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आस्था ही नहीं आर्थिकी का भी केंद्र

Center of not only faith but also economy

बीते साल मई की गर्मियों की एक रात काशी के एक मशहूर देसज रेस्तरां से भोजन के बाद महामना मालवीय की पुण्यभूमि काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सवारी के दौरान अद्भुत अनुभव हुआ। जाति और धर्म की राजनीति में करीब चार दशकों से जूझ रही उत्तर प्रदेश की धरती में वह अनुभव नया था। ऑटो चालक उस बिरादरी का रहा, जिसे आमतौर पर एक समाजवादी राजनीतिक धारा का समर्थक माना जाता है। अव्वल तो भाजपा के राज में उसे प्रचलित नैरेटिव के मुताबिक, दुखी और उदास होना था। लेकिन वह खुश था। उसकी खुशी की वजह थी, उसकी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी कमाई। उसका अपना आकलन था कि उसकी कमाई का वजह बना है, विश्वनाथ काॅरीडोर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर तैयार कारीडोर के उद्घाटन के बाद देसी सैलानियों की जबरदस्त आवक बढ़ी है। इसकी वजह से काशी के होटल पूरे वक्त भरे रह रहे हैं, वाराणसी के घाट सैलानियों से अटे रहते हैं, दुकानों की बिक्री बढ़ गई है और परिवहन के संसाधनों की मांग बढ़ गई है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, विश्वनाथ काॅरीडोर बनने के बाद काशी हर महीने औसतन ढाई से तीन लाख पर्यटक वाराणसी आ रहे हैं। पर्यटन विभाग के बीते महीने के दो दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, वाराणसी साल 2023 में वाराणसी आने वाले देसी पर्यटकों की संख्या पांच करोड 37 साल से ज्यादा रही, जबकि इस दौरान करीब तेरह हजार 700 से ज्यादा विदेशी पर्यटक वाराणसी पहुंचे।

यह कम दिलचस्प नहीं है कि जिस राज्य ने देश के सात प्रधानमंत्री दिए, जो सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा हो, जहां की काशी नगरी का अस्तित्व ब्रह्मांड में ही अलग माना जाता रहा हो, जहां की मथुरा तीन लोकों से न्यारी का दर्जा हासिल की हो उस उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य का उपेक्षाभरा विशेषण मिलना एक तरह से उपहास था। पिछली सदी के अस्सी के दशक में अर्थशास्त्री आशीष बोस ने बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की पिछड़ी अर्थव्यवस्थाओं के चलते बीमार से मिलता-जुलता बीमारू नाम दिया था। लेकिन अब उत्तर प्रदेश बीमारू की श्रेणी से बाहर निकलने लगा है। अब तो उम्मीद की जा रही है कि अयोध्या के राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद रोजाना श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों और सैलानियों की जो बाढ़ आएगी, उससे ना सिर्फ साकेत और अयोध्या, बल्कि पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में तेज उछाल आएगा। वाराणसी का अनुभव इसकी पुष्टि भी कर रहा है।  जहां विश्वनाथ काॅरीडोर के उद्घाटन के बाद रोजाना आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। इसका असर यहां के स्थानीय परिवहन, होटल व्यवसाय, दस्तकारी और रेस्टोरेंट के कारोबार में तेज बढ़ोत्तरी दिख रही है। माना जा रहा है कि राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या और आसपास के इलाकों में तीर्थ यात्रियों की बाढ़ के साथ ही वाराणसी में आने वाले लोगों की संख्या में भारी उछाल होगा।

स्थानीय पर्यटन में सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का बड़ा महत्व रहा है। उत्तर प्रदेश की धरती ऐसे स्थलों से भरी पड़ी है। लेकिन सवाल यह है कि तीर्थ स्थल तो प्राचीन काल से ही हैं, लेकिन यहां पहले यात्रियों की संख्या में बाढ़ क्यों नहीं देखी गई? यात्री श्रद्धा के बावजूद आने से क्यों बचते थे? इसका सीधा सा जवाब है कि पहले तीर्थ यात्रियों के हिसाब से ना तो सड़कें थीं, ना ही यात्रा के साधन ना ही शहरों में ठहरने के इंतजाम, ना ही बेहतर कानून व्यवस्था और दूसरी सुविधाएं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश में बदलाव आ रहा है। इसका असर अब दिख रहा है। अब उत्तर प्रदेश, विशेषकर विकास से पिछड़े रहे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सड़कों का जाल बिछ रहा है। यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री पूर्वी उत्तर प्रदेश ने ही दिये या यहीं से चुन कर आए, लेकिन विकास की दौड़ में यह इलाका पिछड़ा रहा। भगवान शिव की नगरी काशी हो, भगवान बुद्ध के पहले उपदेश का गवाह रहा सारनाथ, भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या, भगवान बुद्ध का निर्वाण स्थल कुशीनगर, सब पूर्वी उत्तर प्रदेश में हैं। लेकिन अतीत में ना तो राम सर्किट और ना ही बौद्ध सर्किट को आर्थिक हलचल के केंद्र में विकसित करने की कोशिश हुई ना ही इन सर्किटों को सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में बढ़ावा देने की कोशिश हुई। लेकिन अब चीजें बदल रही हैं। इसका केंद्र फिलहाल अयोध्या और काशी बन रही है।

अयोध्या में बन रहा राम मंदिर इलाके की आर्थिक हलचल का भी केंद्र बनेगा।  इसकी वजह यह है कि यहां 'टूरिज्म फैसिलिटेशन सेंटर' बनाया जा रहा है।  जिसे अयोध्या में 4.40 एकड़ में बनाया जा रहा है। जिसे तैयार करने में 130 करोड़ रूपए के खर्च का अनुमान है। इस केंद्र को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 330 व 27 से जोड़ने की भी तैयारी है। यहीं सैलानियों के ठहरने के भी इंतजाम किए जाएंगे। इसके निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग ने कार्य शुरू कर दिया गया है। टेंडर डाले जा चुके हैं और उम्मीद की जा रही है कि एक महीने में काम शुरू हो जाएगा। जिस तरह उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है, उससे लगता है कि आस्था और अध्यात्म का केंद्र राममंदिर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। इसमें दो राय नहीं है कि राम मंदिर के निर्माण के बाद ना सिर्फ देश बल्कि दुनिया के तमाम कोनों से श्रद्धालुओं व पर्यटकों की बाढ़ अयोध्या आएगी। वह काशी भी जाएगी, प्रयाग भी जाएगी, हो सकता है कि वह सारनाथ और कुशीनगर भी जाएं। लखनऊ का वैभव भी देखने की वह कोशिश करेगी। जाहिर है कि इसकी वजह से इलाके में परिवहन, दस्तकारी, होटल, रेस्टोरेंट और दूसरे व्यवसायों में तेजी आएगी। इसके लिए बुनियादी सुविधाओं और संरचना की जरूरत होगी। शायद इसे ही ध्यान में रखते हुए जहां पर्यटक केंद्र विकसित किया जा रहा है, वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से अयोध्या की कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। सैलानी केंद्रित परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए योगी सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर आगे बढ़ने की तैयारी में है।

22 जनवरी को राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है, इसके बावजूद यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रोजाना आ रही है। जाहिर है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसमें और तेजी आएगी। उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को उम्मीद है कि राम मंदिर बन जाने के बाद औसतन पचहत्तर हजार से लेकर एक लाख तक श्रद्धालु रोजाना अयोध्या पहुंचेंगे। वैसे बाइस जनवरी के दिन यहां के नवनिर्मित हवाई अड्डे पर करीब सौ विमानों के उतरने की इजाजत मांगी गई है।  इसे देखते हुए अयोध्या के विकास के लिए अलग से काम हो रहा है। अयोध्या का विकास मास्टर प्लान 2031 के तहत किया जाना तय हुआ है। इसके जरिए शहर की स्ट्रीटलाइट्स, ड्रेनेज, सुरक्षा और सर्विलांस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या पर्यटन सुविधा केंद्र में करीब 3273 वर्ग मीटर का बिल्ड अप एरिया बनाने की तैयारी की है। इसमें शेल्टर होम, शिल्प ग्राम, शौचालय के साथ ही बेहतर बाजार भी बनाया जा रहा है। अयोध्या के चौक से राममंदिर तक आने वाली सड़क को सैलानी केंद्र की मुख्य सड़क के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस क्षेत्र में परियोजना को पूरा करने के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे को बदलने की भी तैयारी है। अयोध्या में बृहद रामकथा पार्क भी बनाया जा रहा है। जिसमें बेहतरी ध्वनि व्यवस्था और आधुनिक थियेटर भी होगा। कुल मिलाकर अयोध्या को सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर विकसित किया जा रहा है।

अयोध्या ऐसी जगह स्थित है, जहां से काशी, गोरखपुर, कुशीनगर, श्रावस्ती, प्रयाग, सारनाथ आदि जाना सहज है। जब यहां स्थानीय और विदेशी सैलानी एवं श्रद्धालु आएंगे तो वे बौद्ध सर्किट से सारनाथ और कुशीनगर एवं श्रावस्ती जाएंगे तो काशी, प्रयाग और दूसरे तीर्थ स्थलों पर भी जाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार इन सब जगहों को जोड़ने की योजना बना रही है, इसलिए यहां राजमार्गों के किनारे स्थानीय उत्पादों, शिल्पकारी,  खेती-किसानी की उपज आदि को भी बड़ा बाजार उपलब्ध होगा। सैलानी उन्हें खरीदेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी। इन अर्थो में कहा जा सकता है कि राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद ना सिर्फ श्रद्धा का सैलाब उमड़ेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिकी में नया अध्याय भी शुरू होगा। राज्य की घनी जनसंख्या को देखते हुए ऐसे उपाय पहले ही होने चाहिए थे, इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश की गरीबी और बेरोजगारी को काबू करने में मदद मिलती। लेकिन अतीत की सरकारों ने इस लिहाज से नहीं देखा। राममंदिर का निर्माण भारत के करोड़ों हिंदुओं के पांच सौ साल की उम्मीदों का फलीभूत होना है। जिसमें हजारों लोगों का बलिदान शामिल है। उम्मीद की जानी चाहिए कि राममंदिर आर्थिकी के भी बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा, जिसका फायदा इसके नजदीकी इलाकों को भी मिलेगा।







उमेश चतुर्वेदी
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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