सिद्धरमैय्या ने हिन्दुत्व पर फिर विष उगला

सिद्धरमैय्या ने हिन्दुत्व पर फिर विष उगला

चुनावी राज्य में मुख्यमंत्री की कठदलीली तो आज संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को ही नहीं, पंडित जवाहरलाल नेहरू तक को आतंकवादी ठहरा रही है

 

कर्नाटक में चुनाव की वेला करीब आते ही राजनीति नई निचाइयों को छूने लगी है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने हाल ही मेें भाजपा और आरएसएस को आतंकवादी संगठन और उसके कार्यकर्ताओं को आतंकवादी घोषित कर दिया। हालांकि फिर अपनी कायराना फितरत को जाहिर करते हुए सिद्धरमैया ने मीडिया पर ”बयान को तोड़मरोड़कर पेश’’ करने का आरोप मढ़ दिया और कहा कि मैंने तो आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं को सिर्फ ”उग्रवादी’’ कहा था, न कि ”आतंकवादी।’’ अब शायद हमें सिद्धरमैया से आतंकवादी और उग्रवादी का फर्क समझना होगा!

दरअसल राज्य के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील तटीय जिलों दक्षिण कन्नड़ और उत्तर कन्नड़ में आरएसएस/ भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के सिलसिले में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा में वाकयुद्ध जारी है। कांग्रेस सरकार ने हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या पर चुप्पी साध रखी है, जबकि भाजपा का कहना है कि हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) जैसे संदिग्ध और विवादास्पद संगठन के जेहादी तत्वों की करतूत है।

आरएसएस/ भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के ”राजनीतिकरण’’ की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए सिद्धरमैया ने गुस्से में आरएसएस और भाजपा को आतंकवादी संगठन और उसके कार्यकर्ताओं को आतंकवादी बता दिया। इसके खिलाफ भाजपा महासचिव शोभा करंदलाजे ने राज्य भर में ‘जेल भरो’ अभियान का ऐलान कर दिया। इसका नारा है ”नानु आरएसएस, नानु भाजपा, नन्नानु बंदिस्त’’ (मैं हूं आरएसएस, मैं हूं भाजपा, मुझे गिरफ्तार करो )। यह अभियान ‘नानु गौरी’ की तर्ज पर चलाया गया है जो पिछले साल अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर में पत्रकार गौरी लंकेश की 5 सितंबर को हत्या के विरुद्ध चला था।

सिद्धरमैया की आरएसएस/भाजपा को आतंकवादी संगठन बताए जाने के बयान की लोगों ने काफी निंदा की है। पहले सोशल मीडिया में और फिर प्रमुख अखबारों में संपादक के नाम पत्रों के जरिए। यही नहीं, पुराने कांग्रेसी भी मुख्यमंत्री की टिप्पणी से नाराज हैं। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर उदय इंडिया से कहा, ”आप जानते हो, भाजपा/आरएसएस कार्यकर्ताओं ने इस मौके को कैसे भुनाना शुरू कर दिया। इससे कांग्रेस के लिए संकट खड़ा हो जाने की आशंका है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि वे पुराने मूल कांग्रेसी हैं, न कि प्रवासी कांग्रेसी। जाहिर है, उनका इशारा मुख्यमंत्री के जनता परिवार वाली पृष्ठभूमि से है।

सिद्धरमैया की कठदलीली के मुताबिक तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आतंकवादी ही कहला सकते हैं क्योंकि ये सभी अपने को गर्व से आरएसएस का कार्यकर्ता कहते हैं और ये सभी भाजपा से हैं!

यह कठदलीली सिर्फ भाजपा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस तक भी जाती है। एक कांग्रेस नेता ने कहा, ”सिद्धरमैया के तर्क से तो पंडित जवाहरलाल नेहरू भी आतंकवादी ठहरते हैं क्योंकि नेहरू ने आरएसएस के दूसरे प्रमुख गुरुजी गोलवलकर को चिट्ठी लिखी थी और उनसे कहा था कि 1963 के गणतंत्र दिवस के परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों का एक दस्ता भेजें।’’

इधर कुछ समय से सिद्धरमैया अनाप-शनाप आरोप मढऩे लगे हैं और उनके बयान कांग्रेस के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं। एक दूसरे कांग्रेस नेता ने कहा, ”हम सभी जानते हैं कि मणिशंकर अय्यर के बयान से पहले 2014 और फिर हाल के गुजरात चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ। भाजपा नेताओं के यह कहने में दम है कि मुख्यमंत्री की बेमानी बातों से उनकी हताशा दिखने लगी है।’’ राज्य भाजपा अध्यक्ष बी.एस. येदियुरप्पा अपनी 75 दिनों की परिवर्तन यात्रा से कांग्रेस विरोधी फिजा तैयार कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ”कांग्रेस और मुख्यमंत्री की हताशा दिखने लगी है। सिद्धरमैया को लग गया है कि भाजपा जमीनी स्तर पर ऐसा परिवर्तन लाने में कामयाब हो गई है जिससे कांग्रेस मुश्किल में है। उनके बेतुके बयान हताशा की निशानी हैं।’’

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भाजपा के जेल भरो अभियान के पहले दिन 22 जिलों में करीब 8,000 कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी। हालांकि सिद्धरमैया अपने बयान से पीछे हट गए और कहा कि उन्होंने भाजपा/आरएसएस को उग्रवादी संगठन कहा, न कि आतंकवादी। उन्होंने अपने बचाव में कहा, ”दक्षिण कन्नड़ जिले में मृत शरीर पर राजनीति करने वालों को और क्या कहूं।’’

शोभा करंदलाजे ने कहा, ”सिद्धरमैया शायद भूल गए हैं कि कांग्रेस पार्टी ने ही इंदिरा गांधी के मृत शरीर पर राजनीति की थी। उनका शव घर में पड़ा रहा और उनके अंतिम संस्कार से पहले ‘सूतक’ (अपवित्र काल) में ही राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली।’’

उन्होंने आगे कहा, ”बाद में कांगे्रेस ने देश भर में यह प्रचार किया कि कैसे इंदिरा गांधी को गोलियों से भूना गया और उसके नाम पर वोट मांगे। फिर 1991 में राजीव गांधी बम धमाके में मारे गए तो कांग्रेस ने चुनाव के दूसरे और तीसरे चरण में उनके नाम पर वोट मांगा। अब बताइए मृत शरीर पर कौन राजनीति कर रहा है?’’

सिद्धरमैया की बातों को और जोरदार तेवर दिया प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने। अमूमन गुंडू राव बेहद संयत नेता माने जाते रहे हैं लेकिन भाजपा/आरएसएस के खिलाफ जिस तरह आग उगल रहे हैं, वह पहले देखने को नहीं मिला।

सिद्धरमैया की टिप्पणियों से कांग्रेस को नुकसान और भाजपा को फायदा होता है या नहीं, यह तो अलग बात है। इस पर बहस हो सकती है। लेकिन खतरनाक यह है कि सिद्धरमैया के बयान को देश के भीतरी और बाहरी दुश्मन  इस्तेमाल कर सकते हैं। वे कह सकते हैं कि देश के आला अधिकारी आतंकवादी हैं। नेताओं ही नहीं, आम लोगों की भी यही राय है कि सिद्धरमैया को ऐसा नहीं कहना चाहिए था।

कांग्रेस खुद को इससे कैसे उबारती है, यह देखना होगा। लेकिन भाजपा तो इस मुद्दे को गरमाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है।

 

बेंगलुरू से एस. ए. हेमंत कुमार

 

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