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AI-आधारित सटीक सिंचाई : कार्यप्रणाली, अवसर और चुनौतियां

AI-based precision irrigation Methodology, Opportunities and Challenges

आज विश्व के विभिन्न देश जल संकट के विभिन्न स्तरों की सीमा पर खड़े हुए है और अब कृषि क्षेत्र भी जल संकट से अछूता नहीं रहा। बैश्विक स्तर पर, सिंचाई पद्धति मीठे पानी के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। अतः जलसंकट की इस स्थिति को देखते हुए एक अधिक प्रभावी सिंचाई पद्धति की आवश्यकता है, जो फसल की गुणवत्ता एवं उपज को बरकरार रखते हुए पानी की उच्च उपयोगिता को सुनिश्चित करती हो। पूर्व शोध दर्शाते है कि, विशिष्ट सिंचाई अनुप्रयोगों के माध्यम से लगभग 25% पानी की बचत की जा सकती है। जिनमे से सटीक सिंचाई पद्धति एक उन्नत तकनीक के तौर पर सामने आई है। जिसके माध्यम से प्रत्येक पौधे अथवा खेत के किसी हस्से की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप, सही समय पर और सही स्थान पर पानी की एक सुनिश्चित मात्रा का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। हालाँकि, सटीक सिंचाई के संभावित लाभों का अभी भी पूरी तरह से दोहन करने के लिए, पूरक प्रौद्योगिकियों का एकीकरण और क्रियान्वयन अनिवार्य है। ये पद्धतियां मृदा कारको, मौसम की स्थिति और सिंचाई-जल के गतिविज्ञान के आधार पर स्थानिक तथा समय विषयक पानी की आवश्यकता पर विचार करती है। क्षेत्र आधारित पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों में सिंचाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है, जबकि सटीक सिंचाई पद्धतियां क्षेत्र में उपस्थित नमी की परिवर्तनशीलता को ध्यान में रखती है। यह सिचाई पद्धति मिट्टी-पौधे वातावरण कारकों की प्रभावी ढंग से निगरानी करके, किसान भाइयों को जरूरत के आधार पर सिंचाई सम्बंधित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। जिससे जल संरक्षण के साथ साथ फसल की पैदावार में वृद्धि होती है।

सटीक सिंचाई प्रबंधन: सेंसर एवं आईओटी पटेल एट अल., 2023 के शोध अनुसार, सेंसर और आईओटी-आधारित स्मार्ट सिस्टम, विशेष रूप से, वास्तविक समय में सिंचाई आवश्यकताओं की भविष्यवाणी करने के लिए एक भरोसेमंद तकनीक है। कुशल सिंचाई प्रणाली में, मिट्टी- पौधे-वातावरण के कई कारकों को वास्तविक समय पर मापा जाता है ताकि न्यूनतम जल हानि के साथ-साथ उच्च जल उत्पादकता प्राप्त की जा सके। सेंसर उपकरण, इन संबंधित कारकों को उनकी सटीकता और परिशुद्धता के साथ एकत्र करते हैं। खेत में विभिन्न स्थानों पर लगाए गए तार या बेतार सेंसर नेटवर्क लगातार मिट्टी की नमी की निगरानी करते हैं, जिनके लिए उनमें उचित सटीकता वाले तथा कम लागत वाले कैपेसिटेंस-आधारित सेंसर का उपयोग होता है। हालांकि अधिक सटीकता प्राप्त करने के लिए टाइम डोमेन रिफ्लेक्टोमेट्री (टीडीआर) सेंसर का उपयोग किया जाता है। मौसम सेंसर, मौसम के कारकों जैसे तापमान, सापेक्षिक आर्द्रता, धूप के घंटे, हवा की गति आदि को मापने का कार्य करते हैं। वास्तविक समय पर मौसम निगरानी का मुख्य उद्देश्य खेत में होने वाले वाष्पीकरण-उत्सर्जन (ईटी) का अनुमान लगाना है, जिससे उचित समय पर पानी की कमी को पूरा किया जा सके। इसी तरह, पौधों का तापमान और अन्य संबंधित कारकों का मापन (सामान्यीकृत अंतर वनस्पति सूचकांक, पत्ती क्षेत्र सूचकांक, स्टोमेटल चालन आदि) संबंधित सेंसर नेटवर्क (रास्पबेरी पाई कैमरा, मानव रहित एरियल वाहन, प्लांट कैनोपी इमेजर, पोरोमीटर आदि) द्वारा किया जाता हैं। इस एकत्रित डेटा को आईओटी प्रणाली के घटकों जैसे रास्पबेरी पाई, ऑरड्यूनो (Arduino) प्रोटोटाइप बोर्ड, जीएसएम नेटवर्क आदि के द्वारा वास्तविक समय में सर्वर पर प्रेषित किया जाता है। अबियोए एट अल., २०२०, के अनुसार सेंसर नेटवर्क और आईओटी प्रणालियाँ मिलकर सतत डेटा एकत्रीकरण, उसके संचारण और भंडारण को सक्षम बनाते हैं। इस प्रकार आईओटी युक्त सटीक सिंचाई पद्धति अधिक सटीकता एवं कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ स्वचालित रूप से संचालित होती रहती है।


सटीक सिंचाई: घटक सटीक सिंचाई पद्धति
जल के सटीक और कुशल अनुप्रयोग हेतु विभिन्न घटकों जैसे उन्नत सूचना प्रसारण तकनीक (सेंसर- आधारित फील्ड डेटा), स्मार्ट संचार (आईओटी आधारित) कार्यप्रणाली, स्मार्ट नियंत्रण प्रणाली (नियंत्रक और वितरक सटीक जानकारी का एकत्रीकरण आधारित जल आवंटन) और स्मार्ट प्रतिक्रिया (कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय समर्थन) को शामिल करती है। इनके बारे में विवरण निम्नानुसार हैं-


1- नमी मापने की इकाई-
यह इकाई मिट्टी की नमी के स्तर को मापने और लेखाजोखा रखने के लिए, मिट्टी में प्राथमिक निगरानी उपकरण के रूप में स्थापित की जाती है। सामान्यतः ये इकाईयां केन्द्रीय अथवा नेटवर्क आधारित सेंसर प्रणाली पर कार्य करती है। केन्द्रीय सेंसर आधारित नमी मापक इकाई खेत में केवल एक ही जगह से जानकारी एकत्रित करती है, जिस कारण, अगर खेत आकार में बड़ा हो तो मापन में त्रुटि की सम्भावना बढ़ जाती है। जबकि वहीं दूसरी ओर नेटवर्क आधारित सेंसर प्रणाली बड़े खेतों में नमी की स्थानिक विविधता के पकड़ने में सक्षम होती है और उच्चतर रूप से नमी की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्रदान करते है। हालाँकि, सेंसर की संख्या में वृद्धि से इसकी क्रय लागत बढ़ जाती है। मिट्टी में नमी की मात्रा को मापने के लिए नमी मापक जैसे टेन्सियोमीटर या कैपेसिटेंस सेंसर का उपयोग किया जाता है।


2 - मौसम निगरानी इकाई
स्थानीय मौसम की जानकारी के लिए रिकॉर्डिंग उपकरणों का उपयोग किया जाता है। ये तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और सौर विकिरण जैसे मौसम कारकों की निगरानी कर जानकारी प्रदान करते हैं। एकत्रित जानकारी का उपयोग मुख्यतः फसल/पौधों में पानी की आवश्यकता का पूर्वानुमान लगाने के लिए किया जाता है। यह जानकारी सिंचाई कार्यक्रम को समायोजित करने एवं सिंचाई की उचित मात्रा निर्धारित करने में मददगार होती है।


3 - सटीक संचार : आईओटी इकाई-
आईओटी-सक्षम प्रणाली में, आपस में जुड़े हुए सेंसर नेटवर्क का उपयोग किया जाता है। आईओटी प्रणाली नमी और मौसम सम्बंधित इकाइयों से एकत्र की गयी जानकारी को भंडार उपकरणों (स्थानीय डेटाबेस या क्लाउड सर्वर) तक पहुँचाने का कार्य करती है। इस प्रकार यह केंद्रीय डेटा भण्डारण एक "डेटाबेस" का निर्माण करता है, जिसका उपयोग उन्नत एल्गोरिदम और एनालिटिक्स (डेटा प्रबंधन और निर्णय समर्थन) प्रणाली द्वारा किया जाता है। इसके पश्चात "निर्णय समर्थन/विश्लेषण प्रणाली" द्वारा लिये गए निर्णय को "आईओटी प्रणाली" तदनुसार जल प्रबंधन एवं सटीक सिंचाई कार्यक्रम के लिए "केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली" को प्रेषित करता है। इसके अलावा, आईओटी के माध्यम से किसान भाई स्मार्टफोन और कंप्यूटर का उपयोग करके अपने सिंचाई कार्यों की दूर से निगरानी एवं नियंत्रण कर सकते हैं। अतः आईओटी प्रणालियाँ एक बेहतर जल दक्षता एवं फसल स्वास्थ्य हेतु सिंचाई रणनीतियों को अनुकूलित कर उन्हें और अधिक सक्षम बनाने में अहम् भूमिका निभा सकती हैं।


4 - सटीक नियंत्रण
सिंचाई नियंत्रक, सटीक सिंचाई प्रणालियों के लिए एक "केंद्रीय नियंत्रण इकाई" के रूप में कार्य करते हैं। वे सर्वर से प्राप्त सूचना निर्देश के आधार पर उचित स्थान पर, सही समय पर, उचित अवधि के लिए जल प्रवाह की दर को नियंत्रित कर सिंचाई कार्यों को स्वचालित रूप प्रदान करते है। इस प्रक्रिया में "पोजिशनिंग सिस्टम', "प्रवाह नियंत्रण" और "परिवर्तनीय- दर कुँहरे/उत्सर्जक" आदि उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।


5 - पोजिशनिंग सिस्टम -
ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) जैसी प्रौद्योगिकियां सिंचाई के स्थान की सटीक पहचान कर चित्रण करती हैं। इस जानकारी का उपयोग स्थानिक रूप से परिवर्तनीय सिंचाई योजनाएँ बनाने और लक्षित जल अनुप्रयोग को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

6 - प्रवाह नियंत्रण उपकरण
"प्रवाह नियंत्रण उपकरण" जैसे- वाल्व और प्रवाह मीटर, सामान्यतः "ऑरड्यूनो (Arduino) प्रणालियों" से जुड़े होते हैं। वे जल वितरण की मात्रा, समय एवं प्रवाह की मात्रा को नियंत्रित कर सिचाई प्रणाली को बेहतर प्रकार से संचालित करते है।


7 - परिवर्तनीय-दर फुहरे/उत्सर्जक
इन फैहरें और उत्सर्जकों में दाब-समायोज्य जल प्रवाह दर की विशिष्ट योग्यता होती है, जिसके द्वारा ये विशिष्ट स्थानिक आवश्यकताओं के अनुसार पानी वितरित कर पाते हैं। इस प्रकार ये सटीक जल अनुप्रयोग को नियंत्रित करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि खेत में प्रत्येक पौधे या भाग को आवश्यकता अनुसार उचित मात्रा में पानी मिले।


8 - सटीक प्रतिक्रिया : डेटा प्रबंधन और निर्णय समर्थन प्रणाली-
यह प्रणाली विभिन्न स्रोतों (सेंसर, मौसम स्टेशन, फसल मॉडल आदि) से डेटा समायोजित करने और विश्लेषण करने का कार्य करती है। एकत्र किए गए डेटा को एआई आधारित "निर्णय प्रणाली" के साथ क्रियान्वित कर तदानुसार सिंचाई रणनीतियां बनाई जाती है। इसके अलावा यह घटक आईओटी के माध्यम से किसान भाइयों को सिंचाई संचालन (सिंचाई कार्यक्रम, जल आवंटन और संसाधन अनुकूलन) के पर्यवेक्षण सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। जिससे उपयोगकर्ता नियत समय में प्राप्त सूचनाओं के आधार पर उचित सिंचाई करके पानी की बचत करने में भी सक्षम हो पाते हैं। सटीक सिंचाई प्रणालियाँ वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्रों एवं अन्य संस्थानों में सिंचाई दक्षता को बढ़ाने एवं आर्थिक लागत को कम करने के लिये अपनाई जा रही है, जिससे परिचालन दक्षता में वृद्धि देखी गयी है। अध्ययन में पाया गया है कि एआई और आईओटी से समायोजित सिंचाई प्रणालियों की भविष्य में अत्यधिक संभावनाएं छिपी हुई हैं। हालांकि इस क्षेत्र में कई चुनौतियां और बाधाएं भी हैं जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

सारांश: सटीक सिंचाई प्रबंधन प्रणाली में खेतों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करते हुए जल उपयोग दक्षता बढ़ाने की क्षमता है। बदलते मौसम के दौरान फसल में पानी की जरूरतों को प्रबंधित करने के लिए सटीक सिंचाई कार्यक्रम एक अच्छी रणनीति है। इस प्रकार ये प्रणालियां जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने में भी मदद करती हैं। प्रत्येक किसान या कृषि व्यवसाय स्वामी, क्षेत्र प्रबंधन पर अधिक जानकारीपूर्ण निर्णय लेने, नकारात्मक प्रभावों और जोखिमों को कम करने तथा संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करने के लिए "एआई एवं आएओटी-सक्षम" सटीक कृषि तकनीकों का उपयोग कर सकता है। हम जानते है कि जल एक सीमित संसाधन है। इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए सिंचाई जल उपयोग दक्षता में सुधार करने वाली प्रौद्योगिकियां जल को बचाने तथा पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अतः इन तथ्यों को देखते हुए हमारी कृषि-पद्धति में इनका प्रयोग अतिआवश्यक है।

(https://hindi.indiawaterportal.org)




अभिषेक पटेल, विकास पगारे, आनंद कुमार

(आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। उनसे संपादक व प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी विवाद की स्थिति में हमारा न्याय क्षेत्र दिल्ली होगा।)

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