त्वदीयपादपंकजम् नमामि देवि नर्मदे

त्वदीयपादपंकजम् नमामि देवि नर्मदे

मिश्र की नील नदी हो या भारत की गंगा मानव सभ्यता नदी के किनारे ही पली बढ़ी है और नदियों के पुनरुद्धार से बड़ा पुनीत कार्य कुछ और नहीं हो सकता। म.प्र. की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने नर्मदा सेवा यात्रा के बहाने इसी का बीड़ा उठाया है।  उद्गम स्थल अमर कंटक से रेवा नदी की यह सेवा यात्रा उसके प्रवाह के साथ-साथ आगे बढ़ रही है। खास बात यह है कि नर्मदा  सेवा यात्रा को मुख्यमंत्री चौहान ने बेहद सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाया है।

वैदिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक समेत सभी पक्षों को समाहित करते हुए म.प्र. सरकार ने राज्य के जन मानस को जोडऩे की कोशिश की है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि केवल सरकार अकेले नदी का पुनरुद्धार नहीं कर सकती। बल्कि इसके लिए आमजन के साथ-साथ सभी पक्षों की भागेदारी जरूरी है। मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार तभी सफल हो सकती है, जब लोगबाग नदी के संरक्षण, पुनरुद्धार और उसके जीवन के प्रति उठकर खड़े हो जाते हैं। इसलिए राज्य सरकार ने इस सेवा यात्रा में जनता, साधु संत समाज, इंजीनियर, वैज्ञानिक, जल संरक्षण के विशेषज्ञों, पादप विभाग, जंगल विभाग, पर्यावरणविद, सांस्कृतिक क्षेत्र समेत सभी को लेकर आगे बढऩे का निर्णय लिया है। सरकार ने स्तर पर उठाये जाने वाले कदमों का संकल्प लिया है और बाकी सभी संकल्प अन्य के सहयोग से पूरे किए जाएंगे।

नर्मदा का पुनरुद्धार क्यों

अमर कंटक से निकली मां नर्मदा की जल धारा म.प्र. की जीवन रेखा है। म.प्र. ही नहीं गुजरात का एक बड़ा क्षेत्र नर्मदा नदी के जल से आह्लादित, प्रफुल्लित, पुष्पित और पल्लवित है। नर्मदा एक ऐसी नदी है जिसके जल का स्रोत ग्लेशियर या हिमालय जैसे पहाड़ नहीं हैं। यह वर्षा के जल और नदी के किनारे स्थित पेड़-पौधों द्वारा छोड़े गए अवशोषित जल से कल-कल निनाद करती हुई आगे बढ़ती है। विगत कई वर्षों से रेवा नदी के  किनारे पेड़ों के कटान, पर्यावरण के दोहन से न केवल नर्मदा का कल-कल, छल-छल करता प्रवाह प्रभावित हुआ है, बल्कि तमाम औषधियां, वनस्पतियां भी विलुप्त होने की कगार पर हैं। नर्मदा के किनारे के गांव, जीवनपद्धति पर इसका असर पड़ा है। पारिस्थितिकी प्रभावित हुई है। ऐसे में नर्मदा का पुनरुद्धार अपरिहार्य है।


जल्द दिखाई देने लगेगा नर्मदा सेवा यात्रा का संकल्प


shivraj

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान म.प्र. के बच्चों के मामा हैं। खुद शिवराज के मुताबिक अब तो बुजुर्ग भी उन्हें मामा कहने  लगे  हैं। शिवराज ने यह उपाधि राज्य के आम जनमानस में रच-बसकर पाई है। वह जनता से जुडऩे का कोई भी अवसर नहीं गंवाते। अमरकंटक से निकली नर्मदा सेवा यात्रा उनका सबसे बड़ा अभियान है। पेश है इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से हुई चर्चा के अंश-

आपने नर्मदा सेवा यात्रा शुरू की और इसको लेकर फिर विरोधियों के निशाने पर हैं। आखिर कैसे आया यह ख्याल?

विरोधी क्या कह रहे हैं, उसकी मैं परवाह नहीं करता। एक मुख्यमंत्री होने के नाते मेरा काम जनता की सेवा करना है। उसमें हम कोई कोताही नहीं करना चाहते। नर्मदा सेवा यात्रा भी इसी का हिस्सा है।

नर्मदा सेवा यात्रा का संकल्प पिछले साल लिया था। पिछले साल मई में नर्मदा नदी पर पुल के उद्घाटन के लिए डिडोरी जिले में गया था। वहीं विचार मन में आया और संकल्प लेकर नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से सेवा यात्रा शुरू की है। नर्मदा म.प्र. की जीवन धारा है। नर्मदा में पानी का स्तर घट रहा था, इसलिए इस अभियान को शुरू किया गया है। इसमें वृक्षा रोपण के साथ-साथ तमाम अभियान शामिल है। हमने तमाम सामाजिक विकास कार्यों को भी इससे जोड़ दिया है और राज्य के लोगों का हमें भरपूर साथ मिल रहा है।

राज्य सरकार ने इससे किन सामाजिक अभियानों को जोड़ा  है?

इसके माध्यम से पर्यावरण-प्रदूषण, नदी स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब नर्मदा में घरों का दूषित जल नहीं गिरेगा। सरकार गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट में शोधन कराकर उसे किसानों को सिंचाई के लिए देगी। नदी के किनारों पर फलदार वृक्ष लगेंगे। नर्मदा के घाटों और ओंकारेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार होगा। इसी अभियान से नशा मुक्ति अभियान, बेटी बचाओ, हर गांव में बेटा-बेटी को पढ़ाने की योजना का संकल्प लिया है। ओंकारेश्वर, ममलेश्वर और ब्रह्मपुरी, विष्णुपुरी के तीनों मंदिरों को जोडऩे, ओंकारेश्वर में जगदगुरू शंकराचार्य की धातु की प्रतिमा, उनकी गुफा का पुनरुद्धार, संग्रहालय बनाने, पाठ्यपुस्तकों में जगदगुरू  पर पाठ पढ़ाने आदि का निर्णय लिया गया है।

आपके विरोधी इसकी आलोचना में जुटे हैं। उनका कहना है कि एक मुख्यमंत्री और साधु-संत समाज के साथ जुड़कर धर्म के कामों में?

आलोचना तो होती रहेगी, लेकिन मेरा मानना है कि जिन कार्यों से समाज को दिशा दी जा सके उसे सरकार को भी अपना लेना चाहिए। सरकार का काम केवल बिजली, पानी, सड़क बनाना ही नहीं है। यह कोई राजनीति का विषय नहीं है। नर्मदा नदी के पुनरुद्धार का मसला है। समाज को विकास की दिशा देने से जुड़ा प्रयास है। आप चाहे तो सेवा यात्रा में शामिल होकर देख लीजिए। सेवा यात्रा गांव-गांव में चल रही है। लोग खुद इससे जुड़ रहे हैं।  प्रदेश की जनता इस संकल्प में हमारे साथ है और उसका सहयोग मिल रहा है।

केन्द्र सरकार भी नर्मदा सेवा यात्रा में कुछ आर्थिक सहयोग दे रही है?

इसकी कोई जरूरत ही नहीं है। यात्रा तो लोगों के सहयोग से चल रही है। यात्रा, भोजन, भंडारा मिशन सब लोग आगे बढ़ा रहे हैं। इसलिए यात्रा का कोई बजट नहीं है।

सेवा यात्रा के माध्यम से सरकार परियोजनाओं को कब तक पूरा कर लेगी?

सेवा यात्रा चल रही है। इसके साथ ही नर्मदा के किनारे बनने वाले नालों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लान, पेड़-पौधे लगाने की प्रक्रिया भी चल रही है। राज्य सरकार के विभाग और राज्य के लोग मिलकर इसे आगे बढ़ा रहे हैं। इसके लिए हमने एक नर्मदा सेवा मिशन बनाया है। फारेस्ट, रेवेन्यू, नर्मदा घाटी विकास, हार्टी कल्चर, कृषि और शहरी विकास विभाग के बजट  से इसे पूरा किया जाना है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 15 करोड़ का बजट है, हार्टीकल्चर के बजट से किसानों को फलदार पेड़ लगाने के लिए सब्सिडी मिलेगी। फारेस्ट विभाग वृक्ष रोपण में आगे आएगा। अगले तीन-चार साल में हम इस लक्ष्य को पूरा कर लेंगे। वहीं तमाम जमीनी काम इस साल के अंत से ही दिखाई देने लगेंगे। हम इसे तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।


पारिस्थितिकी तंत्र

नर्मदा एक नदी ही नहीं है, बल्कि उसके दोनों तरफ बसने वाली आबादी नदी की पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बन चुकी है। इसलिए धर्म,आचरण,संस्कृति के जरिए नदी के किनारे की सभ्यता को विकसित किया जाना भी जरूरी है। क्षेत्र में पर्यटन, देशाटन को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय आय बढ़ाने पर जोर दिया जाना आवश्यक है। इन सभी को केन्द्र में रखकर म.प्र. सरकार ने कई अनूठे प्रयोगों को इसके साथ जोड़ा है। मसलन नदी सेवा यात्रा आरंभ करके दोनों तरफ एक-एक किमी की परिधि में फलदार पेड़-पौधों को लगाना, निजी जमीन पर सहमति से फलदार पेड़ों को लगाने को बढ़ावा देना तथा इसके लिए 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तीन साल तक का भुगतान किया जाना, नदी में प्रदूषण को लेकर जागरुकता फैलाना, माला-फूल आदि को नदी में प्रवाहित करने से रोकना आदि शामिल है। खंडवा में ओंकारेश्वर, ममलेश्वर के मंदिर का विकास, विष्णुपुरी, शिवपुरी, ब्रह्मापुरी का जीर्णोद्धार आदि। खंडवा में शंकराचार्य के गुरू की गुफा के मूल स्वरुप को छेड़े बिना उसका पुनरुद्धार, पहाड़ क्षेत्र में शंकराचार्य की प्रतिमा की स्थापना, वेद आदि का निरंतर पाठ, राज्य शिक्षा के पाठ्यक्रम में आदि जगद्गुरु शंकराचार्य का पाठ पढ़ाया जाना आदि शामिल है। राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि वह इसके बाबत नर्मदा के तटों को नशा मुक्ति से भी दूर रखेगी। नदी के दोनों तरफ पांच किमी तक किसी भी शराब की दुकान का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा और राज्य सरकार नशा मुक्ति के विरुद्ध अभियान चलाएगी।

नर्मदा में नहीं गिरेगा गंदा पानी

राज्य सरकार ने नर्मदा नदी को आस-पास की आबादी के उपयोग किए हुए गंदे पानी से मुक्त रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि इसके लिए राज्य सरकार ने अपने विभाग की सहायता से नदी के दोनों तरफ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) लगाने तथा इसका निर्माण करने वाली ऐजेंसी के माध्यम से एसटीपी के दस साल के रख-रखाव का प्रावधान करने का निर्णय लिया है। ताकि सीवेज ट्रीटमेंट और नर्मदा की स्वच्छता को लेकर नगर पालिका की सुस्ती या फिर बजट की समस्या आड़े न आए।

सेवा यात्रा

11 दिसंबर 2016 को अमरकंटक से निकली सेवा यात्रा 144 दिन में 3,350 किमी की दूरी करके 1100 गांवों से गुजरते हुए 11 मई 2017 को वाया सोंडवा (अलीराजपुर) वापस अमर कंटक पहुंचना है। यह यात्रा खंडवा में ओंकारेश्वर, ममलेश्वर ज्योर्तिलिंग का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए आगे बढ़ी है। ओंकारेश्वर में खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, स्वामी अवधेशानंद जी गिरी महाराज, महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा, पद्मभूषण स्वामी तेजोमयानंद जी, चिन्मय मिशन, सुरेश सोनी सह सरकार्यवाह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ यात्रा में शामिल हुए। अब तक शिवराज सिंह चौहान 15 से अधिक बार इस सेवा यात्रा में शामिल हो चुके हैं। नर्मदा सेवा यात्रा ने 10 जिलों के 27 से अधिक विकास खंडो और 325 से अधिक गांवों को जोड़ते हुए 320 जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए हैं। 6446 किसानों ने अपने खेतों में फलदार वृक्षा रोपण की सहमति दी है। 6.56 लाख लोगों ने प्रभावित होकर शराब न पीने का संकल्प लिया है। इस तरह से यह नर्मदा सेवा यात्रा अब म.प्र. ही नहीं बल्कि किसी भी नदी के पुनरुद्धार के क्रम में सबसे बड़ा अभियान बन चुकी है।

रंजना

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