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बांग्लादेश में हिन्दुओ के नरसंहार, महिलाओं पर अत्याचार एवं संसद की चुप्पी के विरोध में काशी के हिन्दुओं का प्रदर्शन 

 People carry out protest march in Varanasi, over attacks on Hindus in Bangladesh on 14 august

नई दिल्ली -हिन्दू सैकड़ों साल से इस्लामिक आतंक एवं बर्बरता का शिकार रहा है, स्वतंत्रता के समय  एवं स्वतंत्रता के बाद भी आतंक एवं नरसंहार थमा नहीं। पश्चिमी पाकिस्तान एवं पूर्वी पाकिस्तान में देश की आज़ादी के समय लाखों हिन्दुओं का कत्ले आम किया गया, महिलाओं  की इज्जत लूटी गयी और छोटे बच्चों को भी नहीं बक्शा गया।  आजादी के बाद जहाँ मुस्लिमों को भारत देश में सम्मान एवं अधिकार मिला, मुस्लिम सम्पतियो का वक़्फ़ मिला, कश्मीर में विशेषाधिकार मिला एवं सरकारों का सरक्षण मिला। भारत मुस्लिम की जनसँख्या का प्रतिशत जहाँ तीन गुना हुआ वहीँ  इनकी अपनी सम्पत्तियों एवं वक़्फ़ सम्पतिया भी कई गुना हो गयी। लेकिन हिन्दू भारत पाकिस्तान एवं बांग्लादेश तीनो जगह प्रताड़ना एवं पलायन का शिकार हुआ।  कश्मीर, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में हिन्दुओ को नरसहार एवं अपमान भुगतना पड़ा। इस्लमिक कट्टरपन के शिकार हिन्दुओं का आज न्याय की अपेक्षा करना मुश्किल हो गया है।
बांग्लादेश में हो रहे हिन्दू नरसंहार एवं महिलाओं पर अत्याचार के समाचार भयावह एवं ह्रदय विदारक हैं।  इन घटनाओं ने आजादी एवं कश्मीर के  संस्मरणों को सजीव कर दिया है।  इन घटनाओं पर मुस्लिम, सेक्युलर एवं वामपंथी नेता एवं समर्थक आज पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।  हिन्दुओं के लिए आवाज उठाने वालों को सांप्रदायिक करार दिया जा रहा है।

काशी  के हिन्दू समाज द्वारा बांग्लादेश में जारी नरसंहार एवं महिलाओं पर हो रहे अत्याचार तथा भारत के तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं, सांसदों और विधायकों की चुप्पी के विरोध में एक प्रदर्शन एवं शांति मार्च का आयोजन दिनांक १४ अगस्त, बुधवार के दिन आयोजित किया गया ।  पातः ८ बजे निकले इस मार्च में लोगो की असुविधा एवं ट्रॅफिक्स का ध्यान रखा गया।  हिन्दू समाज द्वारा इस मार्च में हिन्दू नरसंहार के विरोध के अतिरिक्त हिन्दू समाज को एकजुट होने का आवाहन भी गया ।  ये शांति मार्च रथयात्रा से गुरुबाग, लक्सा होते हुए गोदौलिया जाकर समाप्त हुआ।  इस यात्रा में बांग्लादेश होश में आओ , ऐ भैया तोर जाती कौन- हिन्दू हिन्दू , हम है कौन और तुम हो कौन?- हिन्दू हिन्दू के नारे लगाकर विरोध एवं एकता का प्रदर्शन किया गया। आयोजन को समवेशी रखने एवं सामूजिक रखने के उद्देश्य से आयोजकों ने व्यक्तियों का नाम जाहिर करने से परहेज किया।  यात्रा में शामिल सदस्यों ने बताया की ये कार्यक्रम कशी के हिन्दुओ या हिन्दुस् ऑफ़ वाराणसी द्वारा  किया गया। 

 

 

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