item-thumbnail

आस्था

0 March 22, 2017

धर्म की दृष्टि से विभाजन किया जाए तो मनुष्य दो प्रकार के होते हैं। ईश्वर को मानने वाले इनसान जो आस्तिक कहलाते हैं और ईश्वर को न मानने वाले इनसान, जिन्...

item-thumbnail

परम पुरुष और परमात्मा

0 March 7, 2017

कहा जाता है कि जीवन एक रंगमंच है। यहां हर कोई एक कलाकार है। हममें से हर किसी को एक किरदार निभाना पड़ता है। इस रंगमंच का एक ही निर्देशक है, वह है परमात...

item-thumbnail

विचार मंथन

0 February 8, 2017

हम हमेशा अपने मन में सुविचार और कुविचार दोनों के बीच में दबे रहते हैं। कितना भी अधिक सुविचारों को मन में लाते हैं, कितना भी अधिक ज्ञान प्राप्त कर लेते...

item-thumbnail

व्यक्तित्व का विकास

0 January 26, 2017

व्यक्ति का परिचय होता है उसके व्यक्तित्व से।  समाज में हम कैसे रहते हैं , कैसे लोग हमारे साथ व्यवहार करते हैं, यहाँ तक की हमारी उन्नति भी निर्भर करती ...

item-thumbnail

विश्वासघात एक अपराध

0 January 11, 2017

मनुष्य हमेशा परमात्मा अथवा परमानन्द के खोज में रहता है। इस खोज के रास्ते में रुकावट लाती है तो केवल उसके अन्दर रहने वाली उसकी कुप्रवृति। यही कुप्रवृति...

item-thumbnail

सच की ताकत

0 December 29, 2016

आधुनिक युग में मनुष्य यंत्रों पर अपने से अधिक विश्वास करने लगा है। हर पल उसे यंत्र की आवश्यकता होती है। आज आदमी अपनी भावना व्यक्त करने से लेकर अपनों क...

item-thumbnail

सतचिन्ता में डूब जा रे मनवा

0 December 16, 2016

दुनिया में रहने वाले जितने भी व्यक्ति हैं, हर कोई कुछ न कुछ चिंता के घेरे में बंधे रहता है। व्यक्ति कितना भी ज्ञानी क्यों न हो उसके मन में कुछ-न-कुछ अ...

item-thumbnail

सृष्टि और सृष्टा

0 December 1, 2016

आजकल की परिस्थितियों को देखकर सभी लोग भयभीत रहते हैं। जीवन में कुछ न कुछ अनहोनी होने की आशंका हमेशा बनी रहती है, न होने वाली घटना भी बार-बार सामने आ ज...

item-thumbnail

एक तू ही धनवान है “प्रभु’’ 

0 November 17, 2016

ईश्वर की प्रार्थना करते समय अक्सर हम अपनी सुख-समृद्धि या फिर धन- वृद्धि की कामना करते हैं। मनुष्य जितनी भी स्वच्छ परिस्थितियों में क्यों ना हो उसके मन...

1 2 3 10