बाड़मेर रिफाइनरी बनेगी देश की शान?

बाड़मेर रिफाइनरी बनेगी  देश की शान?

राजनीति भी क्या बला है जिस पर वोट राजनीति तो ”करेला नीम चढ़ा’’ वाली कहावत चरितार्थ कर जाती है। पाकिस्तान से सटे राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर में तेल रिफाइनरी की स्थापना से जुड़े मुद्दे ने सियासी राजनीति को फिर से गरमा दिया है।  अजब गजब यह है कि चौदहवीं राजस्थान विधानसभा के चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रिफाइनरी की पत्थर पूजा की तो अब पन्द्रहवीं विधानसभा के चुनाव से दस माह पहले और अजमेर-अलवर लोकसभा तथा भीलवाड़ा जिले के माण्डलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए प्रचार के दौरान रिफाइनरी का शिलान्यास किया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस सुप्रीमो यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी से 22 सितम्बर 2013 को बाड़मेर जिले के पचपदरा में रिफाइनरी के लिए शिलान्यास करवाया था। इसके कुछ दिनों बाद ही विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो गई थी। अब मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथो 16 जनवरी 2018 को रिफाइनरी के कार्य आरम्भ होने की रस्म अदायगी करवायी (देखें बॉक्स) जबकि 29 जनवरी को तीनों उपचुनाव के लिए मतदान होना है। इन चुनाव क्षेत्रों में ही आचार संहिता लागू है।

हैरानी की बात यह है जिस रिफाइनरी को प्रदेश की राजस्व आय के लिए कामधेनु तथा क्षेत्रीय विकास में नये आयाम जोडऩे का प्रतीक मानकर राजनीतिक दावपेंच चलाये जा रहे हो वहां सीमांत क्षेत्र के आम लोगो में अपेक्षित उत्साह एवं जोश-खरोश दिखाई नहीं देता। पिछले दशक से रिफाइनरी को लेकर चली आ रही कशमकश से लोग आशंकित भी है कि यह रिफाइनरी लगेगी भी या नहीं। इसकी कुछ खास वजह भी है। पश्चिमी राजस्थान में तेल गैस की खोज और बाद में रिफाइनरी स्थापना का मुद्दा शुरू से ही झमेले मे उलझ गया। बात पिछली शताब्दी के आखिरी दशक की है जब विदेशी कम्पनी शैल 1995 के आस पास तेल गैस की खोज में लगी हुई थी। बाड़मेर जिले के गुडामालानी क्षेत्र में 1999 में एक कुंए से तेल मिला। शैल कम्पनी ने सरस्वती नामक इस कुंए के तेल को नगण्य माना और वापिस लौटने का मन बना लिया। इस उहापोह में तेल उत्पादन में अग्रणी कम्पनी केयर्न ने अपना हाथ आगे बढ़ाया। इस कम्पनी ने एक के बाद बारह कुंए खोद डाले लेकिन दुर्भाग्य से उनमे तेल नहीं मिला। शैल कम्पनी की तरह केयर्न भी हार मानने के कगार पर खड़ी थी लेकिन कम्पनी के भू वैज्ञानिक माइक वाटस को पूरा भरोसा था कि इस क्षेत्र में तेल का पर्याप्त भंडार है। इधर सूखे कुंओं की बढ़ती कतार। वर्ष 2004 की शुरूआत हुई थी। केयर्न की कम्युनिकेशन टीम के एक सहयोगी अयोध्या प्रसाद गौड़ ने जनवरी की सर्द रातों में नाटकीय घटनाक्रम की याद करते हुए उदय इंडिया से बातचीत में कहा कि माइक वाटस को लंदन जाना था जहां एक महत्वपूर्ण मीटिंग में बाड़मेर सांचौर बेसिन में तेल खुदाई बंद करने के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाना था। अचानक माइक वाटस के लेपटॉप पर एक के बाद एक कई संदेश आये जिनसे उनके चेहरे पर चमक आ गई। उन्हें इस रिपोर्ट पर विश्वास नही हो रहा था। माइक ने मोबाईल लगाया तो उन्हे खुशी भरा समाचार मिला ”वी हैव हिट द जेक पॉट’’ पीछे से खुदाई की टीम के सहयोगियों की तेल-तेल की आवाजें आ रही थीं। माइक वाट का सपना सच हो गया। यह स्थान था बाड़मेर से जोधपुर मार्ग पर उत्तर की ओर नगाणा।  कवास के इस तेरहवें कुंए को नाम मिला मंगला। अब सफल तेल कुंओं की संख्या परवान पर थी और 29 अगस्त 2004 को  तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने खनिज तेल के वाणिज्यिक उत्पादन का विधिवत शुभारम्भ किया। केयर्न कम्पनी ने केयर्न इण्डिया कम्पनी बनाकर तेल उत्पादन का कार्य अपने हाथ में लिया था और अगले चरण में उद्यमी अनिल अग्रवाल की कम्पनी वेदांता 2011 में इस अभियान में जुड़ गई तथा 2015 में उसका पूर्ण स्वामित्व हो गया। अब वेदांता लिमिटेड की वर्टिकल केयर्न ऑयल एण्ड गैस के माध्यम से तेल के लिए सर्वे, कुंओं की खुदाई एवं तेल उत्पादन का कार्य गति पकड़ चुका है। औसतन रोजाना पौने दो लाख बैरल तेल का उत्पादन हो रहा है। इस हिसाब से बाड़मेर सांचौर बेसिन की देश के घरेलू तेल उत्पादन में करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी हो गई है। वार्षिक नौ मिलियन मीट्रिक टन (एम एम टी पी ए) क्षमता की प्रस्तावित रिफाइनरी के अनुरूप अभी इतना तेल उत्पादन हो रहा है लेकिन रिफाइनरी चालू होने पर क्रूड ऑयल उत्पादन की मात्रा 2.5 एम एम टी पी ए के आस पास रहेगा। राज्य में नये तेल भण्डार की खोज नहीं होने पर रिफाइनरी आयातित तेल पर निर्भर होगी। भारत के महानिदेशक हाइड्रोकार्बन ने भी यह टिप्पणी की है कि 2022 के बाद तेल उत्पादन में भारी गिरावट आयेगी। इस बेसिन में छ: बिलियन बैरल तेल भंडार का अनुमान लगाया गया है। केन्द्र सरकार से अन्य ब्लॉकों में तेल उत्पादन की अनुमति मिलने पर इस तेल भंडार में और इजाफा होने की गुंजाइश है। बाड़मेर सांचोर बेसिन में उत्पादित तेल के परिवहन के लिए बाडमेर से गुजरात के बीच लगभग 700 किमी लम्बी सतत उष्मीय पाईप लाईन (कंटीन्यूटेड हीटेट पाईप लाईन) बिछाई गई। वर्ष 2007 से 2010 के बीच बिछाई गई यह पाईप लाईन विश्व में सबसे लम्बी है। इस पाइप लाईन में प्रवाहित तेल भोगत टर्मिनल तक पहुंचता है जहां इसकी आपूर्ति मुकेश अम्बानी समूह की जामनगर स्थित रिफाईनरी को की जाती है। बाड़मेर सांचौर बेसिन में उपलब्ध तेल भंडार के मद्देनजर बाडमेर में तेल रिफाईनरी स्थापित किये जाने की चर्चा ने जोर पकड़ा। इसके लिए पहले बाडमेर जिले के लीलाणा में रिफाईनरी लगाने की बात उठी। स्वाभाविक रूप से जमीनों के भाव बढ़ गये।  अचानक बाडमेर जिले के औद्योगिक नगर बालोतरा के निकटवर्ती पचपदरा के नमक उत्पादन क्षेत्र में रिफाइनरी स्थापित करने का निश्चय किया गया। इसके विरोध में आंदोलन भी हुए जिसकी अगुवाई सांसद कर्नल सोनाराम ने की। रिफाइनरी  लगाने के लिए राज्य सरकार तथा भारत सरकार के उपक्रम एच पी सी एल के मध्य समझौता हुआ। तत्कालीन प्रतिपक्ष के नेता वसुंधरा राजे तथा भाजपा ने एम ओ यू को राज्य हितों के विपरीत बताकर खुला विरोध किया। और आखिरकार रिफाइनरी का शिलान्यास करवा लिया गया।


 

तारीख नहीं युग बदलेगा


 

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राजस्थान के प्रमुख समाचार पत्रों में रिफाइनरी के बारे में 16 जनवरी को अतिरिक्त मुख्य पृष्ठ पर राज्य सरकार की ओर से विज्ञापन प्रकाशित करवाया गया है। इसका शीर्षक है-राजस्थान रिफाइनरी बाड़मेर, आज राजस्थान में तारीख नहीं युग बदलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रिमोट से एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एच.आर.आर.एल.) की पट्टिका का अनावरण किया। आधा घंटे से अधिक के सम्बोधन में प्रधानमंत्री  ने सत्रह विधानसभा क्षेत्रों में लागू आचार संहिता के बावजूद गरिमा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे  की जैसलमेर बाड़मेर के बीच रेल सुविधा की मांग को लेकर किसी तरह की घोषणा को अनदेखा किया। अलबत्ता मंच पर आने से पहले उन्होंने एच. पी. सी. एल. के सीएमडी एम. के. सुराणा द्वारा रिफाइनरी के मॉडल के अवलोकन कराये जाते समय की गई पूछताछ के आधार पर जनसभा में कहा कि 2022 में देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाते समय उन्हे यह रिफाइनरी चालू करने का भरोसा दिलाया गया है। भाग्य और दिव्य भारत के लिए आजादी के दीवानों के सपनों का हिन्दुस्तान बनाने का यह समय  संकल्पों से सिद्धि का समय है।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा कांग्रेस शासन में कागजी रिफाइनरी सम्बन्धी शिकायत को सही ठहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस राज में जनता को गुमराह करने के लिए महज पत्थर लगाने की संस्कृति थी। इसी संदर्भ में उन्होने रेलवे क्षेत्र की पन्द्रह सौ योजनाओं की कागजी घोषणाओं तथा चालीस साल से लम्बित सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन योजना के क्रियान्वयन का उल्लेख किया।

 


चौदहवीं विधानसभा के चुनाव में रिफाइनरी का मुद्दा छाया रहा। दौ सौ सदस्यीय विधानसभा में 163 सीटों पर प्रचण्ड जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में दूसरी बार शासन सत्ता की बागडोर संभाली। पिछले चार सालों में रिफाइनरी का मुद्दा सत्तारूढ भाजपा तथा प्रतिपक्ष कांग्रेस के बीच फुटबाल बना हुआ है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में एक दूसरे को कठघरे में खड़े करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। राज्य सरकार द्वारा एच पी सी एल के साथ नये सिरे से किए गए समझौते के गणित से प्रदेश को होने वाले हानि लाभ पर  आरोप -प्रत्यारोप का खेल जारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से रिफाइनरी के शिलान्यास कराने की सुगबुगाहट से सियासी राजनीति में उफान आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पहले किए गए शिलान्यास की याद दिलायी और दुबारा स्मरण पत्र भेजकर मीडिया से बातचीत में यह टिप्पणी की कि अब तो रिफाइनरी का उद्घाटन होना चाहिए था। गहलोत ने यह भी टिप्पणी की कि रिफाइनरी रोकना पाप है जनता इसका जवाब मांगेगी। प्रधानमंत्री की फेस सेविंग के लिए अब शिलान्यास की जगह कार्य शुभारम्भ का नामकरण किया गया है।

इस बीच खनिज राज्यमंत्री सुरेन्द्र पाल सिंह टी टी ने बयान देकर कांग्रेस राज की कागजी रिफाइनरी की बखिया उधेड़ दी है। मंत्री का साफ कहना है कि केवल कागज की कश्ती थी कांग्रेस की रिफाइनरी। हकीकत में न कोई लीज डीड हुई न कोई पर्यावरण मंजूरी मिली और 48 सौ एकड़ भूमि का कागजों पर ही अलाटमेंट हुआ। ग्राउण्ड पर कोई काम नहीं हुआ। चुनावी लाभ के लिए महज पत्थर लगाया गया। कांग्रेस ने 56 हजार 40 करोड़ रूपये का प्रोजेक्ट एम ओ यू किया जो पूरी तरह से घाटे का ही था।  आज वह घटकर 16 हजार 845 करोड़ रह गया। अर्थात सरकार को 40 हजार करोड़ की सीधी बचत। आई आर आर भी जो पहले 6.32 प्रतिशत था वह अब 12.2 प्रतिशत है और सी पी ओ भी बी एस- 3 से अपग्रेड होकर बी एस-6 हो गया है। अब पर्यावरण मंजूरी के साथ जमीन की लीज डीड  तथा 97 करोड़ की निविदा जारी होने से सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई और अब रिफाइनरी हकीकत में जमीन पर आ जाएगी। हालांकि कांग्रेस ने राज्य का हिस्सा 26 फीसदी रहने सहित अन्य सवाल उठाये है लेकिन भाजपा ने गहलोत पर पलटवार किया है कि वह प्रदेश में रिफाइनरी लगाने के विरोधी है।

उन्होंने आगे कहा कि वह जब राजस्थान में संगठन के काम से या पड़ोसी राज्य का सीएम रहते हुए आते थे तो उन्हें यहां के लोगों से सुनने को मिलता था कि कांग्रेस और अकाल का जुड़वां रिश्ता है। इस दौरान लोग उनसे कहते थे कि जहां कांग्रेस होती है, वहां अकाल होता हैं। पीएम ने कहा कि एक बार उन्होंने अधिकारियों से बजट के बारे में चर्चा की थी। उन्होंने पूछा कि रेलवे बजट में तमाम योजनाओं की चर्चा होती है लेकिन इन पर कितना काम हुआ। इस पर अधिकारियों ने जो कागज उन्हें दिखाए तो उनसे पता चला कि कांग्रेस की सरकार ने करीब 1500 योजनाओं का ऐलान तो किया गया लेकिन ये योजनाएं सिर्फ कागज पर ही रह गईं। कांग्रेस ने लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन में देश को गुमराह किया।

जयपुर से गुलाब बत्रा

 

 

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