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पद्मावती फिल्म हिन्दू भावनाओं के साथ खिलवाड़ क्यों?

पद्मावती फिल्म  हिन्दू भावनाओं के साथ खिलवाड़ क्यों?

फिल्मकार संजय लीला भंसाली की बहुचर्चित फिल्म पद्मावती को लेकर विवाद चरम पर पहुंच गया है। विवाद के बाद निर्माता ने फिल्म का प्रदर्शन टालने का फैसला किया। मगर उससे विवाद थमने के बजाय बढ़ गया है। अब कहा जा कहा है कि अब गुंडागर्दी करके फिल्मों का प्रदर्शन रोका जा रहा है। फिल्मों अब सड़को पर सेंसर होने लगी हैं। हकीकत यह है कि पद्मावती को लेकर देश में जैसा बवाल हो रहा है या जन आक्रोश दिखाई दे रहा है वह अभूतपूर्व है देश में पहले कभी नहीं देखा गया। पद्मावती फिल्म का राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में विरोध किया जा रहा है। तमाम संगठन इस फिल्म को प्रतिबंधित किए जाने की मांग कर रहे है। विरोध करने वालों का साफ तौर पर कहना है कि रानी पद्मिनी पर आधारित फिल्म ‘पद्मावती’ में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है जो स्वीकार नहीं है। फिल्म ‘पद्मावती’ की रिलीज को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी खामोशी तोड़ते हुए राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को चिट्ठी लिखकर आग्रह किया है कि पद्मावती फिल्म तब तक रिलीज न हो, जब तक इसमें जरूरी बदलाव नहीं कर दिए जाएं, ताकि किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। वसुंधरा ने स्मृति ईरानी को लिखे पत्र में कहा है कि इस संबंध में सेंसर बोर्ड को भी फिल्म प्रमाणित करने से पहले इसके सभी संभावित नतीजों पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं को अपनी समझ के अनुसार फिल्म बनाने का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था, नैतिकता और नागरिकों की भावनाओं को ठेस पहुंचने की स्थिति में मौलिक अधिकारों पर भी तर्क के आधार पर नियंत्रण रखने का प्रावधान भारत के संविधान में है, इसलिए ‘पद्मावती’ फिल्म की रिलीज पर पुनर्विचार किया जाए। उप्र के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने भी फिल्म का प्रदर्शन टालने की मांग की थी। मध्य प्रदेश सरकार नें तो घोषणा की है कि वह फिल्म को मप्र में प्रदर्शित नहीं होने देगी।

करणी सेना के विरोध प्रदर्शन के बीच अब सेंसर बोर्ड भी फिल्मकार से नाराज हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने इस बात पर आपत्ति जताई है। दरअसल, सेंसर बोर्ड के फिल्म देखने और सर्टिफिकेशन देने से पहले कुछ लोगों के लिए फिल्म की प्राइवेट स्क्रीनिंग रखे जाने से बोर्ड मेंबर्स नाराज हैं। बोर्ड के प्रमुख प्रसून जोशी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा करके निर्माता ने नियमों का उल्लंघन किया है।

फिल्म  को लेकर आक्रोश इस कदर बढ़ गया  कि अब फिल्म की नायिका और निर्माता को धमकियां दी जाने लगी हैं। राजपूत करणी सेना की ओर से बनाए गए एक वीडियो में महिपाल सिंह मकराना ने कहा, ‘राजपूतों ने कभी औरतों पर हाथ नहीं उठाया। लेकिन जरूरत पड़ी तो हम दीपिका के साथ वही करेंगे जो लक्ष्मण ने शूर्पणखा के साथ किया था।’ पद्मावती विवाद में दीपिका पादुकोण को नाक काटने की धमकी और एक राजपूत नेता की ओर से भंसाली के सिर पर पांच करोड़ का इनाम रखने के बाद मुंबई में दोनों सेलेबस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दूसरी तरफ भारत बंद की चेतावनी भी दी जा रही है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजपूत करणी सेना के चीफ लोकेंद सिंह ने कहा, ‘यदि फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज हुई तो लाखों लोग इसके विरोध में जमा होंगे। हमारे पूर्वजों ने खून से इतिहास लिखा है। हम किसी को इस पर कालिख नहीं पोतने देंगे। हम 1 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘भंसाली की फिल्म पद्मावती के खिलाफ खून से लिखी चिट्ठी हर डीएम और सिनेमाघर के मालिक को भेजी जाएगी। राजपूत समाज हर हाल में सिनेमाघरों में फिल्म की रिलीज होने से रोकेगा’।

लेकिन विवाद बढ़ता देख भंसाली ने पद्मावती के फेसबुक पेज से एक बयान जारी किया है। जिसमें उन्होंने विवाद को शांत करने की एक कोशिश की है।भंसाली ने कहा- मैं रानी पद्मावती की कहानी से हमेशा से प्रभावित रहा हूं और यह फिल्म उनकी वीरता, उनके बलिदान को नमन करती है। पर कुछ अफवाहों की वजह से यह फिल्म विवादों का मुद्दा बन चुकी है। अफवाह यह है कि फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कोई ड्रीम सीक्वेंस या रोमांस दर्शाया गया है। मैंने पहले ही इस बात को नकारा है। लिखित प्रमाण भी दिया है इस बात का।  फिर दोहरा रहा हूं कि हमारी फिल्म में ऐसा कोई सीन नहीं है जो किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाता हो।

भारतीय जनता पार्टी का भी रानी पद्मावती विरोध समर्थन हासिल है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा, ‘फिल्म पद्मावती इतिहास आधारित फिल्म है। इसकी मुख्य किरदार हैं रानी पद्मावती। वो देश की राजपूत और हिंदू समाज में स्वाभिमान का प्रतीक हैं।’ वो कहते हैं, ‘फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी एक मुख्य किरदार हैं, जो एक अक्रांता हैं। सबसे क्रूर और बर्बरता करने वालों शासकों में अलाउद्दीन खिलजी का नाम शामिल है।’

‘कांग्रेस के सुर भी भाजपा से अलग नहीं है। पंजाब में अमरेन्द्र सिंह ने पद्मावती पर रोक लगाने का समर्थन किया है मगर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने विरोध। राहुल गांधी इस मामले पर चुप्पी साधे हैं मगर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने ट्विटर पर एक वीडियो जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं मानता हूं कि अगर इस फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ हुआ है तो वो गलत है। करणी सेना को पहले फिल्म दिखाई जानी चाहिए उसके बाद रिलीज हो। आपत्तियां दूर होने के बाद ही इस फिल्म को रिलीज किया जाना चाहिए।’ शक्ति सिंह गोहिल खुद राजपूत समाज से आते हैं। इनसे पहले कांग्रेस के किसी नेता ने पद्मावती को लेकर खुलकर विरोध का इजहार नहीं किया था। गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में माना जा रहा है कि वो इस बयान से राजनीतिक फायदा लेना चाहते हैं।

संजय लीला भंसाली फिल्म पद्मावती की वजह से बहुत से संगठनों और नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। उनकी फिल्म के सेट पर दो बार हमला हो चुका है। इसके अलावा जयपुर में शूटिंग करते समय राजपूत करणी सेना ने ना केवल सेट पर तोडफ़ोड़ की थी बल्कि फिल्म निर्माता के साथ हाथापाई भी की थी।

इन दिनों संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ की सबसे बड़ी दुश्मन करणी सेना बनी हुई है। ये फिल्म जब से बनना शुरू हुई है, तभी से करणी सेना इसका विरोध कर रही है। वहीं राजस्थान के जयपुर में रानी पद्मावती फिल्म की शूटिंग के दौरान करणी सेना के सदस्यों पर हमला बोल दिया था, जहां सेट पर तोडफ़ोड़ करने के अलावा डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की पिटाई भी कर दी थी।

फिल्म ‘पद्मावती’ के विरोध का झंडा थामने वाली करणी सेना राजस्थान के लिए नई नहीं है और न ही नया है उनकी कार्रवाई का ये अंदाज। इस संगठन ने ‘जोधा अकबर’ फिल्म का प्रदर्शन रोकने की भी कोशिश की थी। करणी सेना के फाउंडर लोकेंद्र सिंह कालवी हैं। ऐसी मान्यता है कि बीकानेर की करणी माता दुर्गा का अवतार हैं। जोधपुर और बीकानेर की रियासतें उन्हें बहुत मानती रही हैं। उन्हीं  की आस्था और शक्ति से प्रेरित होकर संगठन का नाम करणी रखा गया था।

इस बीच 2008 में फिल्म जोधा-अकबर की शूटिंग जयपुर में शुरु हुई और करणी सेना इसका विरोध कर सुर्खियों में आई। तब सभी राजघराने करणी सेना के खिलाफ खड़े हुए। लेकिन तोडफ़ोड़ और हिंसा के डर से जोधा अकबर कभी राजस्थान में रिलीज नहीं हुई। और करणी सेना ने पहली सफलता हासिल की। इसके बाद बॉलीवुड जब भी राजपूतों पर फिल्म बनाती, पहले करणी सेना के लोगों को दिखाई जाती। सलमान खान की वीरा फिल्म भी इनके पास करने के बाद ही रिलीज हुई थी।

पद्मावती फिल्म को लेकर जिस तरह से राजपूत अपनी भावनाएं प्रकट कर रहे हैं, उसे भुनाने के लिए करणी सेना के तीन गुटों के नेता एक दूसरे को पीछे छोड़ देना चाहते हैं। एक नाक काटने की बात करता है तो दूसरा मीडिया में छाने के लिए सिर काटने की बात करता है। अब इनके बीच राष्ट्रीय स्तर पर राजपूतों का संगठन बनाने की होड़ है। पद्मावती फिल्म के विरोध के नाम पर सुखदेव सिंह गोगमेड़, मध्य प्रदेश, गुजरात और बैंगलोर के बाद केरल के कोयंबटूर में रैली कर रहे हैं। वहीं लोकेंद्र सिंह कालवी गुजरात, राजस्थान और यूपी के बाद बिहार में सभा कर रहे हैं। दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर दलाल बताते हुए पैसे इकट्ठे करने का आरोप लगाते हैं।

इस बीच पद्मावती  की ऐतिहासिकता को लेकर भी विवाद छिड गया है। मशहूर गीतकार, लेखक और शायर जावेद अख्तर ने कहा है कि, ‘पद्मावती’ की कहानी सही मायनों में ऐतिहासिक है ही नहीं। वो मानते हैं कि ‘पद्मावती’ की कहानी उतनी ही नकली है जितनी कि सलीम और अनारकली की कहानी। जावेद अख्तर ‘आजतक’ के शो के दरम्यान ये सारी बातें कह रहे थे। उन्होंने कहा कि, ‘अगर सही मायनों में लोगों को इतिहास में रुचि है तो ऐसी फिल्मों के बजाय किताबों से समझना ज्यादा अच्छा होगा। हालांकि मैं इतिहासकार नहीं हूं लेकिन जो लोग इतिहासकार हैं उनकी बातें पढऩे के बाद मैं ये आपसे कह रहा हूं।’

एक टीवी शो के डिबेट का जिक्र करते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि, ‘मैं टीवी पर इतिहास के एक प्रोफेसर को सुन रहा था। वो कह रहे थे कि ‘पद्मावती’ की रचना और अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में तकरीबन 200-250 साल बाद हुई। और गौर करने वाली बात ये है कि इतने सालों में जायसी ने ‘पद्मावती’ लिखी ही नहीं। दूर-दूर तक रानी पद्मावती का जिक्र तक नहीं।’

आपको बता दें कि रानी पद्मावती के दौर में लिखे गए इतिहास के कहीं साक्ष्य तक नहीं मिलते जबकि अलाउद्दीन खिलजी के बारे में बहुत सारी बातें लिखी गईं और इतिहास में उनके किए सारे काम और उनके जिए हकीकत के किरदारों का अब भी जिक्र है। जावेद साहब ने अपने आगे के कथन में कहा कि, ‘कहानियां बन जाती हैं, उसमें क्या है।’

रानी पद्मिनी/पद्मावती हमेशा से दरबारों की कहानी कहने वाले भाट, चारणों का पसंदीदा पात्र तो रही ही हैं। वे आज भी कौतूहल का विषय हैं। शायद यही कारण है कि फिल्म के ट्रेलर को 4 दिन में ही 2.5 करोंड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं। ट्रेलर में पद्मावती कहती है, ‘राजपूती कंगन में उतनी ही ताकत है, जितनी राजपूती तलवार में।’

कहानियों में पद्मावती की जिस तरह की भव्यता जिक्र मिलता है उससे लगता है कि वो किसी रियासत की रानी भर नहीं थी बल्कि एक बेहद खूबसूरत, दिमागी रूप से शक्तिशाली और कलाओं में दक्ष महान महिला थी।

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आज लोगों में पद्मावती की कहानी प्रचलित है वह मलिक मोहम्मद जायसी के पद्मावत पर आधारित है जो पद्मावती के काल के 250 साल बाद लिखा गया है और इतिहास नहीं महाकाव्य है उसपर आधारित है पद्मावती की कथा। उसके मुताबिक रानी पद्मिनी चित्तौडग़ढ़ के रावल रतन सिंह की पत्नी थी। 450 साल पहले सूफी-साहित्यकार मलिक मोहम्मद जायसी के लिखे ‘पद्मावत’ के मुताबिक वो सिंहल द्वीप (श्रीलंका) की राजकुमारी थी। हरिमन तोता पद्मावती और रतन सिंह के प्यार से स्वयंवर तक की कड़ी और संदेशवाहक था।

चित्तौडग़ढ़ से करीब 800 किलोमीटर दूर दिल्ली में ये समय सल्तनत काल था। 1303 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला किया। चित्तौड़ पर यह किसी मुस्लिम शासक का पहला हमला था। किस्सों में इस हमले से जुड़ी कई कहानियां मिलती हैं।

‘पद्मावत’ के अनुसार चित्तौड़ से निष्कासित राघव पंडित ने अलाउद्दीन के सामने पद्मिनी की खूबसूरती का इतना बखान किया था कि उसने पद्मावती को पाने के लिए चित्तौड़ पर चढ़ाई कर दी। महीनों चित्तौड़ किले का घेरा डाले वह पड़ा रहा। लेकिन कोई नतीजा निकलता न देख उसने छल कपट की नीति अपनाई। संधि का नाटक कर उसने रतन सिंह को बंदी बना लिया।

इसके बाद बहादुर रानी पद्मिनी ने योजना के तहत सुल्तान को मिलने आने का पैगाम भिजवाया। 1600 डोलियों में रानी का लवाजमा दुश्मन के खेमें में पहुंचा। लेकिन इन डोलियों में रानी की दासियां नहीं बल्कि चित्तौ के सैनिक थे। पद्मिनी गोरा और बादल नाम के अपने सेनापतियों की मदद से रावल को छुड़ाने में कामयाब रही। सुल्तान को पद्मिनी की इस चतुराई भरी वीरता का पता लगा तो उसने राजपूत सेना का पीछा किया। लेकिन रावल किले में पहुंचने में सफल रहे।

रतन सिंह के सुल्तान की कैद में होने के दौरान कुंभलनेर के राजा देवपाल ने पद्मिनी को विवाह प्रस्ताव भिजवाया था। रतन सिंह को पता चला तो वह देवपाल से युद्ध करने पहुंच गया। युद्ध मे देवपाल की मौत हो गई लेकिन रतन सिंह भी घायल हो गया।

कुछ दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई और पद्मिनी, रावल की पहली पत्नी नागमती के साथ सती हो गई। इसी समय अलाउद्दीन भी चित्तौड़ में घुस चुका था लेकिन पद्मिनी को पाने की उसकी इच्छा अधूरी ही रह गई।

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एक कहानी ऐसी भी

एक दूसरी कहानी के मुताबिक, राघव पंडित से पद्मिनी की खूबसूरती की चर्चा सुनकर चित्तौड़ पहुंचे अलाउद्दीन ने रानी की एक झलक के बदले रतन सिंह को घेरा उठाने का प्रस्ताव भेजा। उसे शीशे में रानी का चेहरा दिखाया गया। लेकिन ये मुंह दिखाई ही चित्तौड़ के लिए काल बन गई। पद्मावती की खूबसूरती देख कर तो जैसे अलाउद्दीन पागल ही हो गया। अब उसने अपना इरादा बदल दिया। उसने रतन सिंह को पद्मावती या चित्तौड़ के राज्य में से एक चुनने का पैगाम भेजा। रावल ने युद्ध चुना।

पद्मावती ने जौहर का साहसिक फैसला किया। अलाउद्दीन को उसके खूबसूरत शरीर की राख भी नसीब नहीं हुई। पद्मावती ने सैकड़ों दूसरी महिलाओं के साथ ‘जौहर’ कर राजपूताने के दूसरे ‘साके’ को पूरा किया।

क्या होता है साका?

राजपूत राज्यों में युद्ध के दौरान जब दुश्मन पर जीत की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती थी तो साका किया जाता था। साका के तहत दो काम किए जाते थे- केसरिया और जौहर। जौहर महिलाएं करती थी जबकि केसरिया पुरुष करते थे।

केसरिया अंतिम युद्ध होता था। इसमें सभी योद्धा सिर्फ मारने या मरने की ही शपथ लेते थे। यानी उन्हें जिंदा लौटना ही नहीं होता था। सभी योद्धा सिर पर केसरिया पगड़ी बांध लेते थे, किले के सभी दरवाजे खोल दिए जाते थे और ये केसरिया दस्ता इतनी तेजी से दुश्मन पर टूट पड़ता था कि वो भौंचक रह जाता था।

चूंकि इस केसरिया दस्ते को जिंदा नहीं लौटना होता था इसलिए पीछे रही रानियां और बाकी सभी महिलाएं भी जौहर के जरिए अपनी जान दे देती थी। जौहर यानी आग में जिंदा जल जाना। ये इसलिए होता था ताकि दुश्मन के नापाक हाथ उनके शरीर को छू न सकें।

1303 के तुरंत पहले और बाद के 250 वर्षों में रणथंभौर, चित्तौडग़ढ़, झालावाड़, जैसलमेर में कई और साके हुए। जौहर का ये सिलसिला अकबर की राजपूत राजाओं के साथ संधि और वैवाहिक संबंधों के बाद ही खत्म हुआ।

पद्मावती का अर्धसत्य

पद्मावती और रतन सिंह की प्रेम कहानी के पुरातात्विक साक्ष्य नहीं हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय में इतिहास के शोधार्थी रामानंद यादव का कहना है कि ये जानकारी हमें सिर्फ साहित्य से मिलती है। साहित्य में भी या तो मलिक मोहम्मद जायसी इसका उल्लेख करते हैं या फिर फरिश्ता।

लेकिन जायसी ने चित्तौड़ युद्ध के करीब 300 साल बाद इसके बारे में लिखा तो फरिश्ता ने युद्ध के करीब 375 साल बाद पद्मिनी के बारे में बताया। जाहिर है, इसी वजह से इसकी सच्चाई पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जायसी ने कहानी के लौकिक और अलौकिक रूप, प्रेम के समर्पण और वासना भरे दो पहलू और रूपक अलंकार का शानदार चित्रण किया है, लेकिन सच्चा इतिहास वो माना जाता है जिसका साक्ष्य हो।

यही वजह है कि संजय लीला भंसाली की ये फिल्म विवादों में भी घिरी रही है। पहले राजपूतों ने भंसाली पर ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। श्री राजपूत करणी सेना ने कुछ साल पहले आशुतोष गोवरिकर की जोधा अकबर को भी राजस्थान में रिलीज नहीं होने दिया था।अब एक बार फिर ऐतिहासिक फिल्म  कहने वाली पद्मावती को विरोध और बैन की मांग का सामना करना पड़ रहा है।

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रानी पद्मिनी/पद्मावती हमेशा से दरबारों की कहानी कहने वाले भाट, चारणों का पसंदीदा पात्र तो रही ही हैं। वे आज भी कौतूहल का विषय हैं। ट्रेलर में पद्मावती कहती है, ‘राजपूती कंगन में उतनी ही ताकत है, जितनी राजपूती तलवार में।’ कहानियों में पद्मावती की जिस तरह की भव्यता जिक्र मिलता है उससे लगता है कि वो किसी रियासत की रानी भर नहीं थी बल्कि एक बेहद खूबसूरत, दिमागी रूप से शक्तिशाली और कलाओं में दक्ष महान महिला थी। पद्मावती के इतिहास के नाम पर कुछ कहानियां ही है। उन्हीं को इतिहास कहा जा रहा है। लेकिन करणी सेना के अपने तर्क हैं। कालवी ने दावा किया था कि निमार्ता फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। कालवी ने कहा, ‘हम किसी भी मूल्य पर फिल्म में छेड़छाड़ किए गये तथ्यों को दिखाए जाने की अनुमति नहीं देंगे व यह सुनिश्चित करेंगे कि फिल्म हिंदुस्तान के आधे हिस्से में प्रदर्शित ना हो सके।’

करणी सेना ने दावा किया है कि किसी भी किताब में यह नहीं लिखा की 13वीं-14वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश के एक ताकतवर शासक अलाउद्दीन खिलजी को पद्मावती से प्यार हुआ था या वह उनका प्रेमी था।कालवी ने कहा, ‘अगर 16 हजार स्त्रियों के साथ जौहर करने वाली पद्मवती को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका दर्शाया जाएगा, ये बर्दाश्त कैसे किया जाएगा?’ की सभा में जुटे राजपूत समाज के लोग

उन्होंने आगे कहा, ‘आज पूरे देश फिल्म को लेकर आक्रोश है। लोग फिल्म पर बैन लगाने की मांग कर रहे हैं। हमारे बुजुर्गों के खून से इतिहास लिखा गया है। आज उसपर कालिख पोतने का प्रयास नहीं चलेगा।’

दरअसल पद्मावती के विरोध की शुरूआत इस तरह हुई कि एक इंटरव्यू में फिल्म में अल्लाहुदीन खिलजी का रोल करने वाले रणवीर सिंह द्बारा ऐसा कहा गया कि मेरा और दीपिका जो फिल्म में पद्मावती का रोल कर रही है। उसका एक ड्रीम सिक्वल है जिसमे हम रोमैन्स कर रहे है। इस बात से राजपूत समाज गुस्से में हैं। क्योंकि राजपूतों के लिए मां पद्मिनी उनकी मां के समान है और पूजनीय है। और कोई भी स्वाभिमानी इंसान अपनी मां का अपमान नहीं सह सकता। जिस मां पद्मिनी ने अपने स्वाभिमान को बचाने के लिए हजारो स्त्रियो के साथ जौहर कर लिया उसको आप एक लुटेरे के साथ रोमैन्स करते हुए बताये यह बर्दास्त के बहार है।

फिल्म पद्मावती को लेकर कई मुद्दे करणी सेना उटा रही है।

  • पद्मावती के रूप में दीपिका पादुकोण और अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका में रणवीर सिंह के बीच कथित रोमांटिक सीन- करणी सेना ने जयपुर में ऐसे ही किसी सीन का हवाला देकर फिल्म के सेट पर तोडफ़ोड़ की थी। करणी सेना का आरोप है कि ये इतिहास के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। हालांकि फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने ऐसे किसी भी सीन होने से इंकार किया है।
  • कुछ राजनेताओं और राजघरानों की तरफ से ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है।
  • करणी सेना का आरोप है कि फिल्म में घूमर गाने को गलत पिक्चराइज किया गया है। उनका दावा है कि ना ही तो घूमर नृत्य ऐसे किया जाता है और ना ही पुराने समय में रानी ऐसे किसी नृत्य में हिस्सा लेती थीं।
  • घूमर गाने में ‘असभ्य कपड़ों’ का आरोप- फिल्म का विरोध कर रहे कुछ लोगों का कहना है कि घूमर गाने में रानी पद्मावती का रोल निभा रहीं दीपिका पादुकोण ने ‘असभ्य कपड़े’ पहने हैं। साथ ही उनका आरोप है कि जैसा गाने में दिखाया गया है कि रानी लोगों के सामने नृत्य कर रही हैं ऐसा कुछ होता नहीं था। रानी ने कभी लोगों के सामने नृत्य नहीं किया।
  • फिल्म पद्मावती ‘हिंदुत्व पर हमला है’- विश्व हिंदू परिषद् के एक नेता का आरोप है कि ये फिल्म ‘हिंदुत्व पर हमला है’। उन्होंने कहा कि ये फिल्म देश विरोधी और हिंदू विरोधी है। हालांकि फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने अपने एक बयान में कहा था कि यह फिल्म देखकर हिंदू और राजपूत समुदाय को गर्व होगा।
  • अलाउद्दीन खिलजी को ‘ग्लैमराइज’ किया गया है- केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को लिखे अपने पत्र में हरियाणा के मंत्री विपुल गोयल ने कहा है कि फिल्म को लेकर हरियाणा के लोगों में गुस्सा है। उन्होंने लिखा कि इस गुस्से की वजह अलाउद्दीन खिलजी के नकारात्मक किरदार को ग्लैमराइज करना है।

आपको बता दें कि सेंसर बोर्ड ने भी अभी तक ये फिल्म देखी नहीं है। फिल्म को बैन करने और रिलीज कैंसल करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि फिल्म को पास करने का अधिकार सेंसर बोर्ड को है।

इन सबके बावजूद फिल्म को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। करणी सेना ने फिल्म रिलीज होने की सूरत में देशभर में बंद बुलाने का आह्वान किया है साथ ही थियेटर मालिकों को भी धमकी दी है कि अगर उनके थियेटरों में फिल्म दिखाई जाएगी तो उस समय होने वाले नुकसान के वे खुद जिम्मेदार होंगे।

जाने माने पत्रकार हरिशंकर व्यास ने पद्मावती विवाद पर बहुत बेबाक टिप्पणी की है। वे कहते हैं – पुराण की कथा में यदि रावण खलनायक है तो यह कल्पना नहीं बन सकती है, फिल्म का यह फिल्मांकन नहीं हो सकता कि रावण के सपनों में सीता नाचती दिखलाई दे। क्या कोई फिल्मकार अपनी क्रिएटिविटी में रावण के सपनों में सीता की महफिल फिल्मा सकता है?

सो, अलाउद्दीन खिलजी यदि मध्यकाल का आक्रांता खलनायक है। मेवाड़, चित्तौडग़ढ़ पर बर्बर हमले के मिशन में उसकी अपनी हवस में पद्मावती को गुलाम बनाना था तो वह उसकी राक्षसी, बलात्कारी मंशा, प्रवृति से क्या नहीं था? उसमें कहां से सपनों की रंगीनियां आ गईं?

खिलजी वह क्रूरता, जघन्यता लिए था कि महारानी को जौहर करना पड़ा। मान लें कि खिलजी के पद्मिनी को शीशे में देखने आदि के किस्से मिथक लिए हों। मगर इतिहास का यह निर्विवाद तथ्य है कि खिलजी ने हमला किया। एक महारानी को अपने हरम में लिवा लाने, हवस का शिकार बनाने के लिए युद्धोन्माद दिखाया। तारीख, घटनाक्रम सब अपनी जगह उल्लेखित हैं। जब वह है तो महफिल कैसे बनेगी?

सोचें, कोई बलात्कारी है, किसी स्त्री के साथ उसने बलात्कार का जघन्य अपराध किया या महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर किया तो उस सच में कथा कैसे ऐसी फिल्म स्क्रिप्ट में तब्दील हो सकती है कि बलात्कारी के सपनों में महिला नाच रही थी? वह उसके प्रेम, रोमांस में डूबा हुआ था और जो हुआ उसका एक पहलू यह भी है!’

आखिर कुछ भी हो केंद्र में मोदी सरकार है। हिंदू राष्ट्रवादी सरकार का सेंसर बोर्ड फिल्म को पास ही नहीं करेगा। आखिर जब योगी आदित्यनाथ से ले कर मनोहर लाल खट्टर सरकार, हिंदुवादी संगठन, करणी सेना, राजपूत समाज सब जब हिंदू भावनाओं का हवाला दे कर स्टैंड ले चुके हैं तो फिल्म सेंसर बोर्ड में ठप्पा पा ही नहीं सकती। इसलिए पूरा हल्ला धूल में लठ्ठ है।

यही हुआ भी अब निर्माता ने खुद फिल्म की रिलीज टाल दी है। यह नहीं बताया कि फिल्म अब कब रिलीज होगी। मगर इससे विवाद थम नहीं रहा है उलझता ही जा रहा है। विरोधी कह रहे है कि सरकार गुंडागर्दी के सामनें झुक गई है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोटा जा रहा है। वही दूसरी तरफ वो लोग है फिल्म की रिलीज टलने पर जीत का जश्न मना रहे है कि कम से कम इतिहास से छेड़छाड़ करनेवाले निर्देशक पर कुछ तो अंकुश लगा।

सतीश पेडणेकर

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