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केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में घी बिक्री की आड़ में लाखों रुपए के गबन का आरोप, HC ने जांच के आदेश दिए

Allegations of embezzlement of lakhs of rupees under the guise of ghee sales at Kerala's famous Sabarimala temple, HC orders investigation

नई दिल्ली: केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सोने की लूट के बाद अब घी को लेकर गड़बड़झाले की बात सामने आई है। घी को लेकर हुए कथित घोटाले में लाखों रुपए के गबन के आरोप हैं। इस मामले में केरल हाई कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

आरोप हैं कि सिर्फ दो महीने की अवधि में मंदिर में घी की बिक्री की आड़ में तकरीबन 35 लाख रुपये का गबन कर लिया गया। इस गड़बड़ी की भनक सबसे पहले मंदिर के विजिलेंस अधिकारी को लगी, इंटरनल ऑडिट हुआ तो घोटाले की चौंका देने वाली जानकारी सामने आई और इस सिलसिले में त्रावणकोर देवसस्वोम बोर्ड के काउंटर इंचार्ज सुनील पोट्टी को सस्पेंड भी कर दिया गया। 

अब हाईकोर्ट ने मंदिर के विजिलेंस कमिश्नर की इस घोटाले के सिलसिले में दायर रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन विभाग को इस पूरे मामले की तह तक जाने और एक महीने के अंदर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिये हैं।

क्या है घी का गणित?

भगवान अय्यप्पा के दर्शन के लिए सबरीमाला जाने वाले सभी भक्त भगवान को नारियल और घी चढ़ाते हैं। भगवान को चढ़ाए गए इस घी को दोबारा भक्तों को प्रसाद के रूप में बेचा जाता है, जिसे "आथिया सिष्टम" प्रसाद कहा जाता है, TDB के लिए राजस्व का ये एक बहुत बड़ा माध्यम है।

TDB की ओर से घी को 100 ml के पैकेट में पैक करके उसे काउंटर तक पहुंचाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, इस प्रक्रिया में सारी सामग्री TDB की ही होती है, कॉन्ट्रेक्टर को हर एक पैकेट बनाने के लिए 20 पैसे मिलते हैं, TDB ने 100 ml घी की कीमत 100 रुपये निर्धारित की है।

कैसे किया गया गबन?

जांच में पता चला कि 17 नवंबर, 2025 से 26 दिसंबर, 2025 के बीच ठेकेदार ने 100 ml के 3,52,050 पैकेट पैक किए थे, और वे पैकेट बिक्री के लिए मंदिर के स्पेशल ऑफिसर को सौंपे गए थे। 3,52,050 पैकेट में से, अलग-अलग दिनों में मरामाथ बिल्डिंग में काउंटर से लगभग 89,300 पैकेट बेचे गए।

89,300 पैकेट में से 143 पैकेट खराब पाए गए, और 27 दिसंबर, 2025 तक काउंटर में बचे हुए पैकेट की कुल संख्या सिर्फ़ 28 थी। खराब पैकेट और काउंटर में बचे हुए पैकेट को घटाने के बाद, 89,129 पैकेट की बिक्री से मिली रकम  बोर्ड को जमा की जानी चाहिए थी। हालांकि, काउंटर के इंचार्ज कर्मचारियों ने सिर्फ़ 75,450 पैकेट के पैसे ही जमा किए।

इस तरह रिकॉर्ड से पता चलता है कि 13,679 पैकेट की कीमत, जो 13,67,900 रुपये है, जमा नहीं की गई है। कोर्ट ने कहा कि इतने कम समय में इतने कम पैसे जमा करने की का मकसद चिंताजनक है और इसे सिर्फ़ अकाउंटिंग की गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसीलिए कोर्ट ने अब इसकी विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं।

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