अपने देश की संस्कृति को न भूलें-अनु मलिक

अपने देश की संस्कृति को न भूलें-अनु मलिक

अब तक साढ़े तीन सौ से भी ज्यादा फिल्मों का संगीत-निर्देशन करने वाले लोकप्रिय संगीत निर्देशक अनु मलिक हमेशा कुछ अलग करना चाहते हैं। यही प्रयोगधर्मिता उन्हें औरों से हटकर एक खास ‘इमेज’ देती है। जैसे ही अनु मलिक का नाम आता है, वैसे ही फिर तेरी कहानी याद आई, जानम, बाजीगर, सर, फिजा, विरासत, बॅार्डर, चमत्कार, चाइना गेट, तहलका और रिफ्यूजी जैसी कामयाब फिल्में याद आ जाती हैं और दिलो-दिमाग में ताजा हो उठते हैं वो गीत जिन्हें आज भी भूलना मुश्किल है। उनके गाए गाने भी खासे लोकप्रिय हुए। मसलन, गरम चाय की प्याली हो…, जुली जुली…, मेरी जाने जिगर… आदि। अपने जमाने के मशहूर संगीत-निर्देशक अनवर सरदार मलिक के साहबजादे एवं पंडित रामप्रसाद शर्मा के शिष्य, अनु मलिक इन दिनों कई एलबम और फिल्मों में व्यस्त हैं। उनसे व्यक्तित्व के कई पहलुओं पर बातचीत की संजय सिन्हा ने –

अपने अब तक के करियर से कितना संतुष्ट हैं आप?
संतुष्टि मेरे एलबम्स के साथ होती हैं। कई एलबम्स मुझे तृप्त कर देते हैं। कभी बेचैनी भी हो जाती है। ऐसे कई उदाहरण हैं। आमतौर पर लोग इस सवाल के जवाब में यही कहते हैं कि हम और कुछ करना चाहते हैं, कुछ और पाना चाहते हैं। लेकिन, मैं अपने एलबम्स के साथ संतुष्ट होता हूं और कभी कभी तृप्त नहीं होता हूं। जब मुझे शाहरूख खान की फिल्म ‘अशोका’ में काम करने का मौका मिला तो मुझे बहुत मजा आया। ऐसी बहुत सारी फिल्में मैं कर चुका हूं। अब तक लगभग साढ़े तीन सौ फिल्मों के लिए मैं गाने कंपोज कर चुका हूं। फिल्म बॉर्डर के गाने आज भी देश के जवान गर्व के साथ गाते हैं तो काफी संतुष्टि मिलती है। जवानों के बीच मैं जाता हूं तो वे लोग मुझे गले लगा लेते हैं। इससे बड़ी संतुष्टि और होगी? मेरी दर्जनों फिल्में सुपरहिट रहीं, लेकिन एक बात का अफसोस होता है कि हमारा संगीत गलत दिशा में जा रहा है। इसलिए संगीत का पन्ना बदलने का दिल फिर चाह रहा है।

ऐसा नहीं लगता है कि ‘मैलोडी’ धीरे-धीरे मरती जा रही है? इसकी जगह बेतुके संगीत को तरजीह दी जा रही है?
दरअसल ज्यादातर लोग आयटम सॉन्ग्स की तरफ भाग रहे हैं। चाहे शराब पर गाना हो या इश्क पर, सभी को आयटम-गीत बनाकर पेश किया जा रहा है। फिर से मैलोडियस गानों पर काम करने की जरूरत है। मेरे पिताजी अनवर सरदार मलिक साहब ने इंडस्ट्री को दर्जनों सुरीले गीत दिए। संगीत उन्हीं से मुझे विरासत में मिला। इसलिए मेरी भी कोशिश यही रहती है कि सरदार मलिक की परंपरा को मैं जिंदा रखूं। मशहूर गीतकार हसरत जयपुरी मेरे मामा थे। मैं शंकर जयकिशन का मुरीद हूं। आर.डी. बर्मन का प्रशंसक हूं। लिहाजा कुछ बेहतर करने की बेचैनी हर पल रही है।

आपको लगता है कि ‘मैलोडी’ फिर से वापस आ पाएगी?
देखिए, मैं दूसरों के बारे में तो नहीं कह सकता, अपने बारे में जरूर कहंूगा कि मैं कोशिश जरूर करूंगा। वो दौर वापस आएगा या नहीं मुझे नहीं पता, मगर मैंने कोशिश फिर से शुरू कर दी है। मेरे साथ कुछ अच्छे लोग भी जुड़ रहे हैं, इसलिए कुछ अच्छा ही होगा। एक कहावत है न कि ‘सौ सुनार की, एक लुहार की’। मैं दिल से मेहनत करूंगा। चारों तरफ भयानक आग लगी हुई है। उसके बीच से निकलना कोई आसान काम नहीं है, फिर भी मैं पूरी कोशिश कंरूगा।

आप जैसे लोग कोशिश करेंगे तो शायद कुछ अच्छा हो जाए…
संतुष्टि तो मुझे तब मिलेगी जब आप जैसे लोग मुझे फोन करके बोलेंगे कि आपका फलां एलबम बहुत अच्छा है और मैंने खरीद कर घर में रख ली है। मुझे संगीत-प्रेमी श्रोताओं और दर्शकों का भी सहयोग चाहिए।

इन दिनों किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं?
अभी मैंने एक गाना किया है। फिरोज नजरवाला एक फिल्म बना रहे हैं ‘वेलकम बैंक’। दोस्ती के नाते मैंने इस फिल्म के लिए एक गीत उनके लिए कंपोज किया है। इसके अलावा मैंने अक्षय कुमार की फिल्म के लिए एक गाना गाया – ‘लोनली लोनली….’। आदित्य चोपड़ा साहब यशराज फिल्म्स के बैनर तले एक फिल्म बना रहे हैं – ‘दम लगाके हइसां’। इस फिल्म में आयुष्मान खुराना हीरो हैं और मैं बतौर म्यूजिक डायरेक्टर इसके लिए काम कर रहा हूं। इस फिल्म के गाने वरूण ग्रोवर ने लिख रहे हैं।

shachatkar4

कब तक रिलीज होगी यह फिल्म?
अगले साल मार्च-अप्रैल तक। इस फिल्म को लेकर मैं काफी एक्साइटेड हूं।

हिन्दुस्तान का कौन-सा शहर आपको पसंद है?
किसी एक शहर की बात मैं नहीं कंरूगा। मुझे तो पूरा हिन्दुस्तान अच्छा लगता है। यहां का हर शहर खूबसूरत है। इस्ट एण्ड बेस्ट, इंडिया इज द बेस्ट।

बंटवारे के बाद से ही हिन्दुस्तान और पाकिस्तान हमेशा आमने-सामने रहे हैं। आप क्या कहना चाहेंगे?
मुझे लगता है कि किसी भी मसले को प्यार से सुलझाया जा सकता है। मैं एक संगीतकार हूं, इसलिए अपने हिसाब से सोचता हूं। प्यार और संगीत के जरिए बड़े से बड़ा मसला भी हल हो सकता हैं।

राजनीति में कितनी दिलचस्ती है आपकी?
मैं अपना संगीत ही अच्छी तरह समझता हूं। मै संगीत के जरिए देश की सेवा करना चाहता हूं। वैसे नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एक बेहतर परिर्वतन आया है। स्वच्छता अभियान से मैं प्रभावित हूं। मैं भी इसी तरह की समाजसेवा करना चाहता हूं, मगर इलेक्शन लडऩा और मिनिस्टर बनने की मेरी इच्छा नहीं है। मैं राजनीति से बाहर रहकर भी सेवा कर सकता हूं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके कार्यों के लिए कितने अंक देना चाहेंगे?
मोदी इज द बेस्ट। मोदीजी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में हिन्दुस्तान को एक नई पहचान मिलेगी, ऐसी उम्मीद है।

नए संगीत-निर्देशकों और कलाकारों के लिए क्या कहना चाहेंगे?
यही कहूंगा कि अपने देश की संस्कृति न भूलें। वेस्टर्न म्यूजिक अपनाएं, मगर अपने कल्चर को बचाते हुए। मैलोडी को जिंदा रखें। खूब मेहनत करें और हिन्दुस्तान का नाम रोशन करें। हिन्दुस्तान हर क्षेत्र में आगे है। भारतीय संगीत भी अपने आप में अनूठा है। इसलिए अपनी संस्कृति और भारतीयता को मरने न दें।

  1. Thanks very interesting blog!

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.