भारत त्यौहारों का देश है। भारतीय त्यौहारों की विविधता विश्वव्यापी है। जब कभी भी भारत में त्यौहार आते हैं तो उनकी तैयारियां काफी बड़े पैमाने पर और उत्साह के साथ की जाती है। विभिन्न धर्मों और मान्यता के हिसाब से त्यौहार मनाये जाते हैं। पूरे वर्ष आयोजित होने वाले त्यौहारों की विस्तृत श्रृंखला हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का सच्चा प्रतिनिधित्व करती है। विविधता के कारण भारत में हर एक दिन त्यौहार के समान होता है। ऐसे में त्यौहारों पर भारतीय बाजारों में बिकने वाले भारतीय उत्पाद इन त्यौहारों को और महत्वपूर्ण बना देते हैं। लोगों को त्यौहार और पर्व के पास आने की आहट प्रदान करते हैं।
त्यौहारों का मतलब अपनी आस्था के प्रति प्रेम और समर्पण साथ ही उसकी जीवंत रुप से अनुभूति करना है। भारत में त्यौहार उपभोक्ताओं के दिमाग में अपने उत्पाद को बढ़ावा देने और स्थापित करने का बेहद ही सुनहरा मौका प्रदान करता है। त्यौहारों के दौरान खरीदारी के निर्णय अक्सर भावनाओं से प्रभावित होते हैं। अलग-अलग धर्म के लोग अपनी मान्यता के हिसाब से त्यौहार मनाते हैं और उसी के अनुरुप खरीदारी भी करते हैं। भारत में प्रति वर्ष एक अनुमान के मुताबिक सैकड़ों त्यौहार क्षेत्र, समाज, और तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। भारत में व्यापक विविधता के कारण तीन प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं-
पहले प्रकार के त्यौहार में गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती आते हैं। जबकि दूसरे प्रकार के त्यौहार में होली, दिवाली, रक्षा बंधन, ईद, बकरीद ,क्रिसमस, गुरु पूर्णिमा आदि त्यौहार आते हैl इसके अलावा मौसमी त्यौहार में अलग-अलग प्रकार के त्यौहार धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मनाए जाते हैं। पर अगर इन सैकड़ों त्यौहारों में से कुछ खास त्यौहार की बात धार्मिक मान्यता के हिसाब से करें तो हिंदू धर्म में प्रमुख रुप से 12 माह में 13 से अधिक यानी कि होली , दीपावली, दशहरा, रक्षाबंधन, शिवरात्रि, गणेश चतुर्थी, ओणम, छठपूजा, हरितालिका तीज, करवाचौथ के साथ ही कई अन्य त्यौहार होते हैं। वहीं मुस्लिम समुदाय में ईद, बकरीद, मुहर्रम जैसे त्यौहार प्रमुख हैं। ऐसे ही सिख समुदाय में गुरु गोविंद सिंह जयंती के साथ लोहड़ी और ईसाईयों में क्रिसमस प्रमुख रुप से मनाया जाता है। और इन्हीं की मान्यता अनुरुप बाजारों में उत्पादों की रौनक सजाई जाती है। उनकी बिक्री की जाती है। उत्सव अपने वर्तमान और संभावित ग्राहकों या ग्राहकों के साथ फिर से जुड़ने का सुनहरा मौका देते हैं। जो बिक्री के साथ संबंधों को और मजबूत करने में काफी मददगार साबित होते हैं। भारत में त्यौहार दुकानदारों और उत्पादकों को प्रभावी मार्केटिंग रणनीतियों की योजना बनाने में काफी मददगार होता है।
वैसे तो साल में 365 दिन होते हैं, उनमें अलग-अलग दिन अलग-अलग रुप से खास होता है। जो त्यौहारों के रुप में एक विक्रेता को उत्पाद बनाने और उसकी बिक्री के लिए प्रेरित करता है। और इसी प्रेरणा के कारण से त्यौहारों पर ग्राहकों को चकाचौंध कर देने वाले बाजार का निर्माण होता है। और त्यौहारों की विविधता और व्यापकता के अनुरुप उत्पादों की भी विविधता होती है। त्यौहारों के दौरान देशी उत्पादों को प्राथमिकता दी जाती है। उसकी ज्यादा मांग होती है। जो ग्राहक को संतुष्टी प्रदान करती है। जिस प्रकार पर्यटन में एक पर्यटक के अनुरुप उसके लिए टूर पैकेज बनाया जाता है, और उसी के हिसाब से उसके मांग को उसके अनुरुप पूरा किया जाता है। ठीक उसी प्रकार त्यौहार एक पैकेज की तरह होता है और उसी के हिसाब से उत्पादक, उत्पाद का निर्माण करता है और ग्राहक के मांग को पूरा करता है।
त्यौहारों को जीवन के अभिन्न अंग के रुप में माना जाता है। ऐसे में प्रमुख त्यौहारों को मनाने के लिए तैयारियां 1-2 माह पहले से ही की जाने लगती हैं। और यही त्यौहार भारत की अर्थ व्यवस्था में वृद्धी के प्रमुख कारक के रुप ने निकल कर सामने आते हैं। और देश को आर्थिक बल प्रदान करते हैं। इन त्यौहारों के दौरान देश में एक से लेकर दो लाख करोड़ रुपये के बीच खुदरा व्यापार होता है जो पूरे वर्ष के दौरान होने वाले खुदरा व्यापार का एक बहुत बढ़ा हिस्सा रहता है। अब आपको बताते हैं कुछ प्रमुख त्यौहार के बारे में और उनमें बनने और बिकने वाले भारतीय उत्पादों के बारे में-
राष्ट्रीय त्यौहार :
स्वतंत्रा दिवस

भारत का स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्त को देश भर में हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह प्रत्येक भारतीय को एक नई शुरूआत की याद दिलाता है। इस दिन 200 वर्ष से अधिक समय तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से छूट कर एक नए युग की शुरूआत हुई थी। लाखों- करोड़ों सहादत के बाद मिली स्वतंत्रा के रुप में इस दिन को राष्ट्रीय त्यौहार के रुप में मनाया जाता है।
उत्पाद : इस दिन भारत अपनी स्वतंत्रता को मनाता है। इस दिन देश के अलग-अलग जगहों पर अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन भारतीय बाजारों में तिरंगे, हांथों के ब्रेसलेट, के साथ कई अन्य चीजों की ब्रिक्री होती है। जो भारतीय बाजारों को आर्थिक मजबूती प्रदान करती है।
गणतंत्रत दिवस
2 साल 11 महिने 18 दिन में 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुए भारतीय संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। इस दिन संविधान को लागू िकया गया और सके साथ ही भारत एक संप्रभु राज्य बन गया, जिसे गणतंत्र घोषित किये जाने के रुप में भारत में गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है।
उत्पाद : इस दिन भारत अपनी स्वतंत्रता को मनाता है। इस दिन देश के अलग-अलग जगहों पर अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन भारतीय बाजारों में तिरंगे, हांथों के ब्रेसलेट, के साथ कई अन्य चीजों की ब्रिक्री होती है। जो भारतीय बाजारों को आर्थिक मजबूती प्रदान करती है।
धार्मिक त्यौहार :
होली

भारत में होली का त्यौहार साल के शुरुआत में एक अलग ही खुशहाली लेकर आता है। रंग और गुलाल की तरह यह त्यौहार पूरे साल को खुशियों के रंग से शराबोर करने का पहला कदम होता है। इस दिन लोग रंग- गुलाल लगा कर आपसी सभी वैमनस्य का त्याग करते है, और नई शुरुआत करते हैं। लोग आपस में मिलते- जुलते हैं, खुशियां बांटते हैं।
उत्पाद : अब इस त्यौहार पर प्रमुख रुप से बाजारों में अलग- अलग प्रकार के उत्पादों की बिक्री होती है। जिसमें हांथों से बनाये गए रंग, गुलाल, अबीर, पिचकारीयां, शामिल होते हैं। इस त्यौहार पर भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर इन सभी घरेलू वस्तुओं की बिक्री मांग के अनुरुप होती है। रंगों की तरह बाजार भी रंगीन हो जाते हैं। होली पर इन उत्पादों के साथ मिठाईयों और नमकीनों की मांग काफी बड़े पैमाने पर होती है। जिसकी तैयारी भी भारतीय बाजारों में उत्पादकों द्वारा उपभोक्ताओं यानी की ग्राहकों के मांग के अनुरुप की जाती है और उनकी भी बिक्री काफी बड़े पैमाने पर होती है। जो घरेलु उत्पादों के साथ मिठाईयों और नमकीनों के रुप में की जाती है। तो होली पर भारत में मिठाई, नमकीन के साथ रंग-गुलाल की काफी मांग रहती है।
दीपावली

भारतीय त्यौहारों की सूची में हिंदू धर्म की मान्यता के हिसाब से दीपावली सबसे बड़ा त्यौहार के रुप में मनाया जाता है। इस दिन को भगवान रामचंद्र जी के लंका पर विजय प्राप्त करने और सीता माता के साथ अयोध्या वापस लौटने के खुशी के रुप में मनाया जाता है। ठीक इसी मान्यता के हिसाब से पौराणिक काल से लेकर आजतक इस त्यौहार के दिन पूरे देश के कोने-कोने में रौनक रहती है।
उत्पाद : वैसे तो यह त्यौहार अमावस्या के दिन होता है, लेकिन इस दिन जलाये जाने वाले दीपों और पटाखों की रौशनी से पूरा देश जगमगाता रहता है। औऱ इस जगमगाहट के पीछे भारतीय बाजार और घरेलू उत्पादों का प्रमुख हाथ रहता है। दीपावली पर भारतीय बाजार भी जगमागाते रहते हैं। इस त्यौहार पर काफी बड़े पैमाने पर यानी की करोड़ों की संख्या में हाथ से बने मिट्टी के दीयों की बिक्री, ग्रीन पटाखों, और स्थानिय मान्यता के हिसाब से मिठाईयों की बिक्री होती है। जो भारतीय अर्थव्यस्था में वृद्धी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रक्षाबंधन

इस त्यौहार की भारत में अलग ही मान्यता होती है। इस त्यौहार को भाई-बहन के त्यौहार के रुप में मनाया जाता है। इस दिन बहने अपने-अपने भाईयों के हाथों पर राखी बांधती हैं और उनके लंबी आयु की कामना करती हैं। साथ ही भाई अपनी-अपनी बहनों की रक्षा का प्रण लेते हैं। इस त्यौहार पर अन्य त्यौहारों की तरह घरों को सजाया तो नहीं जाता पर यह त्यौहार दिलों को जोड़ने और उन दिलों को सजाने का त्यौहार होता है। इस दिन बहन और भाई नये कपड़े पहनते हैं। एक दूसरों को गिफ्ट्स देते हैं और मिठाईयां खाते हैं। अब इस त्यौहार के माध्यम से भी भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता मिलती है।
उत्पाद: रक्षाबंधन पर भारतीय बाजारों में काफी रौनक रहती है। खासकर इस त्यौहार पर राखियों और कपड़ों के दुकानों और भारतीय मिठाईयों के दुकानों पर काफी रौनक देखने को मिलती है। इस त्यौहार पर भारत में राखियों, कुर्ते-पजामों, सूट-सलवारों के साथ ही साड़ियों के साथ भारतीय मिठाईयों की की काफी बड़े पैमाने पर बिक्री होती है।
ईद

भारत में ईद मुसलमानों का एक प्रमुख त्यौहार होता है। मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ। माना जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी। इस जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा करवाया गया था, इसी दिन को मीठी ईद या ईद-उल-फितर के रुप में मनाया जाता है। इस दिन मुसलमान लोग एक दूसरे को सेवइयां बना के खिलाते हैं और इस त्यौहार को मनाते हैं।
उत्पाद : इद पर भारतीय बाजार में काफी रौनक देखने को मिलती है। इस दिने मुसलमान लोग अलग-अलग वस्तुओं, गिफ्ट्स की खरीद यानी की ईदी की खरीद के लिए बाजारों में जाते हैं। ईद पर मुख्य रुप से भारतीय बाजारों में मांसाहारी खानों, सेवइयों की बिक्री के साथ-साथ बड़े पैमाने पर कपड़ों की भी बिक्री और खरीद की जाती है।
ठीक इसी प्रकार भारत में राष्ट्रीय,धार्मिक, औऱ मौसमी त्यौहारों के समय यानी की हिंदूओं में मनाये जाने वाले दसहरा पर भारतीय बाजारों में खाने-पीने की वस्तुएं, मेले में मिट्टी से बने खिलौनों की बिक्री के साथ ही कपड़ों की भी खूब बिक्री होती है। इसी प्रकार उत्तर भारत में प्रमुख रुप से खासकर यूपी और बिहार में मनाये जाने वाले छठ पूजा पर भारतीय बाजारों में बड़े पैमानों पर पूजा के सामानों के साथ फलों की बिक्री और खरीद होती है। सिख्खों के पर गुरु गोविंद सिंह जयंती को भी काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। कई जगहों पर जलसों का आयोजन किया जाता है, कई जगहों पर मेले लगते हैं। बाजारों में नए कपड़ों की खरीद की जाती है, मले लगतें हैं जो आकर्षण का केंद्र बनते हैं, साथ ही भारतीय उत्पादों की प्रमुखता का वर्णन भी करते हैं। ठीक ऐसा ही ईसाईयों के प्रमुख त्यौहार क्रिसमस पर किया जाता है। भारत में क्रिसमस पर मेले लगाये जाते हैं, चर्चों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
भारत में जो सांस्कृतिक विविधता या कहें तो त्यौहारों की विविधता एवं सम्पन्नता है उसको सबसे आगे लाकर हम भारत को एक सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में परिवर्तित कर सकते हैं। और कई हद तक इस पहलु पर पिछले कुछ सालों में वर्तमान सरकार के द्वारा एक प्रमुख कदम उठाया गया है। विश्व स्तर पर इसका प्रचार किया जा रहा जिसमें डिजिटलाइजेसन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। और इसके बाबजूद यह हमारा उद्देश्य एवं आकांक्षा होनी चाहिए कि भारतीय त्यौहार और उस त्यौहार में प्रमुख रुप से बिकने वाले भारतीय उत्पाद विश्वस्तर पर जाने जाए। भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं में मुख्य रूप से शामिल होने में -खाद्य संस्कृति, संगीत, नृत्य, फाइन-आर्ट्स, सिनेमा, सांस्कृतिक पर्यटन (जिसमें हेरिटेज, साइट्स, म्यूजियम, आदि शामिल हैं) एवं धार्मिक पर्यटन, आदि शामिल हैं। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय त्यौहारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे खुद-ब-खुद उत्पादों को प्रासंगिकता मिले।
सात्विक उपाध्याय
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