पहलगाम नरसंहार हुए एक सप्ताह बीत गया !
मोदी क्या कर रहा है ! पूछने वालों की मौज है !
इस बीच
भटके हुए नौजवान थोड़ा और भटक गये !
साधारण सड़क दुर्घटना में मरने वालों की लाश लेकर रास्ता रोकने वाले!
पहलगाम की लाशें देख अब भूमि में समा गए !
मुझसे सैकड़ो सवाल पूछने वाले ख़ुद से कुछ न पूछ पाये !
किसी को नहीं लगता कि तक्षशिला पहलगाम बन गई है !
तो कभी पहलगाम भी दिल्ली, जयपुर , मुंबई अथवा जबलपुर बनेगा ,
जब शव उनके घर में गिर रहे होंगे तब क्या वह यही ज्ञान देंगे ! या फिर बांग्लादेश या पाकिस्तान भागेंगे !
पैंतीस साल पहले कश्मीरी पंडित ने भोगा था यह तब हम सोते रहे थे !
आम आदमी से मुझे कोई शिकायत नहीं है !
मेरा प्रश्न भिन्न है !

सनातन की रक्षा का नाटक करने वाले, राधा और काली को लड़ाने वाले !
राम कथा में मौला-मौला करने वाले
चिता पर फेरे कराने वाले!
करोड़ों रुपये के पंडाल लगा कर महिलाओं को नचाने वाले
और बीस लाखा में मेरे राम और तेरे राम उसके राम बता कर लूटने वालों की मृत अंतरात्मा से
एक सप्ताह में कोई बोल तक न फूटा!
इनके प्रवचन सुन सुन कर हम इतने नपुंसक हो गये हैं कि सरकार को कोसा, जिहादियों को कोसा किंतु जिनको करोड़ों रुपये दिये हैं जिनकी सभाओं में हिजड़ों की तरह नाचे !
उनसे किसी ने पूछा कि कब आयेंगे आपके राम ?
विश्वामित्र बन कब जाओगे दशरथ के यहाँ खर दूषण के वध के लिए माँगने राम को ?
हिंदू चाहे एक बार भंग गाँजा या कोई और नशा कर ले किंतु इस राधे राधे के नशे को न छुए,
पहलगाम का दृश्य बताता है कि हमारा सांस्कृतिक बंध्याकरण हो चुका है !
पूरे घटनाक्रम मे कोई प्रतिरोध नहीं हैं !
पत्नियाँ पति के आगे आकर छाती पर गोली नहीं खायी !
पति अपने इष्ट का नाद न कर पाये!
ग़ुलामी के दिनों में हक़ीक़त राय और चार साहिब जादे, बंदा बैरागी को लाख मौक़े मिले कि धर्म छोड़ पतन बचा लें किंतु वे टस से मस न हुए !
पर इस हत्या कांड में किसी ने नहीं कहा क्यों सुनाऊँ ?
कौन हैं आप आज्ञा देने वाले ?
क्या यह दोष मृतकों का है ?
नहीं यह दोष है एक कु राष्ट्रपिता का जो सीखा गया है यह नशा!
मरते रहो
रोते रहो!
कांग्रेस ने तो अपने गांधी इजाद कर उसे दफ़ना दिया
तो कथा वाचकों ने पकड़ लिया!
एक आपात काल में नस बंदी अभियान हुआ तो !
शाह कमीशन बैठ गया !
यह जो हिंदू बंध्याकरण जारी है इस पर किसी की निगाह नहीं है!
आज आत्मरक्षा का विकल्प है, राधे राधे
राधे राधे करते जाओ भारत ख़ाली करते जाओ
यदि राधे राधे इतना ही श्रेष्ठ था किसी भी सैन्य बल ने कभी राधे राधे कह कर युद्ध क्यों नहीं लड़ा ?
जय भवानी
जय श्री राम
जय एक लिंग
दुर्गा माता की जाय
जय महाकाल
को त्याग कर मुग़ल काल में पढ़ाया गया राधे राधे और महारास सनातन के सच्चे महा रास से बहुत दूर चला गया !
महारास में आत्मा रूपी राधा परमात्मा के साथ रास करती है?
वह है असली राधा स्वामी !
भांडों की तरह शिखंडियों की सभा में नाचना सनातन नहीं है !
जो राधा वक्त आने पर काली न बन सके तो धिक्कार है !
कथावाचक काली का अपमान करे !
कहे ?
काली तो राधा के चरणों की धूल भी नहीं ?
तो व्यास पीठ पर बैठे नामर्दों
काली को किसी के चरणों की धूल बनाने की सामर्थ्य किस में है ?
यह तो बताओ?
काली चरण वंदना नहीं करती !
काली तो सबके इष्ट ख़ुद महाकाल की छाती पर पैर रख चढ़ जाती है !
अपना तो क्या राक्षस का भी रक्त भूमि पर नहीं गिरने देती !
रास का समय ख़त्म हुए हज़ार साल बीत चुके हैं !
तांडव का दिन है !
सरकार और जिहादियों से भीख मत माँगो !
आत्मबल पैदा करो !
इष्ट बदलो
शब्द गाने वाले संत नानक के अनुयायी पाँचवी पीढ़ी में पीरी के साथ मीरी ले आये !
तुम कब जागोगे !
तुम्हारे कथाकार तुम्हारे धन की लालसा में नपुंसकता को प्राप्त हो गये !
उनका लक्ष्य सनातन की रक्षा नहीं है !
वास्तविक व्यास लंगोट में घूमता था
संजय को दिव्यदृष्टि देता था !
ये वातानुकूलित कक्ष में शाल दुशाले ओढ़ कर धर्म के नाम पर अफ़ीम खिलाने वाले
न कुमार हैं ? न विश्वास के योग्य हैं
अगर इन्होंने अंजनी जैसी माँ का दूध पिया होता तो
अब तक हज़ारों कथावाचक पहलगाम मे कथा की घोषणा करते!
जिहादी लंका में आग लगाते !
यहाँ तो कोई सागर भी नहीं है
न कोई सेतु बनाना है !
तब इनको और इनकी वाणी को लकवा क्यों मार गया !
ख़ुद से रामायण पढ़ते गीता पढ़ते !
तो सौ करोड़ में से कोई तो पूछता
पहलगाम में पड़ा यह लाशों का ढेर किनका है ?
कोई तो प्रतिज्ञा करता कि
जब तक पृथ्वी को राक्षस विहीन नहीं कर दूँगा
चैन से नहीं बैठूँगा।
योद्धा भाव से लड़ना इन कथावाचकों के बस का नहीं है !
यह तुम्हें नचाते रहेंगे !
और तुम नाचते नाचते काल के मुख में जाते रहोगे !
शास्त्र अलमारी में पडे पड़े रोते रहेंगे
पढ़ते रहो देवदत्त पटनायक और अमीष त्रिपाठी अंग्रेज़ी भाषा में
गाते रहो मृत्यु शरणम गच्छामि
मृत्यु शरणम गच्छामि
मृत्यु शरणम गच्छामि.....
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