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आदिवासी समाज में भारत की संस्कृति

आदिवासी समाज में भारत की संस्कृति

भारत में आदिवासी समाज की जनसंख्या विभिन्न्न राज्यों में एक बड़ी संख्या में विद्यमान है। इस देश के आदिवासी समाज ने हमेशा भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति को एक मजबुत कड़ी के रूप में बनाए रखा है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी में आदिवासियों की संख्या 8.61 प्रतिशत है जो लगभग 10 करोड़ से ऊपर है। भारत की विरासत को बचाये रखने वाला यह बहुमूल्य समाज देश के कुल क्षेत्रफल के लगभग 15 प्रतीशत भाग पर निवास करता है। सभी सरकारें अपने-अपने प्रकार से इस समाज की भलाई करने के लिए कुछ न कुछ कदम उठाती रहीं हैं। फिर भी आज के आधुनिक दौर में इस समाज के उपर ध्यान देने की आवश्यकता है, जिससे उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं कमजोर सहभागिता के संकेत को समझा जा सके। साथ ही साथ बिजली, पानी अथवा कृषि योग्य भूमि का उपयोग, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में आदिवासी समुदाय का सामान्य जनसंख्या की तुलना में  काफी अंतर है, यह भी हमे समझाने की आवश्यकता है। आधी से अधिक आदिवासी जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे है तथा आधे आदिवासियों के पास यातायात एवं दूरसंचार का कोई साधन उपलब्ध नहीं है।

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इसी संदर्भ में आदिवासी समुदाय को ताकतवर बनाने के लिए आदिवासी व जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने ट्राईफेड के माध्यम से आदिवासी शिल्पकला के व्यापक प्रसार तथा आर्थिक विकास को तेज करने के उद्देश्य से ‘ट्राइब्स इंण्डिया’ के शोरुमों की स्थापना संपूर्ण भारत में  की है। इनसे भारतीय आदिवासी अपनी जादुई अभिव्यक्ति के माध्यम से उत्पादित कला और शिल्प वस्तुओं का विपणन और प्रदर्शन करते हैं।  ट्राईफेड का मुख्य उद्देश्य आदिवासी उत्पादों के विपणन विकास के क्रियान्वयन के लिए आपसी सहयोग तथा लोकतांत्रिक तरीके से स्व-सहायता व अपने आयोजनों के माध्यम से अपने सदस्यों की आर्थिक समुन्नति एवं समाज के लिए एक राज्य से अधिक राज्यों में अपने सदस्यों के हित को मजबूत करना है। नई बहुराज्यीय सहकारी समितियाँ अधिनियम, 2002 के प्रचलन में आने के पश्चात, ट्राईफेड ने अपने बायलाज में संशोधन किया जो 02-04-2003 से प्रभावी हुए और अधिशेष कृषि उत्पाद एवं लघु वन उपज उत्पाद की बिक्री तथा खरीदी के लिए अपनी पूर्व गतिविधियों के स्थान पर आदिवासी उत्पादों के लिए एक बाजार विकासकर्ता एवं संयोजक, सुविधा प्रदाता, सेवा प्रदाता के रुप में कार्य प्रारंभ किया।

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इसी परिप्रेक्ष्य में, देश के आदिवासी समाज के हस्तशिल्प, कला, पेंटिंग, वस्त्र, आभूषण और अन्य कलाओं को प्रदर्शित करने वाला 15 दिन का आदि महोत्सव दिल्ली हाट में हाल ही में शुरू हुआ। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आदिवासी उत्सव – आदि महोत्सव का उद्धघाटन किया। इस अवसर पर आदिवासी मामलों के मंत्री जुएल ओराम व जनजातीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत मौजूद थे। समारोह में सचिव लीना नायर, ट्राइफैड के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्णा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।  उदय इंडिया से बात करते हुए ट्राईफेड  के एमडी प्रवीर कृष्णा ने कहा कि महोत्सव में 25 राज्यों के 750 से अधिक आदिवासी कारीगर भाग ले रहे हैं। आदि महोत्सव दिल्ली में चार स्थानों आईएनए, जनकपुरी, सेंट्रल पार्क- राजीव चौक और हस्तशिल्प भवन, बाबा खडग़ सिंह मार्ग पर आयोजित हुआ। सभी स्थानों पर प्रत्येक शाम लोगों ने आदिवासी संगीत और नृत्य का आनंद लिया। उत्सव के दौरान 20 राज्यों के करीब 300 आदिवासी कलाकार ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। महोसत्व में जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और गुजरात से लेकर नागालैंड एवं सिक्किम के हुनरमंद आदिवासी कारीगरों द्वारा तैयार आदिवासी वस्त्र खरीददारी के लिए प्रस्तुत किया गया। उत्सव में परम्परागत आदिवासी आभूषण व बांस से बना सामान आकर्षण का केन्द्र बना रहा।

 

रवि मिश्रा

 

 

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