item-thumbnail

क्यों न ईश्वर ही बन बैठू?

0 October 5, 2017

मैं बहुत शर्मिंदा हूं कि मैं जीवन में अभी तक कुछ नहीं कर पाया हूं। शर्म की बात तो यह है कि मैं राजनीति में भी जम नहीं पाया हूं। निकम्में से निकम्में ल...

item-thumbnail

हास्य आपातकाल और नसबन्दी में

0 September 6, 2017

1975 में जब आपातकाल लगाया गया तब वह बड़ा भयावह समय था। पर हास्य उस समय भी उपजे बिना न रह सका। उस समय जब डर का माहौल था और लोगों के चेहरों पर से मुस्का...

item-thumbnail

पालिटिक्स की अनबूझ पहेली

0 August 10, 2017

बेटा : पिताजी। पिता : हां, बेटा। बेटा : पिताजी, लगता है हमारे नेता लालू प्रसाद जी के ग्रह ठीक नहीं चल रहे हैं। पिता : तूनें किस ज्योतिषी को उनकी जन्मप...

item-thumbnail

सोशल मीडिया के क्या कहने

0 July 28, 2017

बेटा: पिताजी। पिता: हां, बेटा। बेटा: पिताजी, मैं तो बहुत लोकप्रिय हो गया हूं। पिता: अच्छा? तुझे कैसे पता? बेटा: पिताजी, मैं जब भी फेसबुक के अपने पेज प...

item-thumbnail

रिश्ते-नाते प्यार-वफा सब बाते हैं

0 July 13, 2017

शरीर  तो  नश्वर  है, आने-जाने वाली वस्तु। आज यहां, कल वहां। अगर  कुछ निरंतर है  तो  वह  है आत्मा। इसीलिये तो हमारे संत-महात्मा कहते हैं कि प्यार करना ...

item-thumbnail

उनकी हिम्मत कैसे हुई बड़ों पर उंगली उठाने की?

0 June 29, 2017

बेटा: पिताजी। पिता: हां, बेटा। बेटा:  खुशखबरी। अब तो समझो आपका बेटा चोरी के अपराध से बरी हो गया। पिता:  तू तो बेटा रंगे हाथों पकड़ा गया था। यह कैसे सम...

item-thumbnail

पढिय़े विज्ञापन और त्यागिये आत्महत्या का इरादा

0 June 15, 2017

रोज बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों को पढ़ कर बड़ा दु:ख होता है। ऐसा लगता है कि ऐसा कायराना कदम उठाने वाले व्यक्ति टीवी नहीं देखते व अखबार नहीं पढ़ते। पर ...

item-thumbnail

अब रिश्तों में रखा क्या है?

0 June 1, 2017

आजकल लोग रिश्तों को महत्व नहीं देते। लेकिन मैं तो समझता हूं कि जीवन में रिश्ते-नाते ही तो हैं  सब कुछ। वरन् न जीवन होता और न समाज। न ही देश व राष्ट्र।...

item-thumbnail

क्रिकेट व पालिटिक्स में अन्तर कितना?

0 May 18, 2017

विश्व में सब से पहले अण्डा आया या मुर्गी? यह एक ऐसी पहेली है जिसे विश्व के बड़े-बड़े विचारक अभी तक ठीक से सुलझा न पाये हैं। इसी प्रकार एक और पहेली उभर...

1 2 3 5