चुनावी मोड में राजस्थान भाजपा-कांग्रेस में महाभारत

चुनावी मोड में राजस्थान  भाजपा-कांग्रेस में महाभारत

दुश्मनी लाख करो पर ये गुंजाइश रहे

कि दुबारा अगर मिल जाये तो शर्मिन्दा न हों

राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता शायर डॉ. बशीर बद्र के इन अल्फाजों को धत्ता बताने की होड़ में इस कदर जुट गये है कि पार्टी विद डिफरेंस के दावे की गुंजाईश भी नहीं रही। नतीजतन तलवारबाजी की परम्परा का इतिहास समेटे इस प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य विषाक्त हो चला है। इसके साथ ही दुबारा सत्ता में लौटने को आतुर भाजपा और सत्ता स्वप्न को संजोये प्रतिपक्ष कांग्रेस मे गुटबाजी के मुखर होते स्वर पार्टी आलाकमान के लिए परेशनी का सबब बनते जा रहे है। धौलपुर उपचुनाव जितवाकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अब अपनी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से जमीनी हकीकत देने पर विशेष फोकस के साथ सरकारी मशीनरी का चेहरा बदलने का प्रयास किया है।

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भाजपा नेतृत्व की पार्टी कार्यकर्ताओं एवं नेताओं को अपनी बात पार्टी के मंच पर कहने की नसीहत दी जाती है। लेकिन पार्टी अनुशासन के मामले में अब महाभारत हो रही है। पार्टी के एक कद्दावर नेता सांगानेर जयपुर से विधायक घनश्याम तिवाड़ी पर तलवार लटकाने से मामला उलझ गया है। पार्टी की केन्द्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष गणेशी लाल द्वारा भेजा गया नोटिस तिवाड़ी को मिलता इससे तीन दिन पहले ही खबर मीडिया में उजागर हो गई। पार्टी संविधान की धारा 25 (च) के अन्तर्गत तिवाड़ी को अनुशासनहीनता का दोषी मानते हुए चार सवालो के साथ दस दिन में नोटिस का जवाब मांगा गया। तिवाड़ी ने भी अपने समर्थक कार्यकर्ताओं को नोटिस मिलने पर जवाब देने तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ जयपुर से लड़ाई के लिए तैयार होने का आहवान किया। प्रदेश भाजपा में सियासी हलचल बढने के साथ-साथ वसुंधरा समर्थक मंत्री राजेन्द्र राठौड़, कालीचरण सराफ और डॉ. अरूण चतुर्वेदी अपने बयान में तल्ख शब्दो में तिवाड़ी की निंदा की। तिवाड़ी ने भी अपना जवाब मीडिया में उजागर किया है क्योंकि उन्हे मीडिया से नोटिस की जानकारी मिली।

तिवाड़ी ने अपने पर लगाये गये चार आरोपो का जिस तरीके से सिलसिलेवार जवाब दिया है वह खुद केन्द्रीय अनुशासन समिति और पार्टी नेतृत्व के लिए भी गले की हड्डी बन सकता है। उदय इंडिया को उपलब्ध करवाये गये जवाब की दो अलग अलग प्रति की शुरूआत ‘‘आयाहि सत्य आविर्भव’’ वाक्य से की गई है। दूसरे जवाब के अंत में कहा गया है-

उम्मीद करे किससे गुनहगार तुंम्हारा

हाकिम भी काजी भी लगता है

उनके हाथो में सिमटा हुआ है बेचारा

दिक्कत बहुत है तुम्हे ‘‘जमीरवालों’’ से

समय आने दो हम भी देखेंगे इनकार तुम्हारा

इस जवाब में तिवाड़ी ने सभी आक्षेपों को सिरे से नकारते हुए लिखा है कि राजस्थान में जो वास्तव में अनुशासनहीन है जिन्हे पार्टी में देश भर में अनुशासनहीनता की महारानी भी कहा जाये तो कोई अतिषयोक्ति नही होगी उनसे सम्बन्धित कुछ तथ्य आपके सामने रख कर मांग करता हूं कि राजस्थान की मुख्यमंत्री पर पार्टी अनुशासनहीनता की कार्रवाई करें इन तथ्यों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह की गरिमा को धूमिल करने के प्रयास में राजस्थान के सासंदों को दिल्ली के बीकानेर हाउस में रोकने, बीकानेर हाउस मे प्रधानमंत्री के कार्यालय (पीएमओ) से भी बेहतर राजस्थान के मुख्यमंत्री का कार्यालय (सीएमओ) बनाने के सार्वजनिक बयान, वर्ष 2012 में भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाब चन्द कटारिया की प्रस्तावित जन जागरण यात्रा के विरोध मे मीडिया के समक्ष पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की घोषणा तथा खुद के समर्थन में भाजपा नेताओं से इस्तीफे दिलवाने 2008 के चुनाव में हार, प्रतिपक्ष के नेता पद से त्याग पत्र के निर्देषों की खुली अवहेलना इत्यादि घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख किया गया है। बकौल तिवाड़ी उनके खिलाफ प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी द्वारा भेजी गई शिकायतों का विवरण मिलने पर वह और विस्तृत जवाब देने को तैयार रहेंगे। तिवाड़ी के जवाब के साथ मीडिया में छपी खबरों की कटिंग्स भी भेजी है। अपने जवाब में तिवाड़ी ने यह आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के दबाव के कारण जब मुझे प्रदेश और केन्द्र की सभी जिम्मेदारियों से पार्टी हटाती चली गई, जब प्रदेश में पार्टी के द्वारा कदम-कदम पर मेरा अपमान होता चला गया और भाजपा सरकार द्वारा मेरी सुरक्षा हटाकर अंत मे मुझ पर भाजपा के ही प्रशिक्षण शिविर में जानलेवा हमला तक किया गया तो आप क्या मुझसे यह आशा रखते है कि मैं पार्टी की बैठको में जाऊं? जवाब में यह भी लिखा गया है कि राजस्थान में पार्टी समर्पण निष्ठा और योग्यता को दरकिनार कर चापलूसों का दरबार और माफियाओं का अड्डा बनती जा रही है।

दुबारा सत्तारूढ़ होने के वक्त से वसुंधरा राजे का घनश्याम तिवाड़ी से छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। विधानसभा के भीतर और बाहर तिवाड़ी वसुंधरा के नेतृत्व को चुनौती देने के साथ सरकार को घेरते आ रहे है। करीब 28 वर्ष पहले पंजीकृत दीनदयाल स्मृति संस्थान के माध्यम से गठित दीनदयाल वाहिनी के मंच पर उन्होने भाजपा नेतृत्व द्वारा तिरस्कृत जमीनी कार्यकर्ताओं को संगठित किया है। पिछले दिनों भाजपा नेतृत्व की कोर बैठक में तिवाड़ी की पार्टी एवं सरकार विरोधी गतिविधियो के खिलाफ कार्यवाही का मानस बना। प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने केन्द्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष डॉ. गणेशी लाल को भेजे शिकायती पत्र में तिवाड़ी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ये खबरे उजागर होने से भाजपा की सियासती हलचल गरमा गई। तिवाड़ी ने भी पलटवार करते हुए ईंट का जवाब पत्थर से दिया। दोनों पक्षों से जिस तलखी से परस्पर व्यंग्य बाण छोड़े गये है उन्हे पार्टी में महाभारत की संज्ञा दी गई है।

अनुशासन समिति ने तिवाड़ी से दस दिन में चार सवालों का जवाब मांगा है। दो वर्षो से लगातार पार्टी के विरूद्व गतिविधियो में हिस्सा ले रहे है और पार्टी के विरूद्व बयानबाजी कर रहे है। दूसरा पार्टी की बैठकों से अनुपस्थित रहते है। तीसरा विपक्षी दलों के साथ मंच संाझा कर रहे है और समानान्तर राजनीतिक दल खड़ा करने का प्रयास भाजपा नेताओं के बीच चल रहे शब्दवाणों के चलते जयपुर में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के सानिध्य में पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत की स्मृति में आयोजित व्याख्यान माला के अवसर पर पिछले कई वर्षो मे पहली बार वसुंधरा राजे तथा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक साथ मंच सांझा किया। इस मौके पर वसुंधरा राजे ने शेखावत का स्मरण करते हुए कहा कि वे ऐसे राजनेता थे जो दुश्मन नहीं बनाते थे और उनके मित्र सभी राजनीतिक दलो में थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शेखावत ने किसी को शत्रु नहीं बनाया और गरीब को हमेशा केन्द्र बिन्दु में रखा। गौरतलब है कि इस समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. अरूण चतुर्वेदी उपस्थित थे। शेखावत पाठशाला से निकले मंत्री राजेन्द्र राठौड मंत्री कालीचरण सराफ, राजपाल सिंह शेखावत की गैर मौजूदगी चर्चा में रही। भाजपा क्षेत्रो में यह सुग बुगाहट है कि मंत्रियों को समारोह में जाने से मना किया गया। इसी प्रकार गत दिनों केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पाली दौरे पर आने से रोकने का प्रयास किया गया। भाजपा के कद्दावर नेता राष्ट्रीय महासचिव ओम माथुर ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा अनावरण के लिए राजनाथ सिंह को आमंत्रित किया था। माथुर भी वसुंधरा विरोधी खेमे में माने जाते है।

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उधर प्रतिपक्ष कांग्रेस में अपनी महाभारत जारी है। गुरदास कामत के पश्चात् प्रदेश प्रभारी महासचिव अविनाश पाण्डे की मौजूदगी में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई। पाण्डे का यही कहना था कि सी एम का कोई चेहरा नही हम सभी मिलकर चुनाव लड़ेंगे। इस बैठक में गैर हाजिर रहे पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विधायक विश्वेन्द्र सिंह ने जयपुर में जिलावार फीड बैठको के दौरान बयान देकर पार्टी में हलचल मचा दी है। पार्टी द्वारा सी एम का चेहरा घोषित किये जाने की मांग करते हुए उनका कहना है कि बिना मांझी के नाव को दरिया मे उतार देंगे तो उसका हश्र क्या होता है, सब जानते है। इसलिए पंजाब की तर्ज पर राजस्थान में भी सी एम प्रोजेक्ट होना चाहिए। इसके अभाव में कार्यकर्ताओ में असमंजस की स्थिति है। अपने बयान से विवादो में रहते आये विश्वेन्द्र सिंह ने इससे पहले प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के समर्थन में नेताओं से हाथ खड़े करवाये थे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इस बैठक में उपस्थित थे। इन विवादों के बीच अशोक गहलोत को गुजरात का प्रभारी महासचिव बनाया गया है। पार्टी के कई कद्दावर नेताओं को राजस्थान से बाहर अन्य प्रदेशों अथवा दिल्ली में जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है तब चुनावी माहौल में कांग्रेस का पंजा राजस्थान में कैसे मजबूत होगा। कांग्रेसजनों के समक्ष लाख टके का सवाल यही है। अलबत्ता प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने कर्मचारी संगठनों द्वारा सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने की मांग के समर्थन में सडक़ो पर उतरने का मानस जताया है।

कांग्रेस को लगता है कि सरकारी मशीनरी की सहानुभूति उनकी चुनावी नैय्या को पार लगाने में मददगार होगी, भले ही अभी कोई मांझी नही है।

चुनावी मोड़ में आयी भाजपा सरकार ने प्रशासन तंत्र में सचिवालय से लेकर जिलो में फेरबदल किया है। साढे तीन साल की अवधि में मई के प्रथम सप्ताह में महज एक ही दिन में जारी 296 अधिकारियों की तबादला सूची अब तक का कीर्तिमान है। इनमे भारतीय प्रशासनिक सेवा के 77 अधिकारियों में 33 मे से 16 जिला कलक्टर बदले जाने भारतीय पुलिस सेवा के 46 अधिकारियों में 24 पुलिस अधीक्षक, भारतीय वन सेवा के 23 तथा राजस्थान प्रशासनिक सेवा के 150 अधिकारियों के तबादले सम्मिलित है। माना जाता है कि जनप्रतिनिधियों की मांग तथा सरकार एवं संगठन के स्तर पर हुई चर्चा में फील्ड पोस्टिंग के जरिये चेहरे बदलकर प्रशासन को चुस्त दुरूस्त बनाने के मकसद से यह कवायद की गई है। पिछले कुछ अर्से से सत्तारूढ़ दल की बैठको में यह स्वर मुखर होता आया है कि मंत्रीगण विधायकों की नही सुनते है और अधिकारी भी उन्हे तवज्जों नहीं देते है। कई विभागों मे मंत्रियों तथा अधिकारियों के बीच विवाद भी सार्वजनिक हो चुके है। अब जनप्रतिनिधि अपने इलाके मे पसंदीदा अफसर लगवाकर अगला चुनाव जीतने की जुगत में है।

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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर एवं स्वयं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हाड़ौती संभाग में कोटा एवं बूंदी सहित आठ जिलो में एक साथ जिला कलक्टर एवं पुलिस अधीक्षक बदले गये है। गौरतलब है कि केन्द्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार 28 जनवरी 2014 को अखिल भारतीय सेवा नियम में संशोधन के जरिये एक पद पर न्यूनतम दो साल की कार्य अवधि का प्रावधान किया था। अलबत्ता विशेष परिस्थिति में समय से पहले तबादला किया जा सकता है। राज्य के कार्मिक विभाग द्वारा तैयार आंकड़ो पर नजर डाले तो पिछले साढ़े तीन वर्षों में राज्य के 33 जिलों में  जिला कलेक्टरों के लगभग एक सौ तथा उच्च पदों पर करीब चार सौ अधिकारियों के तबादले किये गये है। इसी तरह भारतीय पुलिस सेवा में पुलिस अधीक्षक पद के 150 तथा उच्च पदों पर 160 अफसरों के तबादले किये गये। इस अवधि में करीब 74 आई ए एस और 25 आई पी एस के चार बार से भी अधिक तबादले हुए। ताजा सूची के अनुसार लगभग एक दर्जन अधिकारियों को तो छ: माह भी एक स्थान पर नहीं टिकने दिया। ब्यूरोक्रेसी में सबसे बड़े फेरबदल के बावजूद अभी भी कई पद खाली पड़े है जिन पर अफसरों को लगाया जाना है। ब्यूरोक्रेसी के साथ मंत्रिमण्डल के कुछ सदस्यों की विदेश यात्रा और उनके विभागो में फेरबदल भी चर्चित रहे। याने जो मंत्री विदेश यात्रा पर गया और उनके साथ जो अधिकारी गये, वापिस लौटने पर मंत्री तथा उन अधिकारियों तक के विभाग बदले जाने से विदेश यात्रा में अपेक्षित परिणाम ढाक में तीन पात की कहावत को चरितार्थ कर गये। दूसरी तरफ ब्यूरोक्रेसी का एक चेहरा यह भी है कि एक दर्जन से अधिक आईएएस ढाई साल या इससे अधिक अर्से से एक ही पद पर काबिज है। ब्यूरोक्रेसी के मुखिया ओ पी मीना तथा पुलिस के मुखिया मनोज भट्ट जुलाई माह में सेवानिवृत्त हो रहे है। इसलिए दोनो वर्गो में फिर से फेरबदल होना है। बहरहाल राजनीतिक तथा प्रशासनिक मोर्चे पर कशमकश का दौर जारी है।

 जयपुर से गुलाब बत्रा

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