एक अबूझ पहेली

एक अबूझ पहेली

करण जौहर बॉलीवुड के बड़े निर्देशकों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि करण जौहर को सबसे अधिक युवा वर्ग पसंद करता है। करण ने हाल  ही में अपने जीवन पर आधारित एक ‘एक अनोखा लड़का’ नामक पुस्तक को लिखा है। वे लिखते है कि उन्हों ने सिनेमा को बॉलीवुड में प्रवेश करने से लेकर अब तक देखा है। अब यह अधिक संरचनात्मक, अधिक अनुशासित हो गया हैं, लेकिन इसके साथ ही यह पूरी तरह आत्मविहीन भी हो गया है। हां, युवा पीढ़ी एक-दूसरे के साथ कुछ अधिक रहती है, लेकिन साथ ही वे एक-दूसरे के प्रति उदासीन भी हैं। वे पार्टी करते हैं, साथ ही ड्रिंक करते हैं, मजे करते हैं। वह आलोचना नहीं कर रहे है, वह जियो और जीने दो में विश्वास रखते है। उनका कहना है कि आप जो चाहे वह करें और जिसके साथ चाहे उसके साथ रहे। ऐसा हर इंडस्ट्री में होता है। लेकिन बॉलीवुड के बारे में यह अधिक सुनाई देता है, क्योंकि हम सबके सामने सबसे अधिक रहते हैं। धर्मा कौन सी फिल्म बनाएगा, इसका निर्णय लेने में मैं बतौर फिल्म निर्माता अपने अंतर्बोध का उपयोग करता हूं। हम इससे कितना भी बचना चाहें- धर्मा प्रोडक्शंस की फिल्मों के साथ चमक-धमक, अच्छा संगीत और बेहतर महसूस करवाने की भावना जुड़ी रहती है। हमारी फिल्मों से लोग इस प्रकार की आशा भी करते हैं। लेकिन हम इस अवधारणा को तोडऩा चाहते हैं। उन्होंने इसी कारण अग्रिपथ जैसी हिंसक और ब्रदर्स जैसी एक्शन फिल्मों का निर्माण किया। हमने बाहुबली जैसी फिल्मों को लोगों के समक्ष रखा।

एक अनोखा लड़का

लेखक : करण जौहर

प्रकाशक : प्रभात प्रकाशन

मूल्य      : ३५० रु.

पृष्ठ        : २००

वह आगे लिखते हैं कि उनके पिता ऐसे व्यक्ति थे, जो अक्सर प्रत्येक अंत्येष्टि में सारा काम संभाल लेते थे। फिर चाहे वह कोई भी हो, सारी तैयारियां वे ही करते। लेकिन मुझमें वैसा करने की क्षमता नहीं है। ऐसे समय अनिल अंबानी ने सारा कार्य देवदूत की तरह संभाल लिया। उनके पिता इंडस्ट्री के जाने माने व्यक्ति थे, जिससे सभी लोग उनसे प्यार करते थे।

वह लिखते है कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें अपने जीवन में ‘कुछ कुछ होता है’ से लेकर ‘कभी खुशी कभी गम’ के बीच का हिस्सा सबसे घटनाहीन लगता है। अंडरवल्र्ड की धमकी के कारण वह अपनी फिल्म रिलीज होने का आंनद नहीं ले सके। लेकिन अचानक ही वह युवा फिल्म-निर्माताओं की नई छोटी सी ब्रिगेड का प्रतिनिधित्व करने लगे।

सफलता के बहुत सारे दोस्त होते हैं। असफलता फासले लाती है। जो लोग आपके सफल होने पर आपको विफल करना चाहते हैं, वे आपके दोस्त नहीं हो सकते। वे आपके प्रतिस्पर्धी होते हैं। जो आपको इतना उपर उठना नहीं देखना चाहते कि आप उनके हाथों से निकल जाएं। आपको इन लोगों से दूर रहना होगा। उन्हें ऐसा लगता है कि दो सफल व्यक्तिओं में दोस्त बनने की क्षमता सबसे अधिक होती है।

यह पुस्तक करन जौहर के द्वारा पूनम सक्सेना के सह-लेखन में उनके जीवन पर लिखी गई है। इस पुस्तक के माध्यम से करण जौहर ने उनके जीवन में घटित घटनाओं के बारे लिखा है। करण जौहर ने इस पुस्तक में काफी बड़बोलेपन को प्रकट किया है, जो युवाओं को लुभाने में सफल हो सकती है।

रवि मिश्रा

 

 

 

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