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डिफेंस कॉरिडोर बना : यूपी के विकास का इंजन

Defense corridor became: the engine of development of UP

योगी आदित्यनाथ को यूपी का मुख्यमंत्री बने आठ वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने अद्भुत प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया है। राज्य की बेहतर कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, प्रदेश में शांति की बहाली आदि जैसे सीएम योगी के कई कार्यों की तारीफ की जाती है। लेकिन डिफेंस कॉरिडोर जैसी बड़ी उपलब्धि पर जितनी चर्चा होनी थी उतनी नहीं हुई है। उदय इंडिया के इस विशेष अंक में यूपी डिफेंस कॉरिडोर की खासियतें और भविष्य में इसकी संभावनाओं पर डालते हैं एक नजर-

 

डिफेंस कॉरिडोर के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं
वैसे तो डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण केन्द्र सरकार की योजना है। लेकिन इसकी स्थापना के लिए जिस तेजी से योगी सरकार ने काम किया वह प्रशंसा के योग्य है। देश को रक्षा उत्पाद के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में योगी सरकार विश्व स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कर रही है। इसके लिए सरकार की ओर साढ़े नौ सौ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत सड़क, बिजली, पानी, सीवर और सुरक्षा के उच्च कोटि के प्रबंध किए जा रहे हैं। प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 नोड हैं, इनमें से 5 नोड के लिए ये रकम तय की गई है। यूपीडा के अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 187 करोड़ रुपये के कार्य पूरे हो गए हैं। वहीं, 537 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य चल रहे हैं। आगरा, अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर, चित्रकूट, झांसी नोड में बांटकर डिफेंस कॉरिडोर का विस्तार किया जा रहा है। जिसके लिए लगभग 5000 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की योजना है। इसमें से 1546 हेक्टेयर का लैंड बैंक बनाया गया है। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के मध्य, पूर्व, पश्चिम क्षेत्र में फैला हुआ है और दिल्ली को जोड़ने वाले स्वर्णिम चतुर्भुज के साथ-कोलकाता एक्सप्रेस के नेटवर्क से भी जुड़ा हुआ है।  यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे इसी परियोजना का हिस्‍सा है।  इसमें हवाई पट्टी का निर्माण, हाईवे, हेलीपैड, पाइप लाइन और बिजली संयंत्र का निर्माण भी शामिल है।   


किस नोड में कितना होगा खर्च
यूपी डिफेंस कॉरिडोर के लिए यूपीडा की ओर से कराए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कार्यों में अलीगढ़, कानपुर, झांसी, लखनऊ और चित्रकूट नोड में 941.19 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें अलीगढ़ नोड के लिए 122 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। यहां 37 करोड़ से अधिक के कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 61 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य चल रहे हैं। 13 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों का टेंडर हो चुका है। इसके अलावा तकरीबन 10 करोड़ रुपये आगामी कार्यों के लिए रखे गए हैं। इसी प्रकार कानपुर नोड के लिए 62 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। यहां भी 32 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य हो चुके हैं, 16 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य जारी हैं, जबकि 13 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य के टेंडर हो चुके हैं। ऐसे ही झांसी के लिए सर्वाधिक 517 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य हो रहे हैं। इसमें 102 करोड़ से अधिक के कार्य हो चुके हैं, 376 करोड़ से अधिक के कार्य हो रहे हैं, जबकि 37 करोड़ से अधिक आगामी कार्यों के लिए रखे गए हैं।

वहीं लखनऊ नोड में 166 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य हो रहे हैं, इसमें से 14 करोड़ से अधिक के कार्य हो चुके हैं, जबकि 82 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य चल रहे हैं। यहां पर 13 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों का टेंडर हो चुका है, जबकि 56 करोड़ रुपये से अधिक आगामी कार्यों के लिए रखे गए हैं। इसी प्रकार चित्रकूट नोड में 71 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। यहां पर 39 लाख रुपये के कार्य चल रहे हैं, जबकि 10 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों का टेंडर हो चुका है। यहां 61 करोड़ रुपये से अधिक आगामी कार्यों के लिए रखे गए हैं।


कहां तक पहुंचा डिफेंस कॉरिडोर का काम
डिफेंस कॉरिडोर के लिए यूपीडा द्वारा मिली जानकारी के अनुसार यूपीडीआईसी के लिए अब तक 154 एमओयू हो चुके हैं। अब तक 16 सौ हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिगृहित की जा चुकी है, इसमें से सात सौ हेक्टेयर से अधिक भूमि 42 औद्योगिक समूहों को आवंटित हो गई है। इन 42 उद्योग समूहों की ओर से करीब आठ हजार करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। इस प्रोजेक्ट को गति देने के लिए यूपी में डिफेंस एक्सपो 2020 का आयोजन किया गया था। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में 22 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे। डिफेंस एक्सपो के बाद 24 समझौता ज्ञापनों पर और हस्ताक्षर किए गए थे। जिससे कुल एमओयू की संख्या बढ़कर 46 हो गई है। एयरो इंडिया 2021 के दौरान 16 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। एयरो इंडिया 2021 के बाद 6 अन्य समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। जिससे एमओयू की संख्या बढ़कर 68 हो गई। इस प्रकार अब तक कुल 154 एमओयू साइन हो चुके हैं। इनमें से इंडस्ट्रियल एमओयू 134 और इंस्टीट्यूशनल एमओयू 25 हैं। इसके अलावा फरवरी 2025 में बेंगलुरु में आयोजित एयरो इंडिया शो 2021 के जरिए उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए निवेशकों ने 45,00 करोड़ रुपए के 13 नए निवेश के रास्तों को खोला है। इसमें डिफेंस सेक्टर के लिए गोला बारूद के निर्माण के लिए 24,00 सौ करोड़ के साथ एसएमटीपी प्राइवेट लिमिटेड आगे आई है, जो कॉम्बूस्टिबल कंपोनेंट्स और बैलेस्टिक मटेरियल का निर्माण करेगी।


किस नोड में हो रहा है कौन का काम
यूपी के डिफेंस कॉरिडोर में जो कंपनियां निवेश कर रही हैं। उनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार है

  • लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस और एयरोलॉय टेक्नोलॉजी लिमिटेड ने निवेश किया है। यहां पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस नेक्स्ट जनरेशन (Brahmos NG) मिसाइल परियोजना पर काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त यहां एयरोस्पेस हब और एयरो इंजन कलस्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के निर्माण का काम चल रहा है।
  • झांसी में भारत डायनेमिक्स अपनी मिसाइल इकाई की स्थापना कर रहा है।
  • अलीगढ़ में एनकोर रिसर्च लैब्स एएलएलपी, एमीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने निवेश किया है। जो कि मानव रहित एरियल सिस्टम और छोटे हथियार बना रहे हैं।
  • कानपुर में अदाणी डिफेंस सिस्टम एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, आधुनिक मैटेरियल एंड साइंस प्राइवेट लिमिटेड ने निवेश किया है। जो कि सेना के विशेष कपड़े, बुलेटप्रूफ जैकेट, गोला बारुद, पैराशूट बना रहे हैं।
  • झांसी में भारत डायनेमिक्स मिसाइल इकाई स्थापित कर रहा है। साथ ही यहां पर डिफेंस उपकरणों के मेन्टेनेन्स और ओवरहॉलिंग की इकाई बनाई जा रही है।
  • चित्रकूट में हथियार प्रणालियों के परीक्षण सुविधा इकाई की स्थापना की जा रही है।


डिफेंस कॉरिडोर बनने से पहले से ही रक्षा उत्पादन का केन्द्र रहा है यूपी
यूपी में डिफेंस कॉरिडोर की घोषणा तो 2018-19 के केन्द्रीय बजट में की गई थी। लेकिन यूपी को रक्षा उत्पादन का केन्द्र बनाने की तैयारी केन्द्र सरकार ने काफी पहले से कर ली थी। इसी सिलसिले में अमेठी जिले में कोरवा आयुध फैक्ट्री में एके-203 रायफल का निर्माण किया गया है। साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैक्ट्री का शिलान्यास किया था। यहां पर युद्ध स्तर पर एके-203 रायफलों का निर्माण जारी है। रूस के सहयोग से यहां पूरी तरह से मेक इन इंडिया राइफल का निर्माण हो रहा है। यह रूस की रोसोबोरोन एक्सपोर्ट और क्लाशनिकोव कंसर्न, भारत की एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड का साझा उपक्रम है। अब तक हजारों एके-203 रायफलें भारतीय सशस्त्र बलों को सौंपी जा चुकी हैं।  भारतीय सेना को 7.62 एमएम कैलिबर की 35 हजार एके-203 राइफल उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। अभी 25 हजार राइफल सेना को और दी जानी हैं।


डिफेंस कॉरिडोर के लिए किस आधार पर हुआ स्थानों का चयन
उत्तर प्रदेश में रक्षा औद्योगिक गलियारों के निर्माण का फैसला यूं ही नहीं ले लिया गया। दरअसल यूपी में जमीन की बहुतायत है। यहां भूमि की कम लागत और कम मजदूरी दर के साथ-साथ पर्याप्त जनशक्ति मौजूद है। यही वजह है कि यह डिफेंस कॉरिडोर विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र के आर्थिक विकास और वृद्धि के लिए एक इंजन के रूप में काम करेगी। बुंदेलखंड को छह लेन के राजमार्ग से लाभ होगा जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने चित्रकूट से झांसी तक बनाने का प्रस्ताव दिया है और यह रक्षा उत्पादन इकाइयों के लिए आवश्यक अवसंरचनात्मक सहायता प्रदान करेगा। परंपरागत रूप से, उत्तर प्रदेश में धातुओं में कुशल कारीगरी रही है, इसके अलावा कानपुर में एक विशाल रक्षा विनिर्माण आधार है, जिसमें पहले से ही लगभग 6 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हथियार और रक्षा संबंधी सामान बनाते हैं। हालांकि, इनका बड़े पैमाने पर लाभ कभी भी सरकारों द्वारा नहीं उठाया गया, लेकिन यह रक्षा गलियारा निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में रक्षा विनिर्माण को आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करेगा और साथ ही उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, साथ ही संभावित बेरोजगार युवा कार्यबल को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। अर्थात् सस्ते श्रमिक बल और जमीन की उपलब्धता, पारंपरिक कारीगरों की कुशलता का लाभ, कनेक्टिविटी की सुविधा, रक्षा उत्पादन का पुराना इतिहास जैसे तथ्यों के आधार पर यूपी में डिफेंस कॉरिडोर स्थापित करने की फैसला लिया गया। 


यूपी में रोजगार की बहार
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है। यहां की लगभग 20 करोड़ आबादी में से आधे से ज्यादा यानी 52.7% फीसदी युवा मौजूद हैं। इन युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध कराना किसी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती रही है। लेकिन डिफेंस कॉरिडोर एक ऐसा कदम है। जिससे रोजगार की विशाल संभावनाएं पैदा होती है। एक अनुमान के मुताबिक यूपी डिफेंस कॉरिडोर से 40 हजार युवाओं को प्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिलेगा। लेकिन इससे अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार की लाखों संभावनाएं पैदा हुई हैं। क्योंकि इन डिफेंस कॉरिडोर की सप्लाई लाइन, सपोर्टिंग बिजनेस, रॉ मेटेरियल की व्यवस्था, कांट्रेक्ट वर्क आदि से लगभग डेढ़ से दो लाख युवाओं के रोजगार की व्यवस्था हो सकती है। यदि एक व्यक्ति के पीछे उसके परिवार के चार लोगों को गिना जाए, तो यूपी डिफेंस कॉरिडोर से लगभग 10 से 12 लाख लोगों की रोजी-रोटी की व्यवस्था होने की उम्मीद है। 


डिफेंस कॉरिडोर ने दूसरे उद्योगों को भी किया आकर्षित
योगी सरकार में डिफेंस कॉरिडोर के लिए जितनी तत्परता से काम हो रहा है और उसे लाल फीताशाही से मुक्त रखा गया है। उसने दूसरे उद्योगों को भी आकर्षित किया है और वह यूपी में निवेश के लिए इच्छुक हो रहे हैं। जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर जैसे देशों से लगभग 10 कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश करने की इच्छा जाहिर की है. इन सभी कंपनियों ने लगभग 57,000 करोड रुपए के निवेश की इच्छा जाहिर की है. राज्य सरकार ने निवेशकों को जमीन भी आवंटित करनी शुरू कर दी है. इसके लिए अभी तक कुल मिलाकर लगभग 1004 एकड़ का 1480 भूखंड आवंटित कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में लगभग दो लाख रोजगार की संभावनाएं बनेंगी और उत्तर प्रदेश के युवाओं को उनके राज्य में ही रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 2018 में जब ‘यूपी इन्वेस्टर्स समिट’ का आयोजन किया था,तब इस आयोजन के जरिए उत्तर प्रदेश में 4.28 लाख करोड रुपए के निवेश को योगी सरकार लाने में कामयाब हुई थी। जिसमें से दो लाख करोड़ रुपए के निवेश पर फिलहाल सक्रिय रूप से काम चल रहा है। उत्तर प्रदेश में इस वक्त 211 परियोजनाएं 50,756 करोड़ के वित्तीय सहायता के साथ-साथ 12 लाख 7 हजार रोजगार भी पैदा कर रही हैं। जबकि यूपी में इस वक्त 3,5,863 करोड़ के साथ 122 परियोजनाएं आने वाले समय में 20,5000 संभावित रोजगार पैदा करेंगी।

इस नजरिए से देखा जाए तो यूपी डिफेंस कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास का इंजन बन कर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यकुशलता ने प्रदेश की औद्योगिक प्रगति में चार चांद लगा दिए हैं। अब से आठ वर्ष पहले जिस यूपी की पहचान अपराध और अपराधियों की करतूतों की वजह से होती थी। उस उत्तर प्रदेश को योगी आदित्यनाथ ने अपने सुशासन और सख्त प्रशासनिक कदमों से निवेश के अनुकूल बना दिया है। जो कि एक सुंदर और सुरक्षित भविष्य की तस्वीर पेश करता है। 





अंशुमान आनंद

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