एनआईए की अलगाववादियों पर नकेल

एनआईए की अलगाववादियों पर नकेल

कश्मीर के हालात चिंताजनक है, वहां स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं, खासकर दक्षिण कश्मीर में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि यहां 90 के दशक की वापसी हो रही है। उस दौर में आतंकवादियों ने भारी खूनखराबा किया था, वे खुलेआम घूमते थे और पूरी कश्मीर घाटी में दशहत का माहौल बन गया था। लगता है कि 27 साल बाद एक बार फिर कुछ वैसे ही हालात सामने आ रहे हैं। दक्षिण कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां ठप हो गयीं हैं। आतंकवादी बैकों को लूट रहे हैं। साथ ही ऐसे कुछ वीडियो सामने आये हैं जिनमें आतंकवादी खुलेआम घूमते और लोगों को धमकाते नजर आये हैं।

कश्मीर के हालात जानना हम सभी के लिए बेहद जरूरी है। यह न केवल देश का अभिन्न अंग है, साथ ही भारतीय सुरक्षा बलों के हजारों जवानों ने इसकी रक्षा के लिए कुरबानियां दी हैं। जानना इसलिए भी जरूरी है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान किस तरह अपनी नापाक चालों से यहां आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और भारत को कमजोर करने की हरसंभव कोशिश कर रहा है।

ऐसा माना जाता है कि मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर नीतियां ढीलीं थीं, उनमें सुनिश्चित दिशा का अभाव था। जब केंद्र में मोदी सरकार और जम्मू कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन सत्ता में आया तो उस पर भी सवाल उठे थे। कहा गया कि यह बेमेल गठबंधन है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी का रुख हमेशा से अलगाववादियों के प्रति नरम रहा है, दूसरी ओर भाजपा अलगाववादियों के प्रति कड़े रुख की हिमायती रही है। लेकिन गठबंधन चलाने के लिए दोनों दलों ने थोड़ा लचीला रुख अपनाया। उम्मीद जगी कि कश्मीर के हालात सुधरेंगे। पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया जाएगा, साथ ही कश्मीर के अवाम से संवाद का रास्ता खुलेगा। लेकिन संकेत इसी बात के हैं कि हालात नहीं सुधरे हैं, स्थिति बदतर हुई है।

यह बात अब कोई रहस्य नहीं रह गयी है कि पत्थरबाजों को भारतीय सुरक्षाबलों पर हमला करने के लिए पाकिस्तान से पैसे मिलते हैं। नोटबंदी के बाद इसमें समस्या आ रही थी और हवाला के माध्यम से पैसे का लेनदेन भी रुक-सा गया है। आतंकवादियों ने नयी रणनीति अपनायी और बैंकों को लूटना आरंभ कर दिया। आप स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इन घटनाओं के बाद महबूबा मुफ्ती सरकार ने दक्षिण कश्मीर की 40 बैंक शाखाओं में नकद लेनदेन पर रोक लगा दी है यानी कोई ग्राहक न तो नकद जमा कर पाएगा और न ही निकाल पाएगा।

दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ छद्म युद्ध जारी है। पाकिस्तान ने बर्बरता की सीमा पार करते हुए तीसरी बार भारतीय जवानों के शवों को क्षत-विक्षत किया है। एक बार भारत इसके जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक कर चुका है लेकिन उसके बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। मोदी सरकार के ऊपर दबाव है कि वह एक बार फिर इसका जवाब दे।

इन्ही बांतों को ध्यान में रखते हुए कश्मीर के आतंकी नेटवर्क की कमर तोडने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी  एनआईए ने कश्मीर सहित दिल्ली और हरियाणा में छापे मारते हुए आतंकियों को अज्ञात घन उगाही के माध्यम से सहायता करने वाले देशद्रहियों पर शिकंजा कस दिया है । 3 जून को  देर रात एनआईए (नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी) ने दिल्ली और श्रीनगर में ताबड़तोड़ छापेमारी की। इन छापेमारी में कश्मीर में 14 और दिल्ली में 8 जगहों पर छापे मारे गए। राजधानी दिल्ली और कश्मीर में बैठे हवाला ऑपरेटर्स, अलगाववादी नेताओं के घर, दफ्तर और उनके व्यवसायिक स्थानों पर भी छापे मारे गए।

Layout 1

इस छापेमारी में एनआईए ने तहरीक-ए-हुर्रियत से जुड़े तीन अलगाववादी नेताओं  बिट्टा कराटे, नईम खान और जावेद अहमद बाबा उर्फ गाजी से पूछताछ की। इन नेताओं से टेरर फंडिंग और जम्मू-कश्मीर में विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने के मामले में पूछताछ की गई। इस फंडिंग को लेकर एक टीवी चैनेल का स्टिंग भी प्रकाश में आया था।

एनआईए द्वारा की जा रही उक्त तफ्तीश 26/11 मुंबई हमले में की जा रही जांच के दौरान, केन्द्रीय जांच एजेंसी को इन अलगाववादी संगठनो को मदद मिलने की बात का खुलासा हुआ। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज सईद के अलावा कट्टर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और जम्मू ऐंड नैशनल फ्रंट चेयरमैन नईम खान के खिलाफ भी केस दर्ज कर प्राथमिक जांच शुरू की है। अलगाववादी नेताओं पर लश्कर चीफ और आतंकी हाफिज सईद से पैसे लेने की बात भी सामने आयी हैं। बता दें कि इसी छापेमारी में करीब ढाई करोड़ कैश बरामद हुए। इसके अलावा छापेमारी में ज्वैलरी, सिक्के और जायदाद के दस्तावेज भी मिले हैं और अफसरों को लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसी आतंकी संगठनों के लेटरहेड मिले हैं।

एनआईए के अनुसार कश्मीर के अलगाववादी  कश्मीर में आतंक और हिंसा फैलाने के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जमात-उद-दावा, लश्कर-ए-तैयबा के चैरिटी फाउंडेशन फलाह-ए-इंसानियत  और जैश समर्थित अल -हमत ट्रस्ट की मदद से इस टेरर फंडिंग को अंजाम देते है। एनआईए के मुताबिक यह चैरिटेबल संगठन पाकिस्तान से सोशल सर्विस के नाम पर फण्ड एकत्र करते हैं जिसका इस्तेमाल कश्मीर में आतंक के प्रसार के लिए किया जाता है। अल-रहमत ट्रस्ट पर्चे छपवाकर ईद के मौके पर कुर्बानी के लिए लोगों से डोनेशन लेता है, तो एफआईएफ पाकिस्तान का सबसे बड़ा एनजीओ है। खुफिया विभाग की 2012 की एक रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर में आतंकवाद को फंड करने के लिए 78 करोड़ रुपये इकट्ठे किए थे।

घाटी में 1990 में आतंकवाद पनपने के बाद यह पहला मौका है, जब किसी केंद्रीय जांच एजेंसी ने अलगाववादियों के आर्थिक नेटवर्क पर छापेमारी की है। इससे पहले वर्ष 2002 में आयकर विभाग ने गिलानी समेत हुर्रियत नेताओं के ठिकानों पर छापे मारे थे और नकदी और दूसरे दस्तावेज जब्त किये थे। हालांकि तब कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया था।

पुरानी मिसाल है कि आप और बहुत-सी चीजें बदल सकते हैं, लेकिन अपना पड़ोसी नहीं बदल सकते हैं। विरोधाभासों से भरे पाकिस्तान के साथ हम-आपको जीना होगा। कभी सर्जिकल स्ट्राइक करनी होगी, लेकिन साथ ही साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना होगा। दूसरी ओर कश्मीर की अवाम का भरोसा भी जीतना होगा, बिना उनके सहयोग के पाक समर्थित आतंकवादियों से पार नहीं पाया जा सकता।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

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