आधुनिक युग के एक महान संत स्वामी स्मरणानंद जी का मंगलवार यानी 26 मार्च की रात देहांत हो गया। उनकी उम्र 95 वर्ष की हो गई थी और वह वृद्धावस्था जनित बीमारियों के शिकार हो गए थे। स्वामी स्मरणानंद जी श्री रामकृष्ण मिशन एवं मठ के अध्यक्ष थे। उन्होंने आखिरी समय तक अपने संस्थान का त्याग नहीं किया और दक्षिण कोलकाता के रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान के अस्पताल शिशु मंगल में ही अपनी अंतिम सांस ली। वह रामकृष्ण मिशन के 16वें अध्यक्ष थे। सात वर्ष पहले जुलाई 2017 को उन्होंने पदभार संभाला था। उनसे पहले मिशन की जिम्मेदारी स्वामी आत्मस्थानंद महाराज संभाल रहे थे। उनका जन्म साल 1929 में तमिलनाडु के तंजावुर के अंदामी गांव में हुआ था। वह अपने बचपन से ही विचारक प्रवृत्ति के थे और वैराग्य में रुचि रखते थे युवा स्वामी स्मरणानंद जी की यही अभिरुचि उन्हें रामकृष्ण मिशन की ओर खींचकर ले आई। जिससे उनका पहला संपर्क 20 साल की उम्र में हुआ था।

उन्होंने रामकृष्ण मिशन की मुंबई शाखा में कदम रखा। जिसके बाद साल 1952 में 22 वर्ष की अवस्था में स्वामी स्मरणानंद जी ने सब कुछ त्याग कर मठ में संन्यासी बनने का फैसला किया। तब मिशन के सातवें अध्यक्ष स्वामी शंकरानंद ने उन्हें मंत्र दीक्षा दी। साल 1956 में 26 साल की उम्र में उन्हें ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा दिलाई गई। इस परीक्षा में खरा उतरने के बाद साल 1960 में उनका संन्यासी नाम स्मरणानंद रखा गया और वह पूरी तरह संन्यासी बन गए। साल 1958 में उन्हें कोलकाता में अद्वैत आश्रम में तैनात किया गया था। वहाँ उन्होंने 18 वर्षों तक विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवा दी। स्वामी स्मरणानंद जी साल 1976 में बेलूर मठ के बगल में स्थित एक बड़े शैक्षणिक संस्थान, रामकृष्ण मिशन शारदा पीठ के सचिव बने। 1983 में उन्हें रामकृष्ण मठ का ट्रस्टी और रामकृष्ण मिशन के शासी निकाय का सदस्य नियुक्त किया गया। 17 जुलाई 2017 को 89 साल की उम्र में 16वे अध्यक्ष के पद के लिए उन्हें चुना गया। अपने संन्यास काल में उन्होंने आध्यात्मिक उन्नति के साथ साथ सामाजिक सरोकार के बहुत से कार्य किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उनके कार्यों से बेहद प्रभावित थे। पीएम मोदी ने स्वामी स्मरणानंद जी के निधन पर गहरा शोक जाहिर किया है। उन्होंने स्वामी जी के साथ अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं और लिखा कि रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के पूज्य अध्यक्ष स्वामी स्मरणानंद जी महाराज ने अपना जीवन अध्यात्म और सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अनगिनत दिलों और दिमागों पर अमिट छाप छोड़ी। उनकी करुणा और ज्ञान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। मेरा उनसे वर्षों से बहुत करीबी रिश्ता रहा है। मुझे 2020 में बेलूर मठ की अपनी यात्रा याद है, जब मैंने उनसे बातचीत की थी। कुछ हफ्ते पहले कोलकाता में मैं अस्पताल भी गया था और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी। मेरी संवेदनाएं बेलूर मठ के अनगिनत भक्तों के साथ हैं। ओम शांति।
प्रधानमंत्री मोदी हमेशा स्वामी स्मरणानंद जी के साथ निजी संपर्क में रहते थे। 5 मार्च को जब प्रधानमंत्री बंगाल दौरे पर गए थे। तब वह स्वामी जी से मुलाकात करने के लिए शिशु मंगल अस्पताल भी गए थे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। स्वामी स्मरणानंद जी जैसे मानवता के सेवक के निधन पर प्रकृति भी दुखित है। उनकी चिरंतन आत्मा मोक्ष को प्राप्त हुई है। उनका आशीर्वाद हमेशा सत्पुरुषों के साथ रहेगा। धर्म की जय हो।
उदय इंडिया ब्यूरो
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