प्रमुख लेख

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शीतलहर से कैसे बचें

0 January 25, 2018

शीतलहर से प्रभावित होनेवाली जनसंख्या को तीन श्रेणी में बांटा जा सकता है। पहली श्रेणी में वे लोग आते हैं जो सर्व संपन्न हैं, समाज के ऊंचे तबके के लोग ज...

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एनोरेक्सिया व बुलिमिया नर्वोसा के प्राकृतिक उपचार

0 December 28, 2017

मानसिक तनाव, दबाव एवं विषाद आपके आहार की आदतों को प्रभावित करता है। आम लोगों की धारणा है कि जो लोग हंसमुख एवं प्रसन्न होते हैं, वे मोटे होते हैं। परन्...

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मुख व त्वचा रोग निवारक आयुर्वेदिक घटक जैतून

0 December 14, 2017

भारतीय आयुर्वेद में औषधि वह है जो रोगी में आरोग्य का विश्वास पैदा करे और रोग से निजात दिलाये। चूंकि शरीर का सीधा संबंध प्रकृति से है, अत: रोग भी प्रकृ...

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मुख, ह्दय व उदर रोग निवारक आयुर्वेदिक घटक मकोय

0 November 30, 2017

यह पौधा विश्व के उष्णकटिबंधीय तथा समशीतोष्ण क्षेत्रों के साथ समस्त श्रीलंका तथा भारत में 750 से 2100 मीटर की ऊंचाई तक सर्वत्र पाया जाता है। इसमें पूरे...

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वायरल फीवर से राहत कैसे पायें

0 November 16, 2017

वायरल फीवर प्राय: मौसम बदलने के कारण होता है। मौसम बदलने से तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण शरीर का प्रतिरक्षी तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है जिसके कारण वा...

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मिट्टी चिकित्सा

0 November 1, 2017

मिट्टी ऐसा सर्वसुलभ साधन है, जिसका उपयोग कर जीव-जन्तु, पौधे आदि जैविक पदार्थ जीवनी शक्ति प्राप्त करते हैं। मनुष्य, पशु और वनस्पती जगत का अस्तित्व मिट्...

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अच्छे स्वास्थ्य का दिव्य आधार सात्विक अन्न व शाकाहार

0 October 5, 2017

मानवीय गुणों के अभाव मेंमनुष्य और पशु में विशेष अन्तर नहीं होता। दया, करूणा, मैत्री, सेवा, परोपकार, नैतिकता, सहानुभूति, कर्तव्य पालन का विवेक मानवता क...

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पोषण व औषधि की दोहरी भूमिका निभाते हैं शाक वर्गीय पौधे

0 September 6, 2017

पोषण की दृष्टि से शाक-सद्ब्रिजयों का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है, चिकित्सक बीमारी के दौरान इनके उपयोग पर जोर देते हैं तो पोषक विशेषज्ञ सदैव शाकीय आहा...

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वक्ष, उदर, प्रजनन व त्वचा रोग निवारक आयुर्वेदिक घटक पीपल

0 August 24, 2017

भारतीय शास्त्रों में वर्णित पीपल केवल वृक्ष ही नहीं, स्वास्थ्य, संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। यह शुद्ध सात्विक, 24 प्रहर प्राणवायु छोडऩे वाला और विषै...

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विशिष्ट आयुर्वेदिक स्वास्थ्य वर्धक घटक गिलोय

0 August 10, 2017

अमृताए, अमृतवल्ली अर्थात कभी न सूखने वाली गिलोय के पत्ते कोमल पान के आकार के तथा फल मटर के दाने जैसे होते हैं। यह जिस वृक्ष पर चढ़ती है उस वृक्ष के कु...

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