वसुंधरा सरकार की पहली वर्षगांठ पंचायत चुनाव में कांग्रेस की शक्ति परीक्षण की तैयारी

वसुंधरा सरकार की पहली वर्षगांठ पंचायत चुनाव में कांग्रेस की शक्ति परीक्षण की तैयारी

By जयपुर से गुलाब बत्रा

पहले राजस्थान विधानसभा, फिर लोकसभा और अब जयपुर नगर निगम सहित 46 निकायों के चुनाव में बुरी तरह पराजित प्रदेश कांग्रेस को जनवरी, फरवरी में प्रस्तावित पंचायती राज संस्थाओं की चुनावी जमीन पर अपनी पकड़ बनाये रखने के मकसद से संगठनात्मक ढांचे में जान फूंकने की गरज से पार्टी हाईकमान ने जम्बो जेट कार्यकारिणी के गठन की मंजूरी दी है, जिसमें कई चुके हुए नेताओं तक के परिजनों को तरजीह दी गई है। उधर एक के बाद एक ऐतिहासिक चुनावी सफलता का परचम फहराते हुए भारतीय जनता पार्टी की नेता और प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में गठित राज्य सरकार 13 दिसम्बर को पहली वर्षगांठ पर पोलिंग बूथ से जुड़े कार्यकर्ताओं का जयपुर में सम्मेलन बुलाकर पंचायत चुनावों की तैयारी के शंखनाद की तैयारी में हैं।

कार्यकारिणी के गठन पर अपने राजनीतिक बयान में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट का यह दावा है कि राज्य में सरकार न होने के कारण बड़ी कार्यकारिणी बनाकर प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा लोगों को मौका दिया है। युवक कांग्रेस व एन.एस.यू.आई. से जुड़े प्रदेश के प्रमुख लोगों को जगह दी गई है । दूसरी तरफ बरसों से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय तथा जमीन से जुड़े निष्ठावान कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि यह कार्यकारिणी कांग्रेस तथा पी.सी.सी. की गरिमा पर सवालिया निशान लगाती है। कार्यकारिणी में ‘व्यवस्था’ के चलते ऐसे लोग भी शामिल किए गए हैं जिनके नाम और चेहरे भी अनजान हैं। कभी ब्लॉक या जिलाध्यक्ष पद पर नहीं रहे लोगों को सीधे प्रदेश महासचिव तक बनाया गया है। पिछला विधानसभा हारने तथा कांग्रेस के बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩे वालों को भी कार्यकारिणी में स्थान दिया गया है। कई पदाधिकारियों की शैक्षणिक योग्यता भी सामान्य है। इसके गठन से पार्टीजनों में उत्साह जगने की गुंजायश कम ही है।

नये चेहरों के नाम पर कार्यकारिणी में परिवारवाद का भी वर्चस्व है। इनमें एक दर्जन से भी ज्यादा वरिष्ठ नेताओं के परिजनों को प्रमुखता दी गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत को सीधे महासचिव बनाया गया है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के भांजे बृजेन्द्र सिंह शेखावत, पूर्व केन्द्रीय मंत्री गिरिजा व्यास के भाई गोपाल कृष्ण शर्मा, स्व. अबरार अहमद के पुत्र दानिश अबरार, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत के पुत्र बालेन्दु सिंह सहित राज्य के पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों के पुत्रों को भी कार्यकारिणी में स्थान मिला है। हालांकि कोषाध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर कशमकश है।

आंकड़ों का हिसाब लगायें तो 15 उपाध्यक्ष, 26 महासचिव,  43 सचिव तथा दो प्रवक्ता बनाये गये हैं। पिछली कार्यकारिणी के 59 पदाधिकारियों की तुलना में अब इनकी संख्या 86 हो गई है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार डॉ. गिरिजा व्यास के कार्यकाल में अधिकतम 18 महासचिव बनाये गए थे। हीरालाल देवपुरा के समय इनकी संख्या 16 थी। अलबत्ता पिछली बार की 25 महिलाओं की संख्या घटकर 15 रह गई है। पिछली कार्यकारिणी के करीब 33 लोगों की छुट्टी के साथ लगभग पांच दर्जन नए लोगों को जगह मिली है। जातीय हिसाब-किताब के अनुसार कार्यकारिणी में सबसे अधिक 14 ब्राह्मण, 13 जाट, 11 अनुसूचित जाति, 9 जनजाति, 8 मुस्लिम, 7 राजपूत, 4-4 जैन व गुर्जर, 2 माली तथा एक पंजाबी शामिल हैं। सचिव तथा प्रदेश प्रवक्ता अर्चना शर्मा को उपाध्यक्ष पद पर पदोन्नति के साथ उन्हें मीडिया सेंटर की चेयरपर्सन बनाया गया है। राजनीति में उनसे वरिष्ठ पूर्व विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास तथा सुरेश चौधरी प्रवक्ता के रूप में अर्चना शर्मा के नियंत्रण में रहेंगे। अर्चना मालवीय नगर क्षेत्र से विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं तथा निकाय चुनाव में इस क्षेत्र के सभी नौ वार्डों में कांग्रेस पराजित हुई है।

पिछले विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत जब्त कराने वाले तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान की जगह तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन लोकसभा चुनाव में स्वयं पायलट भी अजमेर संसदीय क्षेत्र से पराजित हो गए थे। डॉ. चन्द्रभान मई 2011 में प्रदेश अध्यक्ष बने थे और उन्होंने अक्टूबर में कार्यकारिणी गठित की थी, जिसे पार्टी हाईकमान ने नवम्बर के आखिरी सप्ताह में भंग कर नई कमेटी का ऐलान किया है।

special-report2

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह नगर जोधपुर में नगर निगम के लगातार 15 साल पुराने कांग्रेस की किले को ढहाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने जयपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर निगम सहित प्रथम चरण में 46 निकायों के चुनाव में सफलता का परचम लहराकर विधानसभा तथा लोकसभा चुनाव के बाद शहरी सरकार पर कब्जे के साथ कड़ी से कड़ी मजबूत की है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को निकाय चुनाव की कमान सौंपी गई थी। चुनाव प्रबन्धन में उनके सहयोगी पूर्व राज्यसभा सदस्य ओंकार सिंह लखावत शामिल थे। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी की अगुवाई में इस चुनावी सफलता के बाद पार्टी अब पंचायत चुनावों की तैयारी में जुट गई है। अगस्त 2015 में 126 निकायों के चुनाव भी होने हैं। मौटे तौर पर निकाय चुनावों में जनता प्रदेश में सत्तारूढ़ दल के समर्थन में रहती आयी है। वर्ष 1994 से यही सिलसिला चला आ रहा है। तब निर्दलियों ने कांग्रेस तथा भाजपा को भी पीछे छोड़ दिया था। अलबत्ता 1999 और बाद के चुनावों में निर्दलियों की ताकत में अपेक्षाकृत कमी दर्ज की गई, लेकिन 2014 के चुनावों में कुछ स्थानों पर निर्दलीय कांग्रेस से आगे रहे हैं। इस चुनाव में वर्ष 2009 की तुलना में 6.11 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ। भाजपा ने 25 निकायों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया और भरतपुर नगर निगम में निर्दलियों के सहयोग से भाजपा पार्षद शिव सिंह भोंट महापौर बने, जिन्होंने अपने चचेरे भाई तथा कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चौधरी को 18 मतों से पराजित किया। जयपुर में निर्मल नाहटा, जोधपुर में घनश्याम ओझा, उदयपुर में चन्द्रसिंह कोठारी, कोटा में महेश विजयवर्गीय, बीकानेर में नारायण चोपड़ा महापौर चुने गए। इस बार एक भी महिला महापौर नहीं चुनी जा सकीं।

भरतपुर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी के रूप में किन्नर नीतू मौसी चुनाव जीतीं तो एक दम्पत्ति को भी चुनाव जीतने का अवसर मिला। कांग्रेस पार्षद रहे हरिजन बस्ती के राकेश वार्ड नं. 23 से चुनाव जीते तो उनकी पत्नी बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीतीं। कोटा में फेरी लगाकर कचौड़ी बेचने वाली बादाम बाई निर्दलीय पार्षद बनीं तो जालौर में 2009 लोकसभा चुनाव प्रत्याशी रही संध्या चौधरी ने पिण्डवाड़ा के वार्ड 20 से पार्षद का चुनाव हारकर एक इतिहास दोहरा दिया। कभी पाली से सांसद रहे स्व. मूलचंद डागा पाली नगर परिषद के चुनाव में पराजित हुए थे। झुन्झुनूं में सास बतूलबानो ने अपना नाम वापिस लेकर बहू शबीना बानो को निर्विरोध पार्षद बनवाया तो उसके पति साजिद हुसैन पार्षद थे।

प्रदेश में महिलाओं ने 557 आरक्षित वार्डों में जीत दर्ज करने के साथ दस अन्य वार्डों में पुरूषों को पराजित किया। कुल 1696 वार्डों में भाजपा को 930, कांग्रेस 444 तथा 312 में निर्दलीय प्रत्याशियों को सफलता मिली। बसपा के चार, साम्यवादी दल के दो तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का मात्र एक पार्षद चुना गया।

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के निर्णयानुसार 2009 में निकाय प्रमुखों का चुनाव सीधे मतदाताओं से करवाया गया था। जयपुर नगर निगम में भाजपा बोर्ड को बहुमत मिला, लेकिन कांग्रेस की ज्योति खंडेलवाल महापौर चुनी गईं। दोनों में खपटपट के चलते शहरी विकास में बाधायें तथा आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहा। इस कड़वे अनुभव के बाद 2014 में पार्षदों द्वारा महापौर, सभापति एवं अध्यक्ष के चुनाव का निर्णय लिया गया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा है कि सरकार निकायों की वित्तीय स्थिति सुधारने तथा संविधान के तहत निगमों को मिलने वाले अधिकार देकर उन्हें मजबूत किया जाएगा। निकायों को पूरी स्वायतता मिलेगी।

अगले साल के आरम्भ में पंचायत चुनावों में भाजपा और कांग्रेस में एक बार पुन: शक्ति परीक्षण होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को भरोसा है कि इस बार पार्टी चुनाव में बाजी मारेगी, क्योंकि ग्रामीण अंचल में कांग्रेस की जड़ें गहरी हैं। वहीं भाजपा ने अपनी सरकार की पहली वर्षगांठ पर सप्ताह भर के कार्यक्रमों की योजना बनाई है, जिनमें सरकार की उपलब्धियों, आगामी योजनाओं तथा प्रदेश के भावी विकास के विजन पर फोकस रहेगा। निकाय चुनाव की तर्ज पर पंचायत चुनाव के लिए भी जिला व मंडल स्तरीय समितियां बनेंगी।Налогоплательщик ЮЛwobs.ua

  1. Hi, just wanted to tell you, I enjoyed this post. It was inspiring.Keep on posting!

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.