बर्बाद हो चुका है और यह स्थिति उनके शासन में ही बनी है। कम्युनिस्ट शासन ने जहाँ आधा-अधूरा नुकसान किया था, वहीं तृणमूल कांग्रेस सरकार ने उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया। सिंडिकेट राज, तालेबाजी और शत्रुतापूर्ण माहौल के कारण 2011 से 2025 के बीच 7000 से अधिक कंपनियाँ बंगाल छोड़कर अन्य राज्यों में चली गईं, जो बंगाल के आर्थिक विकास के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।
अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल स्वामी विवेकानंद, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, शरद चट्टोपाध्याय, महर्षि अरविंद, ईश्वरचंद्र विद्यासागर और कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुषों की धरती है। इसी भूमि पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस, अमर शहीद खुदीराम बोस, बाधा जतिन, रास बिहारी बोस, मास्टर सूर्यसेन, प्रफुल्ल चाकी, वीणादास और कल्पना दत्त जैसे वीरों ने देश की आज़ादी के लिए जनजागरण किया। इसी धरती ने अनेक महान फिल्मकार, संगीतकार, चित्रकार और विश्व को प्रभावित करने वाले संत दिए हैं। वही बंगाल आज ऐसे कगार पर पहुँच गया है कि यदि घुसपैठ की बयार नहीं रुकी तो बंगाल का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। समाज और जनजीवन को समझने वाले सभी लोग इसे स्पष्ट रूप से मानते हैं। बंगाल के अस्तित्व पर तो घुसपैठ का संकट है ही, बंगाल की संस्कृति पर भी घुसपैठ का गंभीर खतरा है, और अब यह संकट केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश तक फैल चुका है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वे पश्चिम बंगाल की जनता से करबद्ध निवेदन करना चाहते हैं कि उन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस को अवसर दिया, 34 वर्षों तक कम्युनिस्ट पार्टी को अवसर दिया और 15 वर्षों तक ममता बनर्जी को अवसर दिया। इन सभी का ट्रैक रिकॉर्ड बंगाल को लगातार नीचे ले जाने का रहा है और अब इससे नीचे कोई स्थान शेष नहीं बचा है। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी का रिकॉर्ड यह रहा है कि जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकारें बनी हैं, वहाँ बीमारू राज्य समृद्धि की ओर बढ़े हैं। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पूरा देश आगे बढ़ रहा है, सुरक्षित हो रहा है और भारत की संस्कृति, धर्म और भाषाएँ निरंतर फल-फूल रही हैं। आप आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत और प्रचंड बहुमत वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाएँ। केवल भारतीय जनता पार्टी ही गुरुदेव टैगोर और स्वामी विवेकानंद की कल्पना का सोनार बांग्ला बना सकती है।
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