5 जनवरी। एसजीव्हीपी गुरुकुल परिवार द्वारा आयोजित विद्यालय का भव्य वार्षिक समारोह “सद्विद्या ही समाधान” आज अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं उत्साह के साथ अहमदाबाद गुरूकुल में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम वार्षिक उत्सव के साथ भारतीय शिक्षा, परंपरा, संस्कार, सेवा और समग्र विकास की जीवंत अभिव्यक्ति है, जिसमें विद्या को जीवन की समस्त समस्याओं का समाधान बताया गया है।
इस पावन अवसर पर देश के विख्यात संत, शिक्षाविद्, नीति-निर्माता एवं समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को अलंकृत करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, आध्यात्मिक प्रमुख एवं अध्यक्ष, परमार्थ निकेतन, परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की प्रेरक उपस्थिति ने सभी अतिथियों, गुरूकुल के अनेकों विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों के लिए एक आध्यात्मिक एवं नैतिक संबल प्रदान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं मार्गदर्शन परम पूज्य श्री माधवप्रियदासजी स्वामी, संस्थापक अध्यक्ष एसजीव्हीपी गुरुकुल परिवार द्वारा किया गया। शिक्षा, संस्कार और सेवा को जीवन का आधार मानने वाले स्वामी जी के नेतृत्व में एसजीव्हीपी गुरुकुल परिवार भारतीय मूल्य-आधारित शिक्षा का एक सशक्त केंद्र है।
इस अवसर पर परम पूज्य पुरानी श्री बालकृष्णदासजी स्वामी, उपाध्यक्ष एसजीव्हीपी गुरुकुल परिवार की पावन उपस्थिति भी कार्यक्रम की गरिमा प्रदान की। उनका सान्निध्य विद्यार्थियों में अनुशासन, विनम्रता और सेवा-भाव को प्रोत्साहित करने वाला था।
इस अवसर पर श्री भक्त वत्सल स्वामी जी, श्री राम स्वामी जी, आचार्य रामप्रिय जी का अद्भुत सहयोग रहा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. श्री पद्युमन वाजाजी, माननीय शिक्षा मंत्री, गुजरात सरकार भी समारोह में उपस्थित थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके दूरदर्शी नेतृत्व एवं नीतिगत योगदान से राज्य में गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार-आधारित शिक्षा को नई दिशा मिली है। उनकी उपस्थिति से एसजीव्हीपी के शैक्षणिक प्रयासों को एक सशक्त सरकारी समर्थन और प्रेरणा प्राप्त होगी।
इसके अतिरिक्त, गुजरात के अनेक प्रख्यात बिल्डर्स, उद्योगपति एवं शिक्षाविद् भी इस भव्य समारोह में सम्मिलित हुये। उनका सहभाग समाज और शिक्षा के बीच सशक्त सेतु है जो भावी पीढ़ी के सर्वांगीण विकास हेतु सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को और सुदृढ़ करेगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि शिक्षा यदि केवल सूचना दे, पर संस्कार न दे, तो वह अधूरी है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि सर्वांगीण निर्माण करना है। सूचना बुद्धि को तेज कर सकती है, पर संस्कार ही जीवन को दिशा देते हैं। बिना संस्कार की शिक्षा व्यक्ति को कुशल तो बना सकती है, पर संवेदनशील नहीं। जब शिक्षा करुणा, सत्य, सेवा, अनुशासन और जिम्मेदारी का भाव न जगाए, तब वह समाज के लिए बोझ बन सकती है। सच्ची शिक्षा वही है जो ज्ञान के साथ नैतिकता, आत्मसंयम और राष्ट्रभाव का संचार करे। संस्कारयुक्त शिक्षा ही व्यक्ति को श्रेष्ठ मानव और समाज को सशक्त राष्ट्र बनाती है।“सद्विद्या ही समाधान” विषय पर आधारित यह वार्षिक समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक उपलब्धियों का उत्सव है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, नाट्य रूपांतरण, संगीत, नृत्य एवं वैदिक मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगे। साथ ही, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुशासन, सेवा एवं नेतृत्व में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
एसजीव्हीपी गुरुकुल परिवार का यह प्रयास स्पष्ट संदेश देता है कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, संस्कार, करुणा, पर्यावरण चेतना एवं राष्ट्र-निर्माण का सशक्त माध्यम है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ भौतिक प्रगति के साथ नैतिक मूल्यों का क्षरण देखने को मिलता है, वहीं एसजीव्हीपी जैसे संस्थान ‘सद्विद्या’ के माध्यम से समाज को संतुलित, संवेदनशील और संस्कारवान नागरिक प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं।
यह वार्षिक समारोह निश्चित रूप से विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा, अभिभावकों के लिए विश्वास और समाज के लिए आशा का संदेश लेकर आया है। एसजीव्हीपी गुरुकुल परिवार द्वारा आयोजित यह आयोजन शिक्षा, अध्यात्म और समाज सेवा के त्रिवेणी संगम के रूप में स्मरणीय रहेगा।
Leave Your Comment