भुवनेश्वर, 24 मार्च: मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार (24 मार्च) को विधानसभा में बताया कि वर्ष 2025 में ओडिशा में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में जहां 30,958 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 32,687 हो गई। कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस के प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि जून 2024 से 7 मार्च 2026 तक के 18 माह के दौरान राज्य में महिलाओं के खिलाफ 53,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए।हालांकि कुल मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन दुष्कर्म के मामलों में मामूली कमी देखी गई है। वर्ष 2024 में 3,054 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए थे, जो 2025 में घटकर 2,994 रह गए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दुष्कर्म, दुष्कर्म का प्रयास, सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्रीकरण, एसिड अटैक, दहेज हत्या, आत्महत्या और उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों में कमी आई है। वहीं छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी, ईव-टीजिंग और अपहरण के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रमुख अपराधों का विवरण (उक्त अवधि में)
दुष्कर्म: 4,713
दुष्कर्म का प्रयास: 212
दहेज उत्पीड़न: 7,504
गैर-दहेज उत्पीड़न: 8,814
दहेज हत्या: 270
अपहरण: 11,502
छेड़छाड़: 12,531
यौन उत्पीड़न: 1,869
सार्वजनिक निर्वस्त्रीकरण: 2,673
महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘महिला व बाल अपराध शाखा संवेदनशील मामलों की जांच से लेकर ट्रायल तक की निगरानी करता है। वर्ष 2025 में 199 मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें 94 मामलों में दोष सिद्ध हुआ है।
उन्होंने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ‘सुभद्रा सुरक्षा योजना’ के तहत महिला सुरक्षा ऐप, लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण, चाइल्ड-फ्रेंडली पुलिस स्टेशन, जन-जागरूकता अभियान, 1,000 बॉडी कैमरों की खरीद और अपराध-प्रवण क्षेत्रों में अतिरिक्त सीसीटीवी लगाने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर गश्त बढ़ाई गई है, साइबर पुलिस स्टेशन ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों पर नजर रख रहे हैं और ‘आमा पुलिस समिति’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को बिना भय शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
राज्य में फिलहाल 23 विशेष बाल यौन अपराध संरक्षण (पोक्सो) अदालतें, 7 नामित पोक्सो अदालतें और 46 महिला अदालतें संचालित हैं, जो महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे में सहायक हैं।
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