दक्षिण विजय के बिना भाजपा का 370 सीटें जीतने का सपना पूरा नहीं होगा। जिसके लिए पीएम मोदी ने कमर कस ली है। केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी लगातार दो बार चुनाव जीत चुकी है और अब साल 2024 में तीसरे चुनाव का समय आ चुका है। पिछले दो दो चुनाव पर गौर किया जाए, तो भाजपा ने उत्तर भारत के राज्यों में अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। पिछले दो चुनावों से उत्तर के राज्यों से उसे भारी जनसमर्थन मिल रहा है जो कि अपनी अधिकतम सीमा पर है।
उत्तर भारत में इससे ज्यादा सीटें बढ़ाने की गुंजाइश बहुत कम बची है। पिछली बार यानी साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटें जीती थीं और इस बार पीएम मोदी ने 370 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत के दक्षिणी राज्यों पर फोकस करना भाजपा के लिए बेहद जरुरी है। यही वजह है कि आने वाले दो महीनों में पीएम मोदी ने भारत के दक्षिणी हिस्से में रैली करने की जबरदस्त तैयारी कर रखी है। प्रधानमंत्री ने इस बार दक्षिण भारत की 129 लोकसभा सीटों में 62 से 65 सीटें जीतने के लिए कोशिश शुरु कर दी है। पीएम मोदी पिछले ढ़ाई महीने में 27 दिन दक्षिण में ही घूमते रहे हैं लेकिन उनका काम अभी पूरा नहीं हुआ है। वह दक्षिण के राज्यों में 30-35 चुनावी सभा और रोड शो की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह भी दक्षिण के पांच राज्यों में प्रचार करेंगे।
पीएम मोदी अभी तक 3 बार कर्नाटक का दौरा कर चुके हैं। यहां वह और छह बार जाएंगे। प्रधानमंत्री पिछले 6 महीने में पांच बार तमिलनाडु में रैली और रोड शो कर चुके हैं। यहां उनकी प्लानिंग अभी चार और जनसभा करने की है। 25 मार्च को पीएम मोदी ने एक रैली कोयंबटूर में की।

मोदी आंध्रप्रदेश में तीन कार्यक्रम कर चुके हैं। जबकि 3 और जनसभा वह करने वाले हैं। पिछले दो महीने में तेलंगाना में चार सभा को पीएम नरेंद्र मोदी संबोधित कर चुके हैं। लेकिन अभी तेलंगाना में बीजेपी भाजपा उनकी 3 और जनसभा की तैयारी कर रही है। इसी तरह केरल में भी प्रधानमंत्री की विशेष नजर है। जहां वह पलक्कड में रैली कर चुके हैं। अपनी सीटें बढ़ाने के लिए दक्षिणी राज्यों पर फोकस करना भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। क्योंकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में लोकसभा की 129 सीटें हैं जिसमें से कर्नाटक की 28 सीटों में से भाजपा के पास 17 सीटे हैं। लेकिन तमिलनाडु की 39 सीटों में से भाजपा के मात्र 1 सीट जीत पाई है। वहीं केरल की 20 लोकसभा सीटों में से भाजपा को एक भी नहीं मिली। आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 25 सीटें हैं। जिसमें से भाजपा केवल दो जीत पाई। तेलंगाना नें लोकसभा की 17 सीटें हैं। जिसमें से भाजपा 4 सीटों पर काबिज है। इस तरह देखा जाए। तो दक्षिण भारत की 129 सीटों में से भाजपा के पास मात्र 24 सीटें ही हैं। इन हालातों में अगर भाजपा को अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर 370 तक ले जानी है तो उसे भारत के दक्षिणी राज्यों पर विशेष फोकस करना पड़ेगा। इस सत्य को पीएम मोदी भी जानते हैं इसलिए भाजपा दक्षिण के राज्यों के लिए ज्यादा ताकत झोंक रही है। अगर दक्षिण से भाजपा को 60 से 65 सीटें आ जाती हैं तो वह आसानी से 370 सीटें जीतने का अपना लक्ष्य हासिल कर लेगी।
उदय इंडिया ब्यूरो
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