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हमारी सांस्कृतिक धरोहर पर बार-बार क्यों प्रहार?

हमारी सांस्कृतिक धरोहर पर बार-बार क्यों प्रहार?

एक बार फिर पद्मावती नामक बॉलीवुड  फिल्म राजपूत समुदाय की भावनाओं को चोट पहुंचाने के कारण सुर्खियों में है। मैं संजय लीला भंसाली को उनके इस विवादित फिल्म के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने राजस्थान के चितौडग़ढ़ की रानी पद्मावती की तथाकथित अनकही कहानी को लोगों के सामने रखा। कुल मिलाकर पद्मावती की वास्तविक कहानी से अभी भी लोग अनभिज्ञ हैं और इसका मुख्य कारण वे इतिहासकार हैं, जो अपनी वैचारिक दृष्टि से इतिहास से खिलवाड़ करते हैं। इस संबन्ध में मैंने कई इतिहासकार, पत्रकार और बुद्धजीवी लोगों से वार्ता की हैं। मैंने उन स्तंभकारों को भी पढ़ा, जिनका अपना एजेंडा है, जो उनकी लेखनी में देखने को मिलता है। भारत के इतिहास से खिलवाड़ अंग्रेजो ने स्वतंत्रता से पहले गलत इतिहास लिखकर किया और आज भी हम उसी इतिहास को पढ़ते आ रहे हैं। इसी इतिहास   की देन है कि हम अपने महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को अभी भी पहचानने से विचलित होते हैं। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जिनमें इन तथाकथित इतिहासकारों की मनगढंत कहानियों ने हमारी गौरवशाली इतिहास को विध्वंस करने का प्रयास किया। इसी प्रकार की एक मनगढंत कहानी बक्सी जगबंधु के विषय में प्रस्तुत की गई है, जिसमें अंग्रेजों के समक्ष उनके समर्पण की बात कही गई हैं। लेकिन किसी भी इतिहासकार ने यह बताने का प्रयास नहीं किया है कि आखिर किस कारण से बक्सी जगबंधु जैसे योद्धा ने समर्पण का निर्णय लिया। यह कहीं भी नही लिखा गया है कि अंगे्रजी शासन के विरोध में ओडिसा का पाइका विद्रोह महान बक्सी के ही नेतृत्व में हुआ। उस समय इतिहास उन लोगों के द्वारा लिखा जाता था जो अंग्रेजों के अधीन होकर अंग्रेजों को खुश करने के लिए लिखते थे। लेकिन आज भी हमारे इतिहासकार सच को खोजने का साहस नहीं कर रहे हैं। हमारा इतिहास भी अब जाति व्यवस्था से ग्रसित हो चुका है। इस जाति की लड़ाई से हमारा सामाजिक और राजनीतिक समन्वय भी अब खतरे में आ रहा है। ऐसी कई अव्यवस्थित विचारधाराएं है, जो अपने आप को बुद्धजीवी होने का दावा करती तो है, लेकिन कहीं न कहीं अपने राजनीतिक लाभ के लिए समाज को बांटने का काम करती हैं। इसी प्रकार की जातिगत लड़ाई गुजरात विधानसभा चुनाव में देखने को मिल रही है जिसमें कुछ पाटीदार समाज के लोग आरक्षण की मांग कर रहे हैं और इसका ही परिणाम है कि अन्तत: कांग्रेस कुछ चंद वोट पाने के लिए हार्दिक पटेल द्वारा बिछाए गए जाल में फस ही गई।

अब एक बार फिर पद्मावती की बात करते है। फिल्म रिलीज होने से पहले और सेंसर बोर्ड के पास जाने से पहले भंसाली ने इस फिल्म को कुछ चन्द लोगों को दिखाया। इन लोगों का कहना है कि फिल्म में ऐसी कोई विवादित घटना नहीं है, जिसमें राजपूत योद्धाओं को अपमानित किया गया हो। प्रश्न यह उठता है कि आखिर राजपूत समाज से किसने कह दिया कि फिल्म में अलाऊदीन खिलजी पद्मावती के संग स्वप्न में प्रेम-प्रसंग की बात सोचता है? करणी सेना फिल्म के खिलाफ हिंसात्मक क्यों हो रही है? सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि इस फिल्म के संबन्ध में सेंसर बोर्ड को निर्णय लेना चाहिए। फिर राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात की सरकार ने इस पर कैसे रोक लगा दी?  क्या मात्र कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए? मैं ऐसा नही मानता। हमारी सरकारों के साथ समस्या यह है कि हमारी सरकारें बजाय शरारती तत्वों पर कार्रवाई करने के, इन विवादों से किनारा कर लेती है, जिसका कारण हम सभी समझते है। उदाहरण के तौर पर एमएफ हुसैन की 2002 में रिलीज हुई  ‘गज गामिनी’ फिल्म थी जो पूर्ण रूप से विवादित थी और उस पर भी इसी प्रकार का विवाद हुआ था। मेरी समझ से  हुसैन की वह फिल्म असभ्य थी जिसे समाज में नहीं लाना चाहिए था। अत: जितना ही कम हम उस फिल्म के बारे में बात करें, उतना ही हमारे पाठको के लिए सही होगा।

इसी तरह देश के प्रसिद्ध फिल्मकार संजय लीला भंसाली हैं, जो भारत की संस्कृति, सभ्यता और भारतीय महिलाओं को अपमानित करने जैसी फिल्में बनाकर विवाद खड़ा करते रहते हैं। भारत में कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं। पद्मावती के विषय में सभी लोग जागरूक हैं। सबको पता है कि पद्मावती अपने अंतिम समय तक अलाऊदीन खिलजी से लड़ाई लड़ती रही। अन्त में अलाऊदीन खिलजी जैसे दुराचारी से बचने के लिए इस वीरांगना ने आत्मसमर्पण के बजाय अपने संग की सभी महिलाओं के साथ आत्मदाह (जौहर) कर लिया। भारत की महिलाओं का इतिहास पराक्रमी रहा हैं, जिसे किसी इतिहासकार की प्रमाणिकता की आवश्यकता नहीं हैं। रानी लक्ष्मी बाई उनमें से एक हैं। ऐसे हजारों उदाहरण है जिनमें हमारे देश की महिलाओं ने हमारे इतिहास, संस्कृति और सभ्यता की लाज रखी है। यदि भंसाली पद्मावती की वीरता और पवित्र बलिदान को एक सही दृष्टीकोण से पेश करते हैं तो उनकी सराहना की जा सकती है। कम से कम नई पीढ़ी अलाऊदीन खिलजी जैसे दुष्ट के विरूद्ध रानी पद्मावती के पराक्रम को एक फिल्म के माध्यम से जान पाएगी।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

 

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