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डीयू सीमा-विमर्श सम्मेलन: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया संबोधित, कहा- भारत की सीमा सुरक्षा के लिए सशक्त नीति महत्वपूर्ण

DU Border Discussion Conference: Union Minister Kiren Rijiju addressed, said- Strong policy is important for India's border security

नई दिल्ली: 22 अगस्त, शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस स्थित शंकर लाल हॉल में सीमा जागरण मंच दिल्ली, मोतीलाल नेहरू कॉलेज सांध्य तथा सीआईपीएस के संयुक्त तत्वावधान में  'सीमा-पार से घुसपैठ: सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवेश पर प्रभाव' विषय पर आयोजित हो रहे दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। कार्यक्रम के समापन सत्र में केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू, हेमवती नंदन बहुगुणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्रीप्रकाश सिंह, भारतीय सामाजिक-विज्ञान अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो धनंजय सिंह, सीमा जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक मुरलीधर , लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) संजय कुलकर्णी, सीमा जागरण मंच, दिल्ली के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) नितिन कोहली, दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता महाविद्यालय प्रो बलराम पाणी, मोतीलाल नेहरू कॉलेज सांध्य के प्राचार्य प्रो संदीप गर्ग में उपस्थित रहे।

केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने क्या कहा- 

समापन समारोह के अवसर पर केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मैं सीमावर्ती क्षेत्र से आता हूं, हमारे देश में अधिकांश लोग सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याएं नहीं समझते हैं। भारत सैकड़ों वर्षों तक विदेशी आक्रांताओं का गुलामी सहनी पड़ी, हमें अपनी पुरानी गलतियों पर ध्यान देकर अपनी नीतियों को मजबूती से सुधारना होगा। 2014 से पूर्व सीमावर्ती क्षेत्र में जाने पर यह लगता था कि दूसरे देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुविधाएं तो थीं, लेकिन हमारे देश की ओर से नहीं थीं। मैंने अपने अनेक सीमावर्ती क्षेत्र की सीमाओं पर यह प्रत्यक्ष देखा था, सुरक्षा दृष्टि से यह अत्यंत गंभीर था। देश के सीमावर्ती गांवों में लोगों ने सड़क, बिजली, नेटवर्क के बारे में सोचना छोड़ दिया था, 2018 में गुंजी जैसे कई सुदूरवर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंची। 2013 में तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने संसद में कहा कि चीन से बॉर्डर लगे क्षेत्रों में इसलिए इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है कि चीन इन्हीं सुविधाओं का उपयोग करके हमारे देश पर कब्जा कर लेगा।2014 के बाद देश का नेतृत्व बदला और सशक्त सीमा नीति की शुरुआत हुई। वर्तमान सरकार में सीमावर्ती क्षेत्रों में सुविधाओं तथा विकास की दृष्टि से सकारात्मक परिवर्तन आया है, पहले यह संभव नहीं था। हिंदुस्तान अब हिम्मत के साथ अपनी जमीन के आखिरी इंच तक पहुंच रहा है। जो देश राष्ट्रीय हित से समझौता करते हैं, उनका भविष्य सुरक्षित नहीं रहता। सीमा जागरण मंच देश की सेवा में बढ़-चढ़कर कार्य करने वाला संगठन है।

इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के 174  शोधार्थियों तथा छात्रों ने घुसपैठ की समस्या से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। यह सम्मेलन बहु-विषयक, बहु-क्षेत्रीय संवाद के लिए विद्वानों, नीति-निर्माताओं और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को एक साथ लाने में सफल रहा। कार्यक्रम में कुल 600 लोगों ने प्रतिभाग किया।

केन्द्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने क्या कहा- 

सीमा-विमर्श सम्मेलन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में सम्मिलित हुए केन्द्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में सीमा जागरण मंच ने अनगिनत क्रांतिकारी और दूरगामी कार्य किए हैं। लगभग दो दशकों से मंच के साथ जुड़े रहने के कारण मुझे इसके योगदानों का प्रत्यक्ष अनुभव है, सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले भारतीयों को जागरूक और सक्षम बनाने के परिणामदायी अभियानों में सेवा करने का अवसर पाना मेरे लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि हमें तेजी से राष्ट्रीय विषय के महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाना होगा, सीमा विमर्श के महत्वपूर्ण विषय के बारे देश के आम जनमानस में जागरूकता आनी चाहिए।

सीमा जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक मुरलीधर ने कहा कि देश के विकास में घुसपैठ बहुत बड़ी समस्या है। देश की जनता में यह समझ है कि देश की सुरक्षा केवल सेना और पुलिस की है, यह धारणा बदलनी चाहिए। सीमा जागरण मंच इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है कि देश में सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी और चुनौतियों की समझ हो। राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति युवाओं को जागरूक हों, इसके लिए सीमा जागरण मंच अनेक प्रयास कर रहा है। देश की सीमाएं माता के वस्त्रों के समान होती हैं, उसकी रक्षा करना प्रत्येक पुत्र का कर्तव्य है। 

सम्मेलन के संयोजक डॉ श्याम नारायण पांडेय ने कहा बताया कि दक्षिण एशिया के संदर्भ में, सीमा पार से घुसपैठ एक सतत चिंता का विषय बनी हुई है जो राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती अर्थव्यवस्थाओं, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करती है। घुसपैठ की समस्या स्थानीय समुदायों और राष्ट्रीय विकास दोनों को समान रूप से प्रभावित करती है, जिसके लिए एक सूक्ष्म समझ और समग्र नीतिगत प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। यह सम्मेलन घुसपैठ की समस्या पर सार्थक अकादमिक संवाद की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण व सफल रहा है।

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