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प्रफुल पटेल की दूरदर्शी सोच का उदाहरण दमन: भूले-बिसरे क्षेत्र से राष्ट्रीय फलक तक 

Daman: An Example of Praful Patel’s Visionary Thinking From an Obscure Region to the National Stage.


दीपक कुमार रथ


दशकों तक दमन और दीव भारत की विकास गाथा में एक अजीब-सी जगह रखते रहे। समुद्र तटों, ऐतिहासिक विरासत और रणनीतिक संभावनाओं से समृद्ध होने के बावजूद, देश में जब भी विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे की चर्चा होती, इन क्षेत्रों का उल्लेख शायद ही कभी होता था। वर्ष 2016 में प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के प्रशासक का पद संभालने के बाद यह स्थिति निर्णायक रूप से बदलनी शुरू हुई। उनके कार्यकाल में दमन और दीव एक महत्वाकांक्षी विकास अभियान का केंद्र बने। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस की विकास सोच से भी जुड़ा था, जिसमें बुनियादी ढांचे, संपर्क सुविधाओं और सार्वजनिक सेवाओं का विस्तार देश के पारंपरिक महानगरीय केंद्रों से आगे तक करने पर जोर दिया गया।

पटेल की कार्यशैली इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि इसने इस धारणा को चुनौती दी कि छोटे केंद्रशासित प्रदेशों को सीमित महत्वाकांक्षाओं के साथ संतोष कर लेना चाहिए। इसके बजाय प्रशासन ने सड़क, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और संपर्क सुविधाओं के क्षेत्र में बड़े और स्पष्ट हस्तक्षेपों पर जोर दिया। इस दृष्टिकोण का राजनीतिक महत्व इस प्रयास में दिखाई देता है कि विकास को नागरिकों के लिए प्रत्यक्ष और दृश्यमान बनाया जाए—ऐसी सड़कें जो आवागमन आसान करें, ऐसी सार्वजनिक सुविधाएं जो सेवाओं के स्तर को बेहतर बनाएं और ऐसा बुनियादी ढांचा जो पर्यटकों के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी आकर्षित कर सके।

इस परिवर्तन का सबसे प्रमुख प्रतीक दमन का नमो एयरपोर्ट है। वर्षों तक सीधी वाणिज्यिक हवाई संपर्क सुविधा का अभाव केंद्रशासित प्रदेश की प्रमुख सीमाओं में से एक रहा। एयरपोर्ट के विकास और उसके संचालन के बाद सीधी वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत, जिसमें दमन-दिल्ली सेवा भी शामिल है, क्षेत्र की कनेक्टिविटी के लिहाज से बड़ा बदलाव साबित हुई। इससे दमन सीधे भारत के विमानन मानचित्र पर अधिक प्रमुखता से आया और पर्यटन, कारोबार तथा निवेश के लिए एक नया प्रवेश द्वार तैयार हुआ।

ऐसी परियोजना का महत्व केवल एयरपोर्ट टर्मिनल तक सीमित नहीं है। इस विकास मॉडल का व्यापक संदेश यह है कि बुनियादी ढांचा उन क्षेत्रों तक भी पहुंचना चाहिए जो लंबे समय तक देश के विकास विमर्श के केंद्र से बाहर रहे हैं। दमन को अपनी संभावनाओं के बारे में एक और वादा नहीं, बल्कि उन संभावनाओं को आर्थिक गतिविधियों में बदलने के लिए ठोस बुनियादी ढांचे की जरूरत थी। यही कारण है कि संपर्क सुविधाओं, सड़कों, राजमार्गों और नागरिक सुविधाओं पर प्रशासन का जोर उसकी विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। पर्यटन इस बदलाव का एक और प्रमुख आधार बना। दमन और दीव के पास पहले से ही प्राकृतिक और ऐतिहासिक आकर्षण मौजूद थे, लेकिन पटेल प्रशासन ने इन संसाधनों के आसपास बुनियादी ढांचे के विकास पर अधिक जोर दिया।

वर्ष 2020 में दमन और दीव का दादरा एवं नगर हवेली के साथ विलय इस विकास यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। एकीकृत केंद्रशासित प्रदेश के गठन से तीनों जिलों को एक प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत लाया गया। इससे समग्र योजना और समन्वित विकास की संभावनाएं बढ़ीं। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह विलय बिखरे हुए प्रशासनिक ढांचे से आगे बढ़कर अधिक एकीकृत शासन व्यवस्था की दिशा में एक कदम था।

आर्थिक एजेंडा भी केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहा। दमन और दीव की समुद्री सीमा क्षेत्र को मत्स्य पालन और व्यापक जलीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रदान करती है। एयरपोर्ट के विस्तार और कार्गो सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को व्यापक बाजारों से जोड़ने की महत्वाकांक्षा को दर्शाती हैं। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया गया। आधुनिक विकास केवल कंक्रीट, एयरपोर्ट और सड़कों का नाम नहीं है; यह मानव संसाधन की गुणवत्ता और सार्वजनिक सेवाओं से भी जुड़ा है। शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में निवेश के जरिए केंद्रशासित प्रदेश की सामाजिक नींव मजबूत करने का प्रयास किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा आकलनों में दीव के प्रदर्शन ने भी इस विकास कथा को एक नया आयाम दिया है। पटेल के कार्यकाल का राजनीतिक महत्व अंततः उस महत्वाकांक्षा के स्तर में दिखाई देता है, जो एक छोटे केंद्रशासित प्रदेश के लिए सामने रखी गई।

इस प्रकार दमन और दीव की यात्रा राजनीतिक महत्वाकांक्षा और प्रशासनिक क्रियान्वयन के मेल की कहानी बन गई है। कभी मुख्य रूप से समुद्र तटों और ऐतिहासिक विरासत के लिए चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र अब कनेक्टिविटी, निवेश, बुनियादी ढांचे और आर्थिक संभावनाओं के संदर्भ में भी चर्चा में है। हालांकि, यह गति अंततः टिकाऊ और व्यापक समृद्धि में कितनी बदलती है, यह आगे के कदमों पर निर्भर करेगा। लेकिन एक तथ्य को नजरअंदाज करना कठिन है—प्रफुल पटेल के प्रशासन के दौरान दमन और दीव भारत के अपेक्षाकृत उपेक्षित हिस्से से आगे बढ़कर ऐसे केंद्रशासित प्रदेश के रूप में उभरा, जिसने देश की व्यापक विकास चर्चा में अपनी जगह बनानी शुरू की।

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