अब राम मन्दिर के विरोध पर मुस्लिम समुदाय में भी मतभेद

अब राम मन्दिर के विरोध पर मुस्लिम समुदाय में भी मतभेद

”शिया वर्ग इस देश के मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग है। राम मन्दिर को तोडऩे वाला बाबर भी शिया वर्ग से ही था। 1946 तक शिया समुदाय के लोग ही न्यायालय में अयोध्या मामले को देखते रहे। लेकिन 1946 में अंग्रेजों ने सुन्नी समुदाय को इस मसले को सौंप दिया, अत: शिया समुदाय द्वारा अयोध्या मामले के संदर्भ में किये गये हस्तक्षेप को कभी भी नकार नहीं सकतें,’’ यह कहना है विश्व हिन्दू परिषद् के संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैन का उदय इंडिया के संवाददाता रवि मिश्रा से हुई खास वार्तालाप के दौरान। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 

शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या विवाद को सुलझाने तथा अयोध्या में राम मन्दिर का निमार्ण करने का हलफनामा दाखिल किया है। आप इसे किस प्रकार से देखते हैं?

हम शिया बोर्ड के इस फैसले का स्वागत करते हैं। अब यह देखना है कि सर्वोच्च न्यायालय इसको किस प्रकार से लेता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा है कि कुछ लोग अपने फायदे के लिए राम मन्दिर के संदर्भ में आने वाले न्यायालय के निर्णय को अपने पंैतरों के द्वारा जानबुझकर देर से आने का प्रयास करते हैं। राम मन्दिर का विरोध केवल वहाबी और कम्युनिस्ट विचारधारा के लोग ही कर रहे हैं। ये हमेशा से ही इस देश को तोडऩे का प्रयास करते रहे हैं। यह विचारधारा किसी भी प्रकार से हमारे देश की भलाई के पक्ष में नहीं है। ये नहीं चाहते कि इस मामले में कोर्ट अपना कोई निर्णय दे। इन लोगों को यह पता है कि जितना इस मसले को आगे बढ़ाया जायेगा उतना ही इस देश का सामाजिक सौहार्द खराब होगा। मेरा मानना है कि शिया बोर्ड के इस हलफनामे पर सर्वोच्च न्यायालय अवश्य विचार करेगा। यदि इसी प्रकार की स्थिति बनी रही तो विश्व हिन्दू परिषद भी इस मामले को हल करने में अपना पूर्ण सहयोग करेगा। लेकिन इसमें मेरा मानना है कि भले ही बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी और सुन्नी बोर्ड के लोग मान जाए लेकिन माक्सवादी को मानने वाले लोग नहीं मानेंगे।

शिया बोर्ड अयोध्या विवाद से 1946 में ही अलग हो गया था, फिर शिया बोर्ड का यह हलफनामा इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

शिया वर्ग इस देश के मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग है। राम मन्दिर को तोडऩे वाला बाबर भी शिया वर्ग से ही था। 1946 तक शिया समुदाय के लोग ही न्यायालय में अयोध्या मामले को देखते रहे। लेकिन 1946 में अंग्रेजों ने सुन्नी समुदाय को इस मसले को सौंप दिया,  अत: शिया समुदाय द्वारा अयोध्या मामले के संदर्भ में किये गये हस्तक्षेप को कभी भी नकार नहीं सकते। कम से कम शिया वर्ग के लोग इस मामले को हल करने के लिये सामने आने का साहस तो दिखाते हैं। अयोध्या मामले पर आज मुस्लिम वर्ग टूटता हुआ प्रतीत हो रहा है जो कहीं ना कहीं वहाबी विचारधारा को कमजोर करने में सहायक है।

सुन्नी बोर्ड इस मामले को हल करने के लिये प्रधानमंत्री का हस्तक्षेप चाहती है।

चंद्रशेखर और विश्वनाथ प्रताप सिंह दोनों नेताओं ने अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान राम मन्दिर के मामले को हल करने के लिये एक कमिटी का गठन किया था। लेकिन तब भी सुन्नी समुदाय के लोग पीछे हट गये और वह बातचीत भी विफल रही थी। अत: प्रधानमंत्री को इस संदर्भ में कुछ भी नहीं बोलना चाहिये। ये लोग जानबूझ कर प्रधानमंत्री को विवाद में घसीटना चाहते हैं। इनका उद्देश्य बिल्कुल साफ है। ये इस मामले को शीघ्रता से हल होने देना नहीं चाहते। मुझे याद है, एक मुस्लिम नेता ने मुझसे कहा था कि उन्हें पता है कि इस मामले को कोर्ट में किस प्रकार से दबाये रखा जाये।

कोर्ट के अलावा भी इस मामले को हल करने का कोई दूसरा उपाय है? 

जिस प्रकार की स्थिति है उसको देखते हुए यह कह सकते हैं कि सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मामले को कभी भी न्यायालय में साधारण पूर्वक हल नहीं करने देगा। इन लोगों ने तो कई बार माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।  तीन तालाक के संदर्भ में कोर्ट ने कोई अपना निर्णय भी नहीं सुनाया था। लेकिन जिस प्रकार से इन लोगों ने कोर्ट की अवमानना की वह बिल्कुल ही निंदाजनक था। यही कारण है कि राम मन्दिर बनाने के लिये हमारी संसद को कानून बनाना चाहिये।

राम मन्दिर कब बनेगा?

राम मन्दिर से हमारी आस्था जुड़ी हुई हैं और मैं सुनिश्चित करता हूं कि राम मन्दिर का निर्माण 2018 में अवश्य होगा।

विश्व हिन्दू परिषद इस देश के लिये किस प्रकार का योगदान कर रही है?  

विश्व हिन्दू परिषद का मिशन बिल्कुल साफ है। हमारा लक्ष्य इस देश को पूरे विश्व में शक्तिशाली राष्ट्र बनाना है। हम भारत के नैतिक सिद्धान्तों और हिन्दू दर्शन को पूरे विश्व को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। धीरे-धीरे अब पश्चिम के चिंतक भी यह समझने लगे हैं कि हिन्दुत्व ही पूरे विश्व में शांति फैलाने का एक मात्र रास्ता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था कि यदि भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र बनना चाहता है तो इसे गीता और उपनिषद् के बताये हुए मार्ग पर चलना होगा। अत: हम पूरे विश्व में शांति फैलाने के लिये हिन्दुओं को एक कर रहे हैं।

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