सुरेश शर्मा का देहावसान

सुरेश शर्मा का देहावसान

राष्ट्रवादी चिंतनधारा के महानायक और आदर्श पुरूष सुरेश चंद्र शर्मा अब नहीं रहे। सक्रिय जीवन निभाते हुए जब वो अपने पीतमपुरा स्थित निवास स्थान पर दोपहर को घूम रहे थे, तो अकस्मात वो गिर गए और शायद यह ईश्वर का बुलावा था। और वो हम सबको छोडक़र चले गए। 71 साल में होते हुए भी वो सदा चल-चंचल रहते थे। वह अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र, पुत्रवधु और एक पोते को छोड़ गए हैं। उन्होंने बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आदर्श को अपने जीवन संघर्ष में अपनाया। उनका पूरा जीवन संघ के आदर्शों पर चलता रहा, और कभी भी उनसे समझौता नहीं किया। भगवान का दिया हुआ धन और अपने उपार्जित धन को छोडक़र उनका किसी के उपर लालच नहीं रहा। हमेशा से सामाजिक कार्यों में लगे रहना, लोगों की मदद करना, और अपना कत्र्तव्य को निभाने में सुरेश जी एक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण थे। स्वर्गीय भानुप्रताप शुक्ला को सुरेश जी अपने जीवन के आदर्श के रूप में देखते थे। एक बार एक व्यक्ति  उनके पास नौकरी के लिए रोते हुए उनके ऑफिस में पहुंचा। तब सुरेश जी एक निजी कंपनी में कार्यरत थे और वो अपनी नौकरी उनको देकर खुद नौकरी छोडक़र चले गए। कर्मठ व्यक्ति को नौकरी का अभाव कहां रहता है और उनको संघ के मुखपत्र पंचजन्य और ऑर्गनाईजर  में जनरल मैनेजर के रूप में काम मिल गया। और वो रूके नहीं। पंचजन्य और ऑर्गनाईजर को आगे बढ़ाने में सुरेश जी की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही। नौकरी से अवकाश के बाद भी वो चुप कहां बैठते। सुरेश जी फिर से राष्ट्रवादी चिंतनधारा की और एक पत्रिका उदय इंडिया का झंडा आगे बढ़ाते रहे। अपनी मृत्यु तक सुरेश जी उदय इंडिया के बारे में चिंता करते थे। उदय इंडिया को आगे बढ़ाने में सुरेश जी के महत्वपूर्ण योगदान के लिए उदय इंडिया परिवार उन्हें हमेशा याद रखेगा। सुरेश जी को आत्मप्रशंसा करना अथवा सुनना दोनों से सख्त चिढ़ थी। उनके क्रियाकलाप को ध्यान से देखने पर उनके अंदर के साधक को स्पष्ट पहचाना जा सकता था। उदय इंडिया परिवार परमपिता परमात्मा से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है।

 

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