आम आदमी पार्टी का संकट टलने का नाम नहीं ले रहा। दिल्ली नगर में उसकी सरकार है और पार्टी के सिरमौर अरविन्द केजरीवाल ने वहाँ मुख्यमंत्री का पद सम्भाला हुआ है। विधान सभा में भाजपा के आठ सदस्यों को छोड़ कर बाक़ी सब सदस्य केजरीवाल के ही हैं। लेकिन वे यदा कदा विधान सभा में अपने प्रति विश्वास मत का प्रस्ताव पारित करवाते हैं। यह भी शायद पार्टी की कार्यप्रणाली का हिस्सा ही हो। ऐसे मौक़े पर वे विधिवत रूप से घोषणा करते हैं कि भाजपा उनकी सरकार गिराना चाहती है। दिल्ली विधान सभा में कुल 70 सदस्य हैं। उनमें से आठ भाजपा के और 62 आम आदमी पार्टी के हैं। कांग्रेस का कोई सदस्य विधान सभा में नहीं है।
इस प्रकार आम आदमी पार्टी को विधान सभा में जरुरत से भी कहीं ज्यादा बहुमत है तो आख़िर सरकार कैसे गिराई जा सकती है ? इसका उत्तर भी केजरीवाल के पास है। उनका कहना है कि उनके विधायकों को भाजपा के कुछ लोगों ने सम्पर्क कर कहा था कि पाला बदल लो तो पच्चीस करोड़ दिए जाएँगे। पहले वे इस प्रकार की कथा सार्वजनिक रुप से सुनाते थे। आरोप सचमुच गंभीर थे ,इसलिए इसकी गहन जाँच करना जरुरी था ताकि राजनीति में शुचिता बनी रहे। इसलिए इस आरोप पर एफ आई आर दर्ज हो गई। लेकिन पुलिस बार-बार केजरीवाल का बयान क्रमबद्ध करने के लिए जाती है ताकि पता चले भाजपा के किस आदमी ने आप के किस किस विधायक को पच्चीस करोड़ रुपए की पेशकश की। उसके बाद उसे पकड़ कर कचहरी से सजा दिलवाई जाए। लेकिन इस पर केजरीवाल भागते हैं। वे पुलिस के सामने नहीं आते। बयान देने की बात को बहुत दूर की बात है। लेकिन जब केस दर्ज हो गया है तो जाँच तो होगी ताकि भाजपा के इस प्रकार के व्यक्ति को सजा मिले। लेकिन केजरीवाल कुछ बताने की बात तो दूर पुलिस के सामने आने से भी कतराते हैं। केजरीवाल एक केस से भागते हैं तो दूसरा उससे भी ज्यादा तेज़ी से उनकी ओर आ रहा है। वह है दिल्ली की आबकारी नीति में से निकला हुआ शराब घोटाला। यह घोटाला केजरीवाल सरकार के तीन लोगों को खा चुका है। मंत्री सत्येन्द्र जैन , उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह। शराब घोटाले ने इतना ज़ोर से जकड़ा है कि ज़मानत के लिए हकलान हो रहे हैं। केजरीवाल को भ्रम था कि यदि मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया तो दिल्ली उबल पड़ेगी। लेकिन दिल्ली में पत्ता तक नहीं हिला।
शराब घोटाले में जिन आरोपों व सबूतों की मार से केजरीवाल के तीन तीन ‘लफटैन’ जेल में हैं , वही सबूत बार बार केजरीवाल की ओर भी जा रहे हैं। केजरीवाल को ईडी बार-बार बुला रही है कि इन सब प्रश्नों के उत्तर दो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। लेकिन केजरीवाल जानते हैं मामला दूध का नहीं शराब का है। शराब के चक्कर में फँसा आदमी जल्दी छूट नहीं पाता। इसलिए वे हािज़र नहीं हो रहे और ईडी को बता रहे हैं कि मैं राजनीति में बहुत व्यस्त हूँ , इसलिए आ नहीं पाता। लेकिन वे अच्छी तरह जानते हैं कि शराब की राजनीति उनके गले का फंदा बन सकती है। इसलिए कभी अपने कार्यकर्ताओं को पूछते रहते हैं यदि मैं जेल चला गया तो क्या मुझे मुख्यमंत्री से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए या जेल से ही सरकार चलानी चाहिए ? लेकिन असली चिन्ता और भी है। यदि केजरीवाल जेल जाते हैं तो क्या मनीष सिसोदिया की तरह दिल्ली में सन्नाटा ही रहेगा या फिर दिल्ली के लोग सड़कों पर निकलेंगे ? केजरीवाल के दुर्भाग्य से हवा और सर्वे यही बताते हैं कि दिल्ली के लोग अपने काम काज में ही व्यस्त रहेंगे। ज्यादा से ज्यादा टी.वी पर ख़बर देख भर लेंगे। लेकिन शराब घोटाला , केजरीवाल की तरफ़ एक-एक सधे क़दम से आगे बढ़ता जा रहा है। कहा भी है बचपन की ग़लत आदतें बुढ़ापे में बहुत तंग करती हैं। राजनीति का श्री गणेश करते वक्त ही की गई बड़ी ग़लतियाँ गले की फाँस बनती जा रही हैं। लालू और ओम प्रकाश चौटाला का उदाहरण रात भर सोने नहीं देता।
ऐसे वक्त में पंजाब ही गाड़ी पार लगा सकता था। क़ानून से तो बचा नहीं सकता लेकिन जब क़ानून का फंदा गले में पड़े तो हाहाकार तो मचा ही सकता है। केजरीवाल को उस वक्त इसी हाहाकार की जरुरत है। ताकि दुनिया भर का मीडिया लिखे कि क़ानून की मांद में केजरीवाल के घुसते ही दिल्ली की जनता सड़कों पर उतर आई। अब केजरीवाल को दिल्ली की जनता पर भरोसा नहीं रहा। इसलिए यह भी चर्चा हो रही है कि भगवन्त मान ने जनता ले कर आने का मोर्चा सम्भाला है। मान रोज़ मुँह बिगाड़ बिगाड़ कर चिल्ला रहे हैं , सरकार किसानों को दिल्ली जाने क्यों नहीं देती। ये किसान वहाँ जाकर शान्ति पूर्वक प्रदर्शन ही तो करना चाहते हैं जो इन का लोकतांत्रिक अधिकार है। किसानों की माँगों पर तो सरकार बातचीत कर ही रही है। उसमें भगवन्त मान भी बैठे होते हैं। लेकिन इसके बावजूद भगवन्त मान किसानों को दिल्ली क्यों भेजना चाहते हैं ? क्या इसलिए कि यदि क़ानून, शराब घोटाले को नापता हुआ केजरीवाल तक पहुँच जाए तो किसान दिल्ली में हल्ला करें कि क़ानून द्वारा केजरीवाल का स्पर्श कर लेने से लोकतन्त्र की हत्या हो गई है। इस हत्या पर देश की जनता दिल्ली की सड़कों पर उतर आई है। बेचारे भगवन्त मान की ड्यूटी पार्टी ने दिल्ली की सड़कों पर ‘देश की जनता’ को उतारने की लगाई है। इसलिए वे रोज़ किसानों को ललकारते हैं दिल्ली जाने के लिए। चिन्ता मत करो। चोट वग़ैरह लग जाए तो पंजाब सरकार सारा ख़र्च उठाएगी। लेकिन किसान को हर हालत में दिल्ली जाना ही है। केजरीवाल की राजनीति संकट में है। उसे शराब घोटाला पी रहा है। भगवन्त मान को शराब घोटाले को रास्ते में रोकना है ताकि वह केजरीवाल तक न पहुँच सके। इसके लिए लाख-दो लाख लोगों की जरुरत है ताकि दुनिया देखे सारा हिन्दुस्तान केजरीवाल के साथ है।
इस बार तो केजरीवाल ने न्यायालय को गुज़ारिश की कि मैं विधान सभा में विश्वास मत का सामना कर रहा हूँ , इसलिए हाज़िर नहीं हो सकता लेकिन अगली तारीख़ को खुद हाज़िर हो जाऊँगा। वैसे भी अब तक भगवन्त मान लाख-दो लाख लोग दिल्ली में ला नहीं सके थे और अब उसकी सम्भावना भी नहीं लग रही थी। लेकिन क़ानून बिल्कुल गर्दन तक आ पहुँचा था। चिन्ता बढ़ने लगी। िगरफ्तारी हो तो हो लेकिन किसी गन्दे काम के कारण न हो तो उसका राजनीतिक लाभ मिलने की सम्भावना हो सकती है। शायद अब तक केजरीवाल भी समझ गए थे कि शराब घोटाले में ‘अन्दर जाना’ भलेमानुसों का काम नहीं है। इसलिए किसी न किसी तरीक़े से अपनी सम्भावित गिरफ्तारी का कोई राजनैतिक लिहाज़ से सम्मानजनक कारण दिखाई देना चाहिए। इसी चिन्ता के चलते अब आम आदमी पार्टी ने कहना शुरु किया है कि जब से केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ चुनावी समझौता किया है तब से भाजपा बुरी तरह डर गई है। उसे डर लग रहा है कि अब केजरीवाल की पार्टी की जीत को कोई ताक़त नहीं रोक सकती। इसलिए भाजपा केजरीवाल को धमकियाँ दे रही है कि कांग्रेस से समझौता तुरन्त तोड़ो नहीं तो आपको बन्दी बना लिया जाएगा। केजरीवाल के ‘लफटैन’ ढोल पीट रहे हैं कि केजरीवाल जेल चले जाएँगे लेकिन कांग्रेस से समझौता नहीं तोड़ेंगे। यानि अब केजरीवाल शराब घोटाले की जैकेट के उपर ‘समझौते की चादर पहन कर जेल जाएँगे ताकि जनता को शराब घोटाले की जैकेट नज़र न आए।
केजरीवाल के माफ़ीनामे- केजरीवाल की एक दूसरी आदत उन्हें बार बार जेल की ओर खींचती है। वह आदत है झूठ बोलने की। पंजाब में चुनाव के दौरान उन्होंने तूफ़ान तोलना शुरु कर दिया कि विक्रम सिंह मजीठिया नाम के एक सज्जन ड्रग्स का धन्धा करते हैं और उनका इस धन्धे में लगे अन्तरराष्ट्रीय गिरोहों से रिश्ता है। मजीठिया ने केजरीवाल को आगाह भी किया कि बिना सबूत के इस प्रकार का झूठ न बोलें। केजरीवाल और उग्र हो गए। एलान कर दिया कि सरकार बनते ही पहला काम मजीठिया को जेल भेजने का करेंगे। मजीठिया कचहरी चले गए और केजरीवाल ने माफ़ी माँग कर जान बचाई। ऐसे ही भ्रष्टाचार के आरोप उन्होंने भाजपा के नेता अरुण जेटली पर लगाए थे। जेटली ने भी केजरीवाल को कचहरी में घसीट लिया। लेकिन बाद में माफ़ीनामा लिख कर भेज दिया , केजरीवाल के माफीनामों की फ़ेहरिस्त लम्बी है। वे कपिल सिब्बल और उनके बेटों पर भी आरोप लगाने के सिलसिले में माफ़ी माँग चुके हैं। नितिन गड़करी के आगे भी हाथ जोड़ चुके हैं। अब एक और मानहानि मामले में केजरीवाल उच्चतम न्यायालय में कह रहे हैं कि मुझसे ग़लती हो गई है। इससे तो यही लगता है कि केजरीवाल को झूठ बोलने की आदत है। लेकिन वह इसलिए नहीं छूटती कि उन्हें इतने मामलों के बाद यह भी अनुभव हो गया है कि माफ़ी माँग लेने से जेल जाने से बचा जा सकता है। इसलिए झूठ बोलने का रास्ता निरापद है।
लगता है उन्होंने इसी अनुभव के आधार पर शराब घोटाले को तौलना शुरु कर दिया। उन्होंने सोचा मानहानि वाले मामले चुनावी लाभ देते हैं लेकिन सजा नहीं देते। माफ़ीनामा की छोटी से ‘दवाई की गोली’ सजा से बचा लेती है। इसलिए शराब के मामले में भी ‘नीतिगत’ फ़ैसले की चाशनी से बचा जा सकता है। लेकिन इस बार केजरीवाल अपनी तमाम चालाकियों के वाबजूद धोखा खा गए लगते हैं। उनके तमाम साथी एक एक कर जेल जा रहे हैं। यही डर अब केजरीवाल को डरा रहा है। लेकिन यदि जेल जाना ही पड़ा तो कम से कम आम लोगों में यह धारणा नहीं बननी चाहिए कि वे शराब के मामले में जेल गए हैं। लगना ऐसे चाहिए कि वे राजनीतिक कारणों से जेल गए हैं। इसलिए चारों ओर से ‘हुंआ हुंआ’ की आवाज़ें आ रही हैं। हमें कहा जा रहा है कांग्रेस से गठबन्धन मत करो नहीं तो जेल में डाल देंगे। फिर केजरीवाल की आवाज गूँजती है। “मैं जेल चला जाऊँगा लेकिन कांग्रेस से समझौता नहीं तोड़ूँगा।” नौटंकी बदस्तूर जारी है।

डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री
(लेखक हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं)
(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)
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