तीखी नजर योगी पर

तीखी नजर योगी पर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सौ दिन की उपलब्धियों से गदगद हैं। उनका मानना है कि ‘हमारी सरकार ने मात्र 100 दिन में अनेक ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जिससे आमजन का  सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। इसकी सिर्फ अपने प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चा है।‘ प्रदेश सरकार के एक सौ दिन के कार्यकाल पूरे होने के अवसर पर लखनऊ के लोकभवन में अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने ‘100 दिन विश्वास के’ पुस्तिका जारी की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘हमने जनता से जो वादा किया था, उसे पूरा कर रहे हैं। सरकार की सौ दिन की  उपलब्धियों पर हम संतोष महसूस कर रहे हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सपनों को साकार करने की  दिशा में हमारी सरकार की पहल महत्वपूर्ण है। पिछले 15-16 वर्षों से राज्य में चल रहे ‘जंगल राज’  को खत्म कर ‘सुशासन’ स्थापित करना हमारी प्राथमिकता रही और इस दिशा में हमारा प्रयास सतोषजनक रहा।  कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने में हमारा प्रयास ‘संतोषजनक’ है। हम सबका साथ–सबका विकास के लिए लगातार प्रयत्नशील हैं।‘ अपनी सरकार के सौ दिन का लेखा जोखा पेश करते हुए योगी जी जिस आत्म विश्वास और दृढ़ता का परिचय दे रहे थे, वह सचमुच लाजवाब था।

उपलब्धियों की फेहरिस्त में मुख्यमंत्री की ओर से दी गयी प्राथमिकताओं पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने सबसे पहले नम्बर पर चर्चा करते हुए वी आई पी कल्चर समाप्त करने की बात कही। ‘सरकार ने वीआईपी कल्चर समाप्त करने की साहसिक पहल की। सरकारी और गैर सरकारी वाहनों से लालबत्ती के प्रचलन को बंद करने के आदेश की चर्चा के बाद ‘बिजली की निर्बाध सप्लाई में विभिन्न जिलों को जो वी आई पी दर्जा मिला हुआ था, उसे समाप्त करने की बात पर उन्होंने जोर दिया। कहा कुछ चुनिन्दा जिलों को ही 24 घंटे बिजली आपूर्ति होती थी, उसे समाप्त कर सभी जिलों को एक समान आपूर्ति का साहसिक निर्णय लेना सरकार की समतावादी नीति लागू करने की मंशा को ही जाहिर करता है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से न केवल उनकी कार्य पद्धति की निष्प्क्षता प्रमाणित होती है बल्कि उनका यह निर्णय समता एवं समानता के सिद्धान्त पर आधारित है। सरकार ने हर जिला मुख्यालय को 24 घंटे बिजली देने, ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे बिजली और तहसील मुख्यालयों सहित बुंदेलखंड क्षेत्र को प्रतिदिन 20 घंटे बिजली आपूति देने की बात बतायी। सबको समान अधिकार, सबसे समान व्यवहार का सिद्धान्त भाजपा सरकार का सिर्फ वायदा नहीं बल्कि व्यवहार में शामिल हैं।


 

सौ नम्बर में सिर्फ 10 की हकदार योगी सरकार – मायावती


 

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अपनी सरकार की सौ दिन की उपलब्धियों पर हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार अपनी पीठ ठोंकनें में कोई कोर-कसर नहीं बाकी रख रही है लेकिन वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सौ दिनों में ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिसकी चर्चा की जाए। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती कहती हैं – ‘अपने वायदों पर 10 प्रतिशत भी तो खरी नहीं उतरी भाजपा सरकार, क्या चर्चा की जाय। अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था के मामले में योगी सरकार को जीरो नम्बर ही दिया जा सकता है। प्रदेश में चोरी डकैती, लूट-मार, जातीय हिंसा, महिला उत्पीडऩ, सामंती-साम्प्रदायिक ताकतों का जबर्दस्त आतंक इन सौ दिनों में लगातार बढ़ा है। गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएं अपने चरम पर हैं । दलितों पर सामंतों के अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। साम्प्रदायिक ताकतें अपने मंसूबे पूरे करने के लिए निद्र्वंद्व भाव से बेहिचक काम कर रही हैं। सरकार ने सौ दिनों की उपलब्धियों पर न तो श्वेत पत्र जारी किया और न ही कोई उपलब्धि पुस्तिका, सिर्फ कुछ प्वाइंट्स मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को पढ़कर सुना दिये। हम समझते हैं 100 नम्बर में से इन्हें सिर्फ 10 नम्बर दिये जा सकते हैं वह भी मुश्किल से।‘


मुख्यमंत्री द्वारा विद्युत आपूर्ति बढ़ाने और उसमें समतावादी नजरिये से काम करने की नीति अपनाने के बाद दूसरे नम्बर पर किसानों के लिए ऋण माफी के निर्णय को तवज्जो देने की बात खास मायने रखती है। कहते हैं- प्रदेश के 86 लाख किसानों का 31 मार्च 2016 तक का एक लाख तक का फसली ऋण माफी का फैसला भी बड़ा और व्यापक प्रभाव वाला है। इससे प्रदेश सरकार पर करीब 3600 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय भार आयेगा। इस निर्णय के तहत प्रदेश के पांच एकड़ तक के सभी किसानों के 31 मार्च 2017 तक के बकाया फसली कर्ज माफ कर दिये गये।

सरकार की प्राथमिकताओं में तीसरा और महत्वपूर्ण उपलब्धियों वाला कदम बूचडख़ानों का बंद कराया जाना है। सरकार कहती है-नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट के निर्देर्शों का अनुपालन करते हुए प्रदेश में वर्षों से अवैध रुप से चल रहे बूचडख़ानों को पूरी तरह से बंद करने के निर्णय ने यह साबित कर दिया है कि सरकार किसी प्रकार के अवैध कार्य को बर्दाश्त नहीं करेगी।

इसी तरह योगी सरकार ने अवैध खनन पर प्रतिबंध के बाद नयी खनन नीति लागू की है। इस कदम से प्रदेश को हुए लाभ की चर्चा करते हुए बढ़े हुए राजस्व का उल्लेख भी किया। राजस्व प्राप्ति के अंश का 1.85  से बढ़ाकर अगले पांच वर्षों में 3 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री का दावा महत्वपूर्ण है कि इस निर्णय से अवैध खनन और इसके परिवहन में शामिल असामाजिक तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी आसान हो गयी है। इसी का परिणाम है कि ई-टेंडरिंग के माध्यम से होने वाले खनन पट्टों से राजस्व प्राप्ति पहले के मुकाबले काफी बढ़ गयी है।

यह सर्वविदित है कि प्रदेश की आबादी के मुकाबले डाक्टरों की बहुत कमी है। आमजन की बेहतर चिकित्सा की दृष्टि से सरकारी डाक्टरो की सेवानिवृति 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर देने के निर्णय से स्वास्थ्य विभाग की कार्यक्षमता काफी बढ़ गयी है। इससे जहां शहरी इलाकों के लोगों के इलाज में बेहतरी की उम्मीद जगी है, ग्रामीण क्षेत्रों में जनता को और ज्यादा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

योगी सरकार के एक खास निर्णय का असर प्रदेश में कार्यदिवस बढ़ाने और इस तरह से कार्य क्षमता में बढ़ोत्तरी में सहायक हुआ है। महापुरुषों के नाम पर पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाशों के स्थान पर महापुरुषों के जीवन और आदर्शों  से युवापीढ़ी  को अवगत कराने के लिए विद्यालयों में संगोष्ठी आदि आयोजित करने की व्यवस्था की गयी है। इस निमित्त 15 सार्वजनिक अवकाशों को निबंधित कर दिया गया है। इसके साथ ही 24 जनवरी को ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ मनाने का राज्य सरकार ने निर्णय लिया है जिससे लोग अपने प्रदेश के बारे में और अधिक गहराई एवं व्यापकता से जान सकें।


 

राम नाम जपना, पराया काम अपना- अखिलेश


 

Akhilesh Yadav addesses a press conference

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव यूं तो भाजपा सरकार के सौ दिनों पर कुछ कहने से मना कर देते हैं – ‘क्या बोलू, कुछ उनका किया-धरा सामने आये तब न। जब हमारे किये कामों को ही अपना बताकर पेश किया जा रहा है तो क्या कहूं।’ उन्होंने कहा- ‘पूरा देश जान रहा है कि एम्बुलेंस सेवा हमने शुरु की लेकिन मौजूदा राज्य सरकार उसे भाजपा सरकार की उपलब्धि बताने में मशगूल है। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाइयां, जांच हमने शुरु किया, अब ये इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं।‘ बूचडख़ानों की बंदी और पशुओं की बिक्री पर रोक लगाने पर व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि अब बछड़ों और पड़वों की तादाद इतनी बढ़ रही है कि मुख्यमंत्री उनका इंतजाम करें। यदि वे जल्दी ये इंतजाम नहीं करेंगे तो किसान उनके दरवाजे पर इन्हें लेकर पहुंच जायेंगे या फिर हर जिले के डी एम के दरवाजे पर इकट्ठे होंगे। दरअसल मौजूदा राज्य सरकार सौ दिन में कुछ कर तो पाई नहीं, फिर गिनायेंगे क्या? इसलिए पहले की राज्य सरकारों के काम को अपना बताने के अलावा कोई रास्ता नहीं है,’ उन्होने कहा।


कानून-व्यवस्था के हालात एवं सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के साथ बदसलूकी व अपराध वृद्धि के लिए प्रदेश की ज्यादातर बदनामी होती रही है। पिछली सरकार के कार्यकाल पर तोहमत लगाते हुए भाजपा ने  सपा के शासनकाल को ‘जंगलराज’ का नाम दिया था। इसको ही ध्यान में रखकर  योगी सरकार ने कई कदम उठाये। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि महिलाओं और छात्राओं को आवारा युवकों और लफंगों से सुरक्षा की दृष्टि से एंटी -रोमियों स्क्वायड का गठन प्रदेश के सभी जिलों में किया गया जिसके सकारात्मक परिणाम नजर आ रहे हैं। स्कूल- कालेज, पार्क, मॉल, काफी हाउस, सिनेमा घरों, रेलवे, बस स्टेशनों पर होने वाली छेडख़ानी, अश्लील टिप्पणियों, यौन अपराधों पर अंकुश लगा है।

इसके अलावा प्रदेश में पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी सौ दिनों में पर्याप्त कदम उठाये गये हैं। सरकार भरपूर प्रयास कर रही है कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को स्थायी रुप से बढ़ावा मिले और धार्मिक महत्व के स्थलों के अलावा अन्य दर्शनीय एवं ऐतिहासिक स्थलों पर देश -विदेश के पर्यटकों की आवाजाही बढ़े। इसके तहत कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वालों को राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी 50,000 से बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दी  गयी है। इस दिशा  में गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन के निर्माण का निर्णय सरकार का महत्वपूर्ण कदम है। अयोध्या में सरयू घाटों के जीर्णोद्धार व पुनर्निर्माण सहित अन्य कार्यों के लिए धन अवमुक्त करने का कार्य सरकार की मंशा के अनुरुप ही है।


 

सौ दिन फरेब के – कांग्रेस


 

Layout 1प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यदेव त्रिपाठी कहते हैं – ‘मुख्यमंत्री द्वारा अपनी सरकार के सौ दिन पूरे करने और उपलब्धियों के बारे में सौ दिन विश्वास के पुस्तिका बांटना हास्यास्पद है। असल में ये सौ दिन विश्वास के नहीं बल्कि फरेब के कहे जा सकते हैं। क्योंकि इन सौ दिनों में भाजपा का सिर्फ फरेब ही सामने  आया है। जिस विश्वास का प्रदेश की जनता ने यकीन किया, उसका पर्दाफाश ही हुआ है। कह लीजिए विश्वास का एक्सपोजर हो गया। जिस कानून व्यवस्था पर भाजपा उंगली उठाती थी वह इनके राज में और बदतर हो गयी है। दलितों पर अत्याचार बढ़े हैं। अल्पसंख्यक मायूस हो गये हैं। वे क्या खाएं और कैसे रहें, कैसे चलें, इसका भी निर्देश भाजपा के जिलाये हुए गुंडे कर रहे हैं।‘


दरअसल अपने शपथ ग्रहण के बाद सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री ने अपनी पहली ही बैठक में यह स्पष्ट कर दिया था कि लोक कल्याण संकल्प -पत्र (चुनावी घोषणा पत्र) पर विश्वास करके राज्य की जनता ने इतने बड़े बहुमत से हमारी सरकार बनायी है, इसलिए संकल्प पत्र के सभी बिन्दुओं को पूरी गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने उसी दिन कहा था कि नयी सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्ग दर्शन में सबका साथ,सबका विकास की तर्ज पर विकास का एक नया ढंचा विकसित करेगी, जिसमें समाज के सभी वर्गों, राज्य के सभी नागरिकों-क्षेत्रों के विकास का कार्य किया जायेगा। उन्होंने संकल्प दोहराया था कि यह प्रदेश देश का एक उत्कृष्ट प्रदेश होगा जो भ्रष्टाचार, दंगों, अराजकता एवं नौजवानों  के पलायन और गुण्डागर्दी से मुक्त होगा। अपने उसी संकल्प में मुख्यमंत्री ने गौ तस्करी पर अविलम्ब पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया और अवैध बूचडख़ानों को बंद करने के लिए तत्काल एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया था। यह एक्शन प्लान न केवल तत्काल बना बल्कि उस पर शीघ्र अमल भी होने लगा जिसके परिणाम भी नजर आने लगे हैं। उनके अनुसार ‘मेरी सरकार अपराध मुक्त, अन्यायमुक्त एवं भयमुक्त वातावरण सृजित करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ाते हुए चल रही है और हम कानून का राज स्थापित करने के लिए कृत-संकल्पित हैं।

फिलहाल, मुख्यमंत्री का दावा सही है या अभी उसके पूर्णत: सही होने में कुछ कमी है, इसका फैसला तो प्रदेश की जनता ही कर सकती है, हम इतना जरुर कह सकते हैं कि प्रदेश सरकार अपने द्वारा लिये गये संकल्पों की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। उन्हें पूरे होने के लिए 100 दिन की अवधि बहुत कम है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य में ये संकल्प पूरे होंगे और उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय के सपनों का प्रदेश बनेगा, योगी सरकार इसमें सफल होगी।

लखनऊ से सियाराम यादव

 

 

 

 

 

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