जैसे-जैसे लोग हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे “फैंसी” फूड आइटम्स का ट्रेंड भी तेज़ी से बढ़ा है इन्हीं में से एक है पिंक साल्ट यानी कि सेंधा नमक। माना जाता है कि इसमें ज्यादा मिनरल होते हैं, इसलिए कई लोग साधारण आयोडीन वाले नमक की जगह इसे इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन यह बदलाव जितना हेल्दी दिखता है, उतना है नहीं। विशेषज्ञों और डॉक्टरों के द्वारा रोजमर्रा के उपयोग में आयोडीन युक्त नमक को पूरी तरह गैर-आयोडीन नमक से बदलना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। जी हां कभी-कभी फैंसी फूड का सेवन अच्छा होता है पर रोज इसका प्रयोग हमारे सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। गुलाबी नमक यानी कि सेंधा नमक को पर्याप्त खनिज सामग्री नहीं माना जाता है। गुलाबी नमक में ट्रेस मिनरल्स जरूर होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा बेहद कम होती है। किसी भी पोषण लाभ के लिए इसे अधिक मात्रा में लेना पड़ेगा, जो स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। इससे लोगों को यह गलतफहमी हो सकती है कि वे ज्यादा मिनरल ले रहे हैं, जबकि वास्तव में वे आयोडीन जैसे जरूरी पोषक तत्व से वंचित हो सकते हैं। इसके अलावा, गुलाबी नमक की कीमत भी सामान्य आयोडीन युक्त नमक से लगभग दोगुनी होती है, यानी यह जेब पर भी भारी पड़ता है। आयोडीन की कमी भारत में कभी एक बड़ी पब्लिक हेल्थ समस्या थी। 1960 के दशक में इसकी वजह से थायराइड विकार, गर्भावस्था में जटिलताएं और बच्चों में मानसिक विकास रुकने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आती थीं। इसी वजह से भारत में नमक का यूनिवर्सल आयोडीनीकरण अनिवार्य किया गया, जिसके बाद आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों में गिरावट आई। आयोडीन थायराइड फंक्शन को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाता है और इसकी कमी से थायराइड डिसऑर्डर का खतरा बढ़ सकता है।

यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर वजन को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।
त्वचा और मांसपेशियों के लिए

नहाने के पानी में सेंधा नमक का उपयोग करने से त्वचा में चमक आती है और मांसपेशियों की ऐंठन व थकान से राहत मिलती है।
गले की खराश

गुनगुने पानी में सेंधा नमक मिलाकर गरारे करने से गले की खराश और खांसी से राहत मिलती है।
तनाव मुक्ति

यह साल्ट थेरेपी के माध्यम से तनाव को कम करने में भी सहायक है।
पाचन में सुधार

यह पेट की समस्याओं जैसे कब्ज, गैस, सीने में जलन और खट्टी डकार से राहत दिलाता है, क्योंकि यह पाचन अग्नि को संतुलित करता है।
ब्लड प्रेशर का नियंत्रण

इसमें सामान्य नमक की तुलना में पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं, जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

सेंधा नमक में सामान्य टेबल सॉल्ट की तरह आयोडीन नहीं होता है, इसलिए लंबे समय तक केवल इसी का सेवन करने से आयोडीन की कमी हो सकती है।
उच्च रक्तचाप

अत्यधिक सेवन से रक्तचाप बढ़ सकता है और हृदय रोग का खतरा हो सकता है।
किडनी की समस्या

बहुत अधिक सेवन से शरीर में वॉटर रिटेंशन (पानी का जमा होना) हो सकता है, जिससे किडनी पर दबाव बढ़ता है और सूजन की समस्या हो सकती है।
डीहाइड्रेशन

अगर सीमित मात्रा में न लिया जाए, तो यह शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) का कारण बन सकता है।
क्या करें?

सी-सॉल्ट, पिंक साल्ट या अन्य मिनरल साल्ट डाइट ट्रेंड के कारण आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आयोडीन युक्त नमक एक सस्ता, सुरक्षित विकल्प है। “फैंसी” दिखने वाला हर विकल्प बेहतर नहीं होता कई बार साधारण आयोडीन वाला नमक ही आपकी थायरॉइड हेल्थ और संपूर्ण पोषण सुरक्षा के लिए सबसे समझदारी भरा चुनाव है।
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