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महामंडलेश्वर दाती महाराज: भारतीय ऋषि परम्परा के सशक्तहस्ताक्षर

0 August 10, 2017

भारतीय संस्कृति की आत्मा धर्म है। धर्म मानवीय जीवन की कुंजी है। इसका सामयिक और इहलौकिक ही नहीं, अपितु सार्वकालिक एवं सार्वदेशिक महत्व है। जितना धर्म क...

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ब्रह्मर्षि गुरुवानन्दजी (तिरुपति): साधना एवं सिद्धि पर आरूढ़ दिव्य संत

0 July 28, 2017

अध्यात्म, अहिंसा एवं योग की एक बड़ी प्रयोग भूमि भारत में आज जिस तरह का घना अंधकार छा रहा है। चहूं ओर भय, अस्थिरता एवं अराजकता का माहौल बना हुआ है। इस त...

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स्वामी अडग़ड़ानंदजी महाराज यथार्थ गीता के सृजन ने महात्मा बना दिया

0 July 13, 2017

समाज में कुरीतियां, आडम्बर, अंधविश्वास कब नहीं थे?  हिंसा और अशांति कब नहीं थी? किस काल में नहीं थी? क्या प्रकाश-ही-प्रकाश था? अंधकार नहीं था? अंधेरा ...

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श्री हरिचैतन्यपुरी महाराज जीवन एक प्रयोगशाला

0 June 29, 2017

निरंतर प्रवहमान इस कालचक्र में ऐसे अनेक महापुरुष हुए हैं, जिनका नाम इतिहास के पृष्ठों पर स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उन्हीं महापुरुषों में एक विश्व वि...

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आचार्य श्रीमद् नित्यानंद सूरीजी: जिनका जीवन शांति की मशाल है

0 June 15, 2017

धरती पर कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो असाधारण, दिव्य और विलक्षण होते हैं। हर कोई उनसे प्रभावित होता है। ऐसे व्यक्तित्व अपने जीवन में प्राय: स्वस्थ, स...

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स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि: एक विलक्षण प्रतिभा

0 June 1, 2017

भारतीय संस्कृति में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। गुणवत्ता एवं जीवन मूल्यों को लोक जीवन में संचारित करने की दृष्टि से उनका विशिष्ट योगदान है। गिरते स...

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मुनि श्री ऋषभचन्द्र विजयजी एक सक्षम एवं तेजस्वी आचार्य

0 May 18, 2017

भारत अपनी अध्यात्म प्रधान संस्कृति से विश्रुत था किन्तु आज इसने ‘जगद्गुरु’होने की पहचान खो दी है। खोयी हुई पहचान को पुन: प्राप्त करने एवं अध्यात्म के ...

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आचार्य श्रीमद् वसन्त सूरीश्वरजी कठोर तपस्वी संत

0 May 4, 2017

अध्यात्म के क्षेत्र में आत्मदर्शन का सर्वाधिक महत्व है। भारत के ख्यातनामा ऋषि-महर्षि-संतपुरुष आत्मसाक्षात्कार के लिए बड़ी-बड़ी तपस्याएं करते रहे हैं औ...

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आचार्य श्री विद्यासागरजी महान साहित्य स्रष्टा युगपुरुष

0 April 21, 2017

भारत की इस पवित्र माटी को अपने पवित्र ज्ञान, अनुभव एवं आध्यात्मिक शक्ति से अभिसिंचित करने वाले अनेक महापुरुष और संत कवि हुए हैं। उनकी साधना और कथनी-कर...

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सद्गुरु आनंदमूर्ति गुरु मां ; जहां आकार लेते हैं मानवता के अभ्युदय के नये उन्मेष

0 April 5, 2017

भारतवर्ष की दार्शनिक, धार्मिक तथा आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में महान दार्शनिकों, संतों एवं ऋषियों का मूल्यवान अवदान रहा है। उसमें विदुषी महिलाओं, साध्वियों...

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