एक देश, एक टैक्स का सपना बना हकीकत

एक देश, एक टैक्स का सपना बना हकीकत

एक देश,एक बाजार और एक टैक्स का दशकों से देखा खूबसूरत सपना  आखिरकार पूरा हो ही गया। एक जुलाई से जीएसटी लागू हो गया है। चूंकि अप्रत्यक्ष करों का बोझ आम से लेकर खास सभी पर समान रूप से पड़ता है, इसलिए सभी अब यह जानना चाहते हैं कि उनकी जरूरत की कौन से चीजें 1 जुलाई से महंगी और कौन सी चीजें सस्ती हो गई हैं।

जीएसटी काउंसिल ने 1211 चीजों के टैक्स रेट तय किए हैं। इनमें से अधिकांश चीजों को उसने 18 फीसदी टैक्सी स्लैब में रखा है, इसलिए बड़ी संख्या में चीजें सस्ती हुई हैं, जिससे उम्मीद के अनुरूप आम लोगों को राहत मिली है। मध्यरात्रि को बुलाए गए संसद के खास सत्र में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे लागू करने की घोषणा की, जिसे अधिकांश एक्सपर्ट ने भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया है। यह जश्न का अवसर है लेकिन उसके साथ उम्मीदों के साथ आशंकाएं भी जुड़ी हुई हैं। इसलिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का जश्न मनाने के पहले थोड़ा सोच लेना चाहिए। जीएसटी आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा कर  आर्थिक सुधार है। अब देश इस स्थिति में आ चुका है जहां वस्तुओं एवं सेवाओं को एकीकृत करने वाला मूल्यवर्धित कर लागू किया जा सकता है। यह कर केंद्र और राज्यों को समेटे है। जीएसटी के लागू होने के बाद टैक्स चोरी रुक जायेगी। इसका सीधा असर देश की जीडीपी पर पड़ेगा। लेकिन इसे लागू करने में भी समझौते और देरी दोनों हुए। मगर हम क्या यह कहने की स्थिति में हैं कि देर आए दुरुस्त आए।

एक बात तो स्पष्ट है कि यह कर व्यवस्था वैसी नहीं रह गई है जैसी हमने सोची थी। इसके अलावा हमें परिचालन क्षेत्र की समस्याओं के लिए भी तैयार हो जाना चाहिए नया कर चुकाने वालों को अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक कागजी कार्रवाई करनी होगी । लेकिन इन बातों से यह उपलब्धि छोटी नहीं हो जाती। न ही इसकी बदौलत आ रहे बदलाव का महत्व कम होता है।

इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि  इससे कर दायरा बढ़ेगा, उसमें शामिल लोगों का अनुपालन मजबूत होगा और इस प्रकार सकल घरेलू उत्पाद में कर का अनुपात बढ़ेगा। इससे सरकार के संसाधन बढ़ेंगे। इस प्रक्रिया में उम्मीद यह भी है कि जीडीपी को गति मिलेगी और लाखों नए लोगों के लेनदेन की डिजिटल रिकॅार्डिंग होने से देश में कारोबारी माहौल एकदम बदल जाएगा। इससे सड़क परिवहन में भी तेजी आएगी क्योंकि राज्यों की सीमाओं पर किसी तरह की रोकटोक नहीं होगी। अब यह देखने वाली बात होगी चीजें कैसे निकलकर आती हैं और इन लाभों का किस हद तक फायदा मिल सकेगा। दुनिया भर में करीब 140 देशों ने जीएसटी अपनाया है। लेकिन उसे भी ढेरों कठिनाइयां हुईं। लेकिन कई अर्थशास्त्री बताते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद ऑस्ट्रेलिया, मलयेशिया और कनाडा जैसे देशों में कम से कम पहले दो साल तक महंगाई बढ़ी। क्या भारत इससे अलग रह सकता है

देश के कारोबारी हमेशा सरकारी अधिकारियों के तरीकों की काट निकाल ही लेते हैं। जीएसटी का ढांचा ऐसा है कि इसमें समस्त कर समाहित हैं और यह आधिकारिक डिजिटल लेनदेन का एक व्यापक डिजिटल नेटवर्क तैयार होगा। ऐसे में नई सुधरी हुई कर व्यवस्था की ओर आसान बदलाव की उम्मीद करते हुए हमें सतर्कता के साथ नजर रखनी होगी। वैसे जीएसटी के साथ विवादों का भी नया दौर आरम्भ होनेवाला है।

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जीएसटी कानून के प्रमोशन के लिए अमिताभ बच्चन को ब्रैंड अंबेसडर बनाए जाने को लेकर विवाद हो गया है। एक तरफ कांग्रेस ने अमिताभ बच्चन को अंबेसडर बनाए जाने का विरोध किया है, तो दूसरी ओर व्यापारियों का एक वर्ग भी इससे नाखुश बताया जाता है। उसने हड़ताल भी शुरू कर दी है।

सबसे पहला विवाद कांग्रेस के प्रवक्ता संजय निरुपम ने अमिताभ बच्चन को जीएसटी का अंबेसडर बनाए जाने को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया में कहा कि अमिताभ बच्चन जैसे सम्मानित व्यक्ति को इससे नहीं जुडऩा चाहिए था, क्योंकि देश का एक बड़ा तबका इस नई कर नीति से नाखुश है। इसके अलावा देश के व्यापारियों का एक वर्ग भी अमिताभ बच्चन की नियुक्ति से नाखुश है। एक व्यापारिक संगठन के नेता ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इसके साथ किसी अर्थशास्त्री या किसी ऐसे विशेषज्ञ को जोडऩा चाहिए था, जो इसके बारे में कुछ जानता हो। अमिताभ बच्चन का व्यापार या किसी टैक्स पालिसी से कोई लेना-देना नहीं है। दो दिन पहले ही सोशल मीडिया पर 40 सेकेंड का वीडियो अपलोड किया गया था, जिसमें ब्रैंड अंबेसडर के तौर पर अमिताभ बच्चन एक देश, एक टैक्स के नाम पर आ रहे जीएसटी के कायदे और फायदे गिनाते नजर आते हैं।

आम आदमी से जुड़ी रोजमर्रा की जरुरी चीजों से लेकर हवाई सफर तक के खर्चों पर जीएसटी का असर साफ तौर पर दिखाई देगा। जहां जीएसटी कुछ सेक्टर्स में थोड़ी राहत देगा वहीं कुछ चीजों के लिए लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। फिर वो चाहे फूड ऑयल हो या फिर आपके मनोरंजन के साधन। जानिए जीएसटी दैनिक उपभोग से लेकर आपके मनोरंजन पर कितना असर डालेगा।

सरकार का मानना है कि एक देश, एक कर वाले जीएसटी कानून से कर चोरी रुकेगी, महंगाई कम होगी और कर ढांचे से उत्पीडऩ व कानूनी केस कम होंगे। जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर कानून है। यह एक एकीकृत कर है जो वस्तुओं एवं सेवाओं दोनों पर लगेगा। जीएसटी लागू होने पर पूरा देश एक एकीकृत बाजार में तब्दील हो जाएगा और ज्यादातर अप्रत्यक्ष कर जैसे केंद्रीय उत्पाद कर, सेवा कर, वैट, मनोरंजन कर, विलासिता कर, लौटरी टैक्स जैसे 25 से अधिक कर जीएसटी में समाहित हो जाएंगे..

जीएसटी परिषद ने 500 सेवाओं और 1,200 से ज्यादा वस्तुओं की कर की दरें तय की हैं. उस ने कर की दरों के 5,12,18 और 28 प्रतिशत के 4 स्लैब निर्धारित किए हैं. इनमें कई वस्तुओं के महंगी होने की आशंका है तो कई के सस्ती होने के दावे किए गए हैं। ताजा मीट, अंडा, दूध, दही, शहद, फल, सब्जियां, आटा, बेसन, बटर मिल्क, ब्रैड, नमक, बिंदी, स्टांप, किताबें, अखबार, चूडिय़ां, सिंदूर, हैंडलूम आइटम जैसी चीजों के अलावा दैनिक जरूरतों के सामान को इस कर के दायरे से बाहर रखा गया है। पेंट और सीमेंट सस्ता होंगी। सिगरेट, ब्रैंडेड ज्वैलरी, ट्रक जैसे व्यावसायिक वाहन महंगे होंगे। एसी, रैफ्रीजरेटर, टीवी, वाशींग मशीन, महंगे होंगे जबकि स्मार्टफोन, छोटी कारें सस्ती होंगी। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं कर मुक्त रहेंगी। फोन बिल, इंश्योरेंस व अन्य वित्तीय सेवाओं और ब्रांडेड कपड़ों पर टैक्स बढ़ेगा। एसी रेल टिकट पर 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। इकोनॉमी श्रेणी की विमानसेवा सस्ती जबकि बिजनंस क्लास महंगी होगी। रेस्तरां में खाना महंगा होगा। पूजा सामग्री, मैडिकल उपकरण भी सस्ते होंगे। इन के अलावा क्रीम, मिल्क पाउडर, पैक्ड सब्जियां, कौफी, चाय, पिज्जा ब्रैड, कैरोसिन, कोयला, दवाएं, ब्रैंडेड पनीर, साबूदाना जैसी वस्तुओं को 5 प्रतिशत टैक्स के दायरे में रखा गया है. मिठाई, खाद्य- तेल, चीनी भी इसी टैक्स स्लैब में होंगी। हेयर औयल, टूथपेस्ट, साबुन जैसी वस्तुओं पर 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा। शराब पूरी तरह से जीएसटी से बाहर रहेगी यानी इस पर टैक्स लगाने के लिए राज्य सरकारें स्वतंत्र होंगी। पैट्रोल, एलपीजी और रसोई गैस को भी जीएसटी से बाहर रखने का फैसला लिया गया। केंद्र और राज्य दोनों मिल कर इन पर टैक्स लगाते रहेंगे।

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वस्तु और सेवा कर के 3 अंग होंगे, केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी। केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र लागू करेगा जबकि राज्य जीएसटी राज्य सरकारें लागू करेंगी। शराब, सिगरेट पर अधिक टैक्स लगेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस से महंगाई 2 फीसदी कम होगी। यह संविधान में 122वां संशोधन है।

इन आंकड़ों के अनुसार, देश के करीब 132 करोड़ लोग सेवाओं और वस्तुओं पर सिर्फ एक तरह का टैक्स देंगे। मुख्यरूप से वस्तुओं की बिक्री पर कर लगाने का संवैधानिक अधिकार राज्य सरकार और वस्तुओं के उत्पादन व सेवाओं पर कर लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. इस कारण देश में अलग-अलग प्रकार के कर लागू हैं। कंपनियों और छोटे व्यवसायों के लिए विभिन्न प्रकार के कर कानूनों का पालन करना मुश्किल होता है।

यह कर लागू होने के बाद केंद्र को तो फायदा होगा पर राज्यों को इस बात का डर था कि उन्हें नुकसान होगा क्योंकि इस के बाद वे कई तरह के टैक्स नहीं वसूल पाएंगे जिस से उन की कमाई कम हो जाएगी। बदलाव के बाद अब राज्यों को 5 वर्षों तक 100 प्रतिशत नुकसान की भरपाई की जाएगी। पहले 3 साल तक 100 फीसदी, चौथे साल 75 फीसदी और 5वें साल में 50 फीसदी भरपाई का प्रावधान है। विवाद सुलझाने के लिए नई व्यवस्था की गई है जिस में राज्यों की आवाज बुलंद होगी। पहले विवाद सुलझाने की व्यवस्था मतदान आधारित थी जिस में दोतिहाई वोट राज्यों के और एकतिहाई केंद्र के पास थे। विधेयक में जीएसटी के मूल सिद्धांत को परिभाषित करने वाला एक नया प्रावधान जोड़ा जाएगा जिस में राज्यों और आम लोगों को नुकसान नहीं होने का भरोसा दिलाया जाएगा।

रेफ्रिजरेटर्स और वॉशिंग मशीन जैसे जरुरी सामानों पर जीएसटी उतना प्रभाव नहीं डालेगा। क्योंकि जीएसटी काउंसिल ने इन पर टैक्स की जो दरें प्रस्तावित की हैं वो उसकी मौजूदा दरों से आस-पास ही हैं, इसलिए इन खर्चों पर ज्यादा असर नहीं होगा। सेलेक्टेड कंज्यूमर गुड्स पर 5 फीसद का जीएसटी लगेगा। एक उदाहरण से समझिए कन्ज्यूमर ड्यूरेबल्स आप पर कितना टैक्स बोझ बढ़ाएगा। जीएसटी आने के बाद जीवन बीमा पॉलिसी लेना महंगा हो जाएगा, क्योंकि फाइनेंशियल सर्विसेज पर जीएसटी काउंसिल ने 18 फीसद की टैक्स दर तय की है। मौजूदा समय में यह दर 15 फीसद है। यानी जीएसटी के आने के बाद इसका महंगा होना तय है।

जीएसटी काउंसिल की ओर से प्रस्तावित टैक्स दरों के हिसाब से सोने पर 3 फीसद का जीएसटी लगेगा। मौजूदा समय में सोने पर 2 फीसद का टैक्स लगता है। वहीं सोने को बनवाने में आपको 5 फीसद का टैक्स देना होगा। हालांकि सोने की खरीद पर आपका खर्चा थोड़ा सा ही बढ़ेगा। मान लीजिए अगर कोई 60,000 मूल्य का सोना खरीदता है तो उस पर जीएसटी के अंतर्गत लगने वाला टैक्स कितना असर डालेगा। अगर आप किसी ऐसे होटल में ठहरे हैं जिसकी कीमत 1,000 रुपए से कम है तो आपको इस पर जीएसटी नहीं देना होगा। लेकिन जैसे ही आपके होटल के किराए के दाम बढ़ेंगे, यानी अगर आपका होटल किराया 5,000 रुपए से ऊपर आता है तो आपको उस पर 28 फीसद की दर से टैक्स देना होगा। जानिए 5,000 रुपए से अधिक कीमत वालों होटल में ठहरना आपको कितना महंगा पड़ेगा। प्रस्तावित टैक्स दरों के हिसाब से हेयर ऑयल पर 18 फीसद जीएसटी लगेगा, जबकि कोकोनट ऑयल और रिफाइन्ड कुकिंग ऑयल पर 5 फीसद जीएसटी लागू होगा।

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इस कर के आने के बाद हवाई सफर भी कुछ हद तक सस्ता हो जाएगा। जानिए आपके हवाई सफर पर कितना कम होगा टैक्स का बोझ। उदाहरण से समझिए आपको हवाई सफर कितना सस्ता पड़ेगा। जीएसटी आने के बाद जो लोग लोकल ट्रेन और स्लीपर क्लास में सफर करेंगे उनपर फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन एसी क्लास में सफर करने वाले यात्रियों को जेब ढ़ीली करनी पड़ेगी। फस्र्ट क्लास और एसी कंपार्टमेंट में सफर करने वाले लोगों को ज्यादा पैस खर्च करने होंगे। टेलिकॉम सेक्टर पर भी जीएसटी का असर दिखाई देगा। हालांकि फोन और डीटीएच सर्विस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलता है फिर भी आपको इन सेवाओं के महंगे होने के लिए तैयार रहना होगा।

जीएसटी के बाद होटल में फैमिली के साथ खाना भी महंगा हो जाएगा। अगर आप नॉन एसी होटल में खाना खाते है तो आपको 12 फीसद जीएसटी देना होगा। लेकिन अगर आप किसी 5 स्टार होटल में खाना खाने गए हैं तो आपको अपने बिल पर 28 फीसद जीएसटी चुकाना होगा। कपड़े खरीदना भी महंगा हो जाएगा। हालांकि इंडस्ट्री के भारी दबाव के बाद 1000 रुपए से कम कीमत के कपड़ों पर टैक्स की दर को 12 फीसद से घटाकर 5 फीसद कर दिया गया है। इसके तहत छोटे शहरों के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में 100 रुपए तक के टिकिटों पर थोड़ी राहत दी गई है। जीएसटी ऑटोमोबाइल सेक्टर्स को थोड़ी राहत देता दिखाई दे रहा है। जीएसटी के तहत टैक्स की दर 43 फीसद होगी जो कि मौजूदा समय में 55 फीसद है। वहीं छोटी कारों पर टैक्स की दर 29 फीसद होगी जो कि मौजूदा समय में 30 फीसद है।

जीएसटी के बाद कंपनियों की कमाई और आप पर कैसा असर होगा। जीएसटी से महंगाई बढ़ेगी या घटेगी और लंबी अवधि में इसके फायदे किस तरह के होंगे। किन सेक्टर के लिए जीएसटी संजीवनी का काम करेगा। इस बारे में गोदरेज ग्रुप के चैयरमैन आदि गोदरेज का कहना है –

देश की इकोनॉमी को जीएसटी से बहुत फायदा होगा। जीएसटी के बाद देश की जीडीपी 1-2 फीसदी बढ़ जाएगी। जीएसटी के लागू होने के बाद शुरुआती 1-2 महीनों में थोड़ी परेशानियां रहेंगी लेकिन अक्टूबर से जीएसटी का इकोनॉमी पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा और आगे चलकर भारत की इकोनॉमी में बहुत अच्छी ग्रोथ देखने को मिलेगी।  जीएसटी लागू होने से कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ बढ़ेगी।

जीएसटी से एफएमसीजी सेक्टर पर कैसा असर होगा इस पर डाबर के सीएफओ, ललित मलिक ने कहा कि हम जीएसटी को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। डाबर ने सप्लाई चेन में डिस्ट्रिब्यूटर्स और सप्लायर्स को भी जीएसटी की ट्रेनिंग दी है। हालांकि अभी भी जीएसटी को लेकर थोड़ी बहुत असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जैसे कि जम्मू-कश्मीर के लिए जीएसटी लागू करने को  लेकर कोई सफाई नहीं आई है।

ललित मलिक के मुताबिक जीएसटी को लेकर छोटे कारोबारियों की तैयारी अभी अधूरी ही है। छोटे कारोबारी जीएसटी को लेकर तैयार नहीं हैं, लेकिन दिग्गज कॉरपोरेट की तैयारियां लगभग पूरी हो गई। ललित मलिक ने ये भी बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले डिस्ट्रिब्यूटर्स ने खरीदारी कम की है और जून महीने में इसका असर देखने को मिला है। साथ ही उन्होंने कहा कि जीएसटी के बाद शुरुआती दिनों में थोड़ी दिक्कतें होंगी, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। दूसरी तिमाही के अंत तक स्थिति सामान्य होने का अनुमान है।

ललित मलिक का मानना है कि जुलाई महीने में जीएसटी का कारोबार पर असर देखने को मिल सकता है। सितंबर से स्थिति में सुधार की उम्मीद है। तीसरी तिमाही और चौथी तिमाही में जीएसटी से होने वाले नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में जीएसटी लागू हो गया है। दरअसल राज्य में अभी तक जीएसटी बिल पास नहीं हो सका। इसे लेकर दूसरी सर्वदलीय बैठक में भी कोई आम सहमति नहीं बन सकी। गतिरोध बरकरार रहने के कारण सरकार अब विधानसभा का सत्र बुलाकर विपक्ष के साथ जीएसटी के मुद्दे पर विचार विमर्श करके सहमति बनाना चाहती है।

 सतीश पेडणेकर

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