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पढिय़े विज्ञापन और त्यागिये आत्महत्या का इरादा

0 June 15, 2017

रोज बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों को पढ़ कर बड़ा दु:ख होता है। ऐसा लगता है कि ऐसा कायराना कदम उठाने वाले व्यक्ति टीवी नहीं देखते व अखबार नहीं पढ़ते। पर ...

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अब रिश्तों में रखा क्या है?

0 June 1, 2017

आजकल लोग रिश्तों को महत्व नहीं देते। लेकिन मैं तो समझता हूं कि जीवन में रिश्ते-नाते ही तो हैं  सब कुछ। वरन् न जीवन होता और न समाज। न ही देश व राष्ट्र।...

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क्रिकेट व पालिटिक्स में अन्तर कितना?

0 May 18, 2017

विश्व में सब से पहले अण्डा आया या मुर्गी? यह एक ऐसी पहेली है जिसे विश्व के बड़े-बड़े विचारक अभी तक ठीक से सुलझा न पाये हैं। इसी प्रकार एक और पहेली उभर...

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जीते तो हम स्वयं, हारे तो हराये ईवीमए ने

0 May 4, 2017

बेटा- पिताजी। पिता- हां, बेटा। बेटा- पिताजी, मैंने अपने एक दोस्त से सुना है कि हिमाचल के एक मन्त्री कहते थे कि ईश्वर से बड़ा कोई सियासतदान नहीं है। पि...

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जनता व षड्यंत्रकारी दोनों केजरीवालजी के पीछे

0 April 21, 2017

बेटा: पिताजी। पिता: हां, बेटा। बेटा: मैं तो केजरीवालजी का फैन पहले ही था पर अब बहुत बड़ा बन गया हूं। पिता: क्या घर के लिेये तू कोई बड़ा फैन ले आया है?...

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शहीद पुत्री ने बनाई अपनी पहचान

0 March 22, 2017

बेटा: पिताजी। पिता: हां, बेटा बेटा: पिताजी, गुरमेहर तो बहुत दिलेर विद्यार्थी निकली। पिता: हां बेटा। ऐसी क्यों न निकलती। आखिर वह एक बहादुर सेना अधिकारी...

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आज के युग में दोस्तों की कमी नहीं

0 March 7, 2017

पुरानी कहावत है कि दोस्त वह जो वक्त पर काम आये। लोग यह भी कहते हैं कि अच्छा दोस्त मुश्किल से, किस्मत से ही मिलता है। पर यह तो बात पुरानी हो गयी। अब तो...

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जय हो भंसालीजी! आपने तो मेरा जीवन ही सुखमय कर दिया

0 February 19, 2017

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता संजय भंसाली ने तो मेरी सोच ही बदल दी है। मेरा तो जीवन ही खुशिओं से भर दिया है। मुझे तो मीडिया से ही पता चला कि अल्लाउद्दीन खिल...

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मैं गधा ही ठीक हूं, मुझे इंसान नहीं बनना

0 February 8, 2017

जी हां, मैं गधा हूं। मनुष्य का साथी। उसका दायां हाथ। मैं उसके बहुत काम आता हूं। यदि मैं न होता, मनुष्य का बोझा न ढोता तो आज आदमी इतनी तरक्की कर लेने क...

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आतंकी मेरे भाई, पर अब नहीं

0 January 26, 2017

अभी हाल ही तक मैं अपने भाई आतंकवादियों का बहुत बड़ा फैन था। मैं समझता था कि ईश्वर ने उन्हें मुझ जैसे दीन-दुखियों, दलित, पिछड़े, व समाज द्वारा सताए व त...

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