Written by -अंशुमान आनंद
वैसे तो हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी पिछले दस साल से सत्ता पर काबिज है, इसीलिए इस बार के विधानसभा चुनाव में सभी चुनावी विश्लेषक हरियाणा में भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान की भविष्यवाणी कर रहे हैं और उसे सत्ता मिलना मुश्किल बता रहे थे।लेकिन अब भाजपाई भी क्या करें जब कांग्रेस के नेता उसे प्लेट में परोसकर सत्ता देने के लिए बेचैन हो रहे हैं तो भाजपा मना भी कैसे कर सकती है।
जहां भी चार कांग्रेसी मिल जाते हैं वहां उनमें घमासान जरुर मच जाता है। हरियाणा में भी कुछ ऐसा ही दृश्य दिखाई दे रहा है । हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए 4 अक्तूबर को मतदान होने वाला है लेकिन इससे पहले कांग्रेस की अंदरूनी कलह एक बार फिर से सामने आ गई है हुआ यूं कि जैसे ही हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई।सिरसा लोकसभा सीट से सांसद कुमारी सैलजा तुरंत एक्टिव हो गईं लेकिन जैसै जैसे चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगीं। वैसे वैसे सैलजा हाशिए पर खिसकती चली गईं और हालत ये है कि अब उन्होंने इस चुनाव से पूरी तरह दूरी सी बना ली है। सैलजा न तो कांग्रेस के घोषणा पत्र जारी करने के समय दिखाई दीं और न ही वो अब चुनाव प्रचार कर रही हैं। उनकी नाराजगी की वजह हैं हरियाणा के दिग्गज कांग्रेसी और पूर्व मुख्यमंत्री रहे भूपिंदर सिंह हुड्डा। क्योंकि दरअसल टिकट बंटवारे से लेकर अबतक जो घटनाक्रम हुए उन सब में हुड्डा को तवज्जो मिली है। सैलजा न तो अपने समर्थकों को टिकट दिलवा पाई और ना ही उन्हें प्रचार के लिए कोई बुला रहा है । यही नहीं हुड्डा गुट के समर्थकों ने सैलजा पर कई आपत्तिजनक टिप्पणिां भी की हैं जिससे वह बेहद आहत हैं ।सैलजा की इस नाराजगी का खमियाजा कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है...क्योंकि कुमारी सैलजा हरियाणा में कांग्रेस का बड़ा दलित चेहरा हैं ।
हरियाणा की 21 ऐसी विधानसभा सीटे हैं जहां कुमारी सैलजा का प्रभाव है। लेकिन कांग्रेस समर्थकों की टिप्पणियों के बाद से उन्होंने चुनावी कैंपेन से दूरी बना ली है ।उन्होंने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी या बयान भी नहीं दी है। सैलजा की इस खामोशी ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है नारनौंद में कांग्रेस उम्मीदवार जस्सी पेटवाड़ के नामांकन कार्यक्रम में एक समर्थक ने कुमारी सैलजा पर जातिगत टिप्पणी की थी। इस मामले ने तूल पकड़ा और जगह-जगह विरोध भी हुआ। बताया जा रहा है कि सैलजा इस बात से नाराज चल रही हैं । लेकिन कांग्रेस पार्टी ने आरोपी के खिलाफ कोई विशेष कार्रवा नहीं की है। उधर हरियाणा में टिकट बंटवारे पर भी सैलजा की राय नहीं ली गई है। कांग्रेस हाईकमान ने हुड्डा समर्थकों को तवज्जो देते हुए 90 में से 72 सीटों पर उनके समर्थकों को टिकट दिया है। वहीं सैलजा ने 35 सीटें मांगी थी, लेकिन उनके सिर्फ 10 समर्थकों को टिकट दिया गया। हरियाणा कांग्रेस में दो गुट है एक गुट भूपेंद्र सिंह हुड्डा का और दूसरे एसआरके गुट था एसआरके गुट में सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी थे। लेकिन किरण चौधरी के बीजेपी में शामिल होने के बाद इस गुट में सिर्फ दो नेता रह गए। चुनाव कैंपेन में पोस्टर से लेकर बयानबाजी तक में दोनों खेमे में साफ तौर पर तनातनी साफ तौर पर देखने को मिलती है। सीएम उम्मीदवार को लेकर भी दोनों गुटों में अक्सर बयानबाजी होती रहती है ।
हरियाणा में जाट समाज की आबादी सबसे ज्यादा 22% तो है। लेकिन दलित समुदाय की आबादी 21% आबादी के साथ दूसरे नंबर पर है। हरियाणा में जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस जाट और दलितों का जिताऊ गठबंधन बनाना चाहती है । लेकिन हुड्डा के नाम पर जाट समुदाय के कुछ वोट तो कांग्रेस को मिल सकते हैं लेकिन दलित समुदाय फिलहाल दम साधे अपनी नेता कुमारी सैलजा को अपमानित होते हुए देख रहा है। ऐसे में मतदान के समय दलित वोटरों का रुख किस तरफ होगा यह कहना मुश्किल है उधर जबकि भाजपा 30 फीसदी ओबीसी,8 फीसदी ब्राह्मण,5 फीसदी वैश्य,8 फीसदी पंजाबी,3.5 प्रतिशत राजपूत वोटरों के अलावा दलित वोटरों पर भी भरोसा कर रही है। पिछले 10 सालों से हरियाणा पर शासन करने वाली भाजपा पर सत्ता विरोधी वोटर रुझान का खतरा मंडरा रहा था। लेकिन कांग्रेसी नेताओं के बीच तेज हुई घमासान ने उसे संजीवनी प्रदान कर दी है ।देखते हैं हरियाणा में चुनावी ऊँट किस करवट बैठता है।
Leave Your Comment