राजस्थान में सियासी रणभेरी

राजस्थान में सियासी रणभेरी

सत्ता के सपने संजोये कांग्रेस ने राजस्थान की वसुंधरा सरकार पर हर मोर्चे पर विफलता का राग अलापते हुए बूथ प्रबंधन को बेहतर बनाने के साथ भाजपा के असंतुष्ट नेताओं पर डोरे डालने की रणनीति अपनाने की जुगत की है तो सत्तारूढ़ भाजपा अपना घर बचाने के लिए कमर कसने में जुटी है। पार्टी ने पहली बार खेल कबड्डी को भी चुनावी राजनीति का मोहरा बनाया है। वर्ष 2018 की आखिरी तिमाही में पन्द्रहवीं विधानसभा के गठन के लिए होने वाले चुनाव से पहले सेमीफाइनल मैच के रूप में अजमेर-अलवर लोकसभा एवं मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) विधानसभा क्षेत्र का प्रस्तावित उपचुनाव दोनो दलों के लिए मैदाने जंग का प्रतीक बन गया है। इसमें हार जीत से मतदाताओं के रूझान का पता चल सकेगा। संयोगवश प्रदेश में इस सियासी रणभेरी के लिए हिन्दी दिवस 14 सितम्बर विशेष आकर्षण का केन्द्र बन गया। इसी दिन भारतीय जनता पार्टी ने जयपुर में चिंतन बैठक बुलायी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का छ: दिवसीय संगठनात्मक प्रवास आरम्भ हुआ। उधर जदयू के बागी नेता शरद यादव की पहल पर साझा विरासत बचाओ अभियान का तीसरा सम्मेलन आयोजित किया गया।

दिल्ली इंदौर के बाद जयपुर के बिड़ला सभागार में आयोजित सम्मेलन के कर्ता धर्ता कांग्रेस पार्टी के नेता थे और मंच से लेकर सभागार में कांग्रेसजनों का दबदबा था। चौदह विपक्षी दलों में से अधिकांश के बड़े नेताओं की गैर मौजूदगी में भाजपा तथा आरएसएस को कोसने की रस्म अदायगी के रूप में यह सम्मेलन साझा विरासत का कोई संयुक्त रोड़मेप नहीं दे पाया। अलबत्ता अभियान के संयोजक शरद यादव ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 69 फीसदी वोट लेकर बिखरे विपक्षी दलों की तुलना में 31 प्रतिशत मतों से भाजपा के सत्तारूढ़ होने का राग अलापा और बिखरे विपक्ष तथा मतदाताओं को एक जुट कर राष्ट्र बचाने का भरोसा दिलाया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की गैर मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने मोर्चा संभाला और भावी सकारात्मक राजनीति पर बल दिया।

मई माह के बाद भाजपा की इस चिंतन बैठक में 2018 का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए बूथ प्रबन्धन पर फोकस से पहले लोकसभा एवं विधानसभा के लिए उपचुनाव पर चर्चा को प्राथमिकता दी गई। भाजपा सरकार की चौथी व अंतिम वर्षगांठ 13 दिसम्बर को बड़े पैमाने पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया ताकि कल्याणकारी योजनाओं की गूंज जन-जन तक सुनायी जा सके। राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी.सतीश के सानिध्य में सम्पन्न इस बैठक में नये प्रदेश संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर भी उपस्थित थे।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यों के 110 दिवसीय संगठनात्मक दौरे में पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार संवाद तथा समन्वय के मंत्र के साथ ”बूथ जीतो चुनाव जीतों”का रणनीतिक नारा दिया है। इसलिए मंत्री से लेकर निचले स्तर तक के जनप्रतिनिधियों को मतदान बूथ की जिम्मेदारी सौंपने से यह कयास लगाया गया कि इस कार्यप्रणाली से भाजपा सम्भवत: संघ पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन संघ ने आठ साल के बाद अपने प्रचारक चन्द्रशेखर को प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री पद के लिए भेजा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठनमंत्री रहे चन्द्रशेखर को पदोन्नत कर राजस्थान भेजकर प्रदेश में अब नया पावर सेंटर बनाने की पहल की गई है। उन्होने 23 अगस्त को काम आरम्भ किया और अगले दिन प्रदेश पदाधिकारियों व भाजपा मोर्चा अध्यक्षों की बैठक में आगामी कार्य योजना के बारे में चर्चा की। अगले सप्ताह प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी से लगभग साढ़े सात घंटे तक लम्बी मंत्रणा में पार्टी कामकाज का फीडबैक लिया। विभिन्न मैराथन बैठको में पार्टी के संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर ने कड़े और साफ  शब्दो में चेताया है कि अब महज कागजी नहीं वरन् काम करने वाले कार्यकर्ता ही पार्टी में टिक पायेंगे। बूथ प्रबंधन की मजबूती के लिए विस्तारक योजना से जुड़े कार्यकर्ताओं से फ ीडबैक लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए। प्रदेश अध्यक्ष परनामी भी कह चुके हैं कि बूथ इकाई को संपूर्ण इकाई बनाया जायेगा। इसी उद्देश्य से प्रदेश में 47 हजार बूथों के अनुसार मंडल स्तर पर कबड्डी प्रतियोगिता की शुरूआत की गई है। जिला एवं राज्य स्तर पर इस प्रतियोगिता के माध्यम से लगभग दस लाख युवाओं को पार्टी से जोडऩे का लक्ष्य है। कबड्डी को दलीय राजनीति से जोडऩे में पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन सिंह गहलोत की अहम भूमिका है जो ओलम्पिक खेलो में कबड्डी को शामिल कराने के लिए प्रयत्नशील है। कभी कांग्रेस से जुड़े रहे गहलोत ने जयपुर में कबड्डी मैचों के आयोजन से युवाओं की टीम के बलबूते विधायक का चुनाव जीता। वह मंत्री भी बने और भाजपा में शामिल होकर अभी वह भण्डारण निगम के अध्यक्ष है।

संघ प्रमुख भागवत के जयपुर पहुंचने से पहले राज्य सरकार ने आंदोलनरत किसानों से समझौता करके किसानों की कर्जमाफी के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का कदम उठाया। अपने प्रवास में भागवत ने संघ शाखाओं की मजबूती पर बल देते हुए निर्देश दिया कि पुरानी शाखाओं से जुड़े कार्यकर्ता समाज की नई आवश्यकताओ के अनुरूप योजना बनाकर इस दिशा में काम करे तथा शाखाओं को भी सेवा का माध्यम बनाये। समाज में समरसत्ता के लिए समाज में एक ही शमशान, मन्दिर और एक ही जल स्त्रोत के उपयोग के प्रति भावना जागृत करनी होगी। इसी संदर्भ में उन्होने संतो से मुलाकात कर हिन्दू समाज के लिए संचालित सेवा कार्यो के बारे में चर्चा की। संघ प्रचारकों की बैठक में भी भागवत ने स्वस्थ समाज एवं सफल राष्ट्र के लिए सामाजिक समरसता की पहली जरूरत बताया और प्रचारकों से कहा कि वह सबके मित्र बने तथा परिवारों की आपस में मित्रता का माध्यम बने। इस कदम से समाज तोडऩे वाले तत्वों के प्रयास भी विफ ल होंगे। कार्य विस्तार एवं कार्य के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रचारकों को टोली निर्माण पर ध्यान देना होगा। प्रचारकों को स्वास्थ्य, स्वाध्याय और स्मरण को और बेहतर करके विवेकशीलता के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। सहजता एवं अनौपचारिकता संघ कार्य की विशिष्ठता है। सामाजिक साधना के प्रकार के नाते प्रचारक को समाज में रहते हुए निर्लिप्त भाव से देश-समाज हित में कार्य करना होता है। प्रचारक  यानि कि परिश्रम की पराकष्ठा हो। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने भी भारती भवन जाकर संघ प्रमुख से चर्चा की।

स्वास्थ्य कारणों से मोदी मंत्रिमण्डल से त्याग पत्र देने वाले अजमेर के सांसद प्रो.सांवर लाल जाट और अलवर से सांसद महंत चांदनाथ एवं भीलवाड़ा जिले के माण्डलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की विधायक कीर्ति कुमारी के निधन के कारण उपचुनाव कराये जाने हैं। इन तीनों स्थानों पर भाजपा का कब्जा था। राज्य विधानसभा के आम चुनाव से पहले ये उपचुनाव सत्तारूढ़ भाजपा एवं प्रतिपक्ष कांग्रेस के लिए अग्नि परीक्षा के सबब बन गये है। भाजपा अपनी चुनावी जीत को बरकरार रखने और कांग्रेस अपना खाता खोलने के लिए पूरा दम झोंकने में जुटी है। प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट 2009 के चुनाव में अजमेर से विजयी होकर डॉ.मनमोहन सिंह मंत्रिमण्डल में शामिल किये गये थे। उन्होने विकास कार्यो के माध्यम से अजमेर जिले को पहचान दिलायी। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा के प्रो.सांवरलाल जाट से करीब पौने दो लाख मतों से पराजित हुए सचिन पायलट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा के चार उपचुनाव मे तीन सीटों पर सफलता मिलने से सचिन और कांग्रेस की बल्ले बल्ले हो गई। पायलट पार्टी संगठन को मजबूत बनाने मे जुटे हैं। सचिन पायलट सार्वजनिक तौर पर पार्टी हाईकमान के निर्देश पर उपचुनाव लडऩे की घोषणा कर चुके हैं लेकिन अंदरूनी कहानी कुछ और है। भाजपा द्वारा दिवंगत सांवरलाल जाट के किसी परिजन को उम्मीदवार बना सहानुभूति लहर से चुनाव जीतने की कोशिश के चलते कांग्रेस ने अपने तर्कों का पैंतरा बदला है। अजमेर उपचुनाव जीतने का दावा करने वाली कांग्रेस ने नया तर्क गढ़ा है कि विधानसभा चुनाव में सफलता मिलने पर प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को सरकार का नेतृत्व करना होगा। उस सूरत में लोकसभा से त्यागपत्र देने से गलत संदेश जाएगा लिहाजा अजमेर से किसी अन्य मजबूत उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारना मुनासिब होगा। कमोबेश यही स्थिति अलवर संसदीय क्षेत्र की है जहां यादव वोटों के बलबूते भाजपा चुनाव वैतरणी पार करने की मंशा पाले हुए है तो पिछले चुनाव में पराजित हुए पूर्व मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह पर पुन: दाव खेलने में कांग्रेस संशय में है। कांग्रेस की चिंता यह भी है कि अजमेर अलवर में सफलता नहीं मिली तो अप्रैल 2018 में संसद के दोनों सदनों मे कांग्रेस की गैर मौजूदगी एक इतिहास बन जाएगी। लोकसभा के पिछले चुनाव में सभी 25 सीटों  पर भाजपा को सफलता मिली थी। राज्यसभा मे कांग्रेस सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी एवं नरेन्द्र बुडानिया का कार्यकाल 03 अप्रैल 2018 को पूरा होना है।

भाजपा ने यह उपचुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। अजमेर, अलवर संसदीय  क्षेत्र के सभी आठ-आठ विधानसभा क्षेत्रों के लिए मंत्रियों तथा पार्टी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में अजमेर जिले का तीन दिवसीय दौरा पूरा किया है तथा विभिन्न जातीय समाजों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी नब्ज टटोली है। अलवर में प्रदेश भाजपा ने कार्यसमिति की बैठक नौ अक्टूबर को आयोजित की है। भीलवाड़ा जिले का मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। यह पूर्व मुख्यमंत्री स्व.शिवचरण माथुर की राजनीतिक कर्मभूमि रही है। भाजपा की कीर्तिकुमारी 2003 में माथुर से पराजित हुई और 2008 में मामूली अंतर से हारी लेकिन 2013 के चुनाव में वह 18 हजार वोटो से विजयी हुई। चौदहवी विधानसभा में अब तक पांच उपचुनाव हो चुके है। लोकसभा चुनाव में जीते चार विधायकों के त्यागपत्र से रिक्त सीट वैर, सूरतगढ़ एवं नसीराबाद पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया। कोटा दक्षिण सीट भाजपा के पास रही। धौलपुर उपचुनाव में जीत से वसुंधरा राजे का वर्चस्व बना रहा। अब मांडलगढ़ के साथ अजमेर-अलवर संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव  क्या गुल खिलायेगा-यह देखना होगा? इन उपचुनावों से पहले राजस्थान के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ के चुनावो में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की बड़े विश्वविद्यालयों में पराजय ने भाजपा तथा संघ की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ो के हिसाब से विद्यार्थी परिषद् ने एन एस यू आई के मुकाबले अधिक स्थानों पर जीत का दावा किया है। लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में विद्यार्थी परिषद् प्रत्याशी की लगातार चौथी हार अत्यंत शर्मनाक मानी गई है। दो बार तो विद्यार्थी परिषद के बागी प्रत्याशियों ने अपने मूल संगठन के उम्मीदवार को पराजित किया है। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर तथा महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय अजमेर में भी परिषद को पराजय का सामना करना पड़ा है। छात्रसंघ चुनाव में बागियों से पराजय को लेकर विद्यार्थी परिषद् पॉलिसी बनाने में जुटी है। परिषद् ने संघ की तर्ज पर राजस्थान में तीन संगठनात्मक प्रांत बनाकर संगठन मंत्री बनाये हैं।

कांग्रेस भी भाजपा की तर्ज पर बूथ प्रबंधन में जुटी है। पार्टी के संगठन चुनाव की आपाधापी बूथ कमेटियों में अपनो-अपनों को खपाने की कवायद में पार्टी नेताओं में घमासान है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस के सक्रिय सदस्यो की संख्या 14 लाख से बढ़कर लगभग 22 लाख हो गई है। पार्टी को भरोसा है कि संगठन चुनावों से उभरी टीम कांग्रेस की चुनावी जीत की ताकत बनेगी। संगठनात्मक चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति का मामला भी पार्टी हाईकमान पर छोड़े जाने की संभावना है। पार्टी हाईकमान हर स्तर पर फीडबैक लेने मे जुटा हुआ है तथा विधानसभा क्षेत्र के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा रही है ताकि टिकट वितरण तथा मतदान के दौरान पार्टी उम्मीदवारों को फायदा मिल सके। प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे की अगुवाई में एक टीम इस काम में जुटी हुई है जो आलाकमान के निर्देशानुसार आंकड़े व अन्य जानकारी एकत्रित कर रही है।

भाजपा नेतृत्व को खुली चुनौती देने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता विधायक घनश्याम तिवाड़ी आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्गो को भी आरक्षण सुविधा दिलाने की मांग के लिए आंदोलन करते रहे हैं। दीनदयाल वाहिनी के बैनर पर तिवाड़ी भाजपा के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों को सरकार और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ एकजुट करने में सक्रिय हैं। उन्होने लोक संग्रह अभियान की समाप्ति पर नवम्बर माह में विशेष कदम उठाने के संकेत दिए हैं। पार्टी के अन्य बागी नेता और राजपा के प्रदेश अध्यक्ष विधायक डॉ.किरोड़ी लाल मीणा सरकार की आलोचना से नही चूकते है, फिर भी कई बार पार्टी में अपनी शर्तो पर लौटने की बात कह चुके हैं। डॉ.मीणा भाजपा के बागी नेता विधायक हनुमान बेनिवाल के साथ अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे हुए हैं। उधर पिछले चुनाव में वसुंधरा राजे के विरोध में उतरे भाजपा के कददावर नेता जसवंत सिंह के समर्थकों से भाजपा के नेता मान मनोबल में जुटे हुए है। जसवंत सिंह लम्बे समय से अस्वस्थ है। कांग्रेस के नेता भी जसवंत सिंह के समर्थकों से नजदीकियां रखे हुए हैं। राजस्थान में आप पार्टी के प्रभारी कुमार विश्वास ने भी प्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ायी है। वह भी भाजपा, कांग्रेस  सहित अन्य दलों के नेताओं के सम्पर्क में है। पिछले दिनों उन्होने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा सिंह से मुलाकात की।

विधानसभा चुनाव की इस सियासी रणभेरी में भाजपा सरकार के चुनावी वायदों तथा विकास कार्यो को कसौटी पर कसने के लिए मीडिया भी सक्रिय है। सरकार के कामकाज को लेकर मीडिया में प्रकाशित खबरे सरकार की चिंता बढ़ा रही है लेकिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पूरे आत्मविश्वास से चुनावी लड़ाई जीतने के प्रति आश्वस्त हैं।

जयपुर से गुलाब बत्रा

 

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