राष्ट्रीय महिला संसद महिला अधिकारों के लिए अनोखी पहल

राष्ट्रीय महिला संसद  महिला अधिकारों के लिए अनोखी पहल

आंध्र प्रदेश की नई नवेली राजधानी अमरावती पिछले दिनों रंगों से गुलजार थी। गोदावरी और कृष्णा नदियों को जोडऩे की पहली नदी परियोजना के पवित्र संगम पर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो एक बार फिर महापुष्किरम (महाकुंभ) का आयोजन किया गया हो। लेकिन इस बार इस पवित्र संगम के नजदीक ऐतिहासिक राष्ट्रीय महिला संसद आयोजित की गई थी। यह संसद हर मायने में अनोखी थी क्योंकि इसके जरिये सामाजिक और राजनैतिक दृष्टि से संवेदनशील 22,000 से ज्यादा ऐसी लड़कियों को महिला विधायकों, सांसदों और अलग-अलग क्षेत्रों में नाम कमा चुकी देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित महिलाओं से जोडऩे का प्रयास किया गया था जिन्होंने अपने भविष्य को लेकर अनेक सपने संजो रखे हैं। दूसरा यह कि एक गैर-राजनैतिक समागम था जिसमें सभी धर्मों, जाति, क्षेत्रों, वर्ग, संस्कृति और शहरी तथा ग्रामीण परिवेश की हर महिला को इसमें अपने विचार रखने का अवसर दिया गया।

सम्मेलन स्थल का नजारा ऐसा था मानो चारों तरफ रंग बिखरे हुए हों। ऐसा लग रहा था मानो आकाश से इन्द्रधनुष धरती पर उतर आया हो। साड़ी से लेकर परम्परागत भारतीय वेशभूषाओं में सम्मेलन में भाग लेने आईं देश-विदेश की सभी महिला प्रतिनिधियों में बेहद उत्साह था। शायद इसलिए कि मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू को महिलाओं का बहुत बड़ा हितैषी माना जाता है। देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को राजनैतिक, आर्थिक और सार्वजनिक जीवन में सभी स्तरों पर निर्णय लेने का समान अवसर प्रदान करने और उनकी प्रभावी भागीदारी तय करने के लिए इस संसद का आयोजन किया गया।

आंध्र प्रदेश विधानसभा और आंध्र प्रदेश सरकार ने एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट के सहयोग से इसका आयोजन किया था। एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट के संस्थापक डीन और राष्ट्रीय महिला संसद के संयोजक राहुल कराड ने मुख्य्मंत्री चन्द्रबाबू नायडू के साथ मिलकर इस संसद की नींव रखी और विधानसभा अध्यक्ष कोडेला शिव प्रसाद राव ने इसे हकीकत में बदला।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने तीन दिन तक चलने वाली राष्ट्रीय महिला संसद का समापन किया। उन्होंने महिलाओं को परिवार बनाने में प्रमुख भूमिका निभाने के बाद राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की शक्ति बताया। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की जोरदार वकालत करते हुए लोकसभा अध्यक्ष का कहना था कि यह हक महिलाओं को सम्मान से मिलना चाहिए। महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति और तालियों की गडग़ड़ाहट के बीच सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए श्री चन्द्रबाबू नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश इस सम्मेलन का तब तक आयोजन करता रहेगा, जब तक कोई अन्य बड़ा राज्य इसके आयोजन की जिम्मेरदारी नहीं ले लेता। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे महिला बिल को संसद में पास कराने में अग्रणी भूमिका निभाएं। राष्ट्रीय महिला संसद के संयोजक राहुल कराड ने आने वाले कल के लिए नेतृत्व पैदा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। संसद में भाग लेने आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कोडेला शिवप्रसाद राव ने सभी क्षेत्रों में महिलाओं को अधिकार सम्पन्न बनाने की वकालत की।

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इस संसद में लगभग सभी वक्ताओं ने न केवल अपने व्यक्तिगत अनुभव बांटे बल्कि महिलाओं को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढऩे के सुझाव दिए। इस संसद में तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ई.एस.एल. नरसिंहन, पांडिचेरी की राज्यपाल किरन बेदी, नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू, सूचना और प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू, केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री वाई.एस. चौधरी, बांग्लादेश की संसद की स्पीकर शीरीन शरमिन चौधरी, भाजपा की सांसद मीनाक्षी लेखी, टीआरएस सांसद कविता, केन्या  की नेशनल असेंबली की डिप्टी स्पीकर जॉयसी लाबोसो, नोबल पुरस्कार विजेता, बैंकर और अर्थशास्त्री  बांग्लादेश के मुहम्मद युनूस, भारत में जन्मी अमरीकी राजनीतिज्ञ अरुणा मिलर, गांधीवादी, सेवा की संस्थापक और पद्म भूषण इला बेन भट्ट, दिल्ली उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. रोहिणी, बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की डिप्टी डायरेक्टर कैथरीन हे, राजस्थान की विधायक राजकुमारी जाटव, द्रौपदी मेघवाल, जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य  मंत्री आसिया नक्श, फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला, सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना और गुरु डा. सोनल मानसिंह, यूपीएसी की पूर्व चैयरमैन अलका सिरोही सहित अनेक जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया। लेकिन राष्ट्रीय महिला संसद में किसी भी केन्द्रीय महिला मंत्री की अनुपस्थिति बेहद खली।

इस संसद के जरिये महिलाओं और बच्चों में कुपोषण, सामाजिक सुरक्षा, यौन उत्पीडऩ, दमन ओर लिंग आधारित अन्य समस्याओं तथा स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी जटिलताओं के बारे में चर्चा की गई। तिब्बती धर्म-गुरु दलाई लामा ने कहा कि महिलाओं को नेतृत्व में अधिक भागीदारी प्रदान करने से विश्व  एक सुरक्षित जगह बन सकेगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कहीं अधिक स्नेहपूर्ण मानवता की रचना कर सकती हैं। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिंहन ने कहा कि किशोरावस्था की आड़ में बचाने की परंपरा गलत है और एक निर्धारित समय पर मुकदमे चलाने के लिए विशेष अदालतों की स्थापना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में शामिल लोगों को कठोर सजा दी जानी चाहिए।

वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये अपने संदेश में कोकिल कंठ लता मंगेशकर ने कहा कि इस महिला संसद से निकली आवाज से भारत और विश्व में महिलाओं का सशक्तीकरण होगा। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिला आरक्षण का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि संसद में महिला बिल पास हो जाएगा तो भारत दुनिया के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

पद्म विभूषण और सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने कहा कि लड़कियों को अपना लक्ष्य रखना चाहिए और उसे हासिल करने का जुनून होना चाहिए। उन्होंने बताया, ”नृत्य  सीखने का जुनून होने के कारण मैं मुंबई से भागकर बेंगलुरू आ गई। यहां तक कि 1974 में जर्मनी में एक दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट के बावजूद भी मैंने हार नहीं मानी।’’ अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने कहा कि अपने बचपन से लेकर हिन्दी फिल्मों में काम करने तक उन्हें कई बार निराशाजनक स्थितियों का सामना करना पड़ा। ”मेरी मां ने मुझे बताया कि मेरे जन्म के समय जब मेरे नाना को पता लगा कि लड़की पैदा हुई है तो उन्होंने नाखुशी जाहिर की।’’ उन्होंने कहा कि समाज की सोच है कि लड़का सुरक्षा का प्रतीक है और कमाकर देगा जबकि लड़की जिम्मेदारी का बोझ है। ऐसे ही विचार समाज में विषमता पैदा करते हैं और इस सोच को बदलने के लिए इन पर काम करने की जरूरत है।

कुल मिलाकर राष्ट्रीय महिला संसद का आयोजन एक अच्छी पहल रही लेकिन बेहतर होता यदि महिलाओं और लड़कियों के विचारों के साथ-साथ इस संसद में युवा लड़कों और प्रतिष्ठित पुरुषों को भी अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया गया होता ताकि पुरूषों की भागीदारी से समाज से महिलाओं के विरुद्ध सभी बुराइयों को समाप्त किया जा सकता।

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राष्ट्रीय महिला संसद के साथ ही अमरावती अंतर्राष्ट्रीय संगीत और नृत्य समारोह का भी आयोजन किया गया जिसमें देश-विदेश के नामी कलाकारों ने संगीत और नृत्य के शानदार कार्यक्रम प्रस्तुत किए। संसद के पहले दिन के सत्र के बाद गोदावरी नदी पर शानदार आरती और कुचीपूड़ी नृत्य का आयोजन किया गया।

संसद के आखिरी दिन लोकतंत्र के लिए दौड़ आयोजित की गई जिसे ओलंपिक में रजत पदक विजेता पी.वी. संधु, शतरंज ग्रैंड मास्टिर कोनेरू हम्पी और आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कोडेला शिव प्रसाद राव ने रवाना किया। इस दौड़ में हजारों लड़कियों और महिलाओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया।

राष्ट्रीय महिला संसद के सफल आयोजन के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एक बार फिर नए राज्य के सामने मौजूद चुनौतियों का मुकाबला करने में जुट गए हैं। चन्द्रबाबू नायडू इस सदी के ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी की क्रांति से हैदराबाद को विकास के मानचित्र में शामिल किया। नया तेलंगाना राज्य बनने के बाद उनकी यह बहुमूल्य सम्पत्ति तेलंगाना के पास चली गई। लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए उम्मीद है कि वे पहले से बड़ी क्रांति करेंगे। फिलहाल उन्होंने पोलावरम परियोजना को 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है जो पिछले 40 वर्षों से एक स्वप्न बना हुआ है।

कविता पंत

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