नर्मदा किनारे शिवराज की शंकर-सेवा

नर्मदा किनारे शिवराज की शंकर-सेवा

आज जब पूरे देश में भिन्न-भिन्न राजनैतिक दलों के बीच स्मारक और प्रतिमा की राजनीति दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है, उस समय मध्य प्रदेश सरकार तथा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इंदौर के निकट  ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की भव्य प्रतिमा का निर्माण करने का निर्णय संभवत: विवाद को जन्म  न दे। ओंकारेश्वर देश के प्रसिद्ध और पूजनीय ज्योर्तिलिंगों में से एक  हैं। ओंकारेश्वर में ही एक गुफा में युवा शंकर अपने गुरु गोविन्द भागवतपदा से मिले और अन्तत: अध्यात्म की श्रेष्ठता को प्राप्त किया।

मैं मुख्यमंत्री से पूर्ण रूप से सहमत हूं कि भारत ने आदि शंकराचार्य की श्रेष्ठता तथा उनके महान कार्यों को न समझकर उनके साथ घोर अन्याय किया है। आठवीं सदी में जब हिंदू धर्म देश की अलग-अलग परंपराओं को एक कड़ी मेें जोडऩे में विफल हो रहा था, उस समय शंकराचार्य ने देश के चार दिशाओं में भ्रमण कर देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता की स्थापना की।  केरल से आने वाले शंकर ने बत्तीस वर्ष की अल्प आयु में ही अध्यात्म की राजधानी कहे जाने वाले मठों का निर्माण भारत की चारों दिशाओं में करवाया। इन सभी मठों का काम धर्म और आस्था के बीच एक मजबूत कड़ी बनाकर ‘भारत’ नामक विचारधारा को सदा के लिए जीवन्त रखना था। उन्होनें ‘भारत’ नामक विचारधारा को समझने में असफल रहे लोगों के लिए हिंदू धर्म की परंपरागत वैदिक प्रणाली के माध्यम से भक्ति आन्दोलन को बढ़ावा देना आरम्भ किया, जिसे ‘सनातन धर्म’ के नाम से ज्यादा जाना जाता है।

आदि शंकराचार्य की इस प्रतिमा का निर्माण मध्य प्रदेश के प्रत्येक घर से अनुदान के रूप में इक्कठ किये गये सोना, चांदी, तांबे और लोहे को गला कर किया जाएगा। यह अनुदान इस पवित्र कार्य में सबकी सहभागिता को सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश सरकार विद्यालयों की पाठ्यपुस्तकों में भारत की अनेकता में एकता पर जोर देने वाले संतों के जीवनकाल पर आधारित शिक्षा को सम्मलित करने का निर्णय भी ले सकती है।

आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का निर्माण तथा उनकी विचारधारा को बढ़ावा देनेे के लिए उनकी शिक्षाओं को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने का लिया गया निर्णय, मध्यप्रदेश में चल रही ‘नमामि देवी नर्मदे-सेवा यात्रा’ का ही प्रभाव है। यह यात्रा स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश की जीवन-धारा कही जाने वाली नर्मदा नदी के जल को संरक्षित करने तथा इसका सदुपयोग करने को एक आन्दोलन का रूप देकर चलाई जा रही है। 11 दिसंबर 2016 से आरम्भ हुई यह यात्रा 144 दिनों तक 100 गावों से गुजरते हुए, 3350 किलोमीटर की दुरी तय करते हुए, 11 मई 2017 को खत्म होगी। विंध्य पहाडिय़ों में स्थित अमरकंटक से निकलने वाली नर्मदा मध्य प्रदेश के 16 जिलों से होकर 1077 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए गुजरात में अरब सागर में गिरती है।

इस दूरी को तय करते हुए नर्मदा न सिर्फ चार करोड़ लोगों की प्यास बुझाती है बल्कि साढ़े पांच लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करते हुए राज्य में 24 मेगावाट बिजली भी उत्पन्न करती है

मैं हमेशा से कहता आया हूं कि भले ही शिवराज सिंह के कामों का औरों की तरह प्रचार-प्रसार न किया जा रहा हो लेकिन वे देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्रियों में से एक हैं। वे पहले ही लगातार तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जो आंकड़े प्रतीत हो रहे हैं। उसके अनुसार अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में वह लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री हो सकते हैं, जो एक रिकार्ड होगा। उन्होंने अपने इस कार्यकाल के दौरान कन्या भ्रूण-हत्या रोकने, अक्षय उर्जा, मूलभूत ढांचे का विकास तथा समाजिक न्याय के क्षेत्र में कई सारे महत्वपूर्ण काम किये हैं। यही नहीं, मध्य प्रदेश ने इस वर्ष कृषि तथा सकल घरेलु उत्पाद के क्षेत्र में देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक विकास किया है। विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में भी काफी अधिक बढ़ोतरी हुई है तथा यहां की सड़कें भी काफी चौड़ी हो चुकी हैं।

दिलचस्प बात यह है कि शिवराज सिंह चौहान की छवि ग्रामीण क्षेत्रों में काफी प्रभावशाली है। उन्होंने अपने इस प्रभाव को सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यों को बढ़ावा देकर और लोगों को इससे जोड़कर बनाए रखा है। मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रत्येक बारह वर्ष के पश्चात आने वाले सिंहस्थ मेले का आयोजन पिछले वर्ष ही उज्जैन में जिस प्रकार से लगभग दो हजार करोड़ से कम खर्च में ही आयोजित हुआ, वह कल्पना से परे था। चौहान भारत के उन कुछ थोड़े मुख्यमंत्रियों में से एक हैं जो प्रदेश के मूलभूत ढंचे के  विकास कार्य को धार्मिक तथा पर्यावरण पर्यटन के माध्यम से करना जानते हैं। उन्हें पता है कि इस धार्मिक और पर्यावरण पर्यटन के विकास से स्थानीय लोगों की नौकरी में विकास, सड़क मार्गों में बढ़ोतरी, अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार, स्थानीय संस्कृति और समाजिक सामंजस्य को बनाये रखने जैसी अनेक योजनाओं के विकास में सहायक होता है जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है।

Layout 1‘नमामि देवि नर्मदे-सेवा यात्रा’ नर्मदा नदी के किनारे पौधारोपण को बढ़ावा देती है जो नदी के कटान को कम करने में सहायक होता है। इसके साथ ही यह नदी की गंदगी को लोगों की सहभागिता के माध्यम से पहचानने तथा इसे साफ करने में सहायक है। यह यात्रा प्रकृति के अनुरूप जैविक विधि से कृषि करने को बढ़ावा देने, लोगों के लिए शौचालयों का निर्माण करने, नदी के किनारे पूजा कुण्डों तथा श्मशान स्थलों का निर्माण करने, नर्मदा में शहर से आने वाली गंदगी को नालों की मरम्मत कर इसे नदी के बजाय खेतों में बहाने जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य इस यात्रा के माध्यम से किये जा रहे हैं। यह पदयात्रा बेटी बचाओ जैसे क्रान्तिकारी कदमों को भी बढ़ावा देती है।

दूसरे राज्य ऐसे आयोजन के लिए केन्द्र सरकार से सहायता मांगते हैं लेकिन चौहान ने मुझसे बातचीत में कहा कि कई सारे आयोजनों के माध्यम से उन्होंने इसका खर्च एकत्रित कर लिया है और वे इस यात्रा को विशिष्ट बनाने के लिए अन्तिम दौर तक प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने कहा कि 15 शहर जो नर्मदा नदी के किनारे हैं उन शहरों से निकलने वाले नालों की सफाई करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए उन्होंने पहले ही 1,500 करोड़ का प्रावधान कर लिया है और नर्मदा से सटे सभी शहरों में जलसंचय की क्षमता बढ़ाने के लिए पौधारोपण का काम किया जाएगा तथा इन शहरों को अन्तत: गंदगीरहित किया जाएगा।

उनकी सफलता के लिए मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं।

प्रकाश नंदा

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