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विकास पथ पर भारत का एक दशक

 A decade of India on the path of development

पिछले दशक में, भारत की विकास यात्रा ने न केवल भारतीयों बल्कि वैश्विक समुदाय का भी ध्यान आकर्षित किया है। एक विकासशील देश के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में दुनिया की विकसित अर्थव्यवस्थाओं को टक्कर देने तक की यात्रा चमत्कृत कर देने वाली है। इस परिवर्तन की वजह केंद्र में मोदी सरकार के नेतृत्व में शुरु की गई कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की एक श्रृंखला है, जिसने भारत के विकास यात्रा को पुनर्परिभाषित किया है। पिछले दशक में भारत में विकास के जरिए सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ देश भर में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई सरकारी योजनाओं को आकार दिया गया है। बुनियादी ढांचे का विकास, स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल सशक्तिकरण तक फैली इन योजनाओं ने पूरे देश का परिदृश्य बदलकर रख दिया है। भारतमाला परियोजना, सागरमाला परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) जैसी योजनाओं ने बुनियादी ढांचे के विकास, कनेक्टिविटी को बढ़ाने और सभी क्षेत्रों में समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है। बेहतरीन सड़क नेटवर्क, आधुनिक बंदरगाह और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी ने भारत के आर्थिक इंजन की प्रगति को तेज गति प्रदान की है।  प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) ने बैंक सुविधाओं से विहीन आबादी को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करके वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे न केवल प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की सुविधा मिली है और बचत को बढ़ावा मिला है, बल्कि कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को भी कम किया है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही हाथों तक पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) जैसी योजनाओं ने कौशल विकास और व्यवसायिक प्रशिक्षण, युवाओं को आजीविका के अवसरों के साथ सशक्त बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में कौशल के अंतर को पाटने पर ध्यान केंद्रित किया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों के साथ जोड़कर, पीएमकेवीवाई ने युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाया है और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है।

इसी कड़ी में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) और स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (एचडब्ल्यूसी) समेत आयुष्मान भारत योजना के जरिए  सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं। पीएमजेएवाई ने नागरिकों को उच्च चिकित्सा खर्चों से सुरक्षा प्रदान की है, जबकि एचडब्ल्यूसी जमीनी स्तर पर व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में बहुत मददगार रही हैं। स्वच्छ भारत अभियान और नमामि गंगे जैसी योजनाओं ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन योजनाओं के जरिए लाखों शौचालयों का निर्माण और गंगा नदी को पुनर्जीवित करने से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, साथ ही भारत की पर्यावरणीय विरासत को संरक्षण प्राप्त हुआ है। इसी तरह डिजिटल इंडिया के द्वारा डिजिटल प्रौद्योगिकियां बहुत तेजी से लोकप्रिय हुई हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी सेवाओं का नागरिकों तक पहुंच में सुधार आया है। डिजिटलिकरण ने न केवल प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है बल्कि पारदर्शिता को भी बढ़ावा दिया है। शासन में नागरिक भागीदारी बढ़ी है और डिजिटल रूप से सशक्त समाज का मार्ग प्रशस्त हुआ है, लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद चुनौतियाँ बनी हुई हैं। सरकारी तंत्र के व्यवहार में परिवर्तन को बनाए रखना, बुनियादी ढांचे के रखरखाव को सुनिश्चित करना, अपशिष्ट प्रबंधन को सुव्यव्यस्थित करना और स्वास्थ्य सेवाओं में देखभाल की गुणवत्ता को बढ़ाना कुछ ऐसे क्षेत्र है, जिनपर ध्यान दिए जाने की जरुरत है। जैसे-जैसे भारत अपनी विकास यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, इन योजनाओं के प्रभाव की वजह से यह कालखंड देश के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। पिछले दस सालों में मोदी सरकार ने ना केवल मजबूत विकास की नींव रखी है बल्कि करोड़ों नागरिकों के जीवन को सुधारने में भी सफलता हासिल की है। हालाँकि, मोदी सरकार की इन योजनाओं को पूरी क्षमता से लागू करके इसके लाभ को हाशिए पर खड़े आखिरी नागरिक तक पहुंचाने के लिए सरकारी तंत्र को जबरदस्त प्रतिबद्धता, नवाचार और सहयोग का परिचय देना होगा, ताकि भारत को वैश्विक मंच पर अधिक ऊंचाइयां प्रदान की जा सके।  भारत के विकास के इस दशक को दुनिया भर के देशों के लिए प्रेरणा और आशा की किरण के रूप में देखा जाना चाहिए, जो परिवर्तन लाने के दृढ़ संकल्प, दूरदर्शिता,  और समावेशी शासन की शक्ति को प्रदर्शित करता है।




दीपक कुमार रथ

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