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सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी -एसटी आरक्षण के भीतर आरक्षण से बिहार में दलित नेताओं में तकरार

Dispute among Dalit leaders in Bihar due to reservation within SC-ST reservation by Supreme Court

अनिल मिश्र/पटना 


सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए बनाए गए आरक्षण व्यवस्था में पिछले दिनों बदलाव किए जाने अर्थात कोटे में कोटा के मंजुरी देने के बाद  बिहार में सियासी पारा बढ़ गया है। केन्द्र में बिहार से दो दलित नेता नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रीमंडल में शामिल अपनी- अपनी जाति को लेकर आमने-सामने हैं।वहीं बिहार में विपक्ष की भूमिका में बैठे राष्ट्रीय जनता दल आरक्षण खत्म करने का हवाला देते हुए देश व्यापी अभियान छेड़ने की जुगत में है।जबकि बिहार में लालू-राबड़ी परिवार के बाद सत्ता संभाल रहे जनता दल युनाइटेड सर्वोच्च न्यायालय के सात सदस्यीय समिति के इस निर्णय को अध्ययन कर कोई कदम उठाने की बात कही जा रही है।
13करोड़ की आबादी वाले इस बिहार राज्य में राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्ष कराये गये आर्थिक सर्वेक्षण में सबसे ज्यादा अत्यंत पिछड़ी जातियों (ईबीसी ) हैं।जो छोटी -छोटी जनसंख्या वाले हैं। उसके बाद 19.65प्रतिशत अनुसूचित जाति के लोग यहां निवास करते हैं।जबकि 17.7 मुस्लिम आबादी है। उसके बाद 15.15 प्रतिशत स्वर्ण वर्ग के लोग हैं। वहीं पिछड़ी जातियों (ओबीसी ) की जनसंख्या 13प्रतिशत है। जिसमें अकेले 14.27प्रतिशत साथ सबसे बड़ा उप समूह यादवों का है। सबसे कम यहां मात्र 1.68प्रतिशत के साथ अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासी यहां निवास करते हैं।
बिहार में 2568982अनुसूचित जाति की जनसंख्या है।वहीं 219936लाख अनुसूचित जनजाति के लोगों की जनसंख्या है।
अनुसूचित जाति में सबसे अव्वल नंबर यानी सबसे बड़े जनसंख्या वाले पासवान (दुसाध)जाति के है।इनकी जनसंख्या 69,4300लाख अर्थात 5.31प्रतिशत है। दूसरे नंबर पर 686966 लाख  यानी 5.25 प्रतिशत रविदास (महार/चमार)जाति के लोग हैं। वहीं तीसरे स्थान पर 403578 लाख यानी 3.08प्रतिशत मुसहर यानी भुईयां जाति के लोग हैं। बिहार में करीब 22जातियां अनुसूचित जाति में शामिल है।
अनुसूचित जाति के उत्थान के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2007 में ही दलित और महादलित का वर्गीकरण किया था। उस समय पासवान (दुसाध )जाति को छोड़कर लगभग सभी अनुसूचित जाति के लोग महादलित के श्रेणी में आ गए थे। लेकिन इसके बाद काफी विरोध होने के बाद इस जाति को भी महादलित में शामिल कर लिया गया।
बिहार में राजनीति वगैर जाति की हो तो ये संभव नहीं दिखता। यहां हर चीज में जाति हावी होकर रह गया है। उसमें भी अगर बात राजनीति की हो तो इससे बचना नामुमकिन ही है। बिहार में लगभग पार्टीयों में राजनीति के मुद्दे छाए रहते हैं।

गत गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सहित सात जजों की संवैधानिक पीठ ने देश में लागू अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में आरक्षण ने बिहार के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। जहां राष्ट्रीय जनता दल इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आरक्षण व्यवस्था खत्म करने पर देश व्यापी अभियान छेड़ने में लगा हुआ है। वहीं बिहार से आने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल दो दलित नेता आमने-सामने हैं।


एक ओर जहां राष्ट्रीय जनता दल ने मक्खदुमपुर (सुरक्षित )सीट से राष्ट्रीय जनता दल के विधायक सतीश दास के नेतृत्व में मंगलवार को विश्व शांति का सबसे बड़ा केंद्र बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय से इस निर्णय के खिलाफ हजारों छात्रों एवं कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाल कर गया समाहरणालय स्थित अंबेडकर पार्क तक विरोध जताया। वहीं इस अवसर पर सतीश दास ने कहा कि 31अगस्त को बिहार ही नहीं पूरे देश में सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं  बल्कि सभी अम्बेडकरवादी लोग एक साथ आकर आरक्षण विरोधी सरकार को उखाड़ कर फेंकने का आव्हान करेंगे।राजद विधायक ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ का निर्णय फरवरी माह में ही आ गया था। लेकिन मोदी सरकार ने चुनाव के कारण इसे अब लागू करवा रहा है। अगर केंद्र सरकार चाहती तो इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज करा सकता था। लेकिन वो आरक्षण को समाप्त करना चाहता है। इधर केन्द्र सरकार में मंत्री चिराग पासवान इस निर्णय पर पुनर्विचार करने को लेकर याचिका दायर करने की बात कर रहे हैं।जबकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्द्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री जीतन राम मांझी इस निर्णय का तहेदिल से स्वागत कर रहे हैं। जीतन राम मांझी का कहना है कि वह जिस समाज या जाति से आते हैं।उनकी सामाजिक , बौद्धिक, शैक्षणिक, राजनीतिक के साथ -साथ सरकारी सेवाओं में उपस्थित नगण्य है। वहीं अनुसूचित जाति में ही कुछ लोग आजादी के पहले और बाद में मलाई खाने की आदत हो गई है इसलिए इसका विरोध कर रहे हैं। बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के सात जजों की संवैधानिक पीठ का निर्णय बहुत ही स्वागत योग्य है। इससे समाज में अंतिम छोर पर रहने वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को समाज में बराबरी का हिस्सा मिलेगा।

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