होनहार बन जाओ अपने अंदर की शक्ति से

होनहार बन जाओ अपने अंदर की शक्ति से

ब्रम्हांड में उपस्थित परमात्मा से हम सभी थोड़ा बहुत अवगत हैं। हमारी आत्मा भी उसी परमात्मा का अंश है। लेकिन हम यह आसानी से नहीं मान पाते हैं कि हमारे अंदर भी वही शक्ति मौजूद है। जरूरत है तो केवल उस शक्ति को मानकर कार्य में लगाने की। अगर हम इस शक्ति का उपयोग नहीं कर पाते हैं तो हमारा मानव जीवन व्यर्थ माना जाएगा, लेकिन हममें से अधिक लोग यह ज्ञान नहीं हासिल कर पाते हैं।

कुछ विद्वान व्यक्ति हैं, जो जीवन को समझ सकते हैं, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी कम है। हम साधारण मनुष्य अपने पूरे जीवन को बेकार की बातों में ही गवां देते हैं। जिस दिमाग में कोई अच्छी सोच लाकर मन को शांति प्रदान कर सकेंगे, उसे केवल दुश्चिंता में डालकर परेशान रखते हैं। हमारा पूरा समय बाहर की समस्याओं में ही बीत जाता है। हम अपने अंदर की सोच के लिये भी समय नहीं निकाल पाते हैं।

पूरे विश्व में भारत ऐसा देश है, जहां अनेक  ऋषि-मुनियों ने जन्म लेकर अपनी साधना के जरिए असाध्य को साधा है। वे ऋषि अपनी साधना के जरिए जो चीजें कर लेते थे, हम आधुनिक मनुष्य विश्वास भी नहीं कर पाते है। कुछ ऋषि तो सुक्ष्म रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक विचरण कर लेते थे। वे एक जगह बैठकर दूसरे स्थान की घटनाओं को भी जान लेते थे। बहुत-से ऐसे ऋ षि थे जो दूसरों के मन में चलने वाली घटनाओं का भी अंदाजा लगा लेते थे। इन सभी अभूतपूर्व घटनाओं को करने वाले साधु-महात्मा हमारी इस पावन धरती पर जन्म ले चुके हैं। अभी भी कुछ ऐसे ऋषि हैं जिन्होंने हजारों वर्ष पहले अपने शरीर का त्याग कर दिया लेकिन आज भी सुक्ष्म रूप में इस धरती पर विद्यमान हैं।

हम मनुष्य अपने कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर पर विश्वास कर लेते हैं लेकिन अपने ही अंदर रहने वाली प्रचंड शक्तियों पर विश्वास नहीं कर पाते हैं। पुराणों और ग्रंथों के माध्यम से ऋषियों ने हमें अनेक चीजें सिखाने का प्रयास किया है। लेकिन सामाजिक परेशानियों में बंधने के कारण हम इन बहुमूल्य बातों को समझने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। जब हम अपने मन को इन चीजों से अलग करने का प्रयास करते हैं तो उसमें भी असफल हो जाते हैं।

जब हमारी आत्मा थोड़ी विकसित होती है तो हमारे व्यक्तित्व में साफ झलकने लगती है। सैकड़ों लोगों में उसका व्यक्तित्व साफ अलग लगता है। कुछ गलत व्यक्तियों के संग रहने पर हमारे खुद के व्यक्तित्व पर गलत प्रभाव पड़ता है जो हमे भी गलत सोच की ओर धकेल देता है। जब कभी हम दलदल में फंस जाते है लेकिन ईश्वर में विश्वास बनाये रखते है तो इस संकट में प्रभु हमे अवश्य कुछ मार्ग दिखाते हैं। अत: भगवान पर हमारा विश्वास होना आवश्यक है। जितना अधिक हम भगवान से लगाव रखेंगे, उतना ही अधिक हम परमात्मा के निकट रहेंगे और उतना ही अधिक हमारी कार्य करने की क्षमता होगी। एक क्रियाशील आत्मा जितनी आसानी से किसी कार्य को कर सकती है, वो साधारण मनुष्य कभी नहीं कर सकता है।

उपाली अपराजिता रथ

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