रोहिंग्या से नहीं, बांग्लादेशी घुसपैठियों से खतरा

रोहिंग्या से नहीं, बांग्लादेशी घुसपैठियों से खतरा

पिछले कई महीनों से भारतीय समाचार पत्रों और चैनलों में रोहिंग्या शरणर्थियों के बारे में चर्चा चल रही है। इन होने वाले चर्चाओं में कुछ लोग रोहिंग्या को देश में रखने के पक्ष में हैं तो कुछ उन्हें देश से बाहर करने के पक्ष में हैं। लेकिन रोहिंग्या समुदाय और म्यांमार सरकार के बीच हुए टकराव के कारण इस समुदाय पर हो रहे अत्याचार हमारे मन एवं मस्तिष्क को अपनी ओर खिचती है। यह ध्यान देने वाली बात है कि हमारी नजर कुछ संख्या में आने वाले रोहिंग्या घुसपैठी हैं, वो बांग्लादेशी घुसपैठी नहीं हैं जो घात लगाकर बिना किसी जांच के भारत में घुसपैठ करते हैं।

म्यांमार  के सैनिकों द्वारा रोहिंग्या पर किये गये सैन्य कार्यवाही के कारण रोहिंग्या शरणार्थियों का पिछले दो वर्षों में अभी तक म्यांमार से चार लाख की संख्या में महिलाओं, पुरूषों और बच्चों का भारी संख्या में पलायन हुआ है।

रोहिंग्या लोगों को म्यांमार सरकार बंगाल से लाये गये अप्रवासी नागरिक मानती है, जबकि ये लोग 15वीं शताब्दी से ही आरकान राज्य कीस्वतंत्रता के पूर्व से ही रखाइन राज्य में रहते हैं। रोहिंग्या समुदाय को हमेशा से ही इस्लामिक अल्पसंख्यक के रूप में जाना गया है, लेकिन रोहिंग्या में हिंदू समुदाय के लोग भी आते हैं, जिनको रोहिंग्या मुसलमानों की नजर से ही देखा जाता रहा है।

जब अरकान को 1775 में बर्मा (म्यांमार) द्वारा कब्जे में लिया गया था, उसके बाद की स्थानीय रोहिंग्या समुदाय चित्तागोंग (बांग्लादेश) की ओर पलायन कर लिये। चंकि बाद में इन दोनों क्षेत्रों को अंग्रेजों द्वारा कब्जे में ले लिया गया, जिससे एक बार फिर इनका रखाइन प्रांत में वापसी हुआ। उस समय से ही उनके ऊपर नस्लीय हमले होते रहे हैं। ये हमले द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 1948, 1978, 2012, 2015 और 2017 तक होते रहे हैं।

इन सभी हिंसाओं के बीच, रोहिंग्याओं को म्यांमार आर्मी के द्वारा इनके अधिकारों, पहचान को छिनने, जमींनों को जबरदस्ती हथिया लेने तथा इन पर हमला करने तक के आरोप लगते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसी कारण इनको पूरे विश्व में सबसे दबे-कुचले अल्पसंख्यक का नाम देते हुए म्यांमार सरकार की कड़ी निन्दा की। 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी भारत में भी घुसे हैं जो म्यांमार से उनके कुल पलायन का 10वां हिस्सा है। देखा जाए तो भारत का म्यांमार में चल रही शरणार्थी घटना से कोई जुड़ाव नहीं है। चूंकि बांग्लादेश और म्यांमार भी अंग्रेजों के द्वारा शासित किये गये देश है, अत: शासन के हिसाब से भारत को इससे जोड़ सकते हैं। वैसे यह एक अंतर्राष्ट्रीय मामला है। सबसे अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश में शरण लिया है। रोहिंग्या ने शरण के लिये आस्ट्रेलिया, अमेरिका और भारत में आवेदन किया है। चुकि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर किसी भी देश के शरणार्थी को अपने देश में स्थान देने का कोई समझौता नहीं किया है।

Rohingya people fled from oppression in Myanmar

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक और शांति प्रिय देश है, जिसने पूरे विश्व के दबे कुचले लोगों को शरण दी है। यहीं यह कहना उचित होगा कि भारत का इतिहास अभूतपूर्व रहा है और यही कारण है कि रोहिंग्या समुदाय भी भारत की ओर एक आशा की किरण से देख रही है। ऐसे देखा जाए तो रोहिंग्या का मसला बेजान है। हमारे पास बहुत से ऐसे कारण हैं जिससे हम यह कह सकते हैं कि यह मामला कोई बड़ा नहीं है। इस मामले को सीमित राजनीतिक चेतनाओं से ध्यान भटकाने के लिये लाया गया है। जिस समय सभी लोग इन अल्प संख्या में आये रोहिंग्या के बारे में चिंतित हैं, उस समय हम सभी लोग बांग्लादेश से गलत तरीके से घुसपैठ कर रहे बांग्लादेशियों के बारे में सोच भी नहीं रहे हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों का भारत में घुसना, इन रोहिंग्याओं से भी काफी अधिक भयानक है।

म्यांमार से आये इन शरणार्थियों की संख्या केवल 40 हजार है, जिसमें से 10 हजार की संख्या में रोहिंग्या जम्मू और बाकी बचे लोग बंगाल और असम जैसे राज्यों में हैं। लेकिन इससे अलग बांग्लादेशी घुसपैठियों पर ध्यान दे तो असम और बंगाल जैसे राज्यों में इन लोगों की संख्या 30 लाख से 2 करोड़ है। इसलिये भारत को सबसे अधिक खतरा इन लोगों से है, न की रोहिंग्या से। रोहिंग्या भारत में आने के लिये विवश कर दिये गये हैं, जबकि बांग्लादेशी यहां आने के लिये उत्तेजित रहते हैं। कई जांच ऐजेंसियों ने यह खुलासा किया है कि पश्चिम बंगाल में मात्र 300 रूपये में पहचान पत्र बनाये जाते हैं और इनको बांग्लादेशी नागरिक ही सबसे अधिक की संख्या में बनवाते हैं और अपने आपको राज्य का निवासी बताते हैं। इस माध्यम से ये लोग राज्य में नौकरी व अन्य पदों से लेकर चुनावी राजनीति में भी लाभ उठाते हैं।

अन्तत: यहां तर्क देना आवश्यक है। आखिर ये बांग्लादेशी भारत में घुसपैठ करने के हकदार कैसे हैं? ये बांग्लादेशी घुसपैठी जो कानून की अवहेलना करते हुए भारत में घुसते हैं और यहां आकर हमारे लोकतांत्रिक और आर्थिक नीति का लाभ उठाते हैं, जो भारत जैसे कानून को पालन करने वाले देश के लिये असहनीय है। लेकिन रोहिंग्या म्यांमार से अपनी जान बचाने के लिये वहां से भाग रहे हैं। जिससे संयुक्त राष्ट्र को भी इसे भयानक मानवीय संकट मानना पड़ा है। ये लोग आर्थिक अवसर की ओर नहीं भाग रहे हैं, ये लोग अपनी जान बचाने के लिये भाग रहे हैं। अत: बांग्लादेशियों और रोहिंग्या के बीच के अन्तर को विभेद करना आसान है। रोहिंग्या संकट आज के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट है। लेकिन भारत का इससे केवल अल्प जुड़ाव है। भारत शरणार्थियों को शरण अपने लोगों की भावनाओं का विरोध कर नहीं दे सकता। बांग्लादेशियों की बात न कर केवल रोहिंग्या की बात करना गलत  होगा।

आकाश कश्यप

 

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