रोजगार और पलायन

रोजगार और पलायन

बिहार कभी देश के सबसे अग्रणी राज्यों में सबसे प्रथम स्थान पर था। लेकिन बदलते समय के अनुसार बिहार में उस प्रकार के बदलाव देखने को नहीं मिले जिससे इस कृषि सम्पन्न देश को को भारी नुकसान उठाना पड़ा। आज तो बिहार की हालात इस प्रकार की है कि यहां की गरीब जनता अपने राज्य को छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करने पर विवश हैं। यह ‘बिहारी मजदूरों की पीड़ाÓ नामक पुस्तक जो लेखक अरविन्द मोहन के द्वारा लिखी गई है, पंजाब में कार्य कर रहे बिहारी मजदूरों के हालात पर किये गये अध्ययन को लोगों के समक्ष रखती है। इस पुस्तक के अनुसार मजदूरों का विस्थापन न तो अकेले भारत में हो रहा है, न आज पहली बार। सभ्यता के प्रारम्भ से ही काम करने वाले मजदूरों और व्यापारियों का आपस में अपना आवागमन चलता रहा है, लेकिन भारत में , मुख्यत: बिहार के मजदूरों के प्रवास का कारण बिल्कुल ही अलग प्रकार का है, जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती है। पंजाब के युवाओं का कनाडा  और अमेरिका में लगातार पलायन होने के कारण वहां पर कामगारों की आवश्यकता पड़ गइर्, जिसमें बिहारी मजदूरों को एक रोजगार की किरण मिली और वे लगातार पंजाब की ओर बड़ी संख्या में प्रवास करने लगे।

बिहारी मजदूरों की पीड़ा

लेखक    : अरविन्द मोहन

प्रकाशक: राधाकृष्ण पेपरबैक्स

मूल्य      : १९५ रु.

पृष्ठ        : १७१

संसार में हम सभी लागों के प्रवास का मुख्य कारण अपना पेट पालना है। अपना पेट पालने के लिए इस देश में सबसे अधिक पलायन बिहार के लोगों ने करोड़ो में किया है।  लेखक लिखते है कि देश के सबसे पिछड़े राज्य बिहार और सबसे विकसित राज्य पंजाब के बीच मजदूरों की आवाजाही आज सबसे अधिक ध्यान खींच रही है। लगातार इस संख्या में बढ़ोत्तरी ही होता जा रहा है। पंजाब की अर्थव्यवस्था पर अपना ध्यान आकर्षित करे तो पंजाब के विकास में सबसे अधिक योगदान बिहारी मजदूरों का रहा है, जिन्होंने अपने खून-पसीनों से पंजाब के विकास में अपना खूब योगदान दिया है। लेखक लिखते हंै कि अगर  बिहार के विकास की प्रक्रिया धीमी रही तो वहां से मजदूरों का पलायन और निरंतर बढ़ता जायेगा। लेकिन हाल के कुछ वर्षो में पंजाब में बिहारी मजदूरों के ऊपर कुछ अत्याचार की घटनायें सामने आयी है, जिससे संभव है कि बिहारी मजदूरों के मन में पंजाब के प्रति कुछ आक्रोश जाग्रित हो। लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिये कि पंजाब मेें जो बिहारी मजदूर पहले पलायन किये थे, अब एक ताकत के रूप में उभर चुके हैं जो वहां की अर्थव्यवस्था में बराबर का सहयोग रखते हैं।

लेखक लिखते हैं कि पंजाब में बिहारी मजदूरों को कई बार निशाना बनाया गया है। जब उग्रवादियों ने सीमावर्ती जिलों गुरदासपुर, अमृतसर, फीरोजपुर में  हिंदुओं को भगाकर पूरे पंजाब में पलायन का हंगामा खड़ा करने की रणनीति पर अमल शुरू किया तब भी आम हिंदुओं को डराने के  लिये बिहारी मजदूरों को ही निशाना बनाया गया। और यही कारण है कि आपरेशन ब्लू स्टार के बाद वाले दौर में पूरे सीमावर्ती इलाकों में मजदूर मिलने मुश्किल हो गये।

अरविन्द मोहन के द्वारा लिखी गई  ‘बिहारी मजदूरों की पीड़ाÓ नामक पुस्तक जो पंजाब में काम कर रहे बिहारी मजदूरों पर लिखी गई है, पाठको को पंजाब में कार्य कर रहे बिहारी मजदूरों की स्थिति पर विस्तृत जानकारी देती है।। अत: गंभीर लेख होने के कारण यह पुस्तक पाठको को अपनी ओर खींच सकती है।

रवि मिश्रा

 

 

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