कर्नाटक में जेहादियों द्वारा खून की होली

कर्नाटक में जेहादियों द्वारा खून की होली

”कर्नाटक में खूनी नरसंहार चल रहा है।’’ इसी विषय पर कर्नाटक बीजेपी की महासचिव और सांसद शोभा कर्नान्दलजे ने विस्तृत रूप से गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आरएसएस और भाजपा के ऊपर राज्य में हो रही खूनी नरसंहार के बारे में लिखा है। इसमें उन्होंने यह लिखा है कि आरएसएस और भाजपा के सदस्यों के ऊपर पॉपुलर फ्रंट के द्वारा दक्षिण कर्नाटक में निर्मम तरीके से हमले किये जा रहे हैं। इन घटनाओं में अभी तक 10 आरएसएस और भाजपा के सदस्यों की हत्या तमंचा और तलवारों के प्रयोग से की जा चुकि है और इन घटनाओं में 10 से 12 हिंदू संगठन के लोग निर्मम तरीके से घायल हैं।

इस प्रकार की लौह महिला से ऐसी आशा की जा सकती है जो इसी जिले के पुत्तुर तालुक से आती है। इनका गृहमंत्री को पत्र लिखने का प्रमुख कारण इन हत्यारों को कानून के माध्यम से सजा दिलाना था। शोभा कहती है कि उनके लिए गृह मंत्री को पत्र लिखना और भी अनिवार्य हो गया, जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री राज्य में हो रही निर्मम हत्याओं को रोकने में कोई बड़ा कदम नहीं उठा रहे थे। इन हत्याओं पर ध्यान आकर्षित करे तो राज्य में हो रही इस खूनी नरसंहार में 22 से 31 वर्ष के युवाओं की हत्या लगातार हो रही है।

शोभा द्वारा लिखे इस पत्र में बिल्कुल साफ कहा गया है कि पीएफआई और केडीएफ के इन जेहादियों की आरएसएस और भाजपा के सदस्यों को मारने की कला बिल्कुल ही साधारण है। हेलमेट पहने हुए व्यक्ति दो पल्सर जैसी मोटरसाईकल की सहायता से अपने लक्ष्य की पीछा करते है। इसके कुछ देर बाद ही एक काले रंग के पल्सर से कुछ और लोग आते हैं। पहले दो पल्सर वाले लोग मारने वाले व्यक्ति का गला काटते हैं और फिर उसके शरीर के कई भागों पर हमला करते हैं और भाग जाते हैं। अब तीसरे बाईक पर सवार लोग हेलमेट पहन कर आते हंै और देखते है की मारा गया व्यक्ति पूरी तरह से मरा है या नहीं। ये लोग यह भी देखने का प्रयास करते हैं कि किसी तीसरे व्यक्ति ने इस घटना को कही देखा तो नहीं।

उन्होंने लिखा है कि इसी प्रकार से हमारे 10 से 12 कार्यकर्ताओं की निर्मम तरीके से हत्या तथा 12 लोगों को निर्मम तरीके से घायल कर दिया गया है। शोभा उदय इंडिया से हुई बातचीत में कहती है कि इस प्रकार तलवार से सजे इन जिहादियों ने अब तक 30 हमले किये हैं। सबसे विचित्र बात यह है कि जो पुलिस इन हिंसक हमलों की जांच करती है, वह इस घटना को आपसी झड़प और प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताकर मामले को उलझा देते हैं। लेकिन जब आरएसएस के कार्यकर्ता रूद्रेश, जिसकी पथ संचलन के दौरान ही भरे बाजार में हत्या कर दी गई, की पड़ताल एनआईए करती है तो इस मामले में पीएफआई के कार्यकर्ताओं का हाथ पाया जाता है। इसी मामले में एनआईए नें बेंगलुरू और हैदराबाद के पीएफआई के दफ्तर से पांच कार्यकताओं को पकड़ा जिसमें इन हत्यारों ने अपने इस निर्मम हत्या करने के तरीकों को उगला। पीएफआई का नेटवर्क के  देश भर में होने के बारे में उस समय पता चला जब एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ पर हमला करने वाले आतंकी को पकडऩे के लिए उत्तर प्रदेश में छापा मारा जिससे  एनआईए ने हैदराबाद में छापा मारकर इन तीन आतंकियों  और बेंगलूरू और मैसूर में पीएफआई के दफ्तरों पर छापा मारते हुए 1-1 आतंकियों को पकड़ा। पीएफआई कर्नाटक और अन्य जगहों पर  आरएसएस और भाजपा के सदस्यों पर हमला कर हिंदू-मुस्लिम विवाद खड़ा करना चाहती है जिससे वे अपने सोच को साकार करने में सफल हो सके। शोभा कहती हैं कि ये आतंकी कभी भी अपने इस चाल में सफल नहीं हुए हंै और न ही कभी हो पायेंगे, इसका एक मात्र कारण है हिंदू और मुस्लिम समाज की मजबूत भाई-चारा। शोभा कर्नान्दलजे कहती है कि भाजपा और आरएसएस को सबसे अधिक चिढ़ तो तब आती है जब आरएसएस के कार्यकर्ता शरथ मालदिव जो धोबी जाति से आते है, उन पर 4 जून को 16 बार चाकू से हमला किया गया, जिससे वह अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दु:ख उस समय होता है जब  कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मंगलौर के लिए 6 जून को दौरा करते है लेकिन उन्होंने शरथ को देखना उचित नहीं समझा। यह स्पष्ट दिखा रहा है कि मुख्यमंत्री गरीबों और निचले वर्ग के लिए काम करने का ढ़ोंग करते हंै।

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हाल के दिनों में दक्षिण कान्नदा के कलांदा से आने वाले आरएसएस के 75 वर्षीय कार्यकर्ता डॉ प्रभाकर भट् को भी पीएफआई ने अत्याधिक निशाना बनाया है। डॉ प्रभाकर भट्ट से डाक्टर होते हुए भी श्री राम स्कूल नामक अपना शिक्षण संस्थान चलाते हैं। ध्यान देने वाली बात है कि इनके इस विद्यालय में पढऩे वाले विद्यार्थियों में 50 प्रतिशत विद्यार्थी मुस्लिम समाज से आते हैं और इसी बात को पीएफआई के लोग सहन न कर सके और वे उनके ही छात्रों द्वारा उनपर हमला करवाना आरंभ कर दिया। ये विद्यार्थी केरला में चलाये जा रहे वहाबी विचारधारा के शिकार हो चुके हैं।

उदय इंण्डिया से बातचीत के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि डॉ भट्ट पर हमला करने का मुख्य कारण हिंदू-मुस्लिम विवाद को जन्म देना है। पीएफआई अपने प्रोपगेंडा से पूरे विश्व को यह बताने का प्रयास कर रही है कि मुस्लिम धर्म को मानने वाले भारत के मुसलमान अब भारत में खतरा महसूस कर रहे हैं। यही इनका भयानक और विध्वंसक चाल है। गृहमंत्री को यह पता है कि कर्नाटक सरकार इस मामले की जांच करने मे देर लगा रही है, फिर भी उन्होंने इस मामले की जांच एनआईए को नहीं सौपी है। लेकिन भाजपा हमेशा से मानती रही है कि सिद्धारमैया इस मामले को टालते रहेंगे, क्योंकि वह इन जिहादियों के प्रति अपना साफ रूख रखते हैं। शोभा का कहना है कि भाजपा इसलिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही है, क्योंकि हाल ही में कर्नाटक कांग्रेस के वन विभाग के मंत्री बी रामनाथ राय ने जिला के एसपी को निर्देश दिया कि सांप्रदायिक घटना फैलाने के मामले में धारा 307 के तहत प्रभाकर भट्ट को हिरासत में ले। शोभा कर्नान्दलजे का कहना है कि प्रभाकर भट्ट को हिरासत में लेने का किसी भी प्रकार से सवाल ही नहीं पैदा होता। इस गिरफ्तारी पर प्रश्न खड़ा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ इस मामले से जुड़े पुलिस अफसर को निर्देश दिया है कि वह इस हिरासत की चांच करे कि यह सही है या गलत। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस को कानूनन सही होना होगा।  जब रामनाथ राय द्वारा एसपी को दिया गया यह निर्देश लोगों के सामने आया तो भाजपा ने इस मामले को तुरंत बढ़चढ़ कर उठाया। शोभा कहती है कि जब राज्य का मंत्री ही मुस्लिम तुष्टिकरण के लिये पुलिस को इस प्रकार का निर्देश दे तो हमे भी पता  है कि इस मामले में  किसका हाथ है।

कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष बी एस येदुयुरप्पा तो इस मामले में और भी शख्त हैं। उन्होने कहा कि केएफडी पर भाजपा द्वारा किये गये 42 मामलों को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने निरस्त कर दिया है। यह स्पष्ट करता है कि शासन करने वाली सरकार किस प्रकार से एक पक्ष को खुश करने के लिए खतरनाक खेल खेल रही है।

सिद्धारमैया इस मामले को बिल्कुल ही टाल रहे है। उदय इण्डिया से बातचीत में वह कहते है कि भाजपा का सरकार पर इस प्रकार के आरोप का कोई मतलब नहीं है। मै भी राज्य में आरएसएस के कार्यकर्ताओं के ऊपर हो रहे हमलों से दुखी हूं। इन सभी हमलों की जांच हो रही है। लेकिन हमे यह याद रखना चाहिए कि आरएसएस ने ही इस मामले को सांप्रदायिक रंग देकर इस प्रकार का माहौल खड़ा कर रही है। हम शरथ मालदिव के मामले की भी जांच कर रहे हैं और मै जानता हूं कि कानून अपना काम अवश्य करेगी। कर्नाटक में 11 राजनीतिक हत्यायें हो चुकी है।

कर्नाटक में घटित होने वाली बहुत ऐसी घटनायें हैं, जिसका जवाब सिद्धारमैया को देना पड़ेगा। जैसे-जैसे राज्य में चुनाव निकट आ रहा है, वैसे-वैसे दक्षिण कान्नदा जिले में केएफडी, पीएफआई और एसडीपीआई के सदस्यों के द्वारा आरएसएस पर हमले तेज हो रहे हंै।

 

बैंगलुरू से एस. ए. हेमन्त कुमार

 

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