स्वच्छ राजनीति और अपराध-मुक्त भारत के लिए अन्ना की हुंकार

स्वच्छ राजनीति और अपराध-मुक्त भारत के लिए  अन्ना की हुंकार

भारतीय मतदाता संगठन द्वारा कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक संगोष्ठी का आयोजन 15 जनवरी 2018 को किया गया, जिसका उद्घाटन लोकनायक अन्ना हजारे ने किया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जननायक अन्ना हजारे ने 23 मार्च से पुन: जोश के साथ अपना ‘जन आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा करते हुए युवकों को ‘लोकतंत्र सुधार और लोकपाल’ नियुक्ति के जन आंदोलन में भाग लेने के लिए कहा है। अन्ना हजारे ने लोकतंत्र का अर्थ बताते हुए कहा कि जो लोगों का है यानि की लोक का तंत्र ही ‘लोकतंत्र’ कहलाता है। अन्ना ने कहा कि लोग खाली हाथ आते हैं व खाली हाथ ही जाते हैं, फिर भी लोग मेरा-मेरा तो रटते ही रहते हैं साथ में तेरा वाला भी मेरा है वाली आजकल कहावत चरितार्थ हो गयी है जिससे कि गांव, समूह देश में भ्रष्टाचार बेईमानी में गजब की बढ़ोतरी हो गयी है। एक बार मैंने 25 साल की उम्र में आत्महत्या करने की सोची थी। पूरा मन बना लिया था कि आत्महत्या कर ही लूं पर उसी समय मुझे स्वामी विवेकानंद की एक पुस्तक पढऩे को मिली जिसमें स्वामी जी ने बोला था कि अपने लिए तो कमजोर और कायर लोग जीते हैं। नवयुवकों को उन्होंने गांव- समाज और देश के लिए ही अपना सबकुछ देने के लिए कहा। बस उसी समय से मेरा जीवन जीने का अर्थ ही बदल गया और मैंने 25 साल की अवस्था से ही यह शपथ ले लिया कि मैं अब जब तक जिंदा रहूंगा तबतक गांव समाज और देश के लिए ही अपना सबकुछ न्यौछावर कर दूंगा। मैंने  आमरण-अनशन करके और लोगों को जागरूक करके अपने गांव में स्थित 40 शराब की भठ्ठी को बंद करवाया, साथ ही साथ गुटखा-तंबाकू-बीड़ी-सिगरेट की ब्रिकी को पूरी तरह बंद करवा दिया।

अन्ना ने अनुच्छेद 85 ख व ग के अंतगर्त भारत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 25 साल की हो गयी है वो लोकसभा का चुनाव लडऩे को पूरी तरह स्वतंत्र है। 1952 में देश का पहला आम चुनाव हुआ तब से आज तक हुए सभी चुनावों में ‘समूह’ के कारण ही देश में घोटाले-गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार में बढ़ोत्तरी हुयी। इसी समूह के द्वारा जाति-धर्म में जहर घुल गया। जो युवाशक्ति राष्ट्र की सेवा में लगनी चाहिए वो समूह में लग गया और यहीं से युवाशक्ति का समूह में बंट कर भटकाव हो गया।

गांधी जी हमेशा से यह कहते थे कि जब तक हमारे गांव का विकास नहीं होगा तबतक हमारे देश का विकास नहीं हो सकता है। जिस दिन हमारे देश के सारे गांवों का पूर्णरूप से विकास हो जाएगा उसी दिन हमारा देश विश्व का गुरू बन जाएगा। लेकिन समूह के कारण गांवों का जात-पात में बंटवारा हो गया,जिसके कारण  झगड़े-विवाद में बढ़ोत्तरी होती गयी और गांवों का विकास पूर्णरूप से ठप हो गया। गांव का विकास रूक गया तो समझो कि देश का विकास रूक गया।

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अन्ना ने अपने बारे में बताते हुए कहा कि मैं अपने गांव में अपना घर रहते हुए भी पिछले 30-40 वर्षों से अपना घर रहते हुए भी अपने गांव स्थित मंदिर में रहता हूं। मेरे पास केवल सोने के लिए एक बिस्तर और खाने के लिए एक थाली है। मैं अपने भाईयों के बेटे-बेटियों का नाम तक नहीं जानता हूं । मैंने अपना सारा जीवन गांव-समाज और देश की सेवा में ही लगा दिया है। जो लखपति- करोड़पति सुखद अनुभव का एहसास नहीं करते होंगे वो मैं अनुभव करता हूं। उन्हें चैन की नींद नहीं आती, इन्हें सोने के लिए नींद की गोली की जरूरत होती है और मुझे ऐसे ही चैन भरी गहरी नींद आ जाती है। मैं बहुत ही जल्द कन्याकुमारी से कश्मीर तक की देशव्यापी दौरे पर निकल रहा हूं क्योंकि चाभी जनता के हाथ में ही है। यदि जनता ने चाभी का सही प्रयोग किया तो देश बदल जाएगा।

इस संगोष्ठी के अवसर पर भारतीय मतदाता संगठन के अध्यक्ष रिखब चन्द जैन ने कहा कि भारत के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए देश की राजनीतिक पार्टियों को राष्ट्रनीति पर चलना होगा, दलगत नीति के स्वार्थ को त्यागना होगा तथा दागी अपराधी तत्वों को सत्ता में न लायें तभी भारत की राजनीति पूर्ण रूप से अपराधमुक्त हो सकता है। किसी भी लोकतंत्र में सुशासन के लिए सुरक्षा और शांति तभी रह सकती है जब अपराध न हों, नागरिक स्वतंत्र होकर निर्भीक रूप से अपना मतदान कर सकें। वर्तमान में अपराधी बेकाबू हो रहे हैं। प्रति वर्ष अपराध में बढ़ोत्तरी हो रही है। संसद एवं राज्य के विधानसभाओं में दागी अपराधी बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 48 प्रतिशत दागी विधायक हैं तो वहीं बिहार में 58 प्रतिशत विधायक दागी हैं। यहां तक कि मंत्रिमंडलों में भी 30 प्रतिशत दागी सांसद-विधायक मंत्री बनने में सफल हो गए हैं। गरीबी, भय, अशांति और असुरक्षा तभी खत्म हो सकती है जब सभी राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं के सामने साफ-सुथरे बेदाग छवि वाले प्रत्याशी चुनाव में उतारें। चुनावी खर्च सीमा पार न करें, प्रत्याशी चयन को धन-बल से प्रभावित न करें, टिकट न बेचें, वोट न खरीदें, धर्म और जाति के आधार पर चुनाव न लड़े, वोट बैंक और ध्रुवीकरण का सहारा न लें तब जाकर ही राजनैतिक स्वच्छता आ सकती है। तब जाकर ही सुशासन हमारे देश में संभव है, प्रशासन एवं पुलिस तथा अन्य सुधार तभी संभव होंगे, तब जाकर ही विकास तेजी से होगा। रिखब जैन ने यह भी कहा कि यदि राजनीतिक पार्टियां सुधार न लायें, ‘राष्ट्र पहले’ वाली नीति न अपनायें, स्वार्थवश राजधर्म और राष्ट्रधर्म पर न चलें तो उन पर कानूनी लगाम लगाया जाए और खासकर चुनावी टिकट बंटवारे के लिए कानूनी दिशानिर्देश लागू किया जाना चाहिए। राजनीतिक पार्टी संचालक मनमानी न चला पायें, गैर जिम्मेदारी के साथ गलत, दागी और अपराधियों को सत्ता में न लाएं। महिला और युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ण रूप से केवल महिलाओं की ही पार्टी और युवाओं की पार्टी बने, तब जाकर ही महिलाओं और युवकों को सत्ता में आने का अवसर जल्द मिल सकेगा। देश के चमकते सितारे सभी कार्य क्षेत्रों से, बार एसोसिएशन, प्रबुद्ध नागरिक, सज्जन नागरिक, निष्क्रियता छोड़कर एकजुट होकर राजनीति में स्वच्छता के लिए समर्पित भाव से आगे आना चाहिए और संवाद के द्वारा संघर्ष करना चाहिए। ऐसा होना ही राष्ट्रहित में है और ऐसा ही उन्होंने आह्वान भी किया।

भारतीय मतदाता संगठन के स्थापना दिवस कार्यक्रम ‘स्वच्छ राजनीति और अपराधमुक्त भारत’ में सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय को ‘लोकतंत्र महाप्रहरी’ के सम्मान से नवाजा गया। उपाध्याय ने ‘लोकतंत्र की मजबूती एवं सुरक्षा’ के लिए अपनी जनहित याचिकाओं के माध्यम से अनेक आदेश सर्वोच्च न्यायालय से पारित करवाये हैं। इन्होंने इस दिशा में और अधिक घनिष्ठ प्रयास करने का आश्वासन दिया है।

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कार्यक्रम में ‘लोकतंत्र महाप्रहरी सम्मान 2018’ से अश्विनी उपाध्याय (अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट) को सम्मानित किया गया। इन्हें एक शील्ड व 1 लाख का चेक प्रदान किया गया। ‘मतदाता मित्र 2018’ से 7 व्यक्तियों को सम्मानित किया गया जो हैं- समर्पित युवा समिति (मुजफ्फरनगर, यू.पी.), हितेश चोटाई (जामनगर गुजरात), राजन सिंह (दिल्ली), निर्मल जैन, प्रदीप कोहली (सामाजिक कार्यकत्र्ता दिल्ली), गोमती तोमर (सामाजिक कार्यकर्ता), राजेन्द्र स्वामी (संस्थापक संपादक दिल्ली दर्पण टी.वी.) को शील्ड और एक्कीस हजार रूपये का राशि प्रदान की गयी।

उदय इंडिया ब्यूरो

 

 

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