ओडिशा में आश्चर्यजनक विधानसभा और लोकसभा चुनाव परिणाम ने भाजपा को सत्ता में ला दिया। खुद भाजपा को भी ऐसी अद्भुत उपलब्धि की उम्मीद नहीं थी। हालांकि भाजपा एक कैडर-आधारित पार्टी है, लेकिन ओडिशा में उसकी संगठनात्मक संरचना बीजद जितनी मजबूत नहीं थी। भाजपा के प्रति प्रचंड जनादेश से संकेत मिलता है कि ओडिशा के आम लोगों की इच्छा थी कि राज्य में भाजपा सरकार बने और सत्तारूढ़ बीजद को सबक सिखाया जाए। यह जनादेश स्पष्ट रूप से साबित करता है कि बीजद के खिलाफ एक बड़ी सत्ता-विरोधी लहर चल रही थी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि नवीन बाबू सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई योजनाएं लागू कीं, जिसमें कई गरीब समर्थक और नारी कल्याण की योजनाएं भी थीं। नवीन सरकार द्वारा दी गई मुफ्त सुविधाएँ सरकार और गरीब लोगों दोनों के लिए फायदेमंद थी। लेकिन नौकरशाही के प्रभुत्व के कारण बीजद के अंदर भारी आंतरिक कलह पैदा हो गई थी, क्योंकि बीजद के निर्वाचित प्रतिनिधियों की राज्य प्रशासन और पार्टी के अंदर कोई सुन नहीं रहा था। नवीन बाबू अपने स्वास्थ्य या दूसरे कारणों से 5T सचिव वीके पांडियन पर बहुत अधिक भरोसा करते थे। जिसकी वजह से पांडियन ने सरकार और पार्टी को पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया था। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि वीके पांडियन बेहद सक्षम अधिकारी थे, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों ने नवीन पटनायक के नाम पर वोट दिया था। इस बात का उत्तर सिर्फ और सिर्फ नवीन बाबू के पास है कि क्यों वह पूरी तरह से केवल एक ही अधिकारी पर निर्भर हुए और क्यों इस महत्वपूर्ण स्थान के लिए नवीन बाबू ने बीजद के कैडरों में से किसी का चुनाव नहीं किया। लेकिन हम ओडिशा में बीजेडी सरकार के पतन के लिए सिर्फ वीके पांडियन को दोषी नहीं ठहरा सकते, और मेरे विचार से वीके पांडियन ने जो भी गलतियाँ कीं, उसके लिए नवीन बाबू भी उतने ही जिम्मेदार हैं। अंततः पांडियन सिंड्रोम भी ओडिशा में बीजेडी सरकार के पतन के कारणों में शुमार रहा। भाजपा को ओडिशा में अपने विशाल जनादेश के लिए वीके पांडियन का भी आभारी होना चाहिए। हालाँकि यह भी सच है कि ओडिशा के राजनीतिक माहौल में एक मजबूत मोदी लहर थी। लोग ओडिशा में बेहतर डबल इंजन सरकार के लिए राजनीतिक बदलाव चाहते थे। जो कि उन्होंने किया भी।
अब उन चुनौतियों पर चर्चा करते हैं, जो कि नव-स्थापित भाजपा सरकार के सामने आने वाली हैं। पार्टी ने पिछड़े जिले क्योंझर से आदिवासी समुदाय के एक जमीनी नेता मोहन माझी को नियुक्त किया, जो राज्य विधानसभा के लिए चार बार चुने गए थे। उन्होंने भाजपा का प्रतिनिधित्व करते हुए एक प्रभावी विपक्षी नेता के रूप में सदन के पटल पर कई बार अपनी साख साबित की है। मोहन माझी एक जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं और सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और आम आदमी के लिए सुलभ हैं। पहले दिन से ही मोहन माझी ने साफ कहा है कि यह आम जनता की सरकार है। यह एक अच्छी शुरुआत है और अब मोहन माझी को विभिन्न नीतिगत मुद्दों और राज्य प्रशासन पर खुद को साबित करना होगा। उनका मुकाबला मजबूत और अनुभवी विपक्ष बीजेडी से होगा। ओडिशा के लोग प्रतिदिन मोहन माझी की तुलना नवीन पटनायक की स्वच्छ छवि और व्यक्तित्व से करेंगे। नई भाजपा सरकार को राज्य के विकास पथ को बनाए रखते हुए लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की जरूरत है, जिसे पिछली सरकार ने सफलतापूर्वक प्रबंधित करने में सफलता हासिल की थी। ओडिशा के लोग जीवन की गुणवत्ता, बेरोजगारी के मुद्दों, औद्योगिक विकास, कृषि और शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार की आशा रखते हैं। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा में राज्य सरकार के कामकाज पर बारीकी से नजर रखेंगे।

दीपक कुमार रथ
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