सफलता की मंजिल बेहतर सोच

सफलता की मंजिल बेहतर सोच

साहित्य सृजन अपने पूरे जीवन में श्रमशील रहते हुए सदैव आगे बढऩा चाहता है। जब उसे आगे बढऩे का बोध हो जाता है तो उसके क्षितिज पर अमृत बरसता है। जैसे-जैसे वह इसमें अवगाहन करता है या कहें उड़ान भरता है वह आकाश की थाह को भी नापने में सफल हो जाता है। उसका सहित्य लेखन भव्य व नव्य बन जाता है और वह इसमें गहराई तक डूबता जाता है, अनंत आकाश में झांकने लगता है, उसकी लेखनी, रचनाएं बहुत ऊंचे तक निष्पन्न होने लगती है। इस प्रकार उसका लेखन प्रवेश द्वार बनता है जीवन में महाजीवन का।

Layout 1सहित्य सृजक जनसमुदाय के बीच रहता है। उनके दुख-सुख को देखता है। उन पर कुछ व्यक्त करता है, लेखन करता है, अपने शब्दों का जामा पहनाता है और अपनी अभिव्यक्ति में अभीव्यक्त करता है। वह कहीं भी रहे चाहे तरुवर की छांव में या सूरज की धूप में उसके मनोमस्तिष्क में विचारों का तूफान हर वक्त चलता रहता है और जब वह उसे अपनी लेखनी में उतार देता है तो शांति का अनुभव करता है।

सविता चड्ढा का रचना संसार

संपादन                  : डॉ. शशिभूषण सिंहल

                                राजेन्द्र, ”नटखट’’

प्रकाशक                : मीनू  पब्लीकेशन

मूल्य                      : 400रु.

पृष्ठ                        : 256

इसी क्रम में सविता चड्ढ़ा एक साहित्य सृजक के रूप में उभरीं, उभरती गई। उनमें आत्मविश्वास जागृत हो गया। परिणामस्वरूप उनकी कालजयी कृतियों ने साहित्य-जगत में अपना स्थान व नाम कमाया जो आज भी गतिमान हैं। जिसके फलस्वरूप उनके शुभचिन्तकों, स्नेहीजनों, प्रसिद्ध साहित्य सृजकों, विद्वानों ने उन पर अपनी सदभावनाएं दी और ‘सविता चड्ढ़ा का रचना संसार’ के नाम से पुस्तक बनीं जिसमें लेखिका की आत्मीयता और आन्तरिकता के पड़ावों के वर्णन के साथ लेखन अभिव्यक्ति और संवाद के माध्यम से वर्तमान के धरातल पर बिखरे हुए प्रश्न, दूर पास के टूटते रिश्ते और अनूभूतियों की ऊंची-नीची भूमि पर छाये छलनामय कोहरे में झांककर सच्चाई तक पहुंचने और लेखन करने का प्रयत्न है।

लेखिका के सहित्य में प्रेम की अभिव्यंजना हैं और आस्था के स्वर भी हैं वहीं रचनाओं में गीतात्मकता है। बौद्धिक तथा यांत्रिक युग में एक सहित्यकार में जब भावनाएं जागती हैं तो वह ममत्व और लगाव का ललत्य टटोलता है। उनकी लेखनी सशक्त, तर्कसंगत, परिमार्जित एवं सकारात्मक अभिव्यक्ति लिए हुए है। उनकी लेखनी में जहां माधुर्य है तो क्रान्ति भी है। जीवन की मधुर और कटु इन दो अनुभुतियों के ध्रुवान्तों के बीच अनेक रूपाकार लेते संवेदना को आत्मीय संस्पर्श से छूकर नई मधुरता से भर देते हैं। आज का नीरस, ऊबाऊ और अनास्था की बोझिल जिंदगी जीता मानव, पाठक इनमें तन्मयता चेतन से डृब जाता है।

लेखिका के विचार में बेहतर सोच, बेहतर कार्यशैली सफलता की मंजिल है। इनकी लेखनी जीवन के महान लक्ष्य बनाती है, सही साकारात्मक रास्ता बनाती है। साधारण सोच से उपर उठाकर असाधारण सोच का मालिक बनाती है। इनकी रचनाएं इशारा करती हैं कि सूरज उग रहा है, फूल खिल रहे हैं,चिडिय़ा चहक रही हैं, आप भी उठें, कर्तव्य कर्म में जुटें,रात जीतनी भी घुटनभरी हो सुबह उतनी ही सुनहरी है। इनका रचना संसार रहस्य के अन्तर्वस्तु की कला में रूपान्तरण भी कह सकते हैं। उनमें भाव वेग, जलावृत भंवर और विस्फोट नहीं है, धधकती बडवाग्रि नहीं है, सर्वत्र निथरा हुआ जल है जो मंद गति से बहता चला जाता है।

यह कहना अतिश्योक्ति नहीं कि लेखिका का शब्द संसार काफी बड़ा है। उनके विचारों की सरलता, सरसता और स्पष्टता अन्तर्मन को स्पष्ट करती है। अत: यह लेखन सभी पाठकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेगी।

रवि मिश्रा

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