निकली टायर की हवा

निकली टायर की हवा

अखिलेश बाबू के टायर की उस समय हवा निकल गई, जब उन्हें पता चला कि कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी चुनाव प्रचार से पीछे हट गई हैं। कहां प्रियंका तीसरे चरण के बाद खुलकर चुनाव प्रचार में उतरने वाली थीं और कहां बस अमेठी-रायबरेली का दौरा करके लौट गईं। हालांकि अखिलेश बाबू को इसका वाजिब कारण भी बताया गया, लेकिन वे कर ही क्या सकते हैं। लिहाजा, उन्होंने मजबूरी का गठबंधन बताकर कांग्रेसियों को कोसना शुरू कर दिया। खबर है कि जबसे इसकी भनक शिवपाल को लगी है, वे मंद-मंद मुस्करा रहे हैं। वहीं अखिलेश हैं कि नाक पर मिर्ची की रगड़ से अब तक नहीं उबर पा रहे हैं।



चूहे मारने की दवा ले लो


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कभी गायत्री प्रजापति साइकिल पर चूहे मारने की दवा लिए घूम रहे थे और आज न केवल सपा के पूर्व मंत्री हैं, बल्कि अघोषित तौर पर हजारों करोड़ के मालिक भी हैं। अमेठी से चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव कांग्रेस सांसद संजय सिंह की पूर्व पत्नी गरिमा सिंह और वर्तमान पत्नी अमिता (मोदी) सिंह के बीच में फंस गया है। वहीं अखिलेश भैया पहले से ही गायत्री से दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में अमेठी में एक चर्चा आम है कि गायत्री प्रजापति क्या करेंगे। सवाल उठते ही भाई लोग जवाब दे बैठ रहे हैं कि चूहे मार दवा बेंचेगा। बाकी तो गायत्री भाई ही जानें।



मट्ठे से जल गए


PATNA - JANTA KE DARVAR ME  C . M . NITISH KUMAR

जी  हां, नीतीश कुमार मट्ठा पी रहे थे और जल गए। नीतीश कुमार को उम्मीद थी कि उ.प्र. में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस के साथ गठबंधन में वे शामिल रहेंगे। जब उनकी पार्टी को कोना नहीं मिला तो उन्हें फिर उम्मीद बंधी कि अखिलेश यादव चुनाव प्रचार में ही सही, उन्हें एक बार आने का न्यौता देंगे। धर्मनिरपेक्षता की आवाज बुलंद होगी, लेकिन अखिलेश ने पूरे प्रचार अभियान को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और अपनी पत्नी डिंपल के सहयोग से पूरा करने की रणनीति तैयार कर ली। यहां तक कि कांग्रेस ने लालू यादव को न्यौता दे दिया लेकिन नीतीश को लेकर खामोश रही।  बताते हैं कि ऐसे में नीतीश कुमार को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। यह भी नहीं कि जिस प्रशांत किशोर की उन्होंने इतनी टीआरपी बढ़ाई, आखिर वे क्या कर रहे हैं?



सता रही है जन्मपत्री


modi

पीएम मोदी ने जबसे जन्मपत्री की चर्चा उछाली है, कुछ नेताओं और तमाम नौकरशाहों की नींद हराम हो गई है। वैसे भी नोटबंदी के निर्णय के बाद पीएम ने संदेश दे ही दिया है कि वे काफी दृढ़ निश्चयी हैं। ठान लेते हैं तो पीछे नहीं हटते। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद वह आगे भी कदम उठा सकते हैं। माना जा रहा है कि इसमें भ्रष्ट नौकरशाहों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। केन्द्रीय सचिवालय के गलियारे में भी यह चर्चा तैरने लगी है और इसको लेकर नौकरशाहों में भी खुसफुसाहट जारी है। नोटबंदी के बाद जनता के सहयोग ने पीएम को अच्छा रिस्पांस दिया है। ऐसे लोगों की निगाहें चुनाव नतीजे पर

टिकी है। भाई लोगों का मानना है कि नतीजे पक्ष में आए तो पीएम रुकने वाले नहीं हैं। जन्मपत्री भी खुलेगी।



वाह पीयूष भाई


ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल की खूब तारीफ हो रही है। हो भी क्यों न। उ.प्र. चुनाव पूरे शबाब पर था और पीयूष भाई ने बड़ा रिस्क ले लिया। पीयूष पांडे की टीम को उन्होंने आनन-फानन में चुनाव प्रचार के नारे वगैरह को बदलने का फरमान जारी कर दिया। नए सिरे से मीडिया मैनेजमेंट में जुट गए। बताते हैं महाराष्ट्र निकाय चुनाव को देखते हुए पीयूष भाई के एक कदम महाराष्ट्र में थे तो दूसरा यूपी में। मेहनत रंग लाई है और उ.प्र. में जमीनी स्तर से आ रही रिपोर्ट ने पीयूष भाई की फिर टीआरपी बढ़ा दी है। वहीं पीयूष भाई हैं कि बस मुस्करा देते हैं।



2019 में दिखाएंगी जौहर


कांग्रेस के पास एक प्रियंका गांधी हैं। पार्टी हर बार झाड़-पोंछकर प्रियंका को मैदान में उतारने की हवा चलाती है और फिर रोक देती है। उ.प्र. विधानसभा चुनाव 2017 में भी यही हुआ। प्रियंका की चर्चा उठी और वह चुनाव प्रचार में बस नाम मात्र की दिखी। अब कांग्रेसी भाई कहने लगे हैं कि इस बार तो यूपी में गठबंधन था। सीट भले 105 मिली थी, लेकिन मूल कांग्रेसी तो 89 सीटों पर ही लड़ रहे हैं। ऐसे में क्या प्रियंका  को उतारकर मिसाइल खराब करना। अब प्रियंका सीधे 2019 में ही जौहर दिखाएंगी। यह चुनाव तो राहुल बाबा के चेहरे पर ही ठीक है।


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