आज के समय में सबके अंदर एक अलग सी लालसा होती है किसी भी नए चीज या फिर किसी खास बात को जानने को लेकर। इन्हीं में से एक है- भ्रष्टाचार। यह एक ऐसा विषय है जिसे लेकर सभी के कान खड़े हो जाते हैं कि इस विषय पर क्या कुछ खास आया है। खास बात तो तब होती है जब सूची आती है कि कौन सा देश कितना भ्रष्ट है। कौन सा देश कितना भ्रष्ट है, इसे लेकर करप्शन परसेप्शन इंडेक्स की ओर से सूची जारी की जाती है। इसी कड़ी में हाल ही में CPI द्वारा 2024 में सबसे भ्रष्ट देश को लेकर सूची जारी की गई है। जारी की गई सूची के मुताबिक साल 2024 में कुल 180 देशों के नाम शामिल हैं। इस सूची में भारत 96वें पायदान पर पहुंच गया है। साल 2023 में भारत की रैंक 93 थी। भारत के पड़ोसी देशों में पाकिस्तान 135 नंबर पर और श्रीलंका 121 पर हैं, जबकि बांग्लादेश की रैंकिंग और भी नीचे 149 पर चली गई है। इस लिस्ट में चीन 76वें स्थान पर है। यानी की भारत पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के मुकाबले कई गुना सही है तो वहीं चीन के मुकाबले भारत अभी पीछे है। CPI द्वारा जारी की गई सूची में डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट राष्ट्र होने की सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर हैं।
कैसे तैयार होती है किसी देश की रैंकिंग
सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के धारणागत स्तरों के आधार पर यह इंडेक्स 180 देशों की रैंकिंग के लिए 0 से लेकर 100 के पैमाने का उपयोग करता है। इसके अनुसार ''शून्य'' का अर्थ अत्यधिक भ्रष्ट और ''100'' का तात्पर्य बिल्कुल साफ-सुथरा होता है। इस आधार पर वर्ष 2024 में भारत का कुल स्कोर 38 था, जबकि 2023 में यह 39 और 2022 में 40 था। बहरहाल, वर्ष 2023 में भारत की रैंक 93 थी और इस साल की रैंकिंग में भारत 96वें पायदान पर है।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक यानी CPI दुनिया में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली वैश्विक भ्रष्टाचार रैंकिंग है। यह मापता है कि विशेषज्ञों और व्यवसायियों के अनुसार प्रत्येक देश का सार्वजनिक क्षेत्र कितना भ्रष्ट है।
देश के अंकों की गणना कैसे की जाती है?
गणना में मुख्य रूप से प्रत्येक देश का स्कोर 13 विभिन्न भ्रष्टाचार सर्वेक्षणों और आकलनों से प्राप्त कम से कम 3 डेटा स्रोतों लिया जाता है। ये सोर्स विश्व बैंक और विश्व आर्थिक मंच सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा एकत्र किए जाते हैं। CPI की गणना करने की प्रक्रिया की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जारी की जाने वाली सूची यथासंभव मजबूत और सुसंगत है या नहीं।
किसी देश/क्षेत्र की रैंक और उसके स्कोर के बीच क्या अंतर है?
किसी देश का स्कोर 0-100 के पैमाने पर सार्वजनिक क्षेत्र के भ्रष्टाचार का अनुमानित स्तर है, जहां 0 का मतलब अत्यधिक भ्रष्ट है और 100 का मतलब जहां भ्रष्टाचार बिल्कुल नहीं है। किसी देश की रैंक सूचकांक में अन्य देशों के सापेक्ष उसकी स्थिति है। सूचकांक में शामिल देशों की संख्या बदलने पर ही रैंक बदल सकती है। इसलिए रैंक उस देश में भ्रष्टाचार के स्तर को बताने के मामले में स्कोर जितना महत्वपूर्ण नहीं है।
किसी देश के CPI स्कोर में छोटे उतार-चढ़ाव या बदलाव आमतौर पर महत्वपूर्ण नहीं होते हैं, यही कारण है कि हर साल परिणामों की पूरी लिस्ट में, उन सभी देशों को चिह्नित किया जाता है जिनमें "सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण" परिवर्तन आया है। किसी देश या क्षेत्र को सूचकांक में स्थान देने के लिए, इसे सीपीआई के 13 डेटा स्रोतों में से कम से कम 3 होना चाहिए। किसी देश की सूची से बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि वह देश भ्रष्टाचार-मुक्त है, केवल यह कि भ्रष्टाचार के स्तर को सटीक रूप से मापने के लिए पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है।

CPI किस प्रकार के भ्रष्टाचार को मापती है?
CPI में क्या शामिल नहीं है:
भ्रष्टाचार में आम तौर पर अवैध और जानबूझकर छिपी हुई गतिविधियां शामिल होती हैं, जो केवल घोटालों या अभियोजन के माध्यम से सामने आती हैं। इससे मापना बहुत कठिन हो जाता है।
CPI बनाने वाले स्रोत और सर्वेक्षण सावधानीपूर्वक डिजाइन और कैलिब्रेटेड प्रश्नावली पर आधारित होते हैं, जिनका उत्तर विशेषज्ञों और व्यवसायियों द्वारा दिया जाता है।
उदय इंडिया ब्यूरो
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